कुंडलिनी जागरण मन्त्र प्रयोग भाग 4 ऊं गं गणेशाय नमः:ऊं ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः :ऊं नमः निखिलेश्वरायै : कुण्डलिनी शक्ति परमपिता का अर्द्धनारीश्वर भाग शक्ति कहलाता है यह ईश्वर की पराशक्ति है (प्रबल लौकिक ऊर्जा शक्ति)। जिसे हम राधा, सीता, दुर्गा या काली आदि के नाम से पूजते हैं। इसे ही भारतीय योगदर्शन में कुण्डलिनी कहा गया है। यह दिव्य शक्ति मानव शरीर में मूलाधार में (रीढ की हड्डी का निचला हिस्सा) सुषुप्तावस्था में रहती है। यह रीढ की हड्डी के आखिरी हिस्से के चारों ओर साढे तीन आँटे लगाकर कुण्डली मारे सोए हुए सांप की तरह सोई रहती है। इसीलिए यह कुण्डलिनी कहलाती है। जब कुण्डलिनी जाग्रत होती है तो यह सहस्त्रार में स्थित अपने स्वामी से मिलने के लिये ऊपर की ओर उठती है। जागृत कुण्डलिनी पर समर्थ सद्गुरू का पूर्ण नियंत्रण होता है, वे ही उसके वेग को अनुशासित एवं नियंत्रि...
अक्षय पात्र साधना इस पोस्ट को पढ़ने के लिए धन्यवाद, सदस्यता लेना न भूलें! जीवन में समग्र समृद्धि के लिए! इस पत्रिका में बहुत ही गुप्त और महत्वपूर्ण साधनाएँ छपती हैं। हम अपने प्राचीन ऋषियों और पूर्वजों की साधनाओं को प्राप्त करने और उन्हें इस पत्रिका के माध्यम से साधकों तक पहुँचाने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि इससे न केवल साधक साधनाओं में पारंगत हो सकें बल्कि साधनाओं के प्राचीन विज्ञान को भी सुरक्षित रखने में मदद मिले। इसी उद्देश्य से हम यहां एक बहुत ह...
श्री अर्जुन-कृत श्रीदुर्गा-स्तवन’ विनियोग – ॐ अस्य श्रीभगवती दुर्गा स्तोत्र मन्त्रस्य श्रीकृष्णार्जुन स्वरूपी नर नारायणो ऋषिः, अनुष्टुप् छन्द, श्रीदुर्गा देवता, ह्रीं बीजं, ऐं शक्ति, श्रीं कीलकं, मम अभीष्ट सिद्धयर्थे जपे विनियोगः। ऋष्यादिन्यास- श्रीकृष्णार्जुन स्वरूपी नर नारायणो ऋषिभ्यो नमः शिरसि, अनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे, श्रीदुर्गा देवतायै नमः हृदि, ह्रीं बीजाय नमः गुह्ये, ऐं शक्त्यै नमः पादयो, श्रीं कीलकाय नमः नाभौ, मम अभीष्ट सिद्धयर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे। कर न्यास – ॐ ह्रां अंगुष्ठाभ्याम नमः, ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां स्वाहा, ॐ ह्रूं मध्यमाभ्याम वषट्, ॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां हुं, ॐ ह्रौं कनिष्ठाभ्यां वौष्ट्, ॐ ह्रः करतल करपृष्ठाभ्यां फट्। अंग-न्यास -ॐ ह्रां हृदयाय नमः, ॐ ह्रीं शिरसें स्वाहा, ॐ ह्रूं शिखायै वषट्, ॐ ह्र...
शिव सिद्धि सर्व रक्षाकारक प्रासाद कवच | shiv siddhi sarv rakshaakaarak praasaad kavach शिव सिद्धि सर्व रक्षाकारक प्रासाद कवच | shiv siddhi sarv rakshaakaarak praasaad kavach विनियोग: ॐ अस्य श्रीसदा -शिव -प्रासाद -मन्त्र -कवचस्य श्रीवामदेव ऋषिः , पंक्ति छंद, श्रीसदा-शिव देवता, अभीष्ट -सिद्ध्यर्थे पाठे विनियोगः | ऋषादि न्यास: श्रीवामदेव -ऋषये नमः शिरसी | पंक्तिश्छंद से नमः मुखे | श्रीसदा -शिव -देवतायै नमः ह्रदि | अभीष्ट -सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे | ॐ शिरो मे सर्वदा पातु प्रासादाख्यः सदा-शिवः | षडक्षर-स्वरूपो मे , वदनं ...
#नीलकंठ_अघोर_मंत्र_स्तोत्र #सभी_समस्याओं_का_सरल_उपाय,, Neelkanth Stotra Benefits And How It Can Heal The Body नीलकंठ स्तोत्र, भगवान शिव का अद्भुत मंत्र जिससे बड़े से बड़ा रोग भी दूर होता है यदि आपको लगता है की किसी ने आप पर तंत्र प्रयोग करवा दिया है या करवा सकता है तो नित्य नीलकंठ स्तोत्र का एक पाठ करके जल पर फूक मरे और वह जय भगवन शिव को याद करते हुए अपने घर में छिड़क दे। यदि थोडा थोडा जल आप सभी सदस्य पी ले तो और भी अच्छा रहेगा नीलकंठ अघोर मं...
1. शिवलिंग निराकार रूप को दर्शाता है । भगवान शिव की मुख्य आराधना शिवलिंग के रूप में ही की जाती है । क्या आप जानते है की देवी देवताओ की खंडित मूर्ति की कभी पूजा नही की जाती, उन्हें विसर्जित कर दिया जाता है, लेकिन शिवलिंग ...
*भगवान शिव के 35 रहस्य* भगवान शिव अर्थात पार्वती के पति शंकर जिन्हें महादेव, भोलेनाथ, आदिनाथ आदि कहा जाता है, उनके बारे में यहां प्रस्तुत हैं 35 रहस्य। 1. *आदिनाथ शिव* सर्वप्रथम शिव ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया इसलिए उन्हें ‘आदिदेव’ भी कहा जाता है। ‘आदि’ का अर्थ प्रारंभ। आदिनाथ होने के कारण उनका एक नाम ‘आदिश’ भी है। 2. *शिव के अस्त्र-शस्त्र* शिव का धनुष पिनाक, चक्र भवरेंदु और सुदर्शन, अस्त्र पाशुपतास्त्र और शस्त्र त्रिशूल है। उक्त सभी का उन्होंने ही निर्माण किया था। 3. *शिव का नाग* शिव के गले में जो नाग लिपटा रहता है उसका नाम वासुकि है। वासुकि के बड़े भाई का नाम शेषनाग है। 4. *शिव की अर्द्धांगिनी* शिव की पहली पत्नी सती ने ही अगले जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लिया और वही उमा, उर्मि, काली कही गई हैं। 5. *शिव के पुत्र* शिव के प्रमुख 6 पुत्र हैं- गणेश, कार्तिकेय, सुकेश, जलंधर, अयप्प...
Today (04.03.2019) is Shivratri. Lyricist is Bharat Vyas, Composed by Chitragupt, Singers are Chandrani Mukherjee & Mahendra Kapoor and Actors are Gopi Krishna & Dara Singh. Posted for entertainment purpose only and all the rights are with the original copyright owner. Thanks saregama On behalf of: Saregama India Limited. Lalaat Pe Hai Chandrama Hai Jata Meinn Gang Dhaar Hai Rami Hai Bhasma Ang Pe Gale Mein Sarpa Haar Hai Nava Rahe Hai Sheesh Dev Gan Tumhari Bhakti Mein Hai Surya Ka Prakash Hai Shiv Tumhari Shakti Mein Hai Shiv Tumhari Shakti Mein ...
शांकरी महा लक्ष्मी कवच - लक्ष्मी के 108 गुप्ततम स्वरूपों में जो संसार में धन प्रदायक अन्यतम शक्तियां है उनमें शांकरी देवी का गणना प्रथम तीन स्वरूपों में होता हैं। काफी समय पूर्व संभवतः 90 के पहले के किसी शिविर में पूज्य सदगुरुदेव जी महाराज ने शांकरी लक्ष्मी का रहष्योद्घाटन किए थे इनकी मूल साधना पद्धति के साथ में... यह विद्या उस व्यक्ति को भी धन देती है जिसके भाग्य में ब्रह्मा जी ने दरिद्रता का ही भोग लिख रखा हैं। आज उसी देवी के तांत्रोक्त कवच निर्माण की क्रिया लिख रहा हूँ इनकी साधना की एक विशेषता है कि यदि एक बार साधना आरम्भ किया तो एक मात्रा में धन की नित्य प्राप्ति होता हैं। लेकिन अनेक बार साधक खीझ (लालच के कारण) जाता है कि धन की यह मात्रा दूना या चारगुना क्यों नहीं हो रहा हैं। और यदि इस लो...
श्री भैरव जयंती विशेष बटुक एवं कालभैरव उपासना,कार्य सिद्धि एवं शत्रु नाशक प्रयोग ।।श्री काल-भैरव।। भगवान भैरव की महिमा अनेक शास्त्रों में मिलती है। भैरव जहाँ शिव के गण के रूप में जाने जाते हैं, वहीं वे दुर्गा के अनुचारी माने गए हैं। भैरव की सवारी कुत्ता है। चमेली फूल प्रिय होने के कारण उपासना में इसका विशेष महत्व है। साथ ही भैरव रात्रि के देवता माने जाते हैं और इनकी आराधना का खास समय भी मध्य रात्रि में 12 से 3 बजे का माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव के दो स्वरूप बताए गए हैं। एक स्वरूप में महादेव अपने भक्तों को अभय देने वाले विश्वेश्वरस्वरूप हैं वहीं दूसरे स्वरूप में भगवान शिव दुष्टों को दंड देने वाले काल...
आज का विचार:-आप स्वयं विचार करें कि आपकी आदतों में कौन- सी आदत सबसे बुरी है, बस उस आदत को छोड़ने का हर संभव प्रयास करें|अपने घर में नित्य पूजन अवश्य करें, यह पूजन केवल धूप- दीप से भी हो सकता है| पांच मिनट के लिए ही करें लेकिन अवश्य करें| वारामिहिर वचन ऋषि चिंतन उन्नति की ओर बढ़िए दिनांक-26 नवम्बर 2016 आज प्रात: शनि मंत्र जप करें एवं गाय और कुत्ते को रोटी अवश्य खिलाएं| मंत्र:- "ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:" गुरूवाणी चलो मेरे साथ बढ़ाते हुए कदम अमृत प्रवाह हो हर कदम विशेष- द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) स्कंद पुराण के अनुसार द्वादशी के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं। हर कार्य में सफलता पाने के लिए भ...
शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव को प्रसन्न करने के उपाय इस प्रकार हैं... 1. भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है। 2. तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है। 3. जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है। 4. गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है। यह सभी अन्न भगवान को अर्पण करने के बाद गरीबों में बांट देना चाहिए। शिवपुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव को कौन-सा रस (द्रव्य) चढ़ाने से क्या फल मिलता है... 1. बुखार होने पर भगवान शिव को जल चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है। सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जल द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है। 2. तेज दिमाग के लिए शक्कर मिला दूध भगवान शिव को चढ़ाएं। 3. ...
स्फ़टिक शिवलिंग-भाग्योदय साधना. मनुष्य मूलत: पृथ्वी का ही भाग है,और इसी तत्व से उसमे मानसिक तथा शारीरिक स्थायित्व आती है.इस प्रकार स्फ़टिक पृथ्वि तथा अन्य तत्वो से ग्रहो से उर्जा ग्रहण कर मनुष्य मे पुन: सन्चारीत करने कि शक्ति रखती है.एक प्रकार से यह ''शक्ति केंन्द्र'' है, जो उर्जा को ग्रहण कर नियन्त्रित करती है.उसे इस प्रकार से प्रवाहीत करती है कि व्यक्ती उस उर्जा को ग्रहण कर सके और देह कि उर्जा मे गुणात्मक परिवर्तन कर सके.यहा तक कि उच्च कोटि के शिवलिंग स्फ़टिक शिवलिंग होते है.जिसके सामने बैठने मात्र से उर्जा भाव संचारित होति है.किसी महा-शिवरत्रि कि शिवीर मे सदगुरुजीने तीन श्लोक बताये थे,ज्यो इस प्रकार है...................... ...
तामस मंत्र कोष:॥ { मोह शास्त्र }! नास्ति नारायण समो देवो न भूतो न भविष्यति । ऐतेन सत्यवाक्येन सर्वाऽर्थान साध्याम्यहम् ॥ रावण उवाच । Ravan asked Rudra sitting on Mount Kailash , ” kindly enlighten me about the science that gives instant results ” Rudra said” I shall explain you tantra which can move the oceans and mountains .Those who do not master tantra, what use is their anger ? ” A man without GURU is akin to a night without moon ,day without sun , kingdom without King ! Without guru upadesha no mantra in tantrashastra will be fruitful .One does not have right to practise without gururpadesha . Shatkarma is very important aspect in this shastra . Resorting to it will give all sot f success ! Shantikarma vashikaran stambhan vidweshan uchchatan Maran The act with which one can subside diseases , abhichara , and planetary ill effects is known as shantikarma ! One by which people can be controlled is known as vashikaran One by which the motion and direction of the person [ and his mind ] can be stopped is known as stambhan ...
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