काल भैरव भगवान शिव के सबसे भयंकर और रक्षक स्वरूपों में से एक हैं। वे समय (काल) के देवता माने जाते हैं और अक्सर विकराल रूप में चित्रित किए जाते हैं—श्याम वर्ण, त्रिशूल और खड्ग धारण किए, कुत्ते पर सवार। काल भैरव को काशी (वाराणसी) का कोतवाल कहा जाता है, जो भक्तों की रक्षा करते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने शिव की पूजा में अभिमान दिखाया, तो क्रोधित शिव ने काल भैरव के रूप में उनका विनाश किया, लेकिन विष्णु के कहने पर वे शांत हुए। यह रूप भय, शत्रु बाधा, ग्रह दोष और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति प्रदान करता है।
यह 8 श्लोकों का स्तोत्र है, जो काल भैरव की महिमा का गुणगान करता है। नियमित पाठ से भय, कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं। नीचे संस्कृत श्लोकों के साथ हिंदी अनुवाद दिए गए हैं:
| श्लोक संख्या | संस्कृत श्लोक | हिंदी अनुवाद |
|---|---|---|
| 1 | ॐ देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्। नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥ | मैं उन काल भैरव की वंदना करता हूँ, जिनके पवित्र चरणों की सेवा देवराज इंद्र करते हैं, जिन्होंने सर्प को यज्ञ-सूत्र बनाया है, चंद्रमा को शिरोभूषण धारण किया है, जो कृपा करने वाले हैं। नारद आदि योगियों द्वारा वंदित, दिगंबर (दिशाओं से आच्छादित) हैं, काशी के अधिपति हैं। |
| 2 | भुक्ति मुक्ति सिद्धि दायकं काशी वासं महेश्वरम्। अंधकासुर भयंकरं दिगम्बरं कालभैरवं भजे॥ | मैं उन काल भैरव की वंदना करता हूँ, जो भुक्ति, मुक्ति और सिद्धियाँ प्रदान करने वाले हैं, काशी में निवास करने वाले महेश्वर हैं, अंधकासुर को भयभीत करने वाले, दिगंबर हैं। |
| 3 | नील कण्ठं विभुं विश्वं हस्ते त्रिशूलं अक्षमम्। कपालं गणनाथं सुखं काशिकापुराधीशं भजे॥ | मैं उन काल भैरव की वंदना करता हूँ, जो नीलकंठ, सर्वव्यापी, विश्वरूप हैं, हाथ में त्रिशूल धारण किए, अक्षय हैं, खोपड़ी लिए गणनाथ हैं, सुखदायक काशी के स्वामी हैं। |
| 4 | बटुकं षडाननं चण्डं क्षिति पालं उमापतिम्। नृत्य प्रियं वृषभ वाहं काशिकापुराधीशं भजे॥ | मैं उन काल भैरव की वंदना करता हूँ, जो बाल रूप (बटुक), षडानन, चंड (उग्र), पृथ्वी के पालक, उमा के पति हैं, नृत्य प्रिय, वृषभ वाहन वाले काशी के अधिपति हैं। |
| 5 | त्रिशूल दण्ड पाणिपाश हस्तं क्षिति पालं उमापतिम्। नृत्य प्रियं शशि शेखरं काशिकापुराधीशं भजे॥ | मैं उन काल भैरव की वंदना करता हूँ, जिनके हाथों में त्रिशूल, दंड, पाश हैं, पृथ्वी के पालक, उमा पति, नृत्य प्रिय, चंद्र शेखर, काशी के स्वामी हैं। |
| 6 | भूत सङ्घनायकं विशाल कीर्ति दायकं काशी वास लोक पाप पुण्य पशोधकम्। विभुं नीति मार्ग कोविदं पुरातनं जगत्पतिं काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥ | मैं उन काल भैरव की वंदना करता हूँ, जो भूत-समूहों के नायक, विशाल यश प्रदान करने वाले, काशी वासियों के पाप-पुण्य शोधक, सर्वव्यापी, नीति मार्ग जानने वाले, पुरातन, जगत्पति हैं। |
| 7 | इति श्रीमद् शंकराचार्य विरचितं कालभैरवाष्टकं सम्पूर्णम्॥ | (समापन) |
ॐ बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय हौं।
हिंदी अर्थ: हे बटुक भैरव, मुझे सभी विपत्तियों से शीघ्र मुक्त करो। यह मंत्र बाधाओं को दूर करने के लिए जपा जाता है।
जय जय श्री काली के लाला, जयति जयति काशी।
जयति बटुक भैरव भय हारी, जयति काल भैरव बलधारी॥
(पूर्ण चालीसा के लिए पाठ लाभदायक।)
काल भैरव की कृपा से जीवन में सुख, शांति और विजय प्राप्त होती है। यदि कोई विशेष पूजा या मंत्र जाप की विधि चाहिए, तो बताएं!
काल भैरव की पूजा मार्गशीर्ष मास की कृष्ण अष्टमी (भैरव जयंती) या हर रविवार/मंगलवार को विशेष फलदायी होती है। यह पूजा रात्रि काल में (रात 8 बजे के बाद) करना उत्तम है, क्योंकि वे रात्रि के देवता हैं। पूजा उग्र तांत्रिक विधि से की जाती है, लेकिन सात्विक भक्त भी सरल विधि से पूजा कर सकते हैं। नीचे विस्तृत पूजा विधि दी गई है।
| सामग्री | मात्रा/विशेष निर्देश |
|---|---|
| काल भैरव की मूर्ति/चित्र | काले पत्थर की मूर्ति सर्वोत्तम |
| काला कपड़ा | पूजा स्थल पर बिछाने हेतु |
| सरसों का तेल | दीपक के लिए |
| काले तिल | 108 दाने |
| उड़द की दाल | 100 ग्राम |
| काले फूल (कनेर/गुड़हल) | 8 या 16 |
| शराब (मदिरा) | छोटी बोतल (तांत्रिक पूजा में) |
| मछली/मांस (वैकल्पिक) | तांत्रिक साधकों के लिए |
| पान का पत्ता | 5 |
| सुपारी | 5 |
| लौंग-इलायची | 5 जोड़ी |
| काले हकीक की माला | जप के लिए |
| अगरबत्ती | 11 या 33 |
| घी का दीपक | 1 |
| कुमकुम, चंदन | लाल-काला |
| नींबू | 5 |
| शहद | 1 चम्मच |
| दूध | 100 ml |
| काले कुत्ते को भोजन | तेल लगी रोटी |
"ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः। अद्य मार्गशीर्षे मासे कृष्णपक्षे अष्टम्यां तिथौ, कालभैरव पूजनं करिष्ये।"
ॐ भ्रं कालभैरवाय फट् स्वाहा।
| उपचार | मंत्र |
|---|---|
| 1. आसन | ॐ कालभैरवाय आसनं समर्पयामि |
| 2. पाद्य | ॐ कालभैरवाय पाद्यं समर्पयामि |
| 3. अर्घ्य | ॐ कालभैरवाय अर्घ्यं समर्पयामि |
| 4. आचमन | ॐ कालभैरवाय आचमनीयं समर्पयामि |
| 5. स्नान | दूध, शहद, जल से स्नान कराएं |
| 6. वस्त्र | काला कपड़ा चढ़ाएं |
| 7. यज्ञोपवीत | काला धागा |
| 8. गंध | काला चंदन |
| 9. पुष्प | काले फूल |
| 10. धूप | लोबान |
| 11. दीप | सरसों तेल का दीपक |
| 12. नैवेद्य | शराब, मछली, उड़द की पकौड़ी (या गुड़-चावल) |
| 13. तांबूल | पान-सुपारी |
| 14. दक्षिणा | काले तिल की पोटली |
| 15. आरती | काल भैरव आरती |
| 16. प्रदक्षिणा | 8 परिक्रमा |
| मंत्र | जप संख्या | विधि |
|---|---|---|
| ॐ बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रौं | 1 माला (108) | काले हकीक की माला |
| ॐ ह्रां ह्रौं भैरवाय नमः | 5 माला | रात्रि में |
| काल भैरव अष्टकम | 1 पाठ | रोजाना |
"अपराध सहस्राणि क्रियन्ते अहर्निशं मया, दासोऽयं इति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।"
| समय | कार्य |
|---|---|
| सुबह 5 बजे | स्नान, संकल्प |
| शाम 7 बजे | दीप प्रज्वलन |
| रात 9 बजे | मुख्य पूजा |
| रात 12 बजे | हवन, विसर्जन |
| समस्या | समाधान |
|---|---|
| शत्रु भय | 8 नींबू चढ़ाएं |
| राहु-केतु दोष | काले तिल का दान |
| व्यापार हानि | शराब चढ़ाकर प्रार्थना |
| भूत-बाधा | काले कुत्ते को भोजन |
| अदालती मामले | 33 अगरबत्ती जलाएं |
नोट: तांत्रिक पूजा केवल गुरु मार्गदर्शन में करें। सात्विक पूजा सभी के लिए सुरक्षित है।