who Else Would Do This Task If Not Us? your Birth Is No Ordinary Event. The Lord Has Brought You Into This World With A Special Purpose. You Do Not Have To Lead An Animal Existence. I Know The Aim Of Your Life. And If You Ask Me Then You Do Not Belong To Some Particular Region Or Place Rather You Are The Son Of The Earth And The Entire World Is Your Home. Now You Have To Progress Ahead And Make The Entire Universe Your Home. You Won't Achieve Anything Living An Ordinary Life On Earth, Thus You Won't Be Able To Achieve That Which Is Your True Goal, Your Real Aim. You Real Goal Is To Be Able To Freely Travel Through The Entire Universe. You Should Be Able To Go To Any Place In The Universe Without Any Problem. but Blind Faith Won't Lead You To That Goal. Just Be Repeating ram, Ram you Won't Achieve Such Heights. Just By Singing Hymns You Won't Become Immortal, Just By Beating Drums And Cymbals You Won't Be Able To Make The Entire Universe Your Home. Religion Has Nothing To Do With This Science. Religion And Sadhanas Are Two Different Paths. Only The Later Leads To Totality In Life. Totality, Completeness And The Highest Level Of Success In Spiritual World Can Be Attained Only By Following The Path Of Sadhanas. This Is The Real Goal Of Your Life, This Should Be Your Only Aim And It Is For The Achievement Of This Goal That You Have Been Born On This Earth. This Is The True Basis Of Human Life. but For This You Have To Face Challenges And Stand Up Against All Odds. You Should Have An Intensity In Your Eyes, A Determination On Your Face. And This Shall Happen When You Have The Weapon Of Sadhanas In Your Possession. It Is Only Through Sadhanas That One Can Gain Vitality, Courage And Enthusiasm. With The Weapon Of Sadhanas You Can Destroy All The Enemies Of Your Life. With This Formidable Weapon You Can Overcome All Your Foes. You Can Completely Banish Poverty From Your Life And Overcome All Problems, Obsta...
॥ श्री भुवनेश्वरी कवचम् ॥ shri Bhuvaneshwari Kavacham. गुप्त नवरात्रि में चौथे दिवस को दशमहाविद्या मां भुवनेश्वरी देवी की पूजा करने का विधान है। विनियोगः हाथ में जल लेकर विनियोग मंत्र पढ़कर जल नीचे गिरा दें। ॐ अस्य श्रीभुवनेश्वरीकवचस्य ब्रह्मा ऋषिः । गायत्री छन्दः । श्रीभुवनेश्वरी देवता । मम सर्वाभीष्टसिद्ध्यर्थं जपे विनियोगः ॥ ॥ कवच पाठ ॥ ॐ शिरो मे भुवनेश्वरी पातु, भालं पातु महेश्वर...
वर्तमान समाज में पैर पसारते कलयुग के अशुभ लक्षण 1:- कुटुम्ब कम हुआ 2:- सम्बंध कम हुए 3:- नींद कम हुई 4:- बाल कम हुए 5:- प्रेम कम हुआ 6:- कपड़े कम हुए 7:- शिष्टाचार कम हुआ 8:- लाज-लज्जा कम हुई 9:- मर्यादा कम हुई 10:- बच्चे कम हुए 11:- घर में खाना कम हुआ 12:- पुस्तक वाचन कम हुआ 13:- भाई-भाई प्रेम कम हुआ 15:- चलना कम हुआ 16:- खानपान की शुद्धता कम हुई 17:- खुराक कम हुई 18:- घी-मक्खन कम हुआ 19:- तांबे - पीतल के बर्तन कम हुए 20:- सुख-चैन कम हुआ 21:- अतिथि कम हुए 22:- सत्य कम हुआ 23:- सभ्यता कम हुई 24:- मन-मिलाप कम हुआ 25:- समर्पण कम हुआ 26:- बड़ों का सम्मान कम हुआ। 27:- सहनशक्ति कम हुई । 28:- धैर्य कम हुआ 29 :- श्रद्धा-विश्वास कम हुआ । 30 :- शिक्षक (गुरू जी) का सम्मान कम हुआ। 31 :- पूजा, वंदना कम हुआ । 32 :- लोगो से मेल मिलाप कम हुआ। और भी बहुत कुछ कम हुआ जिससे जीवन सहज था, सरल था। संतान...
Kundalini awakening, often described as the uncoiling of the serpent energy at the base of the spine, represents a profound transformational process within the yogic tradition. This spiritual phenomenon is said to occur when the dormant Kundalini energy ascends through the chakras, culminating in an expanded state of consciousness. The journey of Kundalini awakening can be initiated through various practices, including sadhana (spiritual practice) and diksha (initiation by a guru). It is a path that promises to unlock one's inner potential and foster a harmonious integration of mind, body, and soul. The process of awakening is not uniform and can vary greatly among individuals. Some may experience it as a gradual unfolding, akin to the gentle blooming of a flower, while for others, it may be a swift and intense surge of energy. The signs of a Kundalini awakening are diverse, ranging from physical sensations like the feeling of energy coursing through the body to psychological transformations such as increased insight and emotional release. It is also associated with a heightened sense of intuition and a deeper connection with the self and the universe. The pursuit of Kundalini awakening is not without its challenges. It requires dedication, discipline, and often, the guidance of an experienced teacher. The path is strewn with both roses and thorns, symbolizing the dual nature of this journey—where profound joy and enlightenment can be accompanied by intense physical and emotional upheavals. As such, it is essential for practitioners to approach Kundalini awakening with respect, patience, and an open heart. In the modern context, Kundalini awakening has transcended its traditional boundaries and has been embraced by a wider audience seeking spiritual growth. Websites and online communities dedicated to this practice offer resources and support for those on this path. They serve as portals to a wealth of knowledge, sharing the experiences of those who have walked this journey and ...
माताङी साधना – 30-9-1987 जोधपुर By Hirendra Pratap Singh on Monday, 12 May 2014 at 17:19 माताङी साधना -------- माताङी साधना – 30-1-2014 Delhi माताङी साधना – 30-9-1987 जोधपुर मातंगी मे सारी महाविध्या समाहित है, इस महाविध्या के सिद्द साधक कम ही है |(यह साधना अति गोपनीय रही है ) ►फायदा ------ (1) वर या श्राप से सकते है किसी को भी , पूर्णा फलीभूत होगा | (2) कोई भी अप्सरा/ यक्षिणी/ सौंदर्य साधना इसके बाद पहली बार मे होगी | (3) अद्वितीय सौंदर्य प्राप्त होगा | (4) ज्ञान और स्मरण शक्ति तीब्र होगी | ...
मंत्र सिद्धि के उपाय श्रद्धा विधि के साथ मंत्र साधना और अनुष्ठान करने पर भी सफलता न मिले तो उसे पुनः करना चाहिए . बार बार करने पर भी यदि इच्छित सफलता नहीं मिल पाए तो निम्नलिखित सात उपायों में से कोई एक उपाय करना चाहिए , ध्यान रहे सातों उपाय एक साथ निषिद्ध हे यदि एक उपाय करने पर मंत्र सिद्धि न हो तो फिर दूसरा उपाय करना चाहिए इससे निश्चित ही सफलता प्राप्त हो सकेगी पहला उपाय ( भ्रामन) - इस क्रिया में भोजपत्र पर वायु बीज " यं " तथा मंत्र का एक अक्षर फिर " यं " तथा मंत्र का दूसरा अक्षर - इस प्रकार पूरा मंत्र " यं " वायु बीज से ग्रथित करे. भोजपत्र पर कर्पूर , कुमकुम . खस, और चदन को मिलकर उस लेप या स्याही से लिखे और जब मंत्र पूरा लिख दिया जाये तो उसका षोडशोपचार से पूजन करे . ऐसा करके यदि मंत्र का अनुष्ठान किया जाये तो निश्चित रूप से मंत्र सिद्ध होता हे. ...
Gopniya Shukra Tantra Sadhna – Essential for any Devotee गुरुदेव कल फिर मेरे साथ वही घटना घटित हुयी है , आखिर मेरा क्या दोष है? पूर्ण मनोयोग से मैं पिछले कई वर्षों से ये साधना कर रहा हूँ पर जब भी मैं सफलता के निकट पहुचता हूँ , हर बार बस वही घटना घटित हो जाती है. आखिर किन कर्मों का फल मैं भुगत रहा हूँ? क्या कमी है मेरी साधना में. ...
*गुरु बिन गति नही* एक पंडित रोज रानी के पास कथा करता था। कथा के अंत में सबको कहता कि ‘राम कहे तो बंधन टूटे’। तभी पिंजरे में बंद तोता बोलता, ‘यूं मत कहो रे पंडित झूठे’। पंडित को क्रोध आता कि ये सब क्या सोचेंगे, रानी क्या सोचेगी। पंडित अपने गुरु के पास गया, गुरु को सब हाल बताया। गुरु तोते के पास गया और पूछा तुम ऐसा क्यों कहते हो? तोते ने कहा- ‘मैं पहले खुले आकाश में उड़ता था। एक बार मैं एक आश्रम में जहां सब साधू-संत राम-राम-राम बोल रहे थे, वहां बैठा तो मैंने भी राम-राम बोलना शुरू कर दिया। एक दिन मैं उसी आश्रम में राम-राम बोल रहा था, तभी एक संत ने मुझे पकड़ कर पिंजरे में बंद कर लिया, फिर मुझे एक-दो श्लोक सिखाये। आश्रम में एक सेठ ने मुझे संत को कुछ पैसे देकर खरीद लिया। अब सेठ ने मुझे चांदी के पिंजरे में रखा, मेरा बंधन बढ़ता गया। निकलने की कोई संभावना न रही। एक दिन उस सेठ ने राजा से अपना काम निकलवाने के लिए मुझ...
विश्वास का फल:- ************************************ वह गाड़ी से उतरा और बड़ी तेज़ी से एयरपोर्ट मे घुसा , जहाज उड़ने के लिए तैयार था , उसे किसी कांफ्रेंस मे पहुंचना था जो खास उसी के लिए आयोजित की जा रही थी.....वह अपनी सीट पर बैठा और जहाज़ उड़ गया...अभी कुछ दूर ही जहाज़ उड़ा था कि....कैप्टन ने ऐलान किया , तूफानी बारिश और बिजली की वजह से जहाज का रेडियो सिस्टम ठीक से काम नही कर रहा....इसलिए हम करीबी एयरपोर्ट पर उतरने के लिए मजबूर हैं.। जहाज उतरा वह बाहर निकल कर कैप्टन से शिकायत करने लगा कि.....उसका एक-एक मिनट कीमती है और होने वाली कांफ्रेस मे उसका पहुचना बहुत जरूरी है....पास खड़े दूसरे मुसाफिर ने उसे पहचान लिया....और बोला डॉक्टर अविनाश साहब आप जहां पहुंचना चाहते हैं.....टैक्सी द्वारा यहां से तीन घंटे मे पहुंच सकते हैं.....उसने धन्यवाद किया और टैक्सी लेकर निकल पड़ा... लेकिन ये क्या आंधी , तूफान , बिजली , बारिश ने चलना मुश्किल कर दिया , फिर भी वह चलता रहा.....
संग्रीला घाटी ::पृथ्वी का आध्यात्मिक नियंत्रण केंद्र ================================== चीन के भारत पर आक्रमण का कारण =========================== संग्रीला घाटी सामान्य जन के लिए अनजान जगह हो सकती है ,किन्तु उच्च स्तरीय अध्यात्म क्षेत्र से जुड़ा व्यक्ति इससे अनजान नहीं रह सकता ,फिर वह चाहे वह व्यक्ति योग से जुड़ा हो ,tantra से जुड़ा हो अथवा किसी तरह के अध्यात्म क्षेत्र से जुड़ा हो ,हाँ उसकी स्थिति उच्च अवश्य होनी चाहिए |यह घाटी भारत ही नहीं पूरे विश्व के अध्यात्म जगत का नियंत्रण और पथ प्रदर्शक क्ष...
VAATYAAYAN TARANG CHAKRA जहाँ डॉ श्रीमाली से मिलने के लिए गृहस्त ,व्यापारी,नेता ,अभिनेता आदि आते रहते हैं ,वहीँ साधु - सन्यासी ,योगी भी मंत्र साधना सीखने या विचार - विमर्श करने के लिए आते ही रहते हैं । एक बार " स्वामी सियाराम शरण " आये थे ,उम्र साठ - पैसठ के लगभग ,धवलकेशी पर हृष्ट - पुष्ट ,तेजस्वी - उन दिनों गुरूजी के परिचित ज़्यादा आ गए थे ,अतः स्वामी जी को मेरे ही कमरे में ठहरने की आज्ञा दे दी थी ,और वे मेरे ही कमरे में ठहरे थे । ठहरने के दुसरे या तीसरे रोज प्रातः साढ़े चार बजे के लगभग उठकर शौचादि निवृत्ति के लिए बाहर गए ,रास्ता गुरूजी के साधना कक्ष के सामने से था ,सामान्यतः गुरूजी साधना कक्ष का दरवाज़ा अंदर से बंद कर देते हैं ,परन्तु उस दिन भूल से थोड़ा खुला रह गया था और दो किवाड़ों के बीच की झिर्री से अंदर का दृश्य साफ दिखाई पड़ रहा था । स्वामी जी ने देखा ,की गुरूजी सिद्धासन मुद्रा में आसन पर बैठे ह...
THE GOLDEN DOOR OF KASHI TEMPLE In the 1940s a very important event connected to Indian Alchemy occurred.One Naga Sadhu (ascetic of Naga Cult) used to lie almost naked outside the Baba Vishwanath Temple in Kashi and kept shouting "Baba-O-Baba".Some people forcibly picked him up and left him on the banks of river Ganga but the next day he was found in the same place before the Vishwanath temple. The people persuaded him and even used force to remove him from that place but he did not budge from there.Then the festival of Shiv Ratri came and people started coming from far off places to visit the temple and they offered whatever offerings they had brought with them.Some people teasingly asked the Naga Sadhu - "Today is Shiv Ratri".What are you going to offer to Baba Vishwanath (Lord Shiva)?"At the moment some people from royal families were also present, as they heard a lot about the naked Sadhu. On hearing the taunts of the crowd, the Sadhu once looked hard at them and then took out a small box from his dirty bag and went up to the huge iron doors of the temple...
गुरुमंत्र की शक्तियाँ रक्षण शक्तिः - ॐ सहित मंत्र का जप करते हैं तो वह हमारे जप तथा पुण्य की रक्षा करता है। किसी नामदान के लिए हुए साधक पर यदि कोई आपदा आनेवाली है,कोई दुर्घटना घटने वाली है तो मंत्र भगवान उस आपदा को शूली में से काँटा कर देते हैं। साधक का बचाव कर देते हैं। ऐसा बचाव तो एक नहीं,मेरे हजारों साधकों के जीवन में चमत्कारिक ढंग से महसूस होता है। गाड़ी उलट गयी,तीन गुलाटी खा गयी किंतु .....हमको खरोंच तक नहीं आयी.... ! हमारी नौकरी छूट गयी थी,ऐसा हो गया था, वैसा हो गया था किंतु बाद में उसी साहब ने हमको बुलाकर हमसे माफी माँगी और हमारी पुनर्नियुक्ति कर दी। पदोन्नति भी कर दी... इस प्रकार की न जाने कैसी-कैसी अनुभूतियाँ लोगों को होती हैं। ये अनुभूतियाँ समर्थ भगवान की सामर्थ्यता प्रकट करती हैं। ...
रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के बीच एक दुर्लभ संवाद* स्वामी विवेकानंद : मैं समय नहीं निकाल पाता. जीवन आप-धापी से भर गया है. रामकृष्ण परमहंस : गतिविधियां तुम्हें घेरे रखती हैं. लेकिन उत्पादकता आजाद करती है. स्वामी विवेकानंद : आज जीवन इतना जटिल क्यों हो गया है? रामकृष्ण परमहंस : जीवन का विश्लेषण करना बंद कर दो. यह इसे जटिल बना देता है. जीवन को सिर्फ जिओ. स्वामी विवेकानंद : फिर हम हमेशा दुखी क्यों रहते हैं? रामकृष्ण परमहंस : परेशान होना तुम्हारी आदत बन गयी है. इसी वजह से तुम खुश नहीं रह पाते. ...
मंत्र तंत्र यन्त्र विज्ञानं विश्वविधालय कॉपी राईट अध्यात्मिक चिकित्सा से उपचार भारत या सभी देशो में करोड़ो लोग बिमारिओ से परेसान हो के कस्ट पाते है . एलोपेथ में इलाज तो है पर पूरी तरह से नहीं संभव है | है पर प्राम्भिक स्टेज पर तो उपचार एलोपेथ में विमरियाओ का रोक थम कर पाते है पूरी तरह से नहीं | बीमारियों के कारण चिन्ता, क्रोध, लोभ, उत्तेजना और तनाव शरीर के अंगों एवं नाड़ियो मे हलचल पैदा करते देते हैं, जिससे रक्त धमनियों मे कई प्रकार के विकार उत्पन्न हो जाते हैं। शारीरिक रोग इन्ही विकृतियों के परिणाम हैं। शारीरिक रोग मानसिक रोगों से प्रभावित होते है। अध्यात्मिक चिकित्सा से बीमारी के कारण को जड़ मूल से नष्ट करती हैं, स्वास्थ्य स्तर को उठाती है, बीमारी के लक्षणों को दबाती नहीं हैं। अध्यात्मिक चिकित्सा के द्वारा मानसिक भावनाओं का संतुलन होता है और शारीरिक तनाव, बैच...
जय निखिलं.. जय निखिलं..जय निखिलं.. ⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳ "*निखिलेश्वरानन्द- षट्कम्*" मनो बुद्धयहंकार चित्तानि नाहं, न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे| न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायु: निखिल सत्य रूप: शिवोऽहं शिवोऽहम् ||१|| न च प्राणसंज्ञो न वै पंचवायु र्न वा सप्तधातुर्न वा पंचकोश: | न वाक् पाणिपादं न चोपस्थापायू, निखिल सत्य रूप: शिवोऽहं शिवोऽहम्||२|| न मे द्वेष रागौ न मे लोभ मोहौ, मदो नैव मे नैव मात्सर्य भाव:| न धर्मो न चार्थो न कामो न मोक्ष: निखिल सत्य रूप: शिवोऽहं शिवोऽहम् ||३|| न पुण्य...
परम हंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी ॥ ॐ श्रीं ब्रह्मांड स्वरूपायै निखिलेश्वरायै नमः ॥ ...नमो निखिलम... ......नमो निखिलम...... ........नमो निखिलम........ यह परम तेजस्वी गुरुदेव परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी का तान्त्रोक्त मन्त्र है. पूर्ण ब्रह्मचर्य / सात्विक आहार/आचार/विचार के साथ जाप करें. पूर्णिमा से प्रारंभ कर अगली पूर्णिमा तक करें. तीन लाख मंत्र का पुरस्चरण होगा. नित्य जाप निश्चित संख्या में करेंगे . रुद्राक्ष की माला से जाप होगा. जाप के बाद वह मा...
published in May '97, page 43. To perform this, you need Brahmand Siddhi Yantra and Brahmand Rosary. Take the yantra in your left hand and wash it using the right hand. Then wipe it dry using a clean cloth or Guru Pitamber. Then apply seven spots of kumkum and place the yantra in front of you and sit as muslims do for namaz and recite 11 rounds of the following mantra: Om Hreem Shreem Kleem Sampoorn Brahmand Mantra Siddhim Kleem Shreem Hreem Phat Start the sadhan from any Monday and do it for three days. Three days later, throw the yantra and rosary in a river....
चन्द्रिका यक्षिणी साधना. ईश्वर उवाच- अथाग्रे कथियिष्यामि यक्षिण्यादि प्रसाधनम्l यस्य सिद्धौ नराणां हि सर्वे सन्ति मनोरथाः ॥ श्री शिवजी बोले – हे रावण ! अब मैं तुमसे यक्षिणी साधन का कथन करता हूं , जिसकी सिद्धि कर लेने से साधक के सभी मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं । चन्द्रिका यक्षिणी शीघ्र फल प्रदान करती है उन्हे साधका से कोई अपेक्षा नही है,जैसे षोडश यक्षिणी साधानाये हमारे तंत्र शास्त्र मे है और बाकी पन्द्राह यक्षिणीया साधक के कार्य को अनुकूल करने के उपरांत कुछ ना कुछ अपेक्षाये रखती है जिसे कुछ लोग भोग कहेते है.परंतु यहा आज आपको चन्द्रिका यक्षिणी साधना दियी जा रहि है जिसे अत्यन्त निर्मल मन से संपन्न करे,शुद्ध भाव,सहनशिलता और पूर्ण विश्वास से ही यक्षिणी साधना मे सफलता संभव है. बहोत से मेरे प्यारे बन्धूजनो का एक निवेदन था इन समस्या पर साधना पोस्ट कर...
चन्द्र ग्रहण -ग्रहण काल में ऐसे करें साधना, मिलेगी अपार सफलता साधना में श्रद्धा अनिवार्य तत्व है क्योंकि अपनी स्वयं की श्रद्धा ही साधक को साधना में धैर्य और ऊर्जा प्रदान करती है।श्रद्धा के द्वारा ही वह विपरीत परिस्थितियों पर विजय प्राप्त कर सकता है।यदि मन में दृढ़ श्रद्धा और विश्वास हो तो निश्चय ही लक्ष्य की प्राप्ति होती है। ======================= चंद्र ग्रहण मे मोहिनी का इलम जल्दी सिद्ध होता है और कई वर्ष तक मोहिनी इलम से कार्य किये जा सकते है. शनिवार को चन्द्र प्रधान हस्त नक्षत्र की युति बन रही है,इस कारण भैरव साधना मे पूर्ण सफलता प्राप्त होगा और पंचागुली मंत्र साधना हस्त नक्षत्र मे करने से देवि की कृपा मिलती ही है. मिला जुलाकर यह ग्रहण सभी मंत्र सिद्धी हेतु एक स्वर्णमय अवसर...
BHOOT SIDDHI SADHNA तंत्र का एक अलग ही गति होता है,वह गति जिसे मापना संभव ही नहीं बल्कि नामुमकिन है,और इसी तंत्र के क्षेत्र मे इतर योनियो से संपर्क करने का यह सर्वश्रेष्ठ दिवस माना जाता है “भूत तंत्र सिद्धि दिवस ” जो १५ दिसंबर २०१३ के अवसर पर है,इस दिन का रात्री का पर्व स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है,परंतु विवशता के कारण आज तक यह साधना देने मे बहोत ज्यादा समय लग गया फिर भी साधक वर्ग का चाहत इस साधना हेतु बहोत ज्यादा है,यह साधना है अपितु एक क्रिया भी है॰यह साधना कमजोर हृदय के व्यक्ति ना करे अन्यथा परिणाम आपको ही भुगतने पड़ेगे,१५ तारीख से पूर्व आप कोई भी सुरक्षा कवच य...
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