शुक्र ग्रह, जिसे प्रेम, सौंदर्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, भारतीय ज्योतिष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब इस ग्रह की ऊर्जा संतुलित होती है, तो यह हमारे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करता है। हालांकि, कई बार विभिन्न कारणों से शुक्र की स्थिति असंतुलित हो सकती है, जिससे मानसिक और भावनात्मक अशांति उत्पन्न होती है। इस लेख में, हम तीन शक्तिशाली मंत्रों का उल्लेख करेंगे जो शुक्र ग्रह की शांति के लिए प्रभावी माने जाते हैं, साथ ही एक तत्काल उपाय भी प्रस्तुत करेंगे जो आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक हो सकता है। इन साधनाओं के माध्यम से आप न केवल अपनी आंतरिक शांति को पुनर्स्थापित कर सकते हैं, बल्कि अपने चारों ओर का वातावरण भी सुखद बना सकते हैं। शुक्र ग्रह: एक परिचय ...
Paarad Ganpati Back to Sadhna List Back to Issue Maangalyamoortim Gann-naayakam Bhajet: I bow to Lord Ganpati who is the Lord of all deities. Gannaanaam Buddheesham, Surgann-muneenaam Hitkaram, Maneeshaa Sammaanam, Dhanbalsuvidyaa-sukhkaram. Vidhatte Kalyaannam, Haritjanvighnam Vijayadam, Ganneshamtam Vande, Gamayati Sadaa Yo Nijpadam. I bow devotedly to Lord Ganpati who is Lord of all gods, the deity of wisdom, the protector of gods and Yogis, the most respected among the wise and the prosperous, the bestower of wealth, strength and knowledge, the banisher of all problems, who blesses one with victory and realisation of the Divine. Paarad is a unique gift of Nature. When mercury which is impure is purified and consecrated by various processes it becomes solid and can be given a solid form. This is called Paarad. The ancient text Ras Ratna Samuchchaya states - Siddhrase Karishye Nirdraaridrayamagadam Jagat. i.e. if mercury is consecrated and converted into Paarad then with its help all ailments and poverty of the world can b...
The Divine Path: A Complete Guide to Guru Diksha by Dr. Narayan Dutt Shrimali Introduction In the realm of Indian spirituality, Dr. Narayan Dutt Shrimali (revered as Sadgurudev) revived the lost ancient sciences of Mantra, Tantra, and Yantra. He simplified complex rituals for the common man, asserting that spiritual awakening is not reserved for ascetics but is equally accessible to householders (Grihasthas). At the heart of this transformation is Guru Diksha. Diksha is not merely a ritual; it is a spiritual contract and a transfer of divine energy (Shaktipat) from the Guru to the disciple. It burns past karmas, awakens dormant consciousness, and connects the disciple to the lineage of Siddhashram. Whether you are in a remote village or a bustling city, the process to receive this divine grace has been made accessible through two distinct methods: Online (via Photo) and In-Person (Sadhana Shivir). Understanding the Significance of Guru Diksha Before proceeding with the method, one must understand what...
Navratri Shukla Shashthi Tithi...
Navratri Shukla Shashthi Tithi...
मंत्र जप प्रभाव जब तक किसी विषय वस्तु के बारे में पूर्ण जानकारी नहीं होती तो व्यक्ति वह कार्य आधे अधूरे मन से करता है और आधे-अधूरे मन से किये कार्य में सफलता नहीं मिल सकती है| मंत्र के बारे में भी पूर्ण जानकारी होना आवश्यक है, मंत्र केवल शब्द या ध्वनि नहीं है, मंत्र जप में समय, स्थान, दिशा, माला का भी विशिष्ट स्थान है| मंत्र-जप का शारीरिक और मानसिक प्रभाव तीव्र गति से होता है| इन सब प्रश्नों का समाधान आपके लिये - जिस शब्द में बीजाक्षर है, उसी को 'मंत्र' कहते हैं| किसी मंत्र का बार-बार उच्चारण करना ही 'मंत्र-जप' कहलाता है, लेकिन प्रश्न यह उठता है, कि वास्तव में मंत्र जप क्या है? जप से क्या परिणाम होते निकलता है? व्यक्त-अव्यक्त चेतना १. व्यक्त चेतना (Conscious mind). २. अव्यक्त चेतना (Unconscious mind). हमारा जो जाग्रत मन है, उसी को व्यक्त चेतना कहते हैं| अव्यक्त चेतना में हमारी अतृप्त इच्छा...
गुरु पूजन संक्षिप्त विधि गुरु पूजन गणेश जी पूजन किसी भी साधना में बैठने से पूर्व गुरु पूजन और गणेश जी के पूजन की संक्षिप्त विधि – Brief Method of Guru Worshipping Lord Ganesha पवित्रीकरणः अपने उलटे हाथ की हथेली में थोड़ा सा जल लेकर निम्न मंत्र बोलते हुए जल अपने चारों ओर छिड़कें – ।। ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोSपि वा यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं सः वाह्याभ्यंतरः शुचि ।। आचमनः आंतरिक तत्वों की शुद्धि के लिए यह प्रक्रिया अत्यंत ही आवश्यक है । सीधे हाथ में जल लेकर चार बार यह मंत्र पढ़ें और उस अभिमंत्रित जल को स्वयं पी लें । ॐ आत्मतत्वं शोधयामि नमः ॐ विद्यातत्वं शोधयामि नमः ॐ शिवतत्वं शोधयामि नमः इसके बाद दिग्बंधन का स्थान आता है । दसों दिशाओं में से विघ्न आपकी साधना में बाधा न डालें, इसके लिए अपने हाथ में जल या अक...
Book Catalogue Revered Gurudev has written more than Five Hundred books on various topics like Astrology, Palmistry, Tantra, Sadhanas, Kundalini, Meditation, Ayurveda, Hypnotism, Solar Science, Numerology etc. etc. Some of these books are out of stock/print at the moment. A partial list of the currently available books is presented below. All prices include postage & handling charges and are International Prices. Please contact Jodhpur Gurudham by email/letter/phone/fax to get Indian Prices for India and other SAARC countries (Nepal/ Pakistan/ Sri Lanka/ Bangladesh/ Bhutan/ Maldives/ Burma). You should contact the Jodhpur Gurudham for getting Sadhna articles/books/cassettes etc. by post. Alternatively, you may buy them over the counter from our Delhi Gurudham or from the counters at the Sadhna Camps. If you live in India, then you may send us a email/letter/fax mentioning your address and details of required items. We will send it by VPP. Alternatively, as VPP rates have increased recently, you may send us a Bank Draft of "Total cost of items" plus Rs. 60 (postage charges), then we will send the items by registered post. Sadhaks living in other SAARC countries can get Sadhana articles/books/cassettes etc. at the Indian price by sending a bank draft. Please add around 20-30% as Postal charges. ...
धर्म – प्रतीक्षा का भाव – शिष्यत्व है धर्म का अर्थ है स्वभाव की स्फुरणा। जो छिपा है, उसका प्रकट हो जाना। जो गीत तुम्हारे हृदय में पड़ा है, वह गाया जा सके। जो तुम्हारी नियति है, वह पूरी हो सके। और प्रत्येक की नियति थोड़ी-थोड़ी भिन्न है। इसलिये ऊपर से आरोपित कोई भी आचरण धर्म नहीं हो पाता। धर्म की आधारशिला यही है- अंतः स्फूर्ति हो। और यही भूल हो गई है। और इसी भूल को मैं सुधारना चाहता हूँ। बहुत बार धार्मिक चेतना का जन्म हुआ है, लेकिन ज्योति खो गई। बुद्ध में जला दीया और बुझ गया। महावीर में जला और बुझ गया। दीया जलता रहा है, बार-बार जलता रहा है। परमात्मा मनुष्य से हारा नहीं। मनुष्य हारता गया और परमात्मा की आशा नहीं टूटी है। परमात्मा ने फिर -फिर कोशिश की है- मनुष्य तक पहुँचने की, मनुष्य को खोज लेने की। मनुष्य कितने ही गहन अंधकार में हो, उसकी किरण आती रही है, उसका इशारा आता रहा है।...
QUANTUM HEALING CODES 1st part (2nd part: https://www.facebook.com/100063492496013/posts/686032100189867/) These codes are quantum healing tools that are safe to use on everything and everybody, and have no side effects. Since they are quantum, the intent and the energy of the person using them has a little bit of effect in how powerful they are going to be when they are used. In the hands of someone with a powerful heart energy - which has more to do in your strength of purpose and your ability to be actively involved in your life's mission and connect to sou...
?कुण्डलिनी जाग्रत, ब्रह्माण्डात्माम् मंत्र? ## एक प्रकार से देखा जाए तो ये विश्व मंत्र हैं, इन्हे विश्वदेवात्माम् कहा गया है, इसलिए इन मंत्रो को ब्रह्मण्डात्माम् कहा गया है़......आखिर इन शब्दो का कोई न कोई अर्थ तो होगा ? आखिर इन शब्दों का कोई न कोई प्रयोजन तो होगा..... बिना प्रयोजन के ये मंत्र समस्त ब्रह्मण्ड में स्वत: ही विचरण करते नहीं रहते हैं । जब हम इन मंत्रो का उच्चारण करते हैं, तो ब्रह्मण्ड में विचरित होते हुए मंत्रों को ग्राह्या करते हैं, और जब ब्रह्मण्ड के मंत्रों का इन मंत्रो से सम्बन्ध स्थापित होता है, तब एक विस्फोट पैदा होता है ,एक चेतना पैदा होती है, एक दिव्यता पैदा होती है, एक तेजस्विता पैदा होती है , जो सुनने वाले के हृदय पर एक तेजस्वी बिम्ब स्थापन कर लेती है । ## यह मंत्र स्वयं प्रकृति निर्मित हैं, प्रकृति ने ही इस मंत्र का निर्माण किये हे । जिनको न देवताओं ने बनाया है , ...
साधना क्या है? साधनाओं के माध्यम से असंभव दिखने वाले कार्य भी पूरे होते हैं।मूल रूप से साधनाओं का उद्देश्य दो ऊर्जाओं का संगम होता है - एक उप चेतना का और एक कर्मकांड के माध्यम से प्रचारित देवता का।मंत्र जप के माध्यम से किया जाता है, जो विशेष दिव्य भस्म होते हैं, जिसका दिव्य बल बहुत जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं।लेकिन कभी-कभी यह संयोजन भी विफल हो सकता है, खासकर अगर साधक कमजोर हो।उस स्थिति में एक शक्तिशाली गुरु की आवश्यकता होती है जिसकी दिव्य शक्तियां किसी की इच्छा को अद्भुत स्तर तक बढ़ा सकती हैं।ज्ञान शक्ति सर्वोच्च है और सच्चा ज्ञान कोई सीमा नहीं जानता है।ज्ञान फैलने से बढ़ता है, और यह अज्ञानता, अंधविश्वास, अविश्वास और भय के अंधेरे को दूर करता है। साधना - सही तरीका प्रत्येक साधक दैनिक पूजा को पूरा करने और विशेष मंत्...
सद्गुरुदेव वाणी दुश्चिताओ, दु:ख और गहन व्यथा का रसास्वदन किये बिना व्यक्ति जीवन की ऊचाइया' नही छू सकता ... संकटो से जूझना भी एक विचित्र आनन्द है.... हारिये न हिम्मत : बिसारिये न राम ---------------------------------------------------- यह हमारा सौभाग्य है कि हमे प्रभु की कृपा से मानव जीवन मिला है, और प्रभु ने हमारे इस शरीर मे असीम सम्भावनाए भर दी है, इस काया मे इतनी अधिक छमता और शक्ति है कि हम चाहे तो असम्भव कार्य को भी सम्भव कर सकते है, प्रश्न इतना ही है कि सम्भावनाओ को पहिचाने, और अपने मे निहित उन विशेषताओ को जगाने का प्रयत्न करे, जिससे कि हम पूर्णता तक पहुच सके | संसार मे और हमारे आसपास सैकडो उदाहरण बिखरे पडे है , जिन्होने सर्वथा विपरीत परिस्थितियो म...
covid का बचाव और इलाज़ बहुत से लोग रोज़ रोज़ फ़ोन करते है की मेरा covid से बचाव और इलाज़ क्या है और अभी तक मेने इस विषय पे लिखा नहीं, तो भाई मैं लिख रहा हु . पहले आयुर्वेद को लेते है . यह सब चीज़ें आपके घर में होनी ही चाहिए . अगर covid नहीं हुआ तो आपका बचाव होगा और अगर हो गया है तो आपका इलाज़ भी होगा .पहले आयुर्वेद को लेते है 1. गिलोय :- यह आपके पास होनी ही चाहिए किसी भी पंसारी की दूकान से मिल जायेगी . इसका रस भी मिलता है चाहे रामदेव की दूकान से लें या कोई भी कंपनी की ..लेकिन आपके पास होनी चाहिए . इसके रस के दो चम्मच इसको dilute करके लें , इसका मतलब यह हुआ की पानी में मिला के लें . केवल गिलोय के लाभ पे ही मैं बहुत कुछ लिख सकता हु लेकिन अभी का मसला केवल covid से निपटने का है तो वहीं पे रहता हु . 2. तुलसी :- इसका पंचांग रस भी आपको मिल जायेगा हर पंसारी की दूकान से . बहुत सी कंपनी बनाती है जो भी पसंद है ले लो . दो चम...
मृत्यु का इतना सुन्दर वर्णन किया है ब्रह्म उपासक ने कॉपी करके सभी मित्रो के वैचारिक लाभ हेतु पोस्ट कर रहा हु।। ??जानिए आपके प्राण कहाँ से निकलेंगे...?? = ======================== प्रत्येक व्यक्ति अलग इंद्रिय से मरता है।किसी की मौत आंख से होती है, तो आंख खुली रह जाती है—हंस आंख से उड़ा। किसी की मृत्यु कान से होती है। किसी की मृत्यु मुंह से होती है, तो मुंह खुला रह जाता है। अधिक लोगों की मृत्यु जननेंद्रिय से होती है, क्योंकि अधिक लोग जीवन में जननेंद्रिय के आसपास ही भटकते रहते हैं, उ...
आज मंत्र तंत्र विज्ञान विधालय का विषय था और जानकारी के लिए ज्वाइन करे आकर्षण ही प्रेम है वशीकरण ही प्रेम है, समोहन ही प्रेम है, ॐ गुं गुरूभ्यो नमः ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरूभ्यो नमः गुरु भगवान की कृपा आप सभी पर सदा बनी रहे । ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात् । तो सवाल यह उठता है कि आकर्षण की शक्ति है क्या ? आकर्षण की शक्ति दरअसल प्रेम की शक्ति है ! आकर्षण ही प्रेम है | जब आप अपने प्रिय पकवान के प्रति आकर्षण महसूस करते हैं, तो वास्तव में आप उस पकवान के प्रति प्रेम महसूस करते है ; आकर्षण नहीं होता, तो आपको कुछ भी महसूस नहीं होता | तब आपके लिए सारे पकवान एक जैसे ही होते | तब आप यह नहीं जान पाते कि आप किस चीज से प्रेम करते हैं और किससे नहीं करते, क्योंकि आप किसी भी चीज के प्रति आकर्षित नहीं होते | आप किसी ख़ास व्यक्ति, शहर, मकान, कार...
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