Guru Diksha : Guru initiation गुरु दीक्षा
गुरु दीक्षा कैसे लें
दीक्षा के बाद डाक द्वारा घर पहुंचाई जाने वाली साधना एवं पूजन सामग्री जैसे-:
बिना गुरु के और बिना गुरु दीक्षा के साधना के मार्ग पर चलना और जीवन में पूर्णता प्राप्त करना असंभव है
बहुत से लोग निरंतर Facebook पर मेरे द्वारा ग्रुप में निरंतर किए जानेवाले पोस्ट देखकर और पढ़कर मुझे व्यक्तिगत रुप से बोल रहे हैं की हम भी साधना के मार्ग से जुड़ना चाहते हैं और परम पूज्य सदगुरुदेव जी से दीक्षा लेकर उनसे जुड़ना चाहते हैं साधनाओं के मार्ग पर चलना चाहते हैं और साधनाएं करना चाहते हैं.....!
मैं उन सभी भाइयों बहनों और मित्रों का अंतर्राष्ट्रीय सिद्धाश्रम साधक परिवार में स्वागत करता हूं 
साधना के मार्ग में गुरु को सर्वोत्तम महत्व दिया गया है क्योंकि गुरु ही इष्ट है गुरु ही साधना है और गुरु ही जीवन की पूर्णता है l
गुरु दीक्षा कैसे लें
गुरु दीक्षा के लिए भारत के विभिन्न शहरों में सदगुरुदेव जी द्वारा साधनात्मक शिविरों का आयोजन किया जाता है परंतु इस संक्रमण काल में प्रशासनिक आपत्तियों की वजह से शिविर का आयोजन नहीं हो पा रहा है आप गुरु दीक्षा गुरुधाम दिल्ली अथवा जोधपुर एवं साधनात्मक शिविरों के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं इसके अलावा आप फोटो के माध्यम से भी गुरु दीक्षा प्राप्त कर सकते हैं उसके लिए मैं आपको व्हाट्सएप नंबर दे रहा हूं||
इस नंबर पर आप दीक्षा के लिए बात करिए और व्हाट्सएप नंबर पर अपने सामने से लिए गए फोटो (चित्र) को व्हाट्सएप नंबर पर भेज दीजिए उस चित्र में आपकी आंखें पूरी तरह से खुली होना चाहिए... जो फोटो आप मोबाइल से लेंगे वह बिल्कुल सामने से और बिल्कुल साफ क्लियर होना चाहिए फोटो के माध्यम से भी आप गुरु दीक्षा ले सकते हैं इसके अलावा विभिन्न प्रकार की तीव्र शक्तिपात दिखाएं भी आप फोटो के माध्यम से गुरुजी से ले सकते हैं इसमें किसी प्रकार का कोई संशय नहीं है यह उतना ही असरकारक है जितना की प्रत्यक्ष दीक्षा लेने पर है
गुरु दीक्षा साधना पूजा सामग्री के लिए आपको 2100 रुपए का शुल्क गुरुधाम के इस खाते में जमा करना होगा यह शुल्क आप बैंक खाते में अथवा ऑनलाइन भी जमा कर सकते हैं जिसकी जानकारी आपकी सुविधा के लिए मैं आपको नीचे दे रहा हूं 


बैंक खाते में अथवा ऑनलाइन दीक्षा सामग्री शुल्क जमा करने के बाद बैंक खाते की रसीद या ऑनलाइन पैसा जमा करने का संदेश mess. दीक्षा का फोटो और अपने घर का पता आप Mobile के इस
Wats No-
9560160184
पर भेज दीजिए|
आपके द्वारा जो 2100 रुपए का शुल्क दिया जाता है उसमें आपको एक वर्ष के लिए
" पत्रिका"
की सदस्यता दी जाती है जिससे निरंतर पत्रिकाओं के माध्यम से आपको गुरु ज्ञान एवं साधनाओ का ज्ञान निरंतर प्राप्त होता रहे इसके अलावा अन्य साधना सामग्री जैसे-:
जिसने भी अपनी साधना के बल पर एक स्तर प्राप्त कर लिया और परमपिता परमात्मा की असीम शक्ति का एक अंश भी प्राप्त कर लिया वही तो देवता है देवता साधना के मार्ग में एक विशेष माध्यम हैं जिनकी कृपा से सांसारिक जीवन में कुछ विशेष प्राप्त किया जा सकता है और वह भी सहज रूप से किन किन देवताओं की प्रार्थना किन मंत्रों से की जानी चाहिए और उसका मंत्र विधान क्या है
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पूज्य सदगुरुदेव जी प्रायः साधना शिविरों में अनेक ऐसे गूढ़तम रहस्यों का उद्घाटन कर देते हैं जिनके बारे में सामान्यतः कहीं विवरण प्राप्त होना प्रायः संभव नहीं होता यह हमारा इस पीढ़ी का तथा आगे आने वाली पीढ़ी का सौभाग्य है कि हम अपने पूर्वजों के चिंतन को दुर्लभ साधनात्मक रहस्य प्राचीन ऋषि मुनियों की साधना विधियों के दुर्लभ ज्ञान को पूज्य सदगुरु देव जी के माध्यम से जोड़ने की क्रिया संपन्न कर अपने जीवन को उन्नत बनाने का प्रयास कर रहे हैं साथ ही पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास के साथ इन साधनआत्मक प्रक्रियाओं से गुजरते हुए जीवन की विपरीत परिस्थितियों पर विजय प्राप्त कर लेते हैं तथा एक नवीन इतिहास के सृजन का अध्याय लिख डालते हैं इतिहास के नवीन पृष्ठों की संरचना संभव है यदि पूज्य सद्गुरुदेव द्वारा प्रदत्त यह साधनाए दिए गए विधि विधान से संपन्न कर ली जाए....
साधना को जब तक प्रत्येक मानव अपने जीवन में नहीं अपनाता है, तब तक उसके अंग-प्रत्यंग के महत्वपूर्ण तत्व सुप्त अवस्था में होते हैं, जिससे वह जीवन में वांछित प्रगति नहीं कर पाता है।साधना के माध्यम से एक सामान्य मनुष्य नर से नारायण तक पहुँच सकता है और प्रभु से दर्शन कर सकता है, जो जीवन का आधार है,जो जीवन का चिन्तन है । साधना का तात्पर्य
शरीरं साधयति सः धर्म
अर्थात शरीर को साध लेना ही साधना है, साधना ही वह क्रिया है जिसके माध्यम से मनुष्य जीवन को व्यवस्थित ढंग से संचालित कर सकता है। जिसके माध्यम से जीवन का निर्माण किया जा सकता है।जब तक जीवन में साधना नहीं है, तब तक शरीर संतुलित एवं स्वस्थ नहीं बन सकता है और जब तक स्वस्थ नहीं रहेंगे तब तक जीवन में पूर्णता नहीं है, इस अधूरे जीवन को पूरा करने के लिए *साधना* करना ही एक श्रेष्ठतम मार्ग है।

साधना तो कोई भी कर सकता है 
विविध शास्त्रों में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि साधक के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह संस्कृत का भली प्रकार से उच्चारण करना जानता हो ...लंबे चौड़े विधि-विधान या पूजा पाठ की भी आवश्यकता नहीं है साधना की पूर्ण सफलता के लिए तो यह जरूरी है कि साधक मन में यह दृढ़ निश्चय कर लें कि मुझे अपने जीवन को संभालना है मुझे अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करनी ही है और .....मैं समाज में तथा देश में उन्नति के शिखर पर पहुंचकर पूर्णता प्राप्त करके ही रहूंगा इसके साथ ही साथ जिस प्रकार से गुरु के द्वारा गुरु ग्रंथ और पत्रिकाओं के द्वारा प्रयोग या विधि बताई गई है उस प्रकार से यदि वह प्रयोग संपन्न करता है तो निश्चित ही उसे जीवन में अनुकूलता सफलता प्राप्त होती ही है निश्चित ही उसे जीवन में पूर्ण रूप से सिद्धि प्राप्त होती ही है और वह इस प्रकार के जीवन के दुख दरिद्रता बाधाएं और परेशानियों को दूर करने में सफल हो पाता है तथा जीवन में यह सब कुछ प्राप्त कर लेता है जो उसके जीवन का लक्ष्य होता है जो उसके जीवन का उद्देश्य होता है... और यह सब संभव हो सकता है केवल गुरु दीक्षा के माध्यम से उच्च कोटि की साधनाओ और तपस्या के माध्यम से और इसके लिए सबसे पहले आवश्यक है गुरु दीक्षा क्योंकि बिना इसके आप अपने लक्ष्य पर नहीं पहुंच सकते और ना ही आप उस लक्ष्य की प्राप्ति कर सकते हैं
अंतर्राष्ट्रीय सिद्धाश्रम साधक परिवार 14- A मेन रोड हाई कोर्ट कॉलोनी सेनापति भवन के पास जोधपुर राजस्थान