दिव्य सिद्धिमहामानव तांत्रोक्त गुरु साधना गुरु तत्व प्रत्येक साधक में दिव्यौध, सिद्धौध और मानवौध रूप में स्थित है जिसे साधना द्वारा जाग्रत कर साधक अपने जीवन को सभी श्रेष्ठताओ से युक्त कर सकता है साथ ही भौतिक और आधयात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है और गुरु तत्व की चेतना के फ़ल स्वरूप ही साधक कुण्डलिनी चक्र जाग्रत जैसे दुर्लभ क्रिया को भी पूर्ण रूपेण में आत्मसात कर पाता है—वास्तव में गुरु तत्व से ही साधक जीवन की संरचना हुई, इस तत्व के द्वारा ही सभी श्रेष्ठताओं को आत्मसात किया जा सकता है। गुरु शब्द जितना पावन है उतना ही प्राचीन भी। भावनोपनिषद् में स्पष्ट उल्लेख है- श्री गुरुः सर्वकारणभूता शक्तिः तेन नवरन्ध्र रूपो देहः।। अर्थात् समस्त क्रियाओं के कारणभूत शक्ति श्री गुरुदेव ही हैं और उनके साथ नवरंध्र रूप देह अभिन्न है। तंत्र शास्त्र मे...
The Secrets of Diksha Why is Diksha obligatory for a disciple ? What are the fundamental basics of a Diksha ? What is the significance of the various Dikshas ? Which Diksha should I take ? Please click here for another article containing details of various Dikshas. Another article on Shaktipaat Diksha is listed here. Diksha is a unique and rare process of making the life of a disciple more pure, more enlightened and more successful. Generally a human being remains under the sway of bad karmas of past lives which do not allow him to make the desired level of progress in spite of hard work and sincere efforts. In such cases nothing can work better than Dikshas to remove the baneful effects of past Karmas and propel a Sadhak onwards on the path of success. Just as a cloth has to be washed thoroughly to free it o...
साबर गुरु पूजन पद्धति!! गुरुपूजन की साबर पद्धति का विकास ही इसलिए हुआ था ताकि लोगों को संस्कृत जैसी कठिन भाषा का साधनात्मक क्षेत्र में प्रयोग न करना पड़े। गुरु गोरखनाथ के समय साबर पद्धति का विकास अपने चरम तक हुआ है । कारण भी था, क्योंकि साबर मंत्र बोलचाल की भाषा में ही लिखे गये हैं । भले ही इन शब्दों का तार्किक अर्थ न निकलता हो, लेकिन ये होते बहुत ही प्रभावशाली हैं । गुरुपूजन चाहे जिस भी विधि से किया जाए, सबका प्रभाव एक समान ही होता है । परंतु प्रत्येक साधक या साधिका की अपनी एक मनोभूमि होती है और उसी के अनुसार वह विधि का चयन करता है । इसी क्रम में इस पद्धति को भी सबके समक्ष रखा जा रहा है ताकि इस बात का अहसास किया जा सके कि सदगुरुदेव ने एक ही कार्य को कितने अलग अलग तरीके से करना सिखाया है । ...
अक्षय-धन-प्राप्ति मन्त्र अक्षय-धन-प्राप्ति मन्त्र प्रार्थना हे मां लक्ष्मी, शरण हम तुम्हारी। पूरण करो अब माता कामना हमारी।। धन की अधिष्ठात्री, जीवन-सुख-दात्री। सुनो-सुनो अम्बे सत्-गुरु की पुकार। शम्भु की पुकार, मां कामाक्षा की पुकार।। तुम्हें विष्णु की आन, अब मत करो मान। आशा लगाकर अम देते हैं दीप-दान।। मन्त्र- “ॐ नमः विष्णु-प्रियायै, ॐ नमः कामाक्षायै। ह्रीं ह्रीं ह्रीं क्रीं क्रीं क्रीं श्रीं श्रीं श्रीं फट् स्वाहा।” विधि- ‘दीपावली’ की सन्ध्या को पाँच मिट्टी के दीपकों में गाय का घी डालकर रुई की बत्ती जलाए। ‘लक्ष्मी जी’ को दीप-दान करें और ‘मां कामाक्षा’ का ध्यान कर उक्त प्रार्थना करे। मन्त्र का १०८ बार जप करे। ‘दीपक’ सारी रात जलाए रखे और स्वयं भी जागता रहे। नींद आने लगे, तो मन्त्र का जप करे। प्रातःकाल दीपों के ...
सर्वार्थ साधक मंत्र–– गुरु सठ गुरु सठ गुरु है वीर गुरु साहब सुमरौं बड़ी भांत सिंगी टोरौं वन कहौं मन नाउँ करतार सकल गुरुन का हर भजैं घट्टा पकर उठ जाग चेत सम्भार श्री परमहंस || भगवान गणेश ध्यान--- वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥ गणेश मंत्र---- वक्रतुण्डाय हुम|| दिग्बन्धन मंत्र- वज्रनखाय महादन्ताय दश दिशो बन्ध बन्ध हूं फट स्वाहा|| ...
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श्री महा-विपरीत-प्रत्यंगिरा स्तोत्र श्री महा-विपरीत-प्रत्यंगिरा स्तोत्र नमस्कार मन्त्रः- श्रीमहा-विपरीत-प्रत्यंगिरा-काल्यै नमः। ।।पूर्व-पीठिका-महेश्वर उवाच।। श्रृणु देवि, महा-विद्यां, सर्व-सिद्धि-प्रदायिकां। यस्याः विज्ञान-मात्रेण, शत्रु-वर्गाः लयं गताः।। विपरीता महा-काली, सर्व-भूत-भयंकरी। यस्याः प्रसंग-मात्रेण, कम्पते च जगत्-त्रयम्।। न च शान्ति-प्रदः कोऽपि, परमेशो न चैव हि। देवताः प्रलयं यान्ति, किं पुनर्मानवादयः।। पठनाद्धारणाद्देवि, सृष्टि-संहारको भवेत्। अभिचारादिकाः सर्वेया या साध्य-तमाः क्रियाः।। स्मरेणन महा-काल्याः, नाशं जग्मुः सुरेश्वरि, सिद्धि-विद्या महा काली, परत्रेह च मोदते।। सप्त-लक्ष-महा-विद्याः, गोपिताः परमेश्वरि, महा-काली महा-देवी, शंकरस्येष्ट-देवता।। यस्याः प्रसाद-मात्र...
….भैरव के 52 रूपों में किसी भी रूप या पूर्ण 52 भैरव की साधना हर एक तंत्र साधक को करने ही चाहिए। हर एक साधना की एक विशिष्ट दीक्षा पद्दति होती है हर एक साधना की अलग सिद्धि सूत्र जो केवल और मात्र गुरुमुख से ही प्राप्त की जा सकती है। पर क्या अगर किसी को सद्गुरु प्राप्त ना हुवा हो तो वह भैरव उपासना नहीं कर सकता??? कर सकता है पर स्तोत्र के रूप में। आगे जो स्तोत्र दिया जा रहा है यह स्तोत्र साधक की हर इच्छा पूर्ण करने में सक्षम है। चाहे कोही भी हो। हर इच्छा अवश्य पूर्ण होती ही है। और हर एक व्यक्ति को इस स्तोत्र का अनुष्ठान करने ही चाहिए। सबसे पहले साधक श्री भैरव नाथ को या भगवान् महादेव को अपने गुरु रूप में...
तंत्र के दिव्य प्रयोग माँ बगला का ध्यान मंत्र- ॐ सौवर्णा सनसंस्थितां त्रिनयनां पीतांशुकोल्लासिनीं। हेमा भांगरूचिं शशांक मुकुटां सच्चम्प कस्त्रग्युताम् । हस्तैर्मुद्गरपाश वज्र दशनांः संविधूर्ती भूषणै ॥ व्यप्तिगीं बगलामुखी त्रिजगतां संस्तम्भिनीं चिन्तयेत् ।। माँ का ध्यान करने के पश्चात् माँ के अग्रांकित मंत्र की प्रतिदिन ग्यारह मालाओं का जप करना होता है। जप अगर हरिद्रा माला के ऊपर अथवा लघु पंचमुखी रुद्राक्ष माला के ऊपर किया जाये तो शीघ्र प्रभावी होता है। माँ बगला का यह छत्तीस अक्षरों का मंत्र है। इस मंत्र में अद्भुत शक्ति सन्निहित है। मंत्र में ह्रीं बीज मंत्र माँ की असीम शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है, जो समस्त ऐश्वर्य, सुख-सम्पदा, ऋद्धि-सिद्धि को प्रदान ...
मंत्रों में कितनी शक्ति है, शायद आप न जानते हों। इसीलिये आज हम बताएंगे कि कैसे मंत्रों की शक्ति से अपनी मनचाही चीज़ पा सकते हैं। शाबर मंत्र न सिर्फ आसान हैं बल्कि उन्हे सिद्ध करने के लिए भी बहु...
रावण ने कैलाश पर्वत को उठा लिया फिर सीता स्वयंवर में धनुष क्यों नहीं उठा पाया और राम ने कैसे धनुष तोड़ दिया??? अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि जब रावण कैलाश पर्वत उठा सकता है तो शिव का धनुष कैसे नहीं उठा पाया और भगवान राम ने कैसे उस धनुष को उठाकर तोड़ दिया? आओ इस सवाल का जवाब जानते हैं। ऐसा था धनुष! भगवान शिव का धनुष बहुत ही शक्तिशाली और चमत्कारिक था। शिव ने जिस धनुष को बनाया था उसकी टंकार से ही बादल फट जाते थे और पर्वत हिलने लगते थे। ऐसा लगता था मानो भूकंप आ गया हो। यह धनुष बहुत ही शक्तिशाली था। इसी के एक तीर से त्रिपुरासुर की तीनों नगरियों को ध्वस्त कर दिया गया था। इस धनुष का नाम पिनाक था। देवी और देवताओं के काल की समाप्ति के बाद इस धनुष को देवराज इन्द्र को सौंप दिया गया था। देवताओं ने राजा जनक के पूर्वज देवराज को दे दिया। राजा जनक के पूर्वजों में निमि के ज्येष्ठ पुत्र...
शुक्र ग्रह का विवेचन नवग्रह सभी मनुष्यों के जीवन को प्रभावित करते हैं। जीवन में जो भी सुख के क्षण या दुःख के बादल घिरते हैं, वे नवग्रह से प्रभावित होते हैं। जब सूर्य का सकारात्मक प्रभाव होता है तब आप सम्मान प्राप्त करते हैं, मंगल शौर्य देता है, चन्द्रमा मानसिक शान्ति देता है। बुध की उत्तम दशा में कार्य कुशलता आती है। गुरु के उत्तम प्रभाव से ज्ञान आता हैं। शनि शुभ होते हैं तो कार्य शीघ्रता से सम्पन्न होते हैं, पर शुक्र की शुभता प्राप्त हो जाए तो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष सभी कुछ मिल जाता है। ऐसी है, शुक्र की माया जिससे साधक और जन-साधारण सब प्रभावित होते है। चलिए विश्लेषण करते हैं शुक्र के प्रभाव का, इस आलेख में। बहुत संभव है शुक्र साधना द्वारा जीवन को शुभता की ...
Sarv karya siddhi sadhana Shabar mantra / सर्वकार्य साधक शाबरमंत्र कई बार व्यक्ति की समृद्धि अचानक रुष्ट हो जाती है,सारे बने बनाये कार्य बिगड जाते है,जीवन की सारी खुशिया नाराज सी लगती हैं,जिस भी काम में हाथ डालो असफलता ही हाथ लगती है.घर का कोई सदस्य जब चाहे तब घर से भाग जाता है,या हमेशा गुमसुम सा पागलों सा व्यवहार करता हो,तब ये प्रयोग जीवन की विभिन्न समस्याओं का न सिर्फ समाधान करता है अपितु पूरी तरह उन्हें नष्ट ही कर देता और आने वाले पूरे जीवन में भी आपको सपरिवार तंत्र बाधा और स्थान दोष ,दिशा दोष से मुक्त कर अभय ही दे देता हैं. जीवन मे कितनी विकट स्थिति हो ओर कितनी ही परेशानी हो अगर आप इस मन्त्र का हर रोज केवल 10 मिंट जाप करते हो तो कोई भी संकट नहीं रहेगा. घर मे क्लेश हो यो उपरी बढ़ा हो आप खुद को असुरक्षित मह्सुश करते हो। ...
मां सरस्वती को ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है। देवी लक्ष्मी के साथ हमेशा ही सरस्वती की पूजा की जाती है, इसके पीछे का आधार यह है क्योंकि संपूर्ण जगत के प्राणी एक जीवन-चक्र से अवश्य जुड़े हैं किंतु बुद्धि केवल मनुष्य के पास ही है। इसी बुद्धि के आधार पर ज्ञान की प्राप्ति करते हुए इसने तरक्की की है। शास्त्रों के अनुसार जिस भी मनुष्य के पास बुद्धि और ज्ञान है, इनकी मदद से वह अपने जीवन में सबकुछ पा सकता है, धन-संपत्ति और वैभव भी। किंतु जिनके पास बुद्धि और ज्ञान नहीं है, अगर उसके पास संसार के सभी सुख और धन-संपत्ति हों तो वह स्वयं ही उसे गंवा बैठता है। इसलिए वेदों और पुराणों में एक सुखी-संपन्न, खुशहाल जीवन के लिए बुद्धि तथा ज्ञान का होना मनुष्य के विकास हेतु अति आवश्यक माना गया है। प्रथम पूज्य गणपति की कृपा स...
साबर महाकाली साधना १६-१०-२०१४ का दिवस बहोत ही खास दिन है जैसे इस दिवस पर गुरुपुष्यामृत योग है और काली जयंती भी है तो अब इससे अच्छा दिन क्या होगा। ये दिवस तंत्र साधक के लिए आती उत्तम है। यह साधना कलयुग मे कामधेनु की तरह है। ज्यहा इस साधना से सभी इच्छ...
कार्य सिद्धि हेतु सरल साधना ....... कर्म प्रधान इस विश्व मे बिना कर्म किये न देवता .... न दानव ....न ही किसी मनुष्य का जीवन संभव हैं पर यह कर्म किस प्रकार का हो यह व्यक्ति और परिस्थितियों पर कहीं ज्यादा निर्भर करता हैं ..कोई या किसी के लिए मानसिक श्रम की महत्वता हैं तो कोई सिर्फ शारीरिक श्रम कर रहा हैं . और साधना भी एक अति उच्चस्तरीय कर्म हैं जिसमे जितना ज्यादा एकाग्रता और निष्ठा की जरुरत होती हैं उतनी तो शायद किसी ओर कर्म मे नही ..पूर्ण रूप से कर्म शून्य हो पाना तो बस महा योगियो के लिए भी सम्भव हैं हालाकि वे भी इस अवस्था को पाने के बाद लगतार और भी कर्म शील हो जाते क्योंकि जिस तरह से वे कार्यों का संपादन या काम करते हैं वही बहुसख्यक के लिए आदर्श हो ता हैं अतः सभी को कर्म तो करना ही पड़ता हैं . पर यह कर्म या ...
Jai Sadgurudev Nikhileshwaranand ji Maharaj ki ? A very powerful sabar mantra for Lakshmi Sadhna by Gurudev Dr Narayan Dutt Shrimali ji Sabar Dhandayak Lakshmi Sadhna ( साबर धनदा साधना) by Dr Narayan Dutt Shrimali ji ...
#सम्राटाभिषेकदीक्षा|| 24-25 #December #आरोग्यधाम #NewDelhi. C L I C K H E R E:https://www.youtube.com/playlist?list=PLo6ZpeYNN6rLqZgoSQqITbpGm35XMjwdy #Nandkishorshrimali #guru #sadguru #diksha #sadhana #mantra #shaktipat #smratabhishek #pravachan #spiritualpower #enlightenment #divine #deity ...
त्रिशक्ति साधना काली तारा धूमावती साधना !!!! दुश्मनों की संहार और आर्थिक उन्नति के लिए अद्वितीय महाविध्या साधना !!!!! मंत्र : क्रीम क्रीम क्रीम स्त्रीम स्त्रीम धूं धूं धुमवात्ये धूं धूं स्त्रीम स्त्रीम क्रीम क्रीम क्रीम फट स्वाहा !!! kreem kreem kreem streem streem dhoom dhoom dhumavatyei dhoom dhoom streem streem kreem kreem kreem phat swaha.... अगर मंत्र जप तो कला आसन ,काला वस्त्र ,दक्षिण दिसा ,काली हकीक माला ,धूमावती यांत्र ,काली यंत्र ,तारा यंत्र सामने रखे !!! इस मंत्र का मानसिक जप भी कर सकते है !!!चलते फिरते उठ्ते बैठते ..अगर यंत्र उपालाब्ध न हो ,तो मानसिक रूप में हर पल इस मंत्र का जप कर सकते है !!!अगर हवन करे तो बहोत ज्यादा अनुकूल रहेगा !!!पीले सरसों से या शराब से हवन कर सकते है!!!!!जय गुरुदेव तन्त्रमेव जायते ...
॥ श्री निखिल शाबर तन्त्र प्रयोग ॥ शाबर मन्त्र गुरु की आन, बान और शान पर चलते है । इनकी कोई काट नहीँ है ये तो परिणाम देँगे ही । गुरु तो शिष्य की सुनता ही है । नीचे लिखे मन्त्र स्वयं सिद्ध हैँ बस साधक को गुरु मे सम्पूर्ण विव्श्रास हो उसके लिए गुरु और शिव मे कोई फर्क न हो । उसने गुरु मन्त्र का कम से कम सवा लाख मन्त्र जाप किया हो तत्पश्र्चात गुरु चित्र के सामने अगर वह इन मन्त्रो का जाप करता है तो परिणाम दौडे चले आयेँगे । ॥ हनुमान दर्शन ॥ निम्न मंत्र का अनुष्ठान मंगल या शनिवार से प्रारम्भ करेँ । हनुमान जी को सिन्दूर का चोला, जनेऊ, लंगोट, दो लड्डू और ध्वजा चढावेँ । इसके बाद प्रत्येक मंगलवार को व्रत रखेँ । लाल वस...
अन्न वृद्धि प्रयोग मित्रो यह प्रयोग आप किसी दिन कर सकते है।सरल होते हुए भी अत्यंत प्रभावी है।इस प्रयोग से साधक के घर मे कभी भी अन्न आदी की कमी नही आती है तथा आय के मार्ग खुलते है। स्नान कर उत्तर की और मुख कर बैठ जाये,आसन आदि का कोइ बधंन नही है।अब एक पानी वाला नारीयल लिजिये,और उस पर सिंदुर से आँख नाक तथा पुरा मुख बनाए।अब उसे स्वच्छ भुमी पर दिवाल से टिकाकर सिधा खड़ा कर दे,और उस चेहरे की ओर देखते हुए निम्न मंत्र का १५१ बार जाप करे,तथा जाप के बाद नारीयल को रसोई अथवा भंडार गृह मे रख दे।ईश्वर कृपा से आपके घर मे कभी अन्न की कमी नही होगी। मंत्र ओम नमो गुप्त वीरमंजन सबको ठाय ही तेरी आन,गंगा की लहर जमुना की प्रवाण या कुठार,राजा भण्डार राजा प्रजा लागे है, पाँच राती ऋद्धि लाओ तो नवनाथ चौरासी आदि का पात्र भरो, हमरा जो पात्र ना भरो तो पार्वती का क्षीर चोखा हराम करो। ...
आदित्य प्रयोग मित्रो सुर्य देव तेज तथा बल के दाता है।जीवन नवीन उत्साह का संचार सुर्य कृपा से ही होता है।जिस प्रकार सुर्य उदित होते समय प्रकाश तथा नविन दिन का संदेश लाता है,उसी प्रकार सुर्य कृपा से साधक मे नविन उत्साह का संचार होता।सुर्य देव जहाँ समस्त ग्रहो के स्वामी है वही देवताओ मे भी ईन्हे उच्च स्थान प्राप्त है। प्रस्तुत साधना से साधक के रूके कार्यो को गती मिलती है।तथा समस्त नकारात्मरक विचारो से साधक मुक्त होता है।घर मे निरंतर यदि रोग बड़ रहे हो तो साधक को उनसे भी मुक्ति मिलती है।साधक यह यह प्रयोग किसी भी रविवार अथवा मकर संक्राति पर करे।समय प्रातः सुर्योदय का हि रखे।आसन वस्त्र का कोई बंधन नही है।दिशा पुर्व हो।साधक सर्व प्रथम सुर्य को अर्ध्य प्रदान करे।ईसके बाद सुर्य के सामने ही आसन बिछाकर बैठ जाये।और अपने सामने भुमि पर ही मिट्टी का नविन दिपक प्रज्वलित करे...
मंत्र बडा ही सरल है,कल गोरख बाबा का जन्मदिन है और इस मंत्र का कम से कम 1 घंटा जाप करे.जाप के समय गाय के गोबर से बने हुए उपले पर गुग्गूल डालते रहे,उपले से धुवा निकलता रहेना चाहिये.मंत्र का जाप सुबह या रात मे करे.रुद्राक्ष माला हो तो उसी माला से जाप करे.भविश्य मे जब भी जाप करना हो तो सिर्फ सवेरे ही जाप करे.शरीर और मन शुद्ध होना चाहिये. ll ओम नमो आदेश गुरूजी को आदेश,आदेश सिद्धो को,आदेश निरंजन निराकारी को,बभुत लगाके गोरख आये,कहा से आये किसको लाये,गौड़ बंगाल से आये सिद्धो को लाये,कृपा करो माऊली,श्री नाथजी के चरणो को आदेश ll जाप के बाद बभुत को सम्भाल कर रखे,जो साधक साधना करेगा उसे मै बभुत का महत्व और इस्तेमाल बता दुगा. मंत्र को सम्बाल के रखे,क्युके येसे गोपनीय मंत्र येसे ही नही मिलते. आदेश. ...
सिद्धभैरव साधना ----------------------------------- शिव महापुराण में भैरवजी को परमात्मा शंकर का पूर्णरूप बताते हुए लिखा गया है - भैरव: पूर्णरूपो हि शंकरस्य परात्मन:। मूढास्ते वै न जानन्ति मोहिता: शिवमायया।। पुराणों में भैरव उल्लेख : -तंत्रशास्त्र में अष्ट भैरव का उल्लेख मिलता है - असितांग भैरव, रुद्र भैरव, चंद्र भैरव, क्रोध भैरव, उन्मत भैरव, कपाली भैरव, भीषण भैरव तथा संहार भैरव . मै आपको एक प्रामानिक साधना दे रहा हू जिसका प्रभाव तिश्ण है और जब भी मै यह साधना करता हू मुझे पूर्ण अनुकूल परिणाम प्राप्त होते है. इस साधना से फसा हुआ धन वापस मिलता है,जिनके पास नौकरी ना हो उन्हे नौकरी भी मिलता है,धन के सभी परेशानिया भी समाप्त होता है,रुठी पती/पत्नी मे सामजस्य होता है और कुछ दिनो मे सुलाह हो जाता है,जो तंत्र बाधा से परेशान हो उनके लिये यह साधना संजिवनी है.मै यहा सिर्फ इतना ही कहु...
कार्य सिद्धी साधना. sarva karya siddhi shabar mantra karya siddhi mantra for job karya siddhi mantra in hindi ---------------------------------- जीवन बडा कठिन है पग पग पर काटे है जितना चलोगे उतना ही सफर कम होते जायेगा क्युके संघर्ष ही जीवन का एक सत्य है और मेरा कोशिश सिर्फ इतना है के आपका थोडा बहोत संघर्ष कम हो. यह कार्य सिद्धी साधना है और अच्छे परिणाम प्रदान करती है,सभी यही चाहते है मै जो कार्य करू उसमे मुझे सफलता प्राप्त हो.लोग बहोत मेहनत करते है परंतु अनुकूल परिणाम प्राप्त नही होते है तो उम्मीद छोड देते है तो कोई किस्मत को कोसता है किसीने कई रत्न धारन करके देखे है तो कोई मन्नते माँगते हुए थक गया होगा येसे बहोत सारे किस्से है जहा काम बनते बनते रुक जाता है.फिर क्या,वो बेचारी दो आंखे असफलता के कारण रोती है,रात भर जागती है.....ज्यादा लिखना ठिक नही. साधना विधान:- यह शाबर मंत्...
मोहिनी मंत्र:- ॐ नमो आदेश गुरु का । मोहिनी मोहिनी कहा चली । बाहर खुदाई काम कन चली । फलानी फलाने को देखै,जरै मरै । मेरे को देखकर पायन पडै । छु मंत्र काया ,आदेश ,गुरु की शक्ती ,मेरी भक्ति ,फूरो मंत्र ईश्वरो वाचा ॥ ये मंत्र आज तक कभी खाली नही गया सिर्फ इससे काम लेने का ग्यान सही होना चाहिये, 2 मोहिनी वशीकरण शाबर मंत्र : तेल तेल महा तेल! देखूं री मोहिनी तेरा खेल, लौंग लौंगा लौंगा,बैर एक लौंग मेरी आती पाती ,दूसरी लौंग दिखाए छाती, रूठी को मना लाए ,बैठी को उठा लाए ,सोती को जगा लाए ,चलती फिरती को लेवा लाए, आकास की जोगनी,पताल का सिद्व , ''''जिसको वश में करना हो'''' को लाग लाग री मोहिनी , तुझे भैरों की आन!!! प्रयोग विधि: ...
वचन सिद्धी साधना "वचन सिद्धि साधना" (vachan Siddhi Sadhana) का अर्थ है ऐसी साधना जिसके द्वारा व्यक्ति की वाणी में शक्ति और प्रभाव आ जाए, यानी जो बोले वह सच हो। यह वाणी सिद्धि का ही एक रूप है। इस साधना को प्राप्त करने के लिए विशेष मंत्रों का जाप, ध्यान और प्राणायाम किया जाता है। साधना के दौरान विशेष नियमों और मुहूर्त का पालन करना पड़ता है, जैसे रात 9 बजे के बाद साधना करना और उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना। जो बोलेगे वह सत्य होगा क्युके वचन सिद्धी एक प्रकार की वाणी सिद्धी हि है और बहोत समय बाद यह साधना करने का मुहूर्त आया है.कल से साधना प्रारंभ करना है,माला रुद्राक्ष का हो,आसन वस्त्र कोई भी चलेगे परंतु लाल रंग के रहे तो ठिक है,...
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