kundalini awakening Tantra Sadhana

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  • Lakshmi Abaddh Prayog By Guru Matsyendranath, गुरु मत्स्येन्द्रनाथ का लक्ष्मी आब

    गुरु मत्स्येन्द्रनाथ का लक्ष्मी आबद्ध प्रयोग गुरु मत्स्येंद्रनाथ तो गोरखनाथ से भी ज्यादा सिद्ध और योगी हुए हैं, तन्त्र के वे साक्षात् अवतार थे।उन्होंने अपनी पुस्तक में लक्ष्मी आवद्ध प्रयोग को देकर संसार पर महान उपकार किया है। यह प्रयोग कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को ही सम्पन्न किया जाता है। इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आ रही है। कितना सुंदर है, कि इस दिन पुष्य नक्षत्र भी है, अतः साधकों को बाहिए कि वे इस दिन का अवश्य ही उपयोग करें।इस दिन साधक प्रातःकाल उठकर स्नान कर, पूजा स्थान में बैठ जायें। सामने जल पात्र, कुंकुम, अक्षत आदि हो। इस दिन लक्ष्मी को आबद्ध करने के लिए 'वरदायक लक्ष्मी मंत्रों से युक्त गणेश विग्रह' पूजा का विधान है। यह मत्स्येंद्रनाथ द्वारा सम्पादित वरदायक लक्ष्मी गणेश मंत्र से सिद्ध और प्राण प्रतिष्ठा युक्त होना चाहिए। पाठकों की अनुकूलता ...

  • REIKI LEVEL II | 3 POWERFUL SYMBOLS

    रेकी लेवल II में, जिसे "प्रैक्टिशनर लेवल" के नाम से भी जाना जाता है, छात्रों को तीन शक्तिशाली प्रतीकों से परिचित कराया जाता है जो रेकी ऊर्जा को चैनल और निर्देशित करने की उनकी क्षमता को बढ़ाते हैं। ये प्रतीक, जो उसुई रेकी परंपरा में निहित हैं, पवित्र उपकरण माने जाते हैं जो उपचार को बढ़ाते हैं, भावनात्मक और मानसिक संतुलन को सुविधाजनक बनाते हैं, और दूरस्थ उपचार को सक्षम करते हैं। नीचे इस स्तर पर आमतौर पर सिखाए जाने वाले तीन प्रतीक और उनके उद्देश्य दिए गए हैं: चो कु रेई (शक्ति प्रतीक) अर्थ : चो कु रेई का अक्सर अनुवाद "ब्रह्मांड की शक्ति को यहां रखें" के रूप में किया जाता है, इसका उपयोग रेकी ऊर्जा के प्रवाह और तीव्रता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। उद्देश्य : यह प्र...

  • Bhagwan Shri Krishna Mantra tantra Sadhna

    ||श्रीकृष्णम वन्दे जगदगुरूम, निखिलं वन्दे जगदगुरूम|| अतिविशिष्ट श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजन सम्पन्न !!! #श्रीकृष्ण-सहस्त्रनाम-स्तोत्र● || श्रीकृष्णाय नमः || ...

  • Baglamukhi Pratyangira Kavach | बगलामुखी प्रत्यंगिरा कवच

    BaglaMukhi Pratyangira Kavach बगलामुखी प्रत्यंगिरा कवच इस कवच के पाठ से वायु भी स्थिर हो जाती है। शत्रु का विलय हो जाता है। विद्वेषण, आकर्षण, उच्चाटन, मारण तथा शत्रु का स्तम्भन भी इस कवच के पढ़ने से होता है। बगला प्रत्यंगिरा सर्व दुष्टों का नाश करने वाली, सभी दुःखो को हरने वाली, पापों का नाश करने वाली, सभी शरणागतों का हित करने वाली, भोग, मोक्ष, राज्य और सौभाग्य प्रदायिनी तथा नवग्रहों के दोषों को दूर करने वाली हैं। जो साधक इस कवच का पाठ तीनों समय अथवा एक समय भी स्थिर मन से करता है, उसके लिए यह कल्पवृक्ष के समान है और तीनों लोकों में उसके लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं है। साधक जिसकी ओर भरपूर दृष्टि से देख ले, अथवा हाथ से किसी को छू भर दे, वही मनुष्य दासतुल्य हो जाता है। इस कवच के पाठ से भयंकर से भयंकर तंत्र प्रयोग को भी नष्ट किया जा सकता है लेकिन इसका पाठ केवल बगलामुखी में दीक...

  • सहस्त्रार चक्र कुण्डलिनी जागरण शिव अमृत तत्व साधना, Sahasrara Chakra Kundalini a

    माया कुण्डलिनी क्रिया मधुमती काली कला मालिनी , मातंगी विजया जाया भगवती देवी शिवा शाम्भवी, शक्तिः शंकरा वल्लभा त्रिनयना वाग्वाहिनी भैरवी , ओमकार त्रिपुरा परार्मयि भगवती माता कुमारेश्वरी।। आध्यात्म जगत की सभी विविध प्रणाली में कुण्डलिनी का स्थान अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान है. मनुष्य के अंदर ब्रह्मांडीय मुख्य शक्ति के रूप में कुण्डलिनी अवस्थित है. इसी कुण्डलिनी के अनंत क्रम को सम्प्पन करने के लिए विविध मार्ग में विविध पद्धतियाँ है और यही कुण्डलिनी मनुष्य का उसकी स्वयं की विराट सत्ता का साक्षात्कार कराता है. चाहे वह पारदविज्ञान हो सूर्यविज्ञान मंत्र, योग तंत्र या कोई भी क्षेत्र, इन सभी का आधार कुण्डलिनी ही है. और इसी कुण्डलिनी के स...

  • SANSKRIT LANGUAGE and Kundalini Beej Mantra

    SANSKRIT LANGUAGE Sanskrit  is the most original and natural language.All the alphabets in Sanskrit are derived from nature.Nature is manifested as Kundalini inside a human being.The saying "Yatho Pinde Thatho Brahmaande" explains that complete universe is reflected inside Human being. The Sanskrit letters originally adds upto 50 in number.This are derived as follows: Muladhar chakra has 4 petals with 4 beej mantras Swadhishttaan has 6 beej Manipur has 10 beej Anaahat chakra has 12 petals and beej Vishuddh chakra has 16 beej akshar Agya has 2 beej or alphabets 4 + 6 + 10 + 12 + 16 + 2 = 50 Alphabets from अ,आ,इ ई ,उ ----------- अ:  are beej  mantras of Vishuddh chakra situated at Throat  Subsequent letters are from the other chakras Agya chakra has last alphabets - ha and ksha The beej mantras are pronounced as haM and kshaM Finally Sahasraar has beej mantra OM ...

  • कुंडलिनी जागृत How To Do Kundalini kriyaYog

    क्या आप उर्जा चक्र और कुंडलिनी जागृत करने के बारे में जानते हैं ? क्या आप जानते हैं की वैज्ञानिकों ने पिछले कुछ सालों में मान लिया है कि इनके सही उपयोग से आप अपने खुद के डीएनए को सुगठित व रिबिल्ड तक कर सकते हैं ? सोचिये एक जिन्दा इंसान खुद का डीएनए रिबिल्ड कर सकता है जिसे नोबल पुरूस्कार प्राप्त वैज्ञानिक अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में भी सिर्फ एक डीएनए कोडिंग पर सही ढंग से नहीं कर पाते | क्या आप जानते हैं आधुनिक विज्ञान का मानना है कि सारे आनुवांशिक और अन्य सभी रोगों का इलाज बिना किसी दवा के इस से संभव है? ये हिंदूइस्म का ज्ञान था जो शायद आज हम अधिकतम भूल चुके हैं फिर भी अ...

  • अन्तर त्राटक

    अन्तर त्राटक - छत पर जाएं  सुबह  4-5  बजे  , दरी बिछाकर  बैठ जाएं  आलथी पालथी में  । पहले  कपालभाति करें  5  मिनट  । फिर आँखें  बन्द  कर के शान्तिः  से बैठो ,  साँसो को सामान्य  होने दो ।  अन्धेरो में  देखते रहो बस , कुछ  भी  नहीं  सोचना है  , कहीं  भी  ध्यान नहीं  लगाना है, बस अन्धेरे  में  देखो  । यह सबसे सरल है  । 10-15  दिन में  ही  तुम्हारा  ध्यान  अन्धेरो से हटकर आज्ञा चक्र पर आ जाएगा स्वतः  ही  । कोई  जोर जबरदस्ती  नहीं  , आज्ञा चक्र  पर अपने आप ध्यान चला जाएगा।  बस फिर  उसी क्रम में बढते रहो ,  उन्हीं  अन्धेरो में  एक बिन्दु रोशनी  की  नजर आने लगेगी । यही  अन्तर त्राटक है  , जो कि एक अन्धा व्यक्ति  भी  कर सकता है  विचारों  पर नियंत्रण  कर के ।  अब कोई  कहे कि किसी  गुरु  देवता वगैरह की  फोटो   क...

  • कुंडलिनी जागरण शक्ति kundali shakti Proyog 1

    कुण्डलिनी शक्ति-1 परमपिता का अर्द्धनारीश्वर भाग शक्ति कहलाता है यह ईश्वर की पराशक्ति है (प्रबल लौकिक ऊर्जा शक्ति)। जिसे हम राधा, सीता, दुर्गा या काली आदि के नाम से पूजते हैं। इसे ही भारतीय योगदर्शन में कुण्डलिनी कहा गया है। यह दिव्य शक्ति मानव शरीर में मूलाधार में (रीढ की हड्डी का निचला हिस्सा) सुषुप्तावस्था में रहती है। यह रीढ की हड्डी के आखिरी हिस्से के चारों ओर साढे तीन आँटे लगाकर कुण्डली मारे सोए हुए सांप की तरह सोई रहती है। इसीलिए यह कुण्डलिनी कहलाती है।  जब कुण्डलिनी जाग्रत होती है तो यह सहस्त्रार में स्थित अपने स्वामी से मिलने के लिये ऊपर की ओर उठती है। जागृत कुण्डलिनी पर समर्थ सद्गुरू का पूर्ण नियंत्रण होता है, वे ही उसके वेग को अनुशासित एवं नियंत्रित करते हैं। गुरुकृपा रूपी शक्तिपात दीक्षा से कुण्डलिनी शक्ति जाग्रत होकर ६ चक्रों का भेदन करती हुई सहस्त्रार तक प...

  • कुंडलिनी जागरण मन्त्र प्रयोग भाग 2 kundali jagarn mantra Proyog Part 2

    कुंडलिनी जागरण मन्त्र प्रयोग भाग 2 ऊं गं गणेशाय नमः: ऊं ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः : ऊं निखिलेश्वरायै नमः : GUNJARANN KRIYA Gunjaran is a technique in Kriya Yog.Gunjaran has two aspects - One is Shank method and other is called as Soham method.These two techniques are further divided into Samaanya Gunjaran and Advanced Gunjaran. Now,coming back to Shank and Soham methods -- In Shank Samaanya Gunjaran method , an " uoooo" sound like that of blowing a Shank is produced by mouth without stopping breath .This initially can be done only for 1 minute or so. Now ,when the sadhak becomes successful in doing Samaanya Shank Gunjaran for 8 minutes, he or she has to close all openings of the body which includes two eyes, two ears,two nostrils,guda,linga and naabhi You have to sit with your left foot covering Guda,and right leg touching the ling area.Then you have to close your ears with thumbs and eyes with indexfinger.Close your nose with middle finger.Keep ring and small fingers on mouth.This mudra is called as Shambavi mudra.Take air through your mouth and start aantharik Gunjaran.This is Advanced Gunjaran.Then the sadhak's body develops heat and rises in air above ground level.On reaching 8 minutes gunjaran a sadhak enters samadhi automatically. Dhyaan leads to samaadhi. Dhaarana means the sadhak places Guru in the Third Eye or Agya Chakra Now coming to Soham Method the same process of initial Samaanya Gunjaran and Advanced Gunjaran have to be repeated with the mantra SOHAM. Initialy it will be difficult to continue gunjaran without breath stopping.But Gurudev tells that if you are able to do 1 minute gunjaran you can accomplish 32 minute gunjaran also which is the perfect state.It is similar to the ...

  • कुंडलिनी जागरण मन्त्र प्रयोग भाग 3 kundali jagarn mantra Proyog Part 3

    कुंडलिनी जागरण मन्त्र प्रयोग भाग 3 अमृत सिद्धि(मणिपुर चक्र विभेदनं): ॐ गं गणेशाय नमः: ॐ ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः : ॐ नमः निखिलेश्वरायै : अमृत सिद्धि(मणिपुर चक्र विभेदनं): मणिपुर चक्र को योग, साधना, तंत्र सिद्धि, प्रत्यक्षिकरण, देह सिद्धि, पद्मासन सिद्धि, खेचरत्व पद प्राप्ति,सूक्ष्म शरीर जागरण व विचरण एवं और भी बहुत सारी उपलब्धियों की प्राप्ति में सर्वोपरि स्थान प्राप्त है। इस चक्र के जागरण या भेदन के पश्चात् शरीर पूर्ण रूपेण सिद्ध हो जाता है। क्षुधा कम लगती है यानि के आप को अत्यंत ही अल्प आहार की आवश्यकता होती है। प्राण शक्ति का यही उद्गम बिन्दु है। अत: इस चक्र के भेदन के पश्चात आप कोई भी साधना कर लें सिद्धि सुनिश्चित रूप से प्रथम बार में ही साधक के गले में वरमाला डालने को बाध्य हो जाती है। ऐसा शास्त्रों में उल्लिखित है। सदगुरुदेव ने इस स्तो...

  • कुंडलिनी जागरण मन्त्र प्रयोग भाग 1 kundali jagarn mantra Proyog Part 1

    कुंडलिनी जागरण मन्त्र प्रयोग भाग १ ऊं गं गणेशाय नमः:  ऊं ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः :  ऊं निखिलेश्वरायै नमः : कुन्डलिनी [ Kundalini ] जागरण साधनात्मक जीवन का सौभाग्य है. विशेष तथ्य :- कुन्डलिनी जागरण साधनात्मक जीवन का सौभाग्य है. कुन्डलिनी जागरण साधना गुरु के सानिध्य मे करनी चाहिये. यह शक्ति अत्यन्त प्रचन्ड होती है. इसका नियन्त्रण केवल गुरु ही कर सकते हैं. यदि आपने गुरु दीक्षा नही ली है तो किसी योग्य गुरु से दीक्षा लेकर ही इस साधना में प्रवृत्त हों. यदि गुरु प्राप्त ना हो पाये तो आप मेरे गुरु जी Gurudev Dr. Narayan Dutt Shrimaliji (परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानद जी )को गुरु मानकर उनसे मानसिक अनुमति लेकर जाप कर सकते हैं . साधना सामग्र्री चेतना यन्त्र , चेतना माला , रुद्राक्ष माला , या गुरुमाला आसन , पीला , सफ़ेद ऊनी कम्बल पंचौपचार गुरु पूजन करे फि...

  • कुंडलिनी जागरण मन्त्र प्रयोग भाग 6 kundali jagarn mantra Proyog Part 6

    कुंडलिनी जागरण मन्त्र प्रयोग भाग 6 ऊं गं गणेशाय नमः:  ऊं ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः :  ऊं नमः निखिलेश्वरायै : कुण्डलिनी शक्ति मनुष्य शरीर स्थित कुंडलिनी शक्ति में जो चक्र स्थित होते हैं उनकी संख्या सात बताई गई है। यह जानकारी शास्त्रीय, प्रामाणिक एवं तथ्यात्मक है- kundali About -- Aap ki Kundali jagrit hooa ya nahi  ye janne ke liye ese sune ............... सदगुरुदेव निखिलेश्वरंद की दिव्या वाणी में.. नवरात्रि महोत्सव जोधपुर 91, पार्ट 1-A http://www.youtube.com/watch?v=4-ze0FkD8BE नवरात्रि महोत्सव जोधपुर 91, पार्ट 1-B http://www.youtube.com/watch?v=xq-3sA1LTxs नवरात्रि महोत्सव जोधपुर 91, पार्ट 1-C http://www.youtube.com/watch?v=dfaNMwDx114 ...

  • कुंडलिनी जागरण मन्त्र प्रयोग भाग 4 kundali jagarn mantra Proyog Part 4

    कुंडलिनी जागरण मन्त्र प्रयोग भाग 4 ऊं गं गणेशाय नमः:  ऊं ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः :  ऊं नमः निखिलेश्वरायै : कुण्डलिनी शक्ति परमपिता का अर्द्धनारीश्वर भाग शक्ति कहलाता है यह ईश्वर की पराशक्ति है (प्रबल लौकिक ऊर्जा शक्ति)। जिसे हम राधा, सीता, दुर्गा या काली आदि के नाम से पूजते हैं। इसे ही भारतीय योगदर्शन में कुण्डलिनी कहा गया है। यह दिव्य शक्ति मानव शरीर में मूलाधार में (रीढ की हड्डी का निचला हिस्सा) सुषुप्तावस्था में रहती है। यह रीढ की हड्डी के आखिरी हिस्से के चारों ओर साढे तीन आँटे लगाकर कुण्डली मारे सोए हुए सांप की तरह सोई रहती है। इसीलिए यह कुण्डलिनी कहलाती है। जब कुण्डलिनी जाग्रत होती है तो यह सहस्त्रार में स्थित अपने स्वामी से मिलने के लिये ऊपर की ओर उठती है। जागृत कुण्डलिनी पर समर्थ सद्गुरू का पूर्ण नियंत्रण होता है, वे ही उसके वेग को अनुशासित एवं नियंत्रित...

  • कुंडलिनी जागरण मन्त्र प्रयोग भाग 5

    कुंडलिनी जागरण मन्त्र प्रयोग भाग 5 ऊं गं गणेशाय नमः:  ऊं ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः :  ऊं नमः निखिलेश्वरायै : कुण्डलिनी शक्ति मनुष्य शरीर स्थित कुंडलिनी शक्ति में जो चक्र स्थित होते हैं उनकी संख्या सात बताई गई है। यह जानकारी शास्त्रीय, प्रामाणिक एवं तथ्यात्मक है- (1) मूलाधार चक्र - गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला 'आधार चक्र' है । आधार चक्र का ही एक दूसरा नाम मूलाधार चक्र भी है। वहाँ वीरता और आनन्द भाव का निवास है । (2) स्वाधिष्ठान चक्र - इसके बाद स्वाधिष्ठान चक्र लिंग मूल में है । उसकी छ: पंखुरियाँ हैं । इसके जाग्रत होने पर क्रूरता,गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों का नाश होता है । (3) मणिपूर चक्र - नाभि में दस दल वाला मणिचूर चक्र है । यह प्रसुप्त पड़ा रहे तो तृष्णा, ईष्र्या, चुगली, लज्जा, भ...

  • मानव शरीर के चक्र एवं कुंडलिनी जागरण

    मनुष्य शरीर स्थित कुंडलिनी शक्ति में जो चक्र स्थित होते हैं उनकी संख्या सात बताई गई है। यह जानकारी शास्त्रीय, प्रामाणिक एवं तथ्यात्मक है-     (1) मूलाधार चक्र - गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला 'आधार चक्र' है । आधार चक्र का ही एक दूसरा नाम मूलाधार चक्र भी है। वहाँ वीरता और आनन्द भाव का निवास है ।     (2) स्वाधिष्ठान चक्र - इसके बाद स्वाधिष्ठान चक्र लिंग मूल में है । उसकी छ: पंखुरिया...

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