साधना पथ की बाधाएं और अनुष्ठानिक समाधान: एक आध्यात्मिक मार्गदर्शिका Path of Spiritual Practice and Ritualistic Solutions Spiritual Guide अक्सर साधक दीक्षा प्राप्त करने के बाद पूरे उत्साह से मंत्र जप प्रारंभ करता है, लेकिन कुछ समय बाद उसका उत्साह कम होने लगता है। कारण होता हैसफलता का न मिलना। जब साधना फलित नहीं होती, तो मन में संशय उत्पन्न होता है। आचार्य प्रताप नारायण जी का संकल्प इसी संशय को समाप्त कर साधक को उसकी मंजिल तक पहुँचाना है। 1. साधना में 'ऊर्जा अवरोध' (Energy Blocks) क्या हैं? जैसे एक बिजली के तार में कार्बन जम जाने से बल्ब नहीं जलता, वैसे ही साधक के सूक्ष्म शरीर में जमे 'कर्म-संस्कार' मंत्र की शक्ति को प्रकट नहीं होने देते। प्रमुख बाधाएं और उदाहरण: प्रारब्ध कर्म (Karmic Debt): पिछले जन्मों के संचित पाप कर्म एक दीवार की तरह खड़े हो जाते हैं। उदाहरण: आप कुआँ खोद रहे हैं, लेकिन नीचे कठोर चट्टान आ गई है। अब साधारण फावड़े...
#श्रीवीरभद्रमालामहामन्त्रः॥ श्रीअघोर वीरभद्र प्रलयकालहुङ्कार ~वीरभद्रमालामहामन्त्रः~। ॐ विं ॐ नमो भगवते श्रीअघोरवीरभद्राय त्रिनेत्रमुकुटाय चन्द्रकलाधराय जटाजूटमणिकुण्डल-भूषणाय महाभयङ्कर- स्वरूपाय महाप्रलयकालस्वरूपाय युगयुगान्तकाल प्रचण्ड- ध्वंसकाय खट्वाङ्ग कपाल पाश त्रिशूल डमरुक करवालफलखड्ग धनुर्हस्तायानन्तकर्ण- कुण्डलाय वासुकिकर्णाभरणाय तक्षकहाराय कार्कोटक-यज्ञोपवीताय शङ्खपालघटिकसूत्राय पद्मपादपुरिकटकाय महापद्मवन्दित- पादयुगलाय सर्वगुणडम्बरविनोदानाय आचारप्रतिपालनायाना चारसंहारणाय अद्भुतशक्तिप्रदाय मौक्तिकमुक्ताभरणाय दक्षमखविध्वंशनाय सोमसूर्याग्नि- लोचनाय! ॐ श्रीं अघोरप्रलयकालहुङ्कार अघोर वीरभद्र ब्रह्मगृहं बन्धय बन्धय विष्णुगृहं बन्धय बन्धय रुद्रगृहं बन्धय बन्धय केतुगृहं बन्ध...
Mahamritunjay Sadhana ...
ii राहु स्तोत्रम् Ii विनियोग:ॐ अस्य श्रीराहुस्तोत्रस्य वामदेव ऋषिः गायत्री छन्दः राहुर्देवता राहुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ॥राहुर्दानव मन्त्री च सिंहिका चित्तनन्दनः।अर्धकायः सदाक्रोधी चन्द्रादित्यविमर्दनः ॥१॥रौद्रो रुद्रप्रियो दैत्यः स्वर्भानुर्भानुमीतिदः।ग्रहराजः सुधापायी राकातिथ्यभिलाषुकः ॥२॥कालदृष्टिः कालरुपः श्रीकष्ठह्रदयाश्रयः।विधुंतुदः सैंहिकेयो घोररुपो महाबलः ॥ ३॥ग्रहपीडाकरो द्रंष्टी रक्तनेत्रो महोदरः ।पञ्चविंशति नामानि स्मृत्वा राहुं सदा नरः ॥४॥फलश्रुति:यः पठेन्महती पीडा तस्य नश्यति केवलम् ।विरोग्यं पुत्रमतुलां श्रियं धान्यं पशूंस्तथा ॥५॥ददाति राहुस्तस्मै यः पठते स्तोत्रमुत्तमम्।सततं पठते यस्तु जीवेद्वर्षशतं नरः ॥ ६॥ ii इति श्रीस्कन्दपुराणे राहुस्तोत्रं संपूर्णम् Ii ***********...
2 सर्व सिद्धि माला, 1 यन्त्र :- 1500 +800 =2300 प्रति चरण अनंग रति साधना दीक्षा 3500 , सामग्री 2100 =5600 7X 5000 =35000 Rs प्रति चरण शुक्र साधना दीक्षा 3500 , सामग्री 1500 =5000 7X 5000 =35000 Rs Anang Rati Sadhna Anang Rati Sadhna is a spiritual practice associated with certain forms of meditation and devotion, particularly in the context of Hinduism and practices like Kundalini yoga or other esoteric traditions. It often involves the worship or meditation on divine feminine energy, connecting with love, desire, and the sacred aspects of relationships. Initiation (Diksha) typically refers to a formal ceremony or practice where a spiritual teacher or guru imparts spiritual knowledge, guidance, or energy to a disciple. In the context of Anang Rati Sadhna: Purpose: Initiation aims to awaken spiritual energies and deepen the practitioner’s connection with the divine, aiding in personal and spiritual development. Process: It often includes rituals, mantras, meditation techniques, and sometimes the transmission of specific esoteric knowledge from the teacher. Practices: Engaging in practices such as meditation, chanting, or visualization focused on the divine aspects of love and connection, often with an emphasis on cultivating a deeper understanding of oneself and relationships. Significance: The initiation marks a new phase in the practitioner’s spiritual journey, often leading to transformative experiences and deeper insights. If you’re looking for specific de...
Blog post Spiritual Cleansing Techniques to Refresh Your Energy and Soul Spiritual cleansing is an uplifting practice that helps clear negative energy from your surroundings and your spirit. Think of it as a reset button for your mind, body, and energy. Whether you’ve been feeling stuck, drained, or weighed down, spiritual cleansing techniques can bring you a sense of peace, clarity, and balance. This blog will guide you through some of the most effective methods, including saltwater baths, smudging with sage, and using holy water. Why Spiritual Cleansing? Life can often leave us burdened with stress and negativity, whether it’s from work pressures, toxic relationships, or even just daily challenges. Spiritual cleansing works to remove these invisible barriers to our well-being, allowing us to reconnect with our own positive energy. Many people who practice these techniques report feeling more focused, calm, and energized. Here are a few trusted cleansing methods to help you refresh your energy and feel lighter. 1. Saltwater Baths The calming power of water paired with the neutralizing effects of salt make saltwater baths one of the most popular spiritual cleansing techniques. Salt is known to absorb and dissolve negative energy, leaving you feeling renewed. Benefits of Saltwater Baths: Clears stagnant or negative energy. Relaxes the mind and body. Promotes emotional balance. Simple Steps for a Saltwater Bath: Prepare a warm bath and dissolve a handful of sea salt or Himalayan salt into the water. You can also add essential oils like lavender for extra relaxation. Before stepping in, set an intention. You might say something like, “I release all negativity and invite peace and positivity into my life.” While soaking, visualize the negative energy leaving...
किसी भी प्रकार की गुटिका या यंत्र की आवश्यकता से मुक्त, साधना सामग्री के बंधन से मुक्त स्वयं सदगुरुदेव प्रदत्त प्रयोग ?????????? ब्रह्मकृत सरस्वती स्तोत्र प्रयोग ?????????? प्रिय बंधुओं, जीवन में लक्ष्मी जितनी अधिक महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण सरस्वती भी है। दूसरे शब्दों में जीवन में धन जितना अधिक महत्वपूर्ण है, उतने ही महत्वपूर्ण बुद्धि और विवेक भी हैं। राजाओं के दरबार में धनवान की पूजा नहीं होती थी, परंतु विद्वान की तो वहां भी पूजा होती थी। बुद्धि और विवेक के अभाव में व्यक्ति प्राप्त धन को भी गंवा देता है। धन तो जेबकतरे, स्मगलर, लुटेरे और डाकू भी प्राप्त कर लेते हैं, परंतु उनका कोई सम्मान नहीं होता। सम्मान के लिए भगवती सरस्वती की कृपा प्राप्त करना महत्वपूर्ण और आवश्यक है। संस्कृत का एक प्रसिद्ध श्लोक है ::...
pitra dosh nivaran sadhna and tarapan pitra dosh nivaran sadhna, tarapan “सर्वात्मकं सर्वज्ञं सर्वशक्तिस...
Bhairav sadhana: Bhairav is the great protector deity in tantra. His temples are found on every nook and corner of India and Nepal. Bhairav is classified into various forms depending upon his task and role like sthan Bhairav, kshetrapal bhairav, batuk bhairav, shamshan Bhairav, maha Bhairav, bramha bhairav etc. Without praying Bhairav if you start any anushthana then Bhairav takes away it's fruit. Bhairav protects his devotees and seekers in all conditions irrespective of their deeds. Bhairav is one of the fastest responding deities in kaliyug. One who prays to Bhairav always, gets victory in all fields. Bhairav protects him at costs. He gets wealth, health, women, children, fame and authority. A seeker who dedicatedly does sadhana of Bhairav gets numerous supernatural powers. One who prays Bhairav and offers him wine, chilam with bhaang/ganja/ gorakhmundi, fish and goat sacrifice with proper rituals gets instant and greatest grace of him. But one has to be veer in nature to do this as lord easily gets attracted to him and starts giving experiences and manifests. People with pashu nature can do satvik dhyana puja and Chanting/recital for lord's grace. Even then he gets pleased and offer assistance. One such easy prayog is being given today to please kshetrapal bhairav. This sadhana can be started f...
देव प्रबोधिनी एकादशी आज dev prabodhinee ekaadashee katha, dev prabodhinee ekaadashee vrat, kaartikee ekaadashee ********* हिंदू धर्म में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को अलग अलग नामों से जाना जाता है। इसे हरि प्रबोधिनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी, देवउठनी एकादशी या देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह किया जाता है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ साथ तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व होता है देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन देवी वृंदा को मिले वरदान की वजह से भगवान विष्णु ने शालिग्राम स्वरूप में तुलसी से विवाह किया था। इसी कारण से देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह उत्सव भी मनाया जाता है। इसके अलावा देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन चतुर्मास्य से लगे ...
इस तरीके से तुरंत सिद्ध हो जाते हैं मंत्र, जानिए रहस्य... कोई मंत्र कब होता है सिद्ध, एक लाख बार जपने पर या कि 108 बार जपने पर ही सिद्ध हो जाता है? सिद्ध हो जाता है तब क्या होता है? यह तो सवाल आपके मन में जरूर होंगे तो चलो इस बारे में बताते हैं। मुख्यत: 3 प्रकार के मंत्र होते हैं- 1.वैदिक 2.तांत्रिक और 3.शाबर मंत्र।..पहले तो आपको यह तय करना होगा कि आप किस तरह के मंत्र को जपने का संकल्प ले रहे हैं। साबर मंत्र बहुत जल्द सिद्ध होते हैं, तांत्रिक मंत्र में थोड़ा समय लगता है और वैदिक मंत्र थोड़ी देर से सिद्ध होते हैं। लेकिन जब वैदिक मंत्र सिद्ध हो जाते हैं और उनका असर कभी समाप्त नहीं होता है। मंत्र जप तीन प्रकार हैं:- 1.वाचिक जप, 2. मानस जप और 3. उपाशु जप। वाचिक जप में ऊंचे स्वर में स्पष्ट शब्दों में मंत्र का उच्चारण किया जाता है। मानस जप का अर्थ मन ही मन जप करना। उपांशु जप का अर्थ जिसमें जप करने वाले की जीभ या ...
*श्री गुरुचरण कमलेभ्यो नमः* गुरु सिद्धि दिवस शुक्रवार दिनांक 27-10-2026 सभी शास्त्रों में गुरु सिद्धि दिवस का विशेष महत्व है, और प्रत्येक साधक महाकाल संहिता में वर्णित गुरु साधना सिद्धि को सम्पन्न करता है, जिससे उसके प्राण जाग्रत होने लगते है, और इसके बाद वर्ष में कभी भी जब उसे मिले तो वह सशरीर गुरु के सामने उपस्थित हो कर चैतन्य सिद्धि दीक्षा प्राप्त करने की इच्छा प्रगट करे, और तब गुरु उसे यह दुर्लभ दीक्षा प्रदान करते हैं। ऐसी दीक्षा सामूहिक रूप से नहीं दी जा सकती चाहे शिष्य कितने ही वर्ष गुरु के साथ रहा हो, या कितना ही गुरु का प्रीय हो, परन्तु उसके अनुरोध पर ही गुरु यह चैतन्य दीक्षा प्रदान करते हैं। चैतन्य साधना (सिद्धि महाकाल संहिताबद्ध) मैंने जैसा ऊपर बताया कि साधना जीवन की महत्वपूर्ण दिव्य साधना है, इसके लिए गुरु सिद्धि दिवस...
Yes, there are several codes for back pain mentioned in the document. Here are the codes for different types of back pain: 71 81 533 for back pain in general 71 91 334 for lumbago (pain in the muscles and joints of the lower back) 87 47 838 for problems with the sciatic nerve 78 78 833 for prolapsed intervertebral disc 89 87 438 for a bulging or herniated intervertebral disc These codes can be used for healing back pain according to the document. ...
श्रीरामदुर्गस्तोत्रम् ॐ अस्य श्रीरामदुर्गस्तोत्रमन्त्रस्य कौशिक ऋषिरनुष्टुप्छन्दःश्रीरामो देवता रां बीजं नमः शक्ति रामाय कीलकम् श्रीराम प्रसादसिद्धि द्वारा मम सर्वतो रक्षापूर्वक नाना प्रयोग सिध्यर्थे श्रीराम दुर्ग मन्त्रस्य पाठे विनियोगः। ॐ ऐं क्लीं ह्रीं रीं चों ह्रीं रीं चों ह्रीं श्रीं आं क्रौं ॐ नमोभगवते रामाय मम सर्वाभीष्टं साधय साधय फट् स्वाहा॥ ...
*दीपावली पूजन विधि एवं प्रयुक्त मंत्र पवित्रीकरण बायें हाथ में जल लेकर उसे दाये हाथ से ढक कर मंत्र पढे एवं मंत्र पढ़ने के बाद इस जल को दाहिने हाथ से अपने सम्पूर्ण शरीर पर छिड़क ले। ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः ॥ आचमन मन , वाणी एवं हृदय की शुद्धि के लिए आचमनी द्वारा जल लेकर तीन बार मंत्र के उच्चारण के साथ पिए । (ॐ केशवाय नमः , ॐ नारायणाय नमः , ॐ माधवाय नमः ) ॐ हृषीकेशाय नमः ( इस मंत्र को बोलकर हाथ धो ले ) शिखा बंधन शिखा पर दाहिना हाथ रखकर दैवी शक्ति की स्थापना करें। चिद्रुपिणि महामाये दिव्य तेजः समन्विते, तिष्ठ देवि शिखामध्ये तेजो वृद्धिं कुरुष्व मे ॥ मौली बांधने का मंत्र येन बद...
वीरभद्र, भगवान शिव के परम आज्ञाकारी हैं. उनका रूप भयंकर है, देखने में वे प्रलयाग्नि के समान, हजार भुजाओं से युक्त और मेघ के समान श्यामवर्ण हैं. सूर्य के तीन जलते हुए बड़े-बड़े नेत्र एवं विकराल दाढ़ें हैं. शिव ने उन्हें अपनी जटा से प्रकट किया था. इसलिए उनकी जटाएं साक्षात ज्वालामुखी के लावा के समान हैं. गले में नरमुंड माला वाले वीरभद्र सभी अस्त्र-शस्त्र धारण करते हैं. उनका रूप भले ही भयंकर है पर शिवस्वरूप होने के कारण वे परम कल्याणकारी हैं. शिवजी की तरह शीघ्र प्रसन्न होने वाले है. ...
#गुप्तनवरात्रिअषाढ़शुक्लप्रतिपदा● इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्र 22 जून 2020 से लेकर 29 जून 2020 तक रहेगी। गुप्त नवरात्रि में साधक गुप्त साधनाएं करने शमशान व गुप्त स्थान पर जाते हैं। नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों में वृद्धि करने के लिये अनेक प्रकार के उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन योग साधना आदि करते हैं । सभी नवरात्रों में माता के सभी 51पीठों पर भक्त विशेष रुप से माता के दर्शनों के लिये एकत्रित होते हैं। माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं, क्योंकि इसमें गुप्त रूप से शिव व शक्ति की उपासना की जाती है जबकि चैत्र व शारदीय नवरात्रि में सार्वजिनक रूप में माता की भक्ति करने का विधान है । आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में जहां वामाचार उपासना की जाती है । वहीं माघ मास की गुप्त नवरात्रि में वामाचार पद्धति को अधिक मान्यता नहीं दी गई है । ग्रंथों के अनुसार माघ म...
#गुप्तनवरात्रिअषाढ़शुक्लप्रतिपदा● इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्र 22 जून 2020 से लेकर 29 जून 2020 तक रहेगी। गुप्त नवरात्रि में साधक गुप्त साधनाएं करने शमशान व गुप्त स्थान पर जाते हैं। नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों में वृद्धि करने के लिये अनेक प्रकार के उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन योग साधना आदि करते हैं । सभी नवरात्रों में माता के सभी 51पीठों पर भक्त विशेष रुप से माता के दर्शनों के लिये एकत्रित होते हैं। माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं, क्योंकि इसमें गुप्त रूप से शिव व शक्ति की उपासना की जाती है जबकि चैत्र व शारदीय नवरात्रि में सार्वजिनक रूप में माता की भक्ति करने का विधान है । आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में जहां वामाचार उपासना की जाती है । वहीं माघ मास की गुप्त नवरात्रि में वामाचार पद्धति को अधिक मान्यता नहीं दी गई है । ग्रंथों के अनुसार माघ मास के श...
महामारी नाशक मंत्र का जप जरूर करें। नारायण मंत्र साधना विज्ञान में हनुमानजी का महामारी नाशक मंत्र दिया है। इस पोस्ट में महामारी नाशक मंत्र दिया है। शेयर करना है जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग लाभ ले सके हनुमानजी की जयंती आज ही है ...
शनि जयंती एक महत्त्वपूर्ण दिवस है शनि साधना के लिए, और आज के दिन हम शनि साधना का लघु प्रयोग दिन में किसी भी समय सम्पन्न कर सकते हैं। इसके लिए स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध वस्त्र धारण करें तत्पश्चात *१० मिनट तक गुरु मंत्र जप करें* ।। ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरु भ्यो नमः।। ।। om Param Tatvaay Naaraayannaay Gurubhyo Namah।। *फिर निम्न शनि मंत्र का १० मिनट तक जाप करें* ।। ॐ शं शनौश्चराय सशक्तिकाय सूर्यात्मजाय नमः ।। ।। Om sham shanaishchray sshaktikay suryatmjay namah ।। *इसके बाद १० मिनट फिर गुरु मंत्र जप करें*। ।। ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरु भ्यो नमः।। ।। om Param Tatvaay Naaraayannaay Gurubhyo Namah।। *साधना के पश्चात् शनि की प्रार्थना इन दस नामों से करनी चाहिए*- कोणस्य: पिंगलो वभ्रुः कृष्णो रौद्रान्तको यमः सौरिः शनिश्चरो ...
?मौनी अमावस्या पर शनि का हो रहा है राशि परिवर्तन: इस दिन शनि देव अपनी राशि बदलने जा रहे हैं। शनि के राशि बदलते ही मकर, धनु के साथ कुंभ वालों पर भी शनि की साढ़े साती शुरू हो जायेगी। शनि ढैय्या की बात करें तो मिथुन और तुला वालों पर इसका प्रभाव रहेगा। ?ग्रंथों में ऐसा उल्लेख है कि इसी दिन से द्वापर युग का शुभारंभ हुआ था. माघ मास के ठीक मध्य में अमावस्या के दिन का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान से विशेष पुण्यलाभ प्राप्त होता है. कहा जाता है कि इस दिन गंगा का जल अमृत बन जाता है. इसलिये माघ स्नान के लिये माघी अमावस्या यानि मौनी अमावस्या को बहुत ही खास माना गया है. इस दिन व्रती को मौन धारण करते हुए दिन भर मुनियों सा आचरण करना पड़ता है, इसी कारण यह अमावस्या मौनी अमावस्या कहलाती है. इस साल मौनी अमावस्या का यह त्यौहार 24 जनवरी को है. मौनी अमावस्या का शुभ मुहूर्त (Mauni Amavasya Kab Hai) ?अमावस्या ...
Mayuresh Stotram Mayuresh Stotram is in Sanskrit. This Stotra is created by God Brahma. It is a praise of God Ganesh. Mayuresh is also a name of God Ganesh. This stotra if recited gives Bhukti and Mukti also. It destroys all the troubles/difficulties. It gives everything wished by the reciter devotee. It removes mental as well as body ailments/diseases. It is a very pious and powerful God Mayuresh Stotra. मयूरेश स्तोत्रं पुराणपुरुषं देवं नानाक्रीडाकरं मुदा । मायाविनं दुर्विभाव्यं मयूरेशं नमामा्यहम् ॥ १ ॥ परात्परं चिदानन्दं निर्विकारं हृदि स्थितम् । गुणातीतं गुनमयं मयूरेशं नमामा्यहम् ॥ २ ॥ सृजन्तं पालयन्तं च संहरन्तं निजेच्छया । सर्वविघ्नहरं देवं मयूरेशं नमामा्यहम् ॥ ३ ॥ नानादैत्यनिहन्तारं नानारुपाणि बिभ्रतम् । नानायुधधरं भक्त्या मयूरेशं नमामा्यहम् ॥ ४ ॥ इन्द्रादिदेवतावृन्दैरभिष्टुतमहर्निशम् । सदसद्व्यक्तमव्यक्तं मय...
आत्म चेतना साधना --------------------------------------------------------- कोई भी व्यक्ति के जीवन किस प्रकार से आगे बीतेगा उसका एक अति महत्वपूर्ण आधार उसका व्यक्तित्व है. हमारे जन्म से ले कर हमारी मृत्यु तक हमारे सारे क्रिया कलापों का एक बड़ा आधार हमारा ही व्यक्तित्व होता है, वस्तुतः व्यक्तित्व शब्द भले ही छोटा हो लेकिन इसका वृहद वृत्तांत हो सकता है जो की हर एक व्यक्ति के जीवन में महद रूप से सभी कार्यमें असरकरता है. हमारे अंदर की भावनात्मक एवं व्यवहारात्मक प्रक्रिया को ही हमारा व्यक्तित्व कहते है. निःसंदेह एक उच्चतम व्यक्तित्व का धनि व्यक्ति जीवन में ज्यादा से ज्यादा सफलता की प्राप्ति कर सकता है, वहीँ दूसरी तरफ नकारात्मक व्यक्तित्व अर्थात अपने मानस में हिन् भावनाओं को ले कर चलने वाले व्यक्तित्व पूर्ण व्यक्ति अपने जीवन में सफलता का उतना स्वाद नहीं ले पाते है. ...
॥ॐ॥ Mantra Tantra Aur Jyotish ॥ॐ॥ 1. आर्थिक समस्या के छुटकारे के लिए : यदि आप हमेशा आर्थिक समस्या से परेशान हैं तो इसके लिए आप 21 शुक्रवार 9 वर्ष से कम आयु की 5 कन्यायों को खीर व मिश्री का प्रसाद बांटें ! 2. घर और कार्यस्थल में धन वर्षा के लिए : इसके लिए आप अपने घर, दुकान या शोरूम में एक अलंकारिक फव्वारा रखें ! या एक मछलीघर जिसमें 8 सुनहरी व एक काली मछ्ली हो रखें ! इसको उत्तर या उत्तरपूर्व की ओर रखें ! यदि कोई मछ्ली मर जाय तो उसको निकाल कर नई मछ्ली लाकर उसमें डाल दें ! 3. परेशानी से मुक्ति के लिए : आज कल हर आदमी किसी न किसी कारण से परेशान है ! कारण कोई भी हो आप एक तांबे के पा...
अग्निवास का मुहूर्त जानना – होम,यज्ञ या हवन आदि में कोई भी अनुष्ठान के पश्चात हवन करने का शास्त्रीय विधान है और हवन करने हेतु भी कुछ नियम बताये गए हैं जिसका अनुसरण करना अति – आवश्यक है , अन्यथा अनुष्ठान का दुष्परिणाम भी आपको झेलना पड़ सकता है । इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात है हवन के दिन ‘अग्नि के वास ‘ का पता करना ताकि हवन का शुभ फल आपको प्राप्त हो सके । 1- जिस दिन आपको होम करना हो ,&n...
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हवन की सामग्री और मंत्रों में बहुत शक्ति है। हवन की अग्नि में दी गई आहुति, सीधे संबंधित देवता तक पहुंचती है। श्रीमद्भगवद्गीता के चौथे अध्याय में भी, श्री श्रीकृष्ण ने यज्ञ को परब्रह्म स्वरूप बताया है। हवन की पहली आहुति भी, सबसे पहले गणपति को ही दी जाती है। गणेश ही मूलाधार चक्र में विराजमान हैं। सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति मूलाधार चक्र को जागृत करके ही किया जा सकता है। वैसे तो मूलाधार चक्र, मंत्र और ध्यान से ही जागृत होता है, लेकिन अगर आप गणपति का विभिन्न वस्तुओं और मंत्रों से हवन करें, तो आपकी भौतिक इच्छा पूरी हो सकती है। गणपति अथर्वशीर्ष में हवन की महिमा गणपति अथर्वशीर्ष के अंतिम श्लोकों में, हवन से गणपति को प्रसन्न करने को कहा गया है। यो दूर्वां कुरैर्यजति स वैश्रवणोपमो भवति।। यो लाजैर्यजति स यशोवान भवति।। स: मेधावान भव...
आहुति यह शब्द ही अपने आप मे दिव्यता का परिचायक हैं ,और क्यों न हो ...सारी भारतीय सभ्यता का परिचायक जो यह हैं, १०८ दिव्य विज्ञानों मे से यह एक हैं जो हमारी लिए अनेकानेक तरीकों से गुण वर्धक हैं ....... ज्ञान वर्धक हैं......... पुष्टि वर्धक हैं ..यह इसलिए की यज्ञ या होम या हवन मे दी गयी आहुति के माध्यम से देव वर्ग पुष्ट होते हैं वातावरण शुद्ध होता और आध्यात्मिक स्तर मे अत्यंत उच्चस्तरीय परावर्तन/परिवर्तन लाये जा सकते हैं , देव ता शब्द का अर्थ ही हैं जो दे ता हो और जब देव वर्ग सबल प्रबल होगा &nb...
दैनिक यज्ञ ||अथ अग्निहोत्रमंत्र:|| जल से आचमन करने के मंत्र इससे पहला ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा ।१। इससे दूसरा ॐ अमृतापिधानमसि स्वाहा ।२। इससे तीसरा ॐ सत्यं यश: श्रीर्मयि श्री: श्रयतां स्वाहा ।३। मंत्रार्थ – हे सर्वरक्षक अमर परमेश्वर! यह सुखप्रद जल प्राणियों का आश्रयभूत है, यह हमारा कथन शुभ हो। यह मैं सत्यनिष्ठापूर्वक मानकर कहता हूँ और सुष्ठूक्रिया आचमन के सदृश आपको अपने अंत:करण में ग्रहण करता हूँ।।1।। हे सर्वरक्षक अविनाशिस्वरूप, अजर परमेश्वर! आप हमारे आच्छादक वस्त्र के समान अर्थात सदा-सर्वदा सब और से रक्षक हों, यह सत्यवचन मैं सत्यनिष्ठापूर्वक मानकर कहता हूँ और सुष्ठूक्रिया आचमन के सदृश आपको अपने अंत:करण में ग...
नरसिंह जयंती 2016 नरसिंह अष्टोत्तरशतनाम एवम् अष्टकम Narsingh jayanti 108 names & ashtakam *_॥श्रीनृसिंहाष्टोत्तरशतनामावली ॥_* ॥ श्रीः ॥ ॐ श्रीनृसिंहाय नमः । ॐ महासिंहाय नमः । ॐ दिव्यसिंहाय नमः । ॐ महाबलाय नमः । ॐ उग्रसिंहाय नमः । ॐ महादेवाय नमः । ॐ उपेन्द्राय नमः । ॐ अग्निलोचनाय नमः । ॐ रौद्राय नमः । ॐ शौरये नमः । १०। ॐ महावीराय नमः । ॐ सुविक्रमपराक्रमाय नमः । ॐ हरिकोलाहलाय नमः । ॐ चक्रिणे नमः । ॐ विजयाय नमः । ॐ अजयाय नमः । ॐ अव्ययाय नमः । ॐ दैत्यान्तकाय नमः । ॐ परब्रह्मणे नमः । ॐ अघोराय नमः । २०। ॐ ...
कैसा भी बवासीर हो---- * 15 ग्राम काले तिल पिसकर, 10-15 ग्राम मख्खन के साथ मिलाकर सुबह सुबह खा लो । कैसा भी बवासीर हो मिट जाता है । * जिनको बवासीर है, शौच वाली जगह से जिनको खून आता है, वे २ नींबू का रस निकालकर, छान लें और एनिमा के साधन से शौच वाली जगह से एनिमा द्वारा नींबू का रस लें और १० मिनट सिकोड़ कर सोये रहें । इतने में वो नींबू गर्मी खींच लेगा और शौच होगा । हफ्ते में ३-४ बार करें.......कैसा भी बवासीर हो......... नीम के पके हुए फल को छाया में सुखाकर इसके फल का चूर्ण बना लें। 5 ग्राम चूर्ण सुबह जल के साथ खाने से बवासीर रोग ठीक होता है। लगभग 50 मिलीलीटर नीम का तेल, कच्ची फिटकरी 3 ग्राम, चौकिया सुहागा 3 ग्राम को बारीक पीस लें। शौच के बाद इस लेप को उंगली से गुदा के भीतर तक लगाने से कुछ ही दिनों में बवासीर के मस्से मिट जाते हैं। नीम के बीज, बकायन की सूखी गिरी, छोटी हरड़, शुद्ध रसौत 50-50 ग्राम, घी में भूनी हींग 30 ग्राम ...
प्रातः स्मरणीय भगवान वेदव्यास, आदिशंकराचार्य, परम पूज्य गुरुदेव, श्रद्धेय स्वामी सनातन श्री, देवरहा बाबा आदि समस्त गुरुसत्ताओं को सादर नमन! #सादर_प्रणाम_मंगलमय_सुप्रभात_आदरणीय_सनातनी_भाई_बहनों_एवं_स्नेही_स्वजनों_ ॐ सिद्धि बुद्धि सहिताय श्रीमन्महागणाधिपतये नमः ! #आपका_दिन_मंगलमय_हो_कल्याणकारी_हो_ ॐ भूर्भुव स्वः तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि, धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ सूर्याय नमः, ॐ भाष्कराय नमः, ॐ आदित्याय नमः ! ॐ विश्वानि देव सवितुर दुर्रितानि परासुव, यद्भद्रम तन्न आसुव ! ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनये नमः ! ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ! ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ह्रीं श्रीं महागायत्रियै नमः ! ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ह्रीं श्रीं महासरस्व्त्यै नमः ! ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ह्रीं श्रीं महादुर्गायै नमः ! ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ह्रीं ...
शिवमानसपूजा आदि गुरू शंकराचार्य द्वारा रचित शिव मानस पूजा शिव की एक अनुठी स्तुति है। यह स्तुति शिव भक्ति मार्ग के अतयंत सरल पर साथ ही एक अतयन्त गुढ रहस्य को समझाता है। शिव सिर्फ भक्ति द्वारा प्रापत्य हैं, आडम्बर ह्की कोई आवश्यकता नहीं है। इस स्तुति में हम प्रभू को भक्ति द्वारा मानसिक रूप से तैयार की हुई वस्तुएं समर्पित करते हैं। हम उन्हे रत्न जडित सिहांसन पर आसिन करते हैं, वस्त्र, भोज तथा भक्ति अर्पण करते हैं; पर ये सभी हम भोतिक स्वरूप में अपितु मानसिक रूप में करते हैं। इस प्रकार हम स्वयं को शिव को शिव को समर्पित कर शिव स्वरूप में विलिन हो जाते हैं। रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः स्नानं च दिव्याम्बरं नानारत्नविभूषितं मृगमदामोदाङ्कितं चन्दनम् जातीचम्पकबिल्वपत्ररचितं पुष्पं च धूपं तथा दीपं देव दयानिधे ...
होली विशेष साधना-2 -------------------------------------- इस साधना से किसी प्रकार की विपत्ती और बाधा जीवन मे व्याप्त नही होती है और होली के पर्व पर यह साधना सभी को करना ही चाहिये.मै इस बार साधना के ज्यादा लाभ नही लिखुगा सिर्फ इतना जानना जरुरी है इस साधना से पती-पत्नी मे मतभेद हो तो समाप्त होते है, व्यापार मे कभी हानी नही होगी, समय पर कार्य संपन्न होगे, भाग्य बाधा कम होती है, बिमारी मे राहत मिलता है. साधना विधान:- दक्षिण दिशा मे मुख करके बैठे,कोई भी लाल रंग की माला से 11 माला जाप करना है,आसन वस्त्र लाल हो तो ठिक है अगर आपके पास ना हो तो समय ना गवाये जो भी हो उसिसे काम चलाये.जाप के बाद माला को दूसरे दिन जमीन मे गड्डा खोदकर गाड दे. जाप से पूर्व दाहिने हाथ मे जल लेकर संकल्प ले "म...
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