Gurudev Dr. Narayan Dutt Shrimali

Maha Viparita Pratyangira Mantra Pratyangira Ashtottara Shatnamavali

Maha Viparita Pratyangira Mantra Pratyangira Ashtottara Shatnamavali

#महाविपरीत_प्रत्यंगिरा मंत्र व स्तोत्र●

महा विपरीत प्रत्यंगिरा मंत्र प्रत्यंगिरा अष्टोत्तर शतनामावली

शत्रु की की प्रबलतम क्रियाओं को निष्फल करने के साथ ही ग्रह,
नक्षत्र, देवता, यक्ष, गंधर्व एवं राक्षसी वृत्ति से भी मुकाबले के लिए विपरीत प्रत्यंगिरा और महाविपरीत प्रत्यंगिरा अत्यंत सफल और कारगर होता है।
इसका प्रयोग निष्फल नहीं जाता। इसकी साधना करने वालों को दुनिया में किसी का डर नहीं रह जाता है।
बेहतर होगा कि योग्य गुरु की देखरेख में ही इस साधना को पूरा किया जाए। अन्यथा कई बार अपना साधक का आसन मजबूत न होने से विभिन्न तरह की समस्याएं आने लगती हैं।
ध्यानं----
टंकं कपालं डमरूं त्रिशूलं, संबिभ्रती चंद्रकलावतंसा।
पिंगोर्ध्वकेशाासित भीमदंष्ट्रा, भूयाद् विभूत्यै मम भद्रकाली।।
 

महा विपरीत प्रत्यंगिरा मंत्र प्रत्यंगिरा अष्टोत्तर शतनामावली

 
🟥प्रत्यंगिरा देवी भद्रकाली का ही उग्र एवं घातक स्वरूप है। जिनकी विधिवत उपासना करने से मनुष्य सर्वदुःखों से मुक्ति प्राप्त कर सौभाग्य प्राप्त करता है। जिस स्थान में इनकी विधिपूर्वक पूजार्चना की जाती है, वह स्थान शत्रुओं के भय से सदा मुक्त रहता है।
🟥तंत्रप्रयोग, भूतप्रेत, श्मशान - अस्थि - मज्जा आदि प्रयोगों से स्थान एवं शरीर की सम्पूर्ण सुरक्षा होती है। प्रत्यंगिरा क्रूर एवं उग्र देवी हैं, अतः इनकी साधना सुयोग्य गुरु के सान्निध्य में धैयपूर्वक करनी चाहिये।
🟥रात्रिकाल में शिवमन्दिर, शक्ति मन्दिर अथवा शून्यस्थान में विधिपूर्वक प्रत्यङ्गिराष्टोत्तरशतनामावली का पाठ करने से समस्त दुःख व विपत्तियों से शीघ्र मुक्ति मिलती है।
🌺प्रत्यङ्गिराष्टोत्तरशतनामावली🌺
ॐ प्रत्यङ्गिरायै नमः ।
ॐ ॐकाररूपिण्यै नमः ।
ॐ विश्वरूपायै नमः ।
ॐ विरूपाक्षप्रियायै नमः ।
ॐ जटाजूटकारिण्यै नमः ।
ॐ कपालमालालङ्कृतायै नमः ।
ॐ नागेन्द्रभूषणायै नमः ।
ॐ नागयज्ञोपवीतधारिण्यै नमः ।
ॐ सकलराक्षसनाशिन्यै नमः ।
ॐ श्मशानवासिन्यै नमः ।
ॐ कुञ्चितकेशिन्यै नमः ।
ॐ कपालखट्वाङ्गधारिण्यै नमः ।
ॐ रक्तनेत्रज्वालिन्यै नमः ।
ॐ चतुर्भुजायै नमः ।
ॐ चन्द्रसहोदर्यै नमः ।
ॐ ज्वालाकरालवदनायै नमः ।
ॐ भद्रकाल्यै नमः ।
ॐ हेमवत्यै नमः ।
ॐ नारायणसमाश्रितायै नमः ।
ॐ सिंहमुख्यै नमः ।
ॐ महिषासुरमर्दिन्यै नमः ।
ॐ धूम्रलोचनायै नमः ।
ॐ शङ्करप्राणवल्लभायै नमः ।
ॐ लक्ष्मीवाणीसेवितायै नमः ।
ॐ कृपारूपिण्यै नमः ।
ॐ कृष्णाङ्ग्यै नमः ।
ॐ प्रेतवाहनायै नमः ।
ॐ प्रेतभोगिन्यै नमः ।
ॐ प्रेतभोजिन्यै नमः ।
ॐ शिवानुग्रहवल्लभायै नमः ।
ॐ पञ्चप्रेतासनायै नमः ।
ॐ महाकाल्यै नमः ।
ॐ वनवासिन्यै नमः ।
ॐ अणिमादिगुणाश्रयायै नमः ।
ॐ रक्तप्रियायै नमः ।
ॐ शाकमांसप्रियायै नमः ।
ॐ नरशिरोमालालङ्कृतायै नमः ।
ॐ अट्टहासिन्यै नमः ।
ॐ करालवदनायै नमः ।
ॐ ललज्जिह्वायै नमः ।
ॐ ह्रींकारायै नमः ।
ॐ ह्रींविभूत्यै नमः ।
ॐ शत्रुनाशिन्यै नमः ।
ॐ भूतनाशिन्यै नमः ।
ॐ सर्वदुरितविनाशिन्यै नमः ।
ॐ सकलापन्नाशिन्यै नमः ।
ॐ अष्टभैरवसेवितायै नमः ।
ॐ ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकायै नमः ।
ॐ भुवनेश्वर्यै नमः ।
ॐ डाकिनीपरिसेवितायै नमः ।
ॐ रक्तान्नप्रियायै नमः ।
ॐ मांसनिष्ठायै नमः ।
ॐ मधुपानप्रियोल्लासिन्यै नमः ।
ॐ डमरुकधारिण्यै नमः ।
ॐ भक्तप्रियायै नमः ।
ॐ परमन्त्रविदारिण्यै नमः ।
ॐ परयन्त्रनाशिन्यै नमः ।
ॐ परकृत्यविध्वंसिन्यै नमः ।
ॐ महाप्रज्ञायै नमः ।
ॐ महाबलायै नमः ।
ॐ कुमारकल्पसेवितायै नमः ।
ॐ सिंहवाहनायै नमः ।
ॐ सिंहगर्जिन्यै नमः ।
ॐ पूर्णचन्द्रनिभायै नमः ।
ॐ त्रिनेत्रायै नमः ।
ॐ भण्डासुनिषेवितायै नमः ।
ॐ प्रसन्नरूपधारिण्यै नमः ।
ॐ भुक्तिमुक्तिप्रदायिन्यै नमः ।
ॐ सकलैश्वर्यधारिण्यै नमः ।
ॐ नवग्रहरूपिण्यै नमः ।
ॐ कामधेनुप्रगल्भायै नमः ।
ॐ योगमायायुगन्धरायै नमः ।
ॐ गुह्यविद्यायै नमः ।
ॐ महाविद्यायै नमः ।
ॐ सिद्धिविद्यायै नमः ।
ॐ खड्गमण्डलसुपूजितायै नमः ।
ॐ सालग्रामनिवासिन्यै नमः ।
ॐ योनिरूपिण्यै नमः ।
ॐ नवयोनिचक्रात्मिकायै नमः ।
ॐ श्रीचक्रसुचारिण्यै नमः ।
ॐ राजराजसुपूजितायै नमः ।
ॐ निग्रहानुग्रहायै नमः ।
ॐ सभानुग्रहकारिण्यै नमः ।
ॐ बालेन्दुमौलिसेवितायै नमः ।
ॐ गङ्गाधरालिङ्गितायै नमः ।
ॐ वीररूपायै नमः ।
ॐ वराभयप्रदायै नमः ।
ॐ वासुदेवविशालाक्ष्यै नमः ।
ॐ पर्वतस्तनमण्डलायै नमः ।
ॐ हिमाद्रिनिवासिन्यै नमः । ९०
ॐ दुर्गारूपायै नमः ।
ॐ दुर्गतिहारिण्यै नमः ।
ॐ ईषणात्रयनाशिन्यै नमः ।
ॐ महाभीषणायै नमः ।
ॐ कैवल्यफलप्रदायै नमः ।
ॐ आत्मसंरक्षिण्यै नमः ।
ॐ सकलशत्रुविनाशिन्यै नमः ।
ॐ नागपाशधारिण्यै नमः ।
ॐ सकलविघ्ननाशिन्यै नमः ।
ॐ परमन्त्रतन्त्राकर्षिण्यै नमः ।
ॐ सर्वदुष्टप्रदुष्टशिरच्छेदिन्यै नमः ।
ॐ महामन्त्रयन्त्रतन्त्ररक्षिण्यै नमः ।
ॐ नीलकण्ठिन्यै नमः ।
ॐ घोररूपिण्यै नमः ।
ॐ विजयाम्बायै नमः ।
ॐ धूर्जटिन्यै नमः ।
ॐ महाभैरवप्रियायै नमः ।
ॐ महाभद्रकालिप्रत्यङ्गिरायै नमः ।
इतिश्रीप्रत्यङ्गिराष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णा ॥
 
इस मंत्र से माता का भक्तिपूर्वक ध्यान करें। इसके बाद निम्न मंत्रों से आगे की प्रक्रिया का पालन करें।

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