Panchanguli Sadhana diksha भुतं भव्यं च यद् ज्ञानं अनने प्रतिधीयताम पहली बार गोपनीय रहस्य उजागर पंचागुली कल्प Panchanguli Sadhana diksha जिसे सिद्ध करने पर किसी को देखते ही उसका पूरा भविष्य आंखों के सामने साकार हो उठता है। पाश्चात्य विद्वान् ‘कीरो’ ने भी ‘‘पंचांगुली साधना’’ की थी, जिससे उसे फ़लकथन में अपूर्व सिद्धि प्राप्त हुई— उसने भातर में आकर इस ज्ञान को प्राप्त किया और पंचांगुली साधना के कारणी उसकी पुस्तक पूर्ण प्रमाणिक मानी जाती है। मनुष्य स्वभावतः इसी बात के लिए उत्सुक रहता है, कि वह अपने भविष्य को जान सकें। अनेकों रहस्यमय प्रश्न उसके मानस में उठते रहते हैं – क्या ऐसी कोई शक्ति ब्रह्माण्ड में है, जिसका सम्बन्ध हमसे स्थापित हो? क्या à¤...
लेख अत्यंत ज्ञानवर्धक और तंत्र शास्त्र की सूक्ष्म बारीकियों को समेटे हुए है। इसे और अधिक प्रभावशाली, व्यवस्थित और व्यावहारिक बनाने के लिए मैंने इसमें कुछ अतिरिक्त गुप्त देवताओं, विशिष्ट रक्षा मंत्रों और सुरक्षा के भौतिक प्रतीकों को जोड़ा है।tantric Deities And Ancient Protective Shield Methods For Home Protection घर की रक्षा हेतु तांत्रिक देवता और प्राचीन रक्षा कवच विधि तंत्र और आगम परंपरा के अनुसार, हमारा निवास स्थान केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि एक जीवित ऊर्जा क्षेत्र है। प्राचीन ऋषियों ने 'स्थान की शुद्धि' और 'कीलन' (सुरक्षा घेरा) को अनिवार्य माना है ताकि बाहरी नकारात्मक स्पंदन घर की शांति भंग न कर सकें। घर की रक्षा करने वाले प्रमुख तांत्à...
#महाविपरीत_प्रत्यंगिरा मंत्र व स्तोत्र● महा विपरीत प्रत्यंगिरा मंत्र प्रत्यंगिरा अष्टोत्तर शतनामावली शत्रु की की प्रबलतम क्रियाओं को निष्फल करने के साथ ही ग्रह, नक्षत्र, देवता, यक्ष, गंधर्व एवं राक्षसी वृत्ति से भी मुकाबले के लिए विपरीत प्रत्यंगिरा और महाविपरीत प्रत्यंगिरा अत्यंत सफल और कारगर होता है। इसका प्रयोग निष्फल नहीà...
#महासरस्वती_महाविद्या●◆बसंत_पंचमी 23 जनवरी 2026#पूजा_विधि_शुभ_मुहूर्त_व_महत्व● ॥ सरस्वती बीजमन्त्र साधना ॥हम सदैव साधना करते रहते हैं। कोई महाविद्या की तो कोई भैरव की,परन्तु बहुत कम लोग है, जो सरस्वती माँ की साधना की ओर ध्यान देते हैं। जबकि अगर माँ सरस्वती की कृपा हमें मिल जाए तो संसार का कोई ज्ञान नहीं है, जो हमें प्राप्त न हो सके, चाहे वह तन्त्र का ज्ञान हो या कोई और ज्ञान। परन्तु कुछ लोगों के सिवा सभी साधक सरस्वती साधना को बहुत हल्के में लेते हैं और यदि करते भी हैं तो कितना ? सिर्फ एक या दो माला पर ही आकर रुक जाते हैं और समझ लेते हैं कि बस हो गयी माँ प्रसन्न। परन्तु ऐसा नहीं है, हमें सरस्वती साधना को गम्भीरता से लेना होगा, क्यूँकि संसार का हर शब्द, हर मन्त्र, हर ज्ञान सरस्वती के बिना शून्य है।प्रस्तुत साधना माँ सरस्वती की बीजमन्त्र साधना है, जिसे बीजोक्त सरस्वती स्थापन साधना के न...
काल भैरव: शिव का उग्र रूप काल भैरव भगवान शिव के सबसे भयंकर और रक्षक स्वरूपों में से एक हैं। वे समय (काल) के देवता माने जाते हैं और अक्सर विकराल रूप में चित्रित किए जाते हैं—श्याम वर्ण, त्रिशूल और खड्ग धारण किए, कुत्ते पर सवार। काल भैरव को काशी (वाराणसी) का कोतवाल कहा जाता है, जो भक्तों की रक्षा करते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने शिव की पूजा में अभिमान दिखाया, तो क्रोधित शिव ने काल भैरव के रूप में उनका विनाश किया, लेकिन विष्णु के कहने पर वे शांत हुए। यह रूप भय, शत्रु बाधा, ग्रह दोष और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति प्रदान करता है। काल भैरव की पूजा का महत्व रक्षा और सुरक्षा: भक्तों को शत्रुओं, भय और दुर्घटनाओं से बचाते हैं। ग्रह दोष निवारण: राहु-केतु जैसे दोषों से मुक्ति के लिए विशेष रूप से पूजे जाते हैं। ...
श्री बगलाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् श्री बगलाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् | SHREE BAGALA ASHTOTAR SHATNAM STOTRA ।। श्रीनारद उवाच ।। भगवन्, देव-देवेश ! सृष्टि-स्थिति-लयात्मकम् । शतमष्टोत्तरं नाम्नां, बगलाया वदाधुना ।। ।। श्रीभगवानुवाच ।। श्रृणु वत्स ! प्रवक्ष्यामि, नाम्नामष्टोत्तरं शतम् । पीताम्बर्या महा-देव्याः, स्तोत्रं पाप-प्रणाशनम् ।। यस्य प्रपठनात् सद्यो, वादी मूको भवेत् क्षणात् । रिपूणां स्तम्भनं गाति, सत्यं सत्यं चदाम्यहम् ।। विनियोगः- ॐ अस्य श्रीपीताम्बरायाः शतमष्टोत्तरं नाम्नां स्तोत्रस्य, श्रीसदा-शिव ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीपीताम्बरा देवता, श्रीपीताम्बरा प्रीतये जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यासः- श्रीसदा-शिव ऋषये नमः शिरसि, अनुष्टुप छन्दसे नमः मुखे, श्रीपीताम्बरा देवà...
बारह राशियों के अक्षर एवं वैदिक-शाबर मंत्र संग्रह राशि अक्षर | मेष राशि - चू,चे,चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ. वृष राशि- ई, उ,ए, ओ, वा,वी, वू,वे, वो. मिथुन राशि - का, की, कू,घ,ड,छ,के, को, ह. कर्क राशि - ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू,डे,डो. सिंह राशि- मा, मी,मू,मे,मो,टा,टी, टू, टे. कन्या राशि- टो,प,पी, पू,ष,ण,ठ,पे, पो. तुला राशि - रा, री, रू,रे, रो, ता,ती, तू, ते. वृश्चिक राशि - तो, ना, नी,नू,ने, नो, या, यी,यू. धनु राशि - ये, यो, भ,भी, भू, ध,फ,ढ,भे. मकर राशि- भो,जा, जी, खी,खू,खे, खो, ग,गी. कुंभ राशि - गू, गे,गो, सा, सी, सू,से, सो, द. मीन राशि - दी, दू,थ,झ,ञ,दे, दो, चा,ची अक्षर आते हैं. 01*मेष राशि का वैदिक मन्त्र- ।।ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मी नारायणाय नमः || **साबर मंगल मंत्र** ll ओम गुरूजी मंगलवार मन कर बन्दा,जन्ममरण का कट जावे फन्दा।जन्म मरण का भागे कार।तो गुरू पावूं मंगलवार। मंगलवार भारद्वाज गोत्र,रक्त वर्ण दस हजार जाप अवन्तिदेश।दक्षिण स्थान त्रिकोण मंडल तीन अंगुल,वृà...
इस दिन एक छोटी कटोरी में तेल भर दें और उसमें देखते हुए निम्न शनि मंत्र का 30 मिनट तक जप करें - सात दिन तक नित्य यानि 22 मई 2020 से 29 मई 2020 तक नित्य इसी तेल भरी कटोरी को देखते हुए मंत्र जप करें और 30 मई 2020, शनिवार को इसे किसी पीपल के वृक्ष में उपरोक्त मंत्र का जप करते हुए डाल दें। चिंता से चतुराई घटे, दुःख से घटे शरीर।कैसा भी संकट हो, मनवा खोओ न धीर। चिंता और चिता के बीच मात्र एक अनुस्वार का अन्तर है,अत्यधिक चिंता मनुष्य के जीà...
ॐ नमः शिवाय ... मित्रों !! आज का दिन आप सभी के लिए शुभ हो .... ग्रहों के मानव जीवन पर प्रभाव से इंकार नहीं किया जा सकता। यदि ग्रह अनुकूल हैं तो जीवन आनंदमय रहता है , जबकि ग्रहों की प्रतिकूल अवस्था मे जीवन जीना भी दूभर हो जाता है। किस ग्रह की स्थिति आपके लिए अशुभ सिद्ध हो रही है, यह दैनिक घटनाओं के आधार पर भी पता लगाया जा सकता है। कुछ लक्षण आपको बता सकते हैं कि किस ग्रह की अशुभ स्थिति आपको अशुभ फल दे रही है। ग्रहों के प्रतिकूल होने पर कुछ लक्षण और प्रभाव उत्पन्न होते हैं ... जिनके आधार पर उन ग्रहों की शांति के लिए रत्न , जड़ी , पौधे और मंत्र जप का विधान है। आइये जानते हैं की प्रतिकूल ग्रहों के क्या लक्षण हो सकते हैं - ...
पूर्ण शक्ति बीज स्थापन प्रयोग. यह साधना एक तिव्र बीज साधना है,इस साधना कि माध्यम से शरीर मे शक्ति कि स्थापना होती है.ज्यो हमें साधना सिद्धि कि लिये महत्वपूर्ण है.साधना काल मे बहोत सारि अनुभुतिया होति है.जैसे आज्ञा चक्र जाग्रन होना या फिर गरम होना,शरिर मे गर्मि बढ जाना,बहोत ज्यादा प्यास लगना या भुक लगना,सर मे दर्द होना या फिर सर मे भारीपन लगना( जैसे शक्तीपात प्राप्ति के बाद लगता है ).शरीर मे एक प्रकार कि दिव्यता कि अनुभूति होति है. और 21 दिन बाद कुछ दिव्य विभूतियो और देवि / देवताओ कि दर्शन प्रप्ति भि होति है.और कुछ साधको ने इसि साधना से सद्गुरुजी कि दर्शन प्रपà¥...
मंत्र शक्ति का उद्गम स्त्रोत :- यज्ञ प्रक्रिया में ज्ञान एवं विज्ञान के सभी स्त्रोत विद्यमान हैं। ज्ञानपक्ष के द्वारा यज्ञीय दर्शन एवं प्रेरणाओं को हृदयंगम करने एवं उदात्त-जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। जबकि विज्ञानपक्ष द्वारा शक्ति सामर्थ्य अर्जित की जाती है। वातावरण संशोधन, रोगनिवारक, स्वास्थ्य संरक्षण एवं संवर्धन, पर्यावरण संतुलन इसी के अंतर्गत आते हैं। यज्ञों के उस वैज्ञानिक, उपयोगी प्रारूप को देने में मूलभूत शक्ति कौन-सी काम करती है, यह कम ही जानते हैं। सर्वविदित है कि बिना शब्द शक्ति की ऊर्जा के यज्ञ का प्रयोजन अधूरा ही रहता है। मात्र वनौषधि यजन से यदि यह लक्ष्य पूरा होता तो इसे किसी याँत्रिक संयंत्र द्वारा पूरा कर लिया जाता। यज्ञ में सन्निहित शक्ति एवं परिणति का आधार है मंत्र एवं यज्ञ दोनों मिलकर यजन प्रक्रिया को सफल बनाà...
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