SIDDHASHRAM SIDDHASHRAM What is Siddhashram? यह बात आम आदमी से छिपी क्यों रही? इसे देखने के लिए क्या शर्तें हैं? ????? ...इन सवालों के जवाब यहां हैं। इससे संबंधित एक अन्य लेख यह है - A Visit to Siddhashram सिद्धाश्रम मानव जाति को हमारे पूर्वजों, संतों, ऋषियों और उच्च कोटि के योगियों द्वारा प्रदत्त वरदान है। यह पृथ्वी पर स्वर्ग के समान है और इसका उल्लेख मानव सभ्यता के सबसे प्राचीन ग्रंथ "ऋग्वेद" में मिलता है। एक संत ऋग्वेद के श्लोकों में अपने भाव प्रकट करते हुए कहते हैं, "किसी न किसी समय, जब मेरे जीवन का सबसे शुभ क्षण आएगा, तो मैं निश्चित रूप से सिद्ध...
तंत्र साधना: डिजिटल ग्लैमर और वास्तविकता के बीच की रेखा आजकल यूट्यूब और पॉडकास्ट की दुनिया में 'तंत्र' और 'गूढ़ साधनाओं' को लेकर एक नई लहर देखी जा रही है। लेकिन क्या यह लोकप्रियता साधकों के लिए सुरक्षित है? जवाब है— नहीं। केवल व्यूज, फॉलोअर्स और पैसा कमाने के उद्देश्य से बनाए गए ये वीडियो अक्सर उस "चेतावनी" को गायब कर देते हैं, जो तंत्र साधना की पहली शर्त है। 1. लोकप्रियता के जाल से बचें पॉडकास्ट पर बैठने वाले अतिथि और मेजबान अक्सर रोमांच पैदा करने के लिए तंत्र के रहस्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। वे यह स्पष्ट करना भूल जाते हैं कि तंत्र कोई मनोरंजन या 'क्विक फिक्स' (तुरंत समाधान) नहीं है। बिना पात्रता के इन साधनाओं की ओर आकर्षित होना आत्मघाती हो सकता है। 2. शास्त्रों की गोपनीयता का महत्व अगर आप ...
विनियोग मंत्र- अस्य : श्री ब्रह्मास्त्र-विद्या बगलामुख्या नारद ऋषये नम: शिरसि । त्रिष्टुप् छन्दसे नमो मुखे । श्री बगलामुखी दैवतायै नमो ह्रदये । ह्रीं बीजाय नमो गुह्ये । स्वाहा शक्तये नम: पाद्यो: । ॐ नम: सर्वांगं श्री बगलामुखी देवता प्रसाद सिद्धयर्थ न्यासे विनियोग: । आवाहन- सीधे हाथ में जल, अक्षत, पुष्प, हल्दी, कुमकुम व नैवेद्य आदि लेकर नीचे दिये गये मंत्र का उच्चारण करते हुए मां बगलामुखी का पूजा स्थल पर आवाहन करें - ...
श्री महा-विपरीत-प्रत्यंगिरा स्तोत्र नमस्कार मन्त्रः- श्रीमहा-विपरीत-प्रत्यंगिरा-काल्यै नमः। ।।पूर्व-पीठिका-महेश्वर उवाच।। श्रृणु देवि, महा-विद्यां, सर्व-सिद्धि-प्रदायिकां। यस्याः विज्ञान-मात्रेण, शत्रु-वर्गाः लयं गताः।।विपरीता महा-काली, सर्व-भूत-भयंकरी। यस्याः प्रसंग-मात्रेण, कम्पते च जगत्-त्रयम्।।न च शान्ति-प्रदः कोऽपि, परमेशो न चैव हि। देवताः प्रलयं यान्ति, किं पुनर्मानवादयः।।पठनाद्धारणाद्देवि, सृष्टि-संहारको भवेत्। अभिचारादिकाः सर्वेया या साध्य-तमाः क्रियाः।।स्मरेणन महा-काल्याः, नाशं जग्मुः सुरेश्वरि, सिद्धि-विद्या महा काली, परत्रेह च मोदते।।सप्त-लक्ष-महा-विद्याः, गोपिताः परमेश्वरि, महा-काली महा-देवी, शंकरस्येष्ट-देवता।।यस्याः प्रसाद-मात्रेण, पर-ब्रह्म महेश्वरः। कृत्रिमादि-विषघ्ना सा, प्रलयाग्नि-निवर्तिका।।त्वद्-...
अगर हम नहीं तो यह काम और कौन करेगा? हम जिस युग में जी रहे हैं, वह संघर्ष, स्वार्थ, छल और प्रतिस्पर्धा से भरा है, जिसमें साधन से अधिक लक्ष्य को महत्व दिया जाता है। नैतिकता का पतन हो रहा है, मानवीय भावनाओं का कोई मूल्य नहीं रह गया है और लोग भौतिकवाद के दलदल में फंसते जा रहे हैं। धन कमाने की होड़ में लोग इतने उलझे हुए हैं कि एक पल रुककर यह सोचने का समय ही नहीं है कि हम किस ओर बढ़ रहे हैं। शायद कुछ क्षणिक पल ऐसे आते हैं जब हम सोचते हैं कि इस दुनिया का क्या हो रहा है, हमारा लक्ष्य क्या है, मानव जीवन का वास्तविक सार क्या है, लेकिन अगले ही पल हम फिर से इस पागल दौड़ में फंस जाते हैं और सब कुछ भूल जाते हैं। हम स्वार्थी सोच रखने और सभी कोमल भावनाओं को कुचलने के लिए विवश हैं। यह संक्रांति काल नामक उथल-पुथल ...
Divine Quotations of SADGURUDEV NIKHILESHWARANAND Divine Quotations of SADGURUDEV NIKHILESHWARANAND January 2001 It is not possible that comforts shall continue to exist in a place where there are comforts now. If it is day now, in a few hours it shall be night. Comforts are bound to be followed by sorrows. This is the basic difference between comforts and joy. Once joy is attained there can be no sorrow, no tensions. If you wish to attain to joy then learn to devote yourself in life. You shall have to learn how to merge your soul with that of the Guru. You shall have to completely forget yourself. Give all your problems, worries, tensions to me. You have to be free of them. You have to be like an empty vessel when you come to me. You have to be like a clean paper on which I could write the formula to achieve totality in life, on which I could write about the Divine. Only then shall I be able to tell you what totality in life means, what joy means, what success means. Only a Guru knows how to transform a speck of dust into the cosmos. Only He knows how to transform a human into a divine being. Only He knows how to raise the Kundalini from the Mooladhar to the Sahastrar. This is why the Guru is the basis of life. One should be linked to the soul of the Guru not to His physical form. If the Guru is not well and you feel very perturbed, unhappy or disturbed without any apparent reason then know it that you are linked to His soul. Totality is possible when the disciple places his head in the feet of the Guru and washes His feet with his tears. In such moments the heart brims over with love for the master and so overwhelmed does one become that on...
Tantra Special Is your family troubled by evil ghosts or spirits? Or is some relative or acquaintance worried on this account? If yes, then do try this Sadhana for the food of your family and the society at large. Due to some misconceptions the ordinary man shivers at the mention of the word ghost. This is chiefly because of the fearful picture created in the mind of the populace by unscrupulous individuals who falsely claim to be Tantra experts. Actually they do so just to exploit fear of the people and to make a quick buck thus. The facts related to spirits are completely different from the false beliefs that are prevalent. Spirits do not have grotesque forms and neither do they intend any harm to anybody. They are just wondering souls whose wishes in worldly life have remained unfulfilled. All that they wish for is freedom from their infatuations. Sometimes with the desire of fulfilment of some wish or longing they enter into some person's body and this can lead to a complete change in personality, ailments, mental disturbances etc. No remedy then works in curing that ailment or problem. The only method then left is to drive away the spirit. For this presented here is a very powerful ritual. On a Saturday night wear black or brown clothes. Spread a red cloth over a wooden seat. Sit facing South. On each corner of the cloth place an iron nail. Then take a thread and wind it around the seat. Draw a human figure on a piece of paper with pen and place it in middle of the cloth. On head of the figure place a Taamra Sarpa and on its torso place a Bhoot Bandh Chetak. Sprinkle vermilion over these. Light incense. Place a copper tumbler filled with water nearby. Take some water in your palm and sprinkle it all around you. Then take water in the right palm and pray for riddance of spirit from the body of the person afflicted. Let the water flow to the ground. Then with a...
108 Divine Names ashtottarshat Naamaani sadgurudev Is The Most Powerful Deity With Numerous Divine Forms. A Disciple Who Chants These Mantras Pertaining To 108 Names Of Sadgurudev Surely Gets The Blessings Of The Revered Master. om Naaraaynnaay Namah om Aatma Swaroopaay Namah om Trikaal Gyaan Sampannaay Namah om Dashmahaavidyaa Siddhidaay Namah om Bhagwati Priyaay Namah om Vigyaan Deepaankuraay Namah om Prem Swaroopaay Namah om Tan Man Ranjanaay Namah om Bhav Bhaya Bhanjanaay Namah om Asur Nikhandanaay Namah om Divya Hastaay Namah om Goodd Swaroopaay Namah om Soumya Swaroopaay Namah om Goodd Charitraay Namah om Daani Charitraay Namah om Sarva Sampatkaraay Namah om Jaagriti Rachanaa Sikta Pradaay Namah om Ved Prayaay Namah om Karunnaa Karaay Namah om Pratyaksh Maheshwaraay Namah om Sachidaanand Shreshtth Shishyaay Namah om Siddhashram Prateekaay Namah om Keilaashaachal Kandaraalayakaraay Namah om Moksh Dwaar Kapaat Paat Na Karaay Namah om Sarvaanand Karaay Namah om Bhaktaabheesht Pradaay Namah om Kripaavalambanaay Namah om Kalp Tarave Namah om Koti Koti Swaroopaay Namah om Mahaa Abhyankaraay Namah om Saakshaanmokshkaraay Namah om Rakshaa Kandkaraay Namah om Niraamayaay Namah om Gyaan Veiraagya Siddhayarthaay Namah om Somaavrit Sodaraay Namah om Dayaanupavano Dravinnaambu Dharaay Namah om Pushkar Visht Karaay Namah om Trivisht Sulabh Labhaay Namah om Samast Jagataam Mahaneeya Moortaye Namah om Aashaa Poorakaay Namah om Sachid Sukhdhaamne Namah om Purann Purushaay Namah om Naanaa Kreedaakaraay Namah om Chidanand Nirvikaaraay Namah ...
शिवलिंगी बाझपनरोग को गर्भधारण करने की क्षमता पुत्र प्रदान करने की क्षमता रखता हैं यह 100%गारंटी का प्रयोग है । जो हताश निराश हो चुके हो एक बार इस प्रयोग को जरूर आइए शिवलिंगी एक पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधि है, जो पुत्र प्राप्ति में मददगार मानी जाती है। यह औषधि मुख्य रूप से शिवलिंगी के बीजों से तैयार की जाती है, जिनमें प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाले गुण होते हैं। शिवलिंगी के गुण? - यह शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता में सुधार करती है। - यह हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है। ...
ऊर्जा-चोरी से बचने के तांत्रिक उपाय। क्या आपने कभी महसूस किया है कि आप बिल्कुल ठीक थे, पर अचानक ऊर्जा गिर गई, मन थकावट से भर गया, सिर भारी हो गया, मन बेचैन हो गया? या किसी विशेष व्यक्ति से मिलने के बाद आपको ऐसा लगा कि आपकी ऊर्जा किसी ने खींच ली? यह ...
माँ धूमावती दस महाविद्याओं में सातवीं महाविद्या हैं। बगलामुखी की अंगविद्या हैं इसीलिए माँ बगलामुखी से साधना की आज्ञा लेनी चाहिए और प्रार्थना करना चाहिए की माँ पूरी कराये . ज्ञान के आभाव में या कौतुहल से किताब , इन्टरनेट से पढ़कर प्रयोग करने से विपत्ति में भी फसते देखे गये हैं . बगलामुखी साधना करने के पश्चात ही धूमावती साधना विशेष करने की योग्यता मिलती है .इसीलिए विशेष परिस्थिति में गुरु से प्रक्रिया जानकार ही शुरू करना चाहिए . गुरु जानते हैं की शिष्य की योग्यता क्या है . धूमावती साधना सबके बस की नहीं . इनके काम करने का ढंग बिलकुल अलग है . बांकी महाविद्या श्री देती हैं और धूमावती श्री विहीनता अपने सूप में ले...
।। श्रीमहामृत्युंजय- स्तोत्रम् ।। ।। श्रीमहामृत्युंजय- स्तोत्रम् ।। ॐ अस्य श्रीमहामृत्युंजयस्तोत्रस्यश्रीमार्कण्डेय ऋषिः। अनुष्टुप् छन्दः। श्री मृत्युंजयो देवता। गौरी शक्तिः। मम आयुष्य-आरोग्य-ऐश्वर्य-सिद्ध्यर्थं जपे विनियोगः।। * स्तोत्रम् * ॐ रुद्रं पशुपतिं स्थाणुं नीलकण्ठं उमापतिम्। ...
AATMA SADHANA Even You Can See Your Aura Today even the modern scientists have accepted the fact that every human being is surrounded by an aura similar to the radiance around the faces of Lord Ram, Krishna, Buddha and Jesus, as is seen depicted in their pictures. And every human being can attain the capabilities of viewing his own and other people’s aura and also increase the radiance around his body through various methods like Yoga, Sadhana and meditation. This article reveals secret facts on this interesting and captivating subject. The ancient Indian sages and seers who were great exponents of spiritualism and the natural sciences believed that other than the apparent physical form, a human has six more forms or bodies or Sharirs as they called them. Thus the combination of the seven bodies makes a complete human form. But unfortunately we are only able to see and feel the presence of the outer physical body and even our minds are generally not able to penetrate into the deeper realms. Knowledge of existence of aura around the human bodies was present even thousands of years ago and a radiance is shown to emanate from the bodies of great saints of India, Greece, Rome and Egypt in their pictures. In India pictures of Ram, Krishna, Buddha, Mahavir and Nanak are even tod...
श्री काल भैरवाष्टमी काल भैरव साधनायें श्री काल भैरव अष्टमी काल भैरव साधना भैरव देव के सम्बन्ध में इतना अधिक साधना साहित्य लिखा है, कि सामान्य साधक यह निश्चित नहीं कर सकता कि उसे किस प्रकार की साधना करनी चाहिये, भैरव देव का मूल स्वरूप क्या है और उनकी शक्तियां कितनी प्रबल है और भैरव की साधना कर किस प्रकार शक्ति प्राप्त करनी चाहिये? किसी भी शुभ कार्य में, चाहे वह यज्ञ हो, विवाह हो, वास्तु स्थापना हो, गृह प्रवेश हो अथवा अन्य कोई मांगलिक कार्य हो, भैरव की स्थापना एवं पूजा अवश्य ही की जाती है, क्योंकि भैरव ऐसे समर्थ रक्षक देव है जो कि सब प्रकार के विघ्नों को, बाधाओं को रोक सकते हैं और कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो जाता है, छोटे-छोटे गांवों में भैरव का स्थान, जिसे ‘भैरव चबूतरा’ कह...
भैरव तीव्र वशीकरण सम्मोहन प्रयोग नौकरी, व्यापार, जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं कि आप चाह कर भी किसी को अपनी बात स्पष्ट नहीं कर पाते। ऐसे कई लोग हैं जिनको इस बात का दुःख होता है कि जीवन में उन्हें ‘चांस’ नहीं मिला। अक्सर लोग इस बात को कहते हैं कि – उसे अपनी बात कहने का अवसर ही प्राप्त नहीं हुआ, इसलिये काम नहीं हुआ। जीवन में आने वाले अवसरों अर्थात् ‘चांस’ को सुअवसर में बदलने के लिये सम्पन्न करें भगवान भैरव का यह अति विशिष्ट वशीकरण प्रयोग। जिसको सम्पन्न करने के पश्चात् आप जिस किसी को भी अपने वश में करना चाहते हैं अथवा अपनी बात को उसके सामने स्पष्ट करना चाहते हैं कर सकते हैं। यह प्रयोग बालक-वृद्ध, स्त्री-पुरुष किसी पर भी सम्पन्न किया जा सकता है। भगवान भैरव का तंत्र वशीकरण प्रयोग कोई टोटका नहीं बल्कि शुद्ध तंत्र प्रयोग है जिसका प्रभाव तत्काल रूप से देखा जा सकता है। ...
Shukra Sadhana in hindu शुक्र ग्रह का विवेचन नवग्रह सभी मनुष्यों के जीवन को प्रभावित करते हैं। जीवन में जो भी सुख के क्षण या दुःख के बादल घिरते हैं, वे नवग्रह से प्रभावित होते हैं। जब सूर्य का सकारात्मक प्रभाव होता है तब आप सम्मान प्राप्त करते हैं, मंगल शौर्य देता है, चन्द्रमा मानसिक शान्त...
|| बीज मंत्र || •••••••••••••••• बीज मंत्र क्या है ? `````````````````````````` बीज मंत्र पूरे मंत्र का एक छोटा रूप होता है जैसे की एक बीज बोने से पेड़ निकलता है उसी प्रकार बीज मंत्र का जाप करने से हर प्रकार की समस्या का समाधान हो जाता हैं. अलग- अलग भगवान का बीज मंत्र जपने से इंसान में ऊर्जा का प्रवाह होता हैं और आप भगवान की छत्र-छाया में रहते हैं I मूल बीज मंत्र "ॐ" होता है जिसे आगे कई अलग बीज में बांटा जाता है I ये सब बीज इस प्रकार जापे जाते हैं- ॐ, क्रीं, श्रीं, ह्रौं, ह्रीं, ऐं, गं, फ्रौं, दं, भ्रं, धूं,हलीं, त्रीं,क्ष्रौं, धं,हं,रां, यं, क्षं, तं.I ...
kamakhya mantra sadhana vidhi नूतन वर्ष की प्रथम महान् नवरात्रि पर्व दिव्य शक्ति से सम्पन्न होने का महोत्सव है। जीवन में धर्म, अर्थ, मोक्ष और प्रेम की पूर्णता प्राप्ति के लिए कामस्वरूप शक्ति का होना आवश्यक है। शक्ति की साधना, भगवती कामाख्या की साधना सौभाग्यशाली व्यक्ति ही अपने जीवन में सम्पन्न कर पाते हैं, और फिर आपका तो वास्तव में ही पुण्योदय हुआ है, क्योंकि नवरात्रि जैसे महान् पर्व पर ऐसी महत्वपूर्ण साधना सम्पन्न करने का निश्चय करते हैं। यह साधना आप के जीवन के समस्त सन्तापों, दुःख-दारिद्रय, कष्ट, प्रभाव, पीड़ा और बाधाओं को मिटाने में सर्मथ होगी, वहीं आपको इस साधना के दौरान वे सफलताये भी मिल पायेंगी जो की जीवन में आवश्यक है। इस साधना से जहां जीवन ...
।सर्वयंत्र मन्त्र तंत्रों उत्कीलन। *******।।सर्व यन्त्र मन्त्र तंत्रोत्कीलन।******* *******।।सर्व यन्त्र मन्त्र तंत्रोत्कीलन।******* पर्वतीउवाच: देवेश परमानंद भक्तानांभयप्रद,आगमा निगमसचैव बीजं बीजोदयस्था।।१।। समुदायेंन बीजानां मंत्रो मंत्रस्य संहिता। ऋशिछ्दादिकम भेदो वैदिकं यामलादिकम।।२।। धर्मोअधर्मस्था ज्ञानं विज्ञानं च विकल्पनम। निर्विकल्प विभागेनं तथा छठकर्म सिद्धये।३।। भुक्ति मुक्ति प्रकारश्च सर्व प्...
List of Cassettes There are Hundreds of Cassettes. This list is not exhaustive. Please contact Jodhpur Gurudham for more details. All prices include postage & handling charges and are International Prices. Please contact Jodhpur Gurudham by email/letter/phone/fax to get Indian Prices for India and other SAARC countries (Nepal/ Pakistan/ Sri Lanka/ Bangladesh/ Bhutan/ Maldives/ Burma). Currently most of the cassettes are in Hindi language only. We are in the process of translating them to other major languages like English etc. The International Price of all Audio Compact Discs is US$ Eight only. The International Price of all Audio Cassettes is US$ Five only. The International Price of all Video Cassettes is US$ Fifty only. You should contact the Jodhpur Gurudham for getting Sadhna articles/books/cassettes etc. by post. Alternatively, you may buy them over the counter from our Delhi Gurudham or from the counters at the Sadhna Camps. If you live in India, then you may send us a email/letter/fax mentioning your address and details of required items. We will send it by VPP. Alternatively, as VPP rates have increased recently, you may send us a Bank Draft of "Total cost of items" plus Rs. 60 (pos...
Tantra Utkilan Tripura Sadhana तंत्र उत्कीलन त्रिपुरा साधना यदि हम जीवन का गहराई से विश्लेषण करें, तो पायेंगे, कि व्यक्ति हर पल, हर क्षण, भय एवं बाधाओं से आशंकित रहता है। गहराई से विश्लेषण करने पर ऐसा ही प्रतीत होता है कि मनुष्य की शक्तियां कीलित हो गई हैं। शक्तियों का यह कीलन स्वार्थी लोगों द्वारा या उनकी स्व...
RajaRajeshwari Shodashi Tripura Sundari Sadhana गुरु पूर्णि...
पापांकुशा एकादशी साधना Jai Gurudev Jai Gurudev प्रत्येक जीव विभिन्न योनियों से होता हुआ निरन्तर गतिशील रहता है। हालांकि उसका बाहरी चोला बार-बार बदलता रहता है, परन्तु उसके अन्दर निवास करने वाली आत्मा शाश्वत है, वह मरती नहीं है, अपितु भिन्न-भिन्न शरीरों को धारण कर आगे के जीवन क्रम की ओर गतिशील रहती है। जो कार्य जीव द्वारा अपनी देह में होता है, उसे कर्म कहते है और उसके सामान्यतः दो भेद हैं- शुभ कर्म यानि कि पुण्य तथा अशुभ कर्म अर्थात् पाप। शुभ कर्म या पुण्य वह होता है, जिसमें हम किसी को सुख देते हैं, किसी की भलाई करते हैं और अशुभ कर्म वह होता है, जिसमें हमारे द्वारा किसी को दुःख प्राप्त होता है, जिसमें हमारे द्वारा किसी को संताप पहुँचता है। मानव योनि ही एक ऐसी योनि है, जिसमें वह अन्य कर्मों को संचित करता रहता है। पशु आदि तो बस पूर्व कर्मों के अनुसार जन्म ले कर ही चलते रहते है, ...
श्री दुर्गा सप्तशती के सात सौ मन्त्र ब्रह्म की शक्ति चण्डी के मंदिर की सात सौ सीढियाँ है, जिन्हें पारकर साधक मंदिर में पहुँचता है। मार्कण्डेय पुराणोक्त 700 श्लोकी श्री दुर्गा सप्तशती मुख्यतः 3 चरित्रों में विभाजित है- . 1. प्रथम चरित्र ( मधु-कैटभ-वध) 2. मध्यम चरित्र ( महिषासुर वध) 3. उत्तम चरित्र (शुम्भ-निशुम्भ-वध) . ये तीनो चरित 3 प्रकार के कर्म संस्कारो या वासनाओं - . 1.सञ्चित 2.प्रारब्ध 3.भविष्यत् . अथवा तीन गुणों - . 1.सत्व 2.रज 3. तम . अथवा तीन ग्रंथियों - . 1.ब्रह्म ग्रन्थि 2. विष्णु ग्रन्थि 3. रूद्र ग्रन्थि . के प्रति न केवल हमारा ध्यान आकर्षित करते है अपितु एक सुंदर कथा के माध्यम से इनके मूल में हमारा प्रवेश भी करा देते है और जैसे ही मनुष्य उक्त तीनो के मूल में पहुँचता है, वैसे ही वह ब्रह्म की शक्ति भगवती चण्...
टोटके व्यापार वृद्धि १॰ व्यवसाय प्रारम्भ करने से पूर्व पत्नी या माता द्वारा यथासंभव भगवान की पूजा कराए, उसके पश्चात् पेड़े का प्रसाद बांटें तथा नौकरों को एक-एक रुपया बांटें। ऐसा नियमपूर्वक प्रत्येक शुक्रवार को करते रहें। २॰ यदि ग्राहक कम आते हैं अथवा आते ही न हों तो यह अचूक प्रयोग करें। सोमवार को सफेद चन्दन को नीले डोरे में पिरो लें तथा २१ बार दुर्गा सप्तशती के निम्न मन्त्र से अभिमंत्रित करें- “ॐ दुर्गे! स्मृता हरसि भीतिमशेष-जन्तोः, स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव-शुभां ददासि। दारिद्र्य-दुःख-भय-हारिणि का त्वदन्या, सर्वोपकार-करणाय सदाऽऽर्द्र-चित्ता।।” अब अभिमन्त्रित चंदन को पूजा स्थल पर स्थापित कर दें या कैश-बॉक्स में स्थापित कर दें। ३॰ व्यवसाय स्थल पर श्रीयंत्र का विशाल रंगीन चित्र लगा लें, जिससे सबको दर्शन होते रहें। ४॰ व्यवसाय को नजर-टोक लगी ह...
चैत्र-नवरात्रों में विशेष? करें कामाख्या साधना :- कामाख्या वशीकरण मंत्र कामाख्या मोहिनी मंत्र कामाख्या शक्ति साधना अद्वितीय और श्रेष्ठतम शक्ति सम्पन्न है. ...
#होलीकोत्सव_2024___________ फाल्गुन पुर्णिमा (होलिका दहन , दिवस ) हमें अपनी बुराई , धृणा, नफरत , बदला लेने की प्रवित्ति , आलोचना , गिले शिकवे इत्यादि को नष्ट कर जला, कर *एक निखिल शिष्य* का पहचान इस यूग को देना है, यकिन करो , फिर आपको छुने वाला पैदा न होगा ,आप मुक्कदर के सिकन्दर होगे , वरमाला लिए जमाना तैयार रहेगा क्षण प्रति क्षण ... ...
SURYA VIGYAAN AND KAAL CHAKRA-सूर्य विज्ञानं और काल चक्र त्रिनाभिमती पञ्चारे षण्नेमिन्यक्षयात्मके l संवत्सरमये कृत्स्रम् कालचक्रम् प्रतिष्ठितं ll तीन नाभियों से युक्त है सूर्य के रथ का चक्र,अर्थात भूत भविष्य और वर्तमान ये तीनो काल ही सूर्य रथ चक्र की तीन नाभि है,नाभि अर्थात जहाँ स्पंदन होता हो प्राणों का lवेदों मे काल को प्राण ही तो कहा गया है l और सूर्य इन प्राणों का अधिपति है,अर्थात जहाँ कालमयी दृष्टि की बात आती हो या अपनी दृष्टि को काल के परे ले जाकर व्यापकता प्रदान ...
आसन सिद्धि विधान-1 ...
बगला शतनाम के एक सौ आठ माला पाठ कर, हवन कर दिया। परिणाम तुरन्त सामने आया यजमान की आर्थिक स्थिति में जबरदस्त सुधान प्रारम्भ हो गया। क्रिया इस प्रकार की गई - विष्णुयामल से उद्धत है- विनियोग - ऊँ अस्य श्री पीताम्वर्य अण्ठोन्तर शतनाम स्त्रोतस्य सदा शिव ऋषि, अनुष्टुप छन्दः श्री पीताम्बरी देवता श्री पीताम्बरी जपे हवन विनियोगः। (जल पृथवी पर डाल दें) 1. ऊँ बगलाये नमः स्वाहा। 2. ऊँ विष्णु विनिताये नमः स्वाहा। 3. ऊँ विष्णु शंकर भामनी नमः स्वाहा। 4. ऊँ बहुला नमः स्वाहा। 5. ऊँ वेदमाता नमः स्वाहा। 6. ऊँ महा विष्णु प्रसूरपि नमः स्वाहा। 7. ऊँ महा-मत्स्या नमः स्वाहा। 8. ऊँ महा-कूर्मा नमः स्वाहा। 9. ऊँ महा-वाराह-रूपिणी नमः स्वाहा। 10. ऊँ नरसिंह-प्रिया रम्या नमः स्वाहा। 11. ऊँ वामना वटु-रूपिणी नमः स्वाहा। 12. ऊँ जामदग्न्य-स्वरूपा नमः स्वाहा। 13. ऊँ रामा राम-प्रपूजिता नमः...
#श्रीविष्णुअपराजिता_स्तोत्र!! अपराजिता मंत्र:- (१).ॐ ऐं ऐं अपराजितायै क्लीं क्लीं फट्। (२))ॐ बलायै महाबलायै असिद्धसाधिनी अपराजितायै नमः। (३) ॐ बलायै विदमहे महाबलायै धीमहि तन्नोअपराजिता प्रचोदयात्। (४) ॐ आदिनारायण्यै च विदमहे नवदुर्गेश्वर्यै धीमहि तन्नो: अपराजिता: प्रचोदयात्। (५) ॐ आकर्षिणी आवेशिनी ज्वालामालिनी रमणि रामणि धरणि धारणि तपनि तापिनि मनोन्मादिनि शोषिणि सम्मोहिनि नीलपताके महानीले महाप्रिये महाग्रेयि महाचण्डे महारौद्रि महावज्रिणि आदित्य रश्मि जाह्नवि यमघण्टे! किलि किलि चिन्तामणि सुरभि सुरोत्पन्ने सरस्वति सर्वकामदुधे! मम मनीषितं कार्यं तन्मे सिध्यतु स्वाहा। यह १२६ अक्षरों का अपाराजिता देवी का मंत्र है जो बहुत तीव्र व प्रभावी है । विजयदशमी पर अपराजिता देवी का पूजन करने का विधान पूर्वकाल से ही प्रचलित है और भगवती अपराजिता भगवान विष...
GURU AARTI...
माघी गुप्त नवरात्रि 10 फरवरी – 18 फरवरी मैं देखता हूं कैसे सिद्धि नहीं मिलती भगवती दिगम्बरी दक्षिण काली साधना यों तो काली महाकाली और दक्षिणकाली से सम्बन्धित कई साधनायें, साधना ग्रंथों में प्रकाशित हैं, परन्तु दिगम्बरी दक्षिण काली साधना, साधना क्षेत्र में अत्यन्त उच्चस्तरीय साधना मानी गई है, वामा क्षेपा जैसे तांत्रिक ने भी स्वीकार किया है कि दिगम्बरी दक्षिण काली साधना सर्वाधिक गूढ गुप्त अलौकिक अद्वितीय और अनुपम है, पूर...
Tripura Bhairavi भगवती त्रिपुर भैरवी महाभैरव की ही शक्ति हैं नित्य प्रलय आद्या शक्...
Shri Suktam Shri Suktam: Laxmi Stotra ?? Shri Suktam: Laxmi Stotra - The Divine Path to Abundance and Prosperity ?? "श्रीसूक्त (ऋग्वेद)" श्री सूक्तम् ( Sri Suktam )– देवी लक्ष्मी ( Lakshmi ) जी की आराधना के लिए उनको समर्पित संस्कृत में लिखा मंत्र है जिसे हम श्री सूक्त ( Sri Sukt ) या लक्ष्मी सूक्त ( Lakshmi Sukt )भी कहते है | इस पवित्र शक्तिशाली श्री सूक्त का पाठ करने से मैं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है | सभी प्रकार के दुःख और गरीबी दूर होती है | श्री सूक्त का नित्य पाठ करने से मनुष्य के जीवन में अपर सुख और संपत्ति आती है | श्री सूक्त माँ लक्ष्मी जी को अति प्रिय है इसलिए मन में माँ लक्ष्मी जी के प्रति पूर्ण श्रद्धा रखते हुए इस श्री सूक्त पाठ का श्रवण करें | ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। ...
"Sadhana Prayog Alakshmi Durbhagya Nashak Prayog" means "Practice of Sadhana to remove Alakshmi and misfortune". दिवाली के समय बहुत लोगों को पैसे की तंगी होने लग जाती है. और बहुत लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है जीवन में यह बातें सबको पता है पर उपाय कोई करना नहीं चाहता है सिर्फ एक बात सोचता है कि मेरा दुर्भाग्य है और मैं दुर्भाग्य के साथ ही पैदा हुआ हूं और दुर्भाग्य के साथ में जी रहा हूं. लक्ष्मी भी तभी आती हैं जब आपका मन श्रद्धा से भरा हुआ हो विश्वास हो और आपका घर में सकारात्मक माहौल हो। आपकी पत्नी आपके बच्चे आपके कंट्रोल में हो। ...
?ॐ नमो भगवते वासुदेवाय? भगवत गीता अध्याय 7 श्लोक 22 से 30 (समाप्त) यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयार्चितुमिच्छति । तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम् ॥ (२१) भावार्थ : जैसे ही कोई भक्त जिन देवी-देवताओं के स्वरूप को श्रद्धा से पूजने की इच्छा करता है, मैं उसकी श्रद्धा को उन्ही देवी-देवताओं के प्रति स्थिर कर देता हूँ। (२१) स तया श्रद्धया युक्तस्तस्याराधनमीहते । लभते च ततः कामान्मयैव विहितान्हि तान् ॥ (२२) भावार्थ : वह भक्त सांसारिक सुख की कामनाओं से श्रद्धा से युक्त होकर उन देवी-देवताओं की पूजा-आराधना करता है और उसकी वह कामनायें पूर्ण भी होती है, किन्तु वास्तव में यह सभी इच्छाऎं मेरे द्वारा ही पूरी की जाती हैं। (२२) अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भवत्यल्पमेधसाम् । देवान्देवयजो यान्ति मद्भक्ता यान्ति मामपि ॥ (२३) भावार्थ : परन्तु उन...
The document provides a list of healing codes for various neurological deficits and degeneration symptoms. The codes mentioned include specific numbers for different conditions such as anoxic brain injury, herpes viruses, cellular damages, hardness of hearing and deafness, Amyotrophic Lateral Sclerosis (ALS), cerebral palsy, Guillain–Barré syndrome, Limb Girdle Muscular Dystrophy (LGMD), multiple sclerosis, Parkinson's Disease, dementia, and Alzheimer's dementia. The document suggests that these codes can be used for healing purposes related to neurological deficits and degeneration symptoms. Yes, the document provides healing codes for neurological deficits and degeneration symptoms. Here are some of the codes mentioned: - 66 51 816 for those who suffer anoxic brain injury - 88 21 233 for herpes viruses - 33 45 634 for cellular damages of any sort - 88 33 421 for hardness of hearing and deafness - 87 89 114 for Amyotrophic Lateral Sclerosis (ALS) - 55 96 183 for cerebral palsy - 41 57 051 for recovery from Guillain–Barré syndrome - 53 59 816 for Limb Girdle Muscular Dystrophy (LGMD) - 45 96 151 for multiple sclerosis in general - 19 86 116 for multiple sclerosis relapsing and remitting - 81 23 7961 for Parkinson's Disease - 29 56 932 for dementia (Mental Illness) - 25 49 563 for Alzheimer's dementia These codes can be used for healing neurological deficits and degeneration symptoms according to the document....
प्रचंड माँ तारा प्रत्यंगिरा कवच | Prachanda Maa Tara Pratyangira Kavach || ईश्वर उवाच || ॐ तारायाः स्तम्भिनी देवी मोहिनी क्षोभिनी तथा । हस्तिनी भ्रामिनी रौद्री संहारण्यापि तारिणी ॥ १ ॥ शक्तयोहष्टौ क्रमादेता शत्रुपक्षे नियोजिताः । धारिता साधकेन्द्रेण सर्वशत्रु निवारिणी ॥ २ ॥ || कवचमारम्भम् || ...
inner peace, hanuman mantra to remove black magic in hindi, काला जादू दूर करने के लिए मंत्र । Black Magic Removal घर में नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने केलिए। ब्लैक मैजिक रिमूवल ऑल पर्सन बजरंग बाण का एक प्रयोग किया हुआ उपाय आप लोगों के मध्य बता रहा हूं इसका लाभ समाज को मिले यही उद्देश्य है जिसके घर में ऐसा लगे कि कोई नकारात्मक ऊर्जा है और परेशानी हो रही है तो घर का मुखिया जो पूजा पाठ कर सके वही, पूरे परिवार को शाकाहारी भोजन अपनाना है। घर में साफ सफाई शुद्धता का विशेष ...
1) तंत्र दोष - खुद के लिए और बिज़नेस के लिए 2) ग्रह दोष - 9 ग्रह शांति और दुर्भक्षा मगल शनि राहु केतु निवारण - शुक्र साधना और सूर्य को मजबूत करने हेतु सूर्य सम्मोहन साधना 3 ) भाग्योदय साधना - खुद के लिए और उन्नति के लिए ४) पाप दोष निवारण - पूर्व जन्म कृत दोष निवारण, समस्त दोष निवारण साधना , निष्कीलन साधना खुद के लिए 5 ) शत्रु बांधा निवरण - 52 भैरव साधना,शत्रु नाश और उन्नति के लिए वंगला मुखी साधना, तारा साधना, हनुमान साधना, 6 ) लक्ष्मी साधना - 5 प्रकार की साधना , श्री यन्त्र, कनकधारा , कुबेर, अलक्ष्मी दूर करने के लिए दरिदता निवारण, अस्ट लक्ष्मी साधना ७) ऋण मुक्ति गणपति साधना - गणपति तंत्र 8) कार्य सिद्धि विजय सिद्धि समोहन साधना ...
।। श्रीएकमुखी हनुमत्कवचम् ।। अथ श्री एकमुखी हनुमत्कवचं प्रारभ्यते। मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।। श्रीरामदूतं शिरसा नमामि।। श्रीहनुमते नमः एकदा सुखमासीनं शङ्करं लोकशङ्करम्। ...
शुक्र देव मंत्र, Shukra Yantra Mala Related searches Shukra Yantra Mala शुक्र मंत्र विनियोग, शुक्र मंत्र जाप विधि, शुक्र मंत्र फॉर लव मैरिज, शुक्र मंत्र जप संख्या, शुक्र मंत्र के लाभ, शुक्र मंत्र का जाप कब करना चाहिए, शुक्र पूजा विधि, शुक्र बीज मंत्र जाप, धर्म पथ पर या मोक्ष के मार्ग में जो सबसे बड़ा व्यवधान होता है वो होता है वह होता काम भाव का अति आवेग , वो भी साधना के दिनों में और हद तो तब होती है जब वो आवेग साधनात्मक इष्ट , समबन्धित देवी देवता और यहाँ तक की गुरु के प्रति भी हो जाता जाता है . और यही पर साधक के बस में कुछ नहीं होता. जहाँ जीवन में आर्थिक या अध्यात्मिक उन्नति का परिचायक शनि होता है , वहीं पर उसकी दमित काम भावना, कुत्सित या सुप्त विचार, साधनाओं में व्यवधान के रूप में कामुक चिंतन, स...
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किसी भी प्रकार की गुटिका या यंत्र की आवश्यकता से मुक्त, साधना सामग्री के बंधन से मुक्त स्वयं सदगुरुदेव प्रदत्त प्रयोग ...
श्रीफल तंत्र 1)लाल कपड़े में लपेटकर अपने रुपये रखने वाले स्थान(...
प्रेम के देवता कामदेव के वशीकरण मंत्र से किसी को भी अपनी मुट्ठी में किया जा सकता है: ओम नमो भगवते काम-देवाय श्रीं सर्व-जन-प्रियाय सर्व-जन-सम्मोहनाय ज्वल-ज्वल, प्रज्वल-प्रज्वल, हन-हन, वद-वद, तप-तप, सम्मोहय-सम्मोहय, सर्व-जनं मे वशं कुरु-कुरु स्वाहा। इस मंत्र का इतना गहरा प्रभाव है, जिस किसी को भी ध्यान में रखकर 6 हजार बार जाप किया जाए तो तुरंत असर दिखाता है। आपका बड़े से बड़ा शत्रु, रुठा प्यार या जीवनसाथी तुरंत आपके वशीभूत हो जाएगा। ...
कुंडलिनी जागरण मन्त्र प्रयोग भाग १ ऊं गं गणेशाय नमः: ऊं ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः : ऊं निखिलेश्वरायै नमः : कुन्डलिनी [ Kundalini ] जागरण साधनात्मक जीवन का सौभाग्य है. विशेष तथ्य :- कुन्डलिनी जागरण साधनात्मक जीवन का सौभाग्य है. कुन्डलिनी जागरण साधना गुरु के सानिध्य मे करनी चाहिये. यह शक्ति अत्यन्त प्रचन्ड होती है. इसका नियन्त्रण केवल गुरु ही कर सकते हैं. यदि आपने गुरु दीक्षा नही ली है तो किसी योग्य गुरु से दीक्षा लेकर ही इस साधना में प्रवृत्त हों. यदि गुरु प्राप्त ना हो पाये तो आप मेरे गुरु जी Gurudev Dr. Narayan Dutt Shrimaliji (परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानद जी )को गुरु मानकर उनसे मानसिक अनुमति लेकर जाप कर सकते हैं . साधना सामग्र्री चेतना यन्त्र , चेतना माला , रुद्राक्ष माला , या गुरुमाला आसन , पीला , सफ़ेद ऊनी कम्बल पंचौपचार गुरु पूजन करे फिर गुरु मंत्र का ४ माल...
तारा साधना → दर्शन, सिद्धि और धनलाभ हेतु -------- २६-९-१९८७ नवरात्र जोधपुर | धन के मामले मे नियम पालन जरूरी | कब? → किसी भी शुक्ल पक्ष की तृतीया से → लाल आसन, पुष्प,लाल ही मिठाई (केवल दूध का बना) → लाल मूंगा माला| →नियम ::-- (१) एक समय भोजन | (२) जमीन पर सोना | (३) केवल धोती,, (वनियान आदि नहीं ) | (४) पूरे दिन तारा चिंतन | (५) तृतीया के रात थाली मे खलिख से स्त्री का चित्र बना कर, उसे तारा मान कर पुजान करे | (६) दश महाविध्या, गुरु, तारा यंत्र चित्र भी आगे रखे | (७) लाल चावल की ढेरी पर अखण्ड दीपक रखे | (८) दिशा → दक्षिण | (९) दिन को दूसरे से नहीं बोले | (१०) पूरे दिन जाप करे (बिना आसान के, बिना माला) →| ऐं ओं ह्रीं क्रीं हूं फट | (aing Ong Hring Kring Hoom Phat) (११) आसन पर ११ माला ११ दिन जाप करे रात को →| ॐ ह्रीं ह्लिं ह्लिं ओं ओं | (om Hring Hling Hling Ong Ong) #विशेष : →यदि इस विधि से पूर्ण "सहस्त्र देहन्वित तारा सिद्धि...
जय सदगुरुदेव जी...
वीरभद्र, भगवान शिव के परम आज्ञाकारी हैं. उनका रूप भयंकर है, देखने में वे प्रलयाग्नि के समान, हजार भुजाओं से युक्त और मेघ के समान श्यामवर्ण हैं. सूर्य के तीन जलते हुए बड़े-बड़े नेत्र एवं विकराल दाढ़ें हैं. शिव ने उन्हें अपनी जटा से प्रकट किया था. इसलिए उनकी जटाएं साक्षात ज्वालामुखी के लावा के समान हैं. गले में नरमुंड माला वाले वीरभद्र सभी अस्त्र-शस्त्र धारण करते हैं. उनका रूप भले ही भयंकर है पर शिवस्वरूप होने के कारण वे परम कल्याणकारी हैं. शिवजी की तरह शीघ्र प्रसन्न होने वाले है. ...
? ♨️ साधना तो कोई भी कर सकता है ♨️? ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ निरंतर ग्रुप मे पोस्ट की जा रही साधनाओं मे से तो आप कोई भी साधना कर सकते हैं जैसे विष्णु , लक्ष्मी ,नवग्रह महागणपति, जगदंबा, स्त्रोत आदि एवं अन्य सौम्य साधनाएं ...परंतु आप तीक्षण साधनाए नहीं कर सकते क्योंकि उसके लिए योग्य गुरु से मार्गदर्शन और अनुमति प्राप्त करना बहुत जरूरी है योग्य गुरु के मार्गदर्शन में साधना करना इसलिए जरूरी है क्योंकि निरंतर मंत्र जाप करने पर निरंतर साधना करने से साधक के शरीर में अत्यंत तीव्र ऊर्जा का निर्माण होता है जिसे योग्य गुरु अपने शिष्य की इस ऊर्जा पर बराबर नियंत्रण व संतुलन बनाए रखते हैं जिससे शिष्य को किसी प्रकार की कोई हानी नहीं उठानी पड़ती साधक की साधना में त्रुटि हो जाने पर उसे अपनी शक्ति के माध्यम से पूर्ण कर देते हैं एवं शिष्य को साधना हेतु उचित मार्गदर्शन प्रदान करते हैं जिससे शिष्य तीक्ष्ण ...
ॐ निखिलं ?? मंत्र-विधियाँ क्यों नहीं करते हैं काम? Why do mantras not work 〰️〰️?〰️〰️?〰️〰️?〰️〰️ ?आपने अक्सर सत्संग में सुना होगा, रामायण, महाभारत या वेदों आदि में पढ़ा होगा कि प्राचीन काल में तपस्वी लोग मंत्रों की शक्ति से जो चाहे हासिल कर लेते थे। वे जिस चीज का आह्वान करते थे, उसे तुरंत पा लेते थे। आज भी आप जब शारीरिक या आर्थिक रूप से परेशान होते हैं, और किसी ज्योतिषी के पास जाते हैं, तो वह क्या करता है। जन्म पत्रिका देखने के बाद पीड़ित ग्रह की शांति के लिए कुछ उपाय बता देता है और कुछ मंत्रों का जाप करने के लिए कहता है। ऐसे में कई बार लोग सवाल करते हैं कि उन्होंने मंत्रों का जाप तो किया, लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली। आखिर ऐसा क्यों होता है कि जो मंत्र प्राचीन काल में सिद्ध थे, उनका प्रभाव आज कम दिखता है या नहीं दिखता है। मंत्रों की शक्ति प्रभावी क्यों नहीं होती है।...
तीव्र आकर्षण साधना –गुमशुदा व्यक्ति को बुलाने के लिए गुमशुदा व्यक्तियों को वापिस बुलाने के लिए मैंने इस साधना का प्रभाव बहुत अचरजकारी है. और अन्य मन्त्रों के बजाय इसे सिद्ध करने में कोई दिक्कत भी नहीं आती, नवरात्री में १०,००० की संख्या में इस मन्त्र को कर लेने से ये सिद्ध हो जाता है , सामने तीव्र आकर्षण यन्त्र रख कर मूंगा माला से इस मंत्र को १४ माला नित्य करने से ९ दिन में ये साधना सिद्ध हो जाती है. मन्त्र सिद्ध हुआ या नहीं इसका परीक्षण करने के बिनोला,पीली सरसों,तथा चूहे के बिल की मिटटी को मिला निम्न मंत्र से १०८ बार अभिमंत्रित करे,और एक सरकंडे को बीच में से चीर कर दो अलग अलग लोगो को जोर से पकडे रहने के लिए दे दे , और मन्त्र पढ़ कर उस अभिमंत्रित मिश्रण को उस सरकंडे पर मारे .यदि सरकंडा आपस में ...
हिन्दू धर्म एक मात्र ऐसा धर्म है जिसमें जितना सम्मान और महत्व देव पूजा को दिया जाता है उतना ही सम्मान देवी पूजन को भी दिया जाता है | माँ दुर्गा को सबसे बड़ी शक्ति के रूप में पूजा जाता है | माँ दुर्गा के अनेक रूप है जिनका विस्तार से वर्णन मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत देवी महात्यम में किया गया है | माँ दुर्गा की पूजा -आराधना और उनकी विशेष कृपा पाने हेतु दुर्गा सप्तशती का पाठ करना सर्वोतम माना गया है |दुर्गा सप्तशती का पाठ करने में पूजा-विधान बहुत बड़ा होने के साथ-साथ समय भी अधिक लगता है | इसलिए जो भक्त इस पाठ के लिए समय नहीं निकाल पाते उनके लिए सिद्ध कुंजिका स्त्रोत/Siddha Kunjika Stotram का पाठ भी सप्तशती पाठ के समान ही फल देने वाला है | Siddha Kunjika Stotram/सिद्ध कुंजिका स्त्रोत :- सिद्ध कुंजिका स्त्रोत , दुर्गा सप्तशती पाठ का सार माना गया है | इसलिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से म...
कालाष्टमी( कालभैरव जयंती ) शिव के रूधिर से भैरव की उत्पत्ति हुई। बाद में उक्त रूधिर के दो भाग हो गए- पहला बटुक भैरव और दूसरा काल भैरव। मुख्यत: दो भैरवों की पूजा का प्रचलन है, एक काल भैरव और दूसरे बटुक भैरव। पुराणों में भगवान भैरव को असितांग, रुद्र, चंड, क्रोध, उन्मत्त, कपाली, भीषण और संहार नाम से भी जाना जाता है। भगवान शिव के पांचवें अवतार भैरव को भैरवनाथ भी कहा जाता है। नाथ सम्प्रदाय में इनकी पूजा का विशेष महत्व है। कालाष्टमी को काला अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है और हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान इसे मनाया जाता है। कालभैरव के भक्त साल की सभी कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा और उनके लिए उपवास करते हैं। सबसे मुख्य कालाष्टमी जिसे कालभैरव जयन्ती के नाम से जाना जाता है, उत्तरी भारतीय पूर्णीमांत पञ्चाङ्ग के अनुसार मार्गशीर्ष के महीने में पड़ती है जबकि दक्षिणी भारतीय अ...
नाग दोष शान्ति - नाग दोष शान्ति - कालसर्प दोष शांति, Nag Panchami & Kaal Sarp Dosh Shanti एक भाग दूध + 19 भाग जल मिलकर उस से शिव जी का अभिषेक पंचाक्षरी /मृत्युंजय /रूद्र सूक्त /रुद्राष्टाध्यायी या /शिवाष्टक से सवा दो या ढाई घण्टा तक करें उन पर चांदी का नाग नागिन का जोड़ा चढ़ाएं और अभिषेक उपरान्त नाग युगल को जल प्रवाह कर दें। विशष्ट पीड़ा होने पर नाग बाम्बी की मिट्टी मिलाकर पार्थिव निर्माण भी किया जाता है पूजन अभिषेक आदि प्रयोजनार्थ । ...
प्रचंड भगवती धूमावती साधना: प्रचंड भगवती धूमावती साधना, Mahavidya Dhumavati Sadhana, Silence of Prachanda Bhagwati dhumavati प्रचंड भगवती धूमावती तंत्र की सातवीं महाविद्या के रूप में जगत प्रसिद्ध हैं। दतिया (म. प्र.) के बगलामुखी सिद्ध पीठ महादेवी के समीप ही भगवती धूमावती का भी सिद्ध स्थान है। -मां भगवती धूमावती की साधना विधि इस प्रकार है। श्यामांगी रक्तनयनां श्याम वस्त्रोत्तरीयकां । वामहस्ते शोधनं च दक्षिणहस्ते च सूर्पकम्।। धृत्वा विकीर्ण केशांश्च धूलि धूसर विग्रहा। लम्बोष्ठी शुभ्र-दशनां लंबमान पयोधराम्।। संल...
हवन में कौनसे फल अर्पित करने से क्या लाभ मिलता है ? श्री फल जिसको बेल भी कहते है से लक्ष्मी प्राप्ति होती है , क्रमुक से भोग , नारंगी से सौंदर्य , कटहल से कांति , नारियल से वशीकरण , निम्बू से शत्रुनाश , आम से राज्य लाभ , जामुन से स्तम्भन , केला से सर्व सिध्ही , कैथ से उछाटन, बेर से पोरुशता, मुनक्के से मोक्ष , गुलर से धर्म , जायफल से वशीकरण , कुष्मांड से गृह शांति , रुद्राक्ष से मोक्ष मिलता है . अपनी अपनी कामना के अनुसार साधक को हवन सामग्री में इन फ्लो को मिला लेना चाहिए. ...
धूमावती जयंती विशेष दस महाविद्याओं में सातवीं महाविद्या हैं माँ धूमावती। इन्हे अलक्ष्मी या ज्येष्ठालक्ष्मी यानि लक्ष्मी की बड़ी बहन भी कहा जाता है। ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष अष्टमी को माँ धूमावती जयन्ति के रूप मइ मनाया जाता है। मां धूमावती विधवा स्वरूप में पूजी जाती हैं तथा इनका वाहन कौवा है, ये श्वेत वस्त्र धारण कि हुए, खुले केश रुप में होती हैं। धूमावती महाविद्या ही ऐसी शक्ति हैं जो व्यक्ति की दीनहीन अवस्था का कारण हैं। विधवा के आचरण वाली यह महाशक्ति दुःख दारिद्रय की स्वामिनी होते हुए भी अपने भक्तों पर कृपा करती हैं। इनका ध्यान इस प्रकार बताया है ’- अत्यन्त लम्बी, मलिनवस्त्रा, रूक्षवर्णा, कान्तिहीन, चंचला, दुष्टा, बिखरे बालों वाली, विधवा, रूखी आखों वाली, शत्रु के लिये उद्वेग कारिणी, लम्बे विरल दांतों वाली, बुभुक्षिता, पसीने से आद्र्र, स्तन नीचे लटके हो, सू...
यह साधना हिंदू परिवारों के लिए की जानी चाहिये। जो मुस्लिमो के अत्याचार से ग्रस्त है , या बॉर्डर पर , आप के घर पर युद्ध जैसे आपात काल हो तो इस मंत्र का जाप अगर किया जाये तो सभी समस्या से आप का राहत मिलेगा, कोई बीमारी हो , बहुत परेशांन हो किसी के दुश्मनी के कारन , ऑफिस , घर बहार हर जगह , लड़की के लिए जो बहार काम करती है या घर पर अकेली रहती है , पुरुष के लिए भी सभी समस्या का निदान तुरत मिलता है | बहुत से लोगो का मात है की कलयुग में मंत्र काम नहीं करते है | ये सत्य है पर पूरा नहीं ? जिस मंत्र के देने वाले सद्गुरु निखिल हो वो खुद में चेतनाय होते है बस आप श्रद्धा विश्वास की जरुआत होती है नित्य कर्म में ऐसे शामिल कर ले १० मिंनट या ३२ मिंनट , १ घंटे जाप से आप को पुण्य सुरक्षा के साथ आप के घर में धन की कभी भी कमी नहीं होता है | आप खुदगर्ज नहीं बने ? धरम की रक्षा तभी होगी शक्ति से सम्पन्य होंगे ? और कोई आप प...
नवार्ण और नवदुर्गा मंत्र साधना. दुर्गा पूजा शक्ति उपासना का पर्व है। नवरात्र में मनाने का कारण यह है कि इस अवधि में ब्रह्मांड के सारे ग्रह एकत्रित होकर सक्रिय हो जाते हैं, जिसका दुष्प्रभाव प्राणियों पर पड़ता है। ग्रहों के इसी दुष्प्रभाव से बचने के लिए नवरात्रि में दुर्गा की पूजा की जाती है।दुर्गा दुखों का नाश करने वाली देवी है। इसलिए नवरात्रि में जब उनकी पूजा आस्था, श्रद्धा से की जाती है तो उनकी नवों शक्तियाँ जागृत होकर नवों ग्रहों को नियंत्रित कर देती हैं। फलस्वरूप प्राणियों का कोई अनिष्ट नहीं हो पाता। दुर्गा की इन नवों शक्तियों को जागृत करने के लिए दुर्गा के 'नवार्ण मंत्र' का जाप किया जाता है। नव का अर्थ नौ तथा अर्ण का अर्थ अक्षर होता है। मा...
उच्छिष्ट गणपति मंत्र साधना. उच्छिष्ट गणपति साधना करने में अत्यन्त सरल, शीघ्र फल को प्रदान करने वाला, अन्न और धन की वृद्धि के लिए, वशीकरण को प्रदान करने वाला भगवान गणेश जी का ये दिव्य तांत्रिक साधना है । इसकी साधना करते हुए मुह को जूठा रखा जाता है एवं सुबह दातुन भी करना वर्जित है । उच्छिष्ट गणपति साधना को जीवन की पूर्ण साधना कहा है। मात्र इस एक साधना से जीवन में वह सब कुछ प्राप्त हो जाता है, जो अभीष्ट लक्ष्य होता है। अनेक इच्छाएं और मनोरथ पूरे होते हैं। इससे समस्त कर्जों की समाप्ति और दरिद्रता का निवारण,निरंतर आर्थिक-व्यापारिक उन्नति,लक्ष्मी प्राप्ति,रोजगार प्राप्ति,भगवान गणपति के प्रत्यक्ष दर्शनों की संभावना भी है। यह साधना किसी भी बुधवार को रात्री मे संपन्न किया जा सकता है। साधक निम्न सामग्री को पहले से ही तैयार कर लें, जिसमें जल पात्र, केसर, कुंकुम, चावल, पुष्प, माल...
ललिताम्बा साधना विश्वामित्र ओज और साहस की प्रतिमूर्ति थे , भारतीय ऋषियों का दर्प वर्णित करता व्यक्तित्व जिनकी तो कोई मिसाल ही नहीं । जिनकी प्रत्येक साधना पद्वति धरा से हटकर नवीन और चुनौती भरी है । वे ही पहले ऋषि हुए है जिन्होंने लक्ष्मी के आगे हाथ नहीं जोड़े । सर्वथा नवीन पद्वति से लक्ष्मी को बाध्य कर दिया की वह उनके आश्रम में आकर स्थापित हो ।ब्रम्हऋषि विश्वामित्र ने जीवन की अक निराली साधना रच डाली जिसका नाम है "ललिताम्बा साधना" । जीवन में हमे किसी के आगे हाथ न जोड़ना पड़े , हमारे मनोवांछित कार्य सम्पन्न होते रहे ऐसी जीवन शैली संभव हो सकती है विश्वामित्र प्रणीत "ललिताम्बा साधना" से । आज के युग में यह साधना परम आवश्यक है । महर्षि विश्वामित्...
भय मुक्ति प्रयोग(जो डर गया समझो मर गया ) गुरु पूजन कर गुरु मन्त्र ४ माला और १ माला चेतना और १ माला गायत्री मन्त्र के जाप के बाद आप प्रातः 5 बजे सफ़ेद आसन पर बैठ कर विद्धुत माला धारण करें तथा ५ मिनट तक अपनी श्वांस के आवागमन पर मन को केन्द्रित करें, ५ मिनट के बाद अपने मन को भ्रू मध्य मे एकाग्र करते हुए निम्न मंत्र का 32 मिनट तक जप करें| हरी ॐ 3 बार बोले फिर सोऽहं १० मिनट का जाप करे दोनों आँखों को बंद कर फिर निम्न मंत्र का 32 मिनट तक जप करें| !! ॐ सं क्षं हंसः ह्रीं ॐ फट !! ज...
मंगलवार को अष्टधातु का कड़ा बनवायें शनिवार को घर ले आयें। फिर शनिवार को ही एक कच्चा नारियल और वह कड़ा हनुमान जी के मंदिर में जाकर हनुमान जी के विग्रह के सामने रखकर पूर्ण मनोभाव से हनुमान चालीसा का पाठ करें । अपने मनोकामना या रोग मुक्ति की प्रार्थना करें । फिर हनुमत् विग्रह से थोड़ा या सिंदूर लेकर कड़े पर व अपने ललाट पर लगा कर अपने दाहिने हाथ में पहन लें । यह कड़ा बहुत महत्वपूर्ण है । यह हनुमान जी आशीर्वादात्मक प्रभाव युक्त है । जीवन में चाहे कितनी कठिन बीमारी या रोग क्यों न हो वह धीरे धीरे दूर होता ही है । और सही दवा और माहौल स्वत: ही बन जाता है । लेकिन इस में आचरण और खान पान शुद्ध रखना जरूरी है । साथ ही यह भी जरूरी है कि ११ मंगलवार के भीतर हनुमान चालीसा के कम से कम १०० पाठ पूरे कर लेने चाहिये । यह प्रयोग अनुभूत है ।...
सर्व सिद्धि दायक सफलता प्रयोग / सर्व दोष निवारण प्रयोग by Dr Narayan Dutt Shrimali ji sarv siddhi daayak saphalata prayog / sarv dosh nivaaran prayog We do various mantra sadhana but fail to get desired results. Which is mainly due to various Doshas & shortcomings in our life & karma. These can be easily removed by doing this rare sadhana which helps in achieving success in all other sadhanas by removing Obstacles in our way. Jai Sadgurudev Bhagwan Nikhileshwaranand ji Maharaj ki https://www.youtube.com/watch?v=REvdCjt5eNM ...
महाविद्यायों में द्वितीय स्थान पर विद्यमान 'तारा', मोक्ष दात्री। ॐ प्रत्यालीढ़ पदार्पिताग्ध्रीशवहृद घोराटटहासा परा खड़गेन्दीवरकर्त्री खर्परभुजा हुंकार बीजोद्भवा, खर्वा नीलविशालपिंगलजटाजूटैकनागैर्युता जाड्यन्न्यस्य कपालिके त्रिजगताम हन्त्युग्रतारा स्वयं सर्व विघ्नों का नाश करने वाली महाविद्या तारा, स्वयं भगवान शिव को अपना स्तन दुग्ध पान करा, पीड़ा मुक्त करने वाली। 'आद्या शक्ति महा-काली' ने, हयग्रीव नमक दैत्य के वध हेतु नीला वर्ण धारण किया तथा वे उग्र तारा के नाम से जानी जाने लगी। ये शक्ति, प्रकाश बिंदु के रूप, आकाश के तारे की तरह स्वरूप में विद्यमान हैं, फलस्वरूप ...
तंत्र की रहस्यमयी-अद्भुत वस्तुएँ - भाग २ सियार सिंगी, गीदढ़ सिंगी, जम्बुकी प्राणी विशेषज्ञों की मान्यता के अनुसार सियारों के सींग नहीं होते. पर यह प्रकृति का आश्चर्य ही है कि जब वह गर्दन झुका कर हुआं हुआं करता है तब उसके सर पर एक छोटा सा सींग निकल आता है. यह करीब १ या २ इंच के लगभग होता है. इसके चारों ओर भूरे बाल होते हैं. कहते हैं कि जब यह हुआं-हुआं करता है तब ये सींग बाहर उभर आता है उस समय यह प्राप्त किया जाता है. इसी को सियार सिंगी कहते हैं. इसकी पहचान यह है कि यह हड्डी के समान होता है तथा ऊपरी भाग एकदम नुकीला और भूरे बालों से ढका रहता है. इसको कुछ अन्य वस्तुएं जैसे उड़द की दाल, कपूर और लोंग इत्यादि के साथ सिन्दूर में रखा जाता है. सिन्दूर पाकर इसके बाल बढ़ने लगते हैं यही इसकी असली पहचान है. कहा जा...
क्या आप जानते है बड़े काम की और चमत्कारी होती है गूंजा =============================== गुंजा या रत्ती (Coral Bead) लता जाति की एक वनस्पति है। शिम्बी के पक जाने पर लता शुष्क हो जाती है। गुंजा के फूल सेम की तरह होते हैं। शिम्बी का आकार बहुत छोटा होता है, परन्तु प्रत्येक में 4-5 गुंजा बीज निकलते हैं अर्थात सफेद में सफेद तथा रक्त में लाल बीज निकलते हैं। अशुद्ध फल का सेवन करने से विसूचिका की भांति ही उल्टी और दस्त हो जाते हैं। इसकी जड़े भ्रमवश मुलहठी के स्थान में भी प्रयुक्त होती है। इसको चिरमिटी, धुंघची, रत्ती आदि नामों से जाना जाता है। इसे आप सुनारों की दुकानों पर देख सकते हैं। इसका वजन एक रत्ती होता है, जो सोना तोलने के काम आती है। यह तीन रंगों में मिलती है। सफेद गुंजा का प्रयोग तंत...
" नवरात्र या नवरात्रि " जानिए नवरात्र से जुड़े तथ्य ... संस्कृत व्याकरण के अनुसार नवरात्रि कहना त्रुटिपूर्ण हैं। नौ रात्रियों समूह होने के कारण से द्वन्द समास होने से यह शब्द पुलिंग रूप ' नवरात्र ' कहना उचित है। पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के काल मे एक साल की चार संधियाँ हैं। उनमे मार्च व सितंबर माह मे पड़ने वाली संधियों मे साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक संभावना होती है। दिन और रात के तापमान मे अंतर के कारण , ऋतु संधियों मे प्रायः शारीरिक बीमारियाँ बढ़ती हैं, दरअसल, इस शक्ति साधना के पीछे छुपा व्यावहारिक पक्ष यह है कि नवरात्र का समय मौसम के बदलाव का होता है। आयुर्वेद के अनुसार इस बदल...
कुलदेवी कृपा प्राप्ति साधना कुलदेवी सदैव हमारी कुल कि रक्षा करती है,हम पर चाहे किसी भी प्रकार कि कोई भी बाधाये आने वाली हो तो सर्वप्रथम हमारी सबसे ज्यादा चिंता उन्हेही ही होती है.कुलदेवी कि कृपा से कई जीवन के येसे कार्य है जिनमे पूर्ण सफलता मिलती है. कई लोग येसे है जिन्हें अपनी कुलदेवी पता ही नहीं और कुछ येसे भी है जिन्हें कुलदेवी पता है परन्तु उनकी पूजा या फिर साधना पता नहीं है.तो येसे समय यह साधना बड़ी ही उपयुक्त है.यह साधना पूर्णतः फलदायी है और गोपनीय है.यह दुर्लभ विधान मेरी प्यारी गुरुभाई/बहन कि लिए आज सदगुरुजी कि कृपा से हम सभी के लिये. इस साधना के माध्यम से घर मे क्लेश चल रही हो,कोई चिंता हो,या बीमारी हो,धन कि कमी,धन का सही तरह से इस्तेमाल न हो,या देवी/देवतओं कि कोई नाराजी हो त...
श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र / Shri Hanuman Vadvanal Stotra रावण के भाई श्री विभीषण जो की भगवान राम व हनुमान जी के अनन्य भक्त थे, अपनी पूजा में वो निरंतर दोनों की पूजा किया करते थे। भक्त विभीषण ने कष्टों से मुक्ति व सुरक्षा हेतु उन्होंने 'हनुमद वडवानल स्तोत्र' की रचना करी। इस चमत्कारी वडवानल स्तोत्र पर भगवान श्रीराम व हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त तो है ही साथ में विभीषण का तप बल भी इस स्तोत्र के साथ है। अत: इस शक्तिशाली स्तोत्र के पाठ से न सिर्फ व्यक्ति सुरक्षित महसूस करता है अपितु उसकी अभीष्ठ इच्छा की भी पूर्ति होती है। यह स्तोत्र सभी रोगों के निवारण में, दूसरों के द्वारा किए गए पीड़ा कारक कार्यों से बचाव, राज-बंधन विमोचन आदि कई प्रयोगों में काम आता है। विधि:- सरसों के तेल का दीपक जलाकर 108 पाठ नित्य 41 दिन तक करने पर सभी बाधाओं का शमन होकर अभीष्ट क...
?जानिए कैसे असर करते हैं मंत्र ? मंत्र शब्दों का एक खास क्रम है जो उच्चारित होने पर एक खास किस्म का स्पंदन पैदा करते हैं, जो हमें हमारे द्वारा उन स्पंदनों को ग्रहण करने की विशिष्ट क्षमता के अनुरूप ही प्रभावित करते हैं। हमारे कान शब्दों के कुछ खास किस्म की तरंगों को ही सुन पाते हैं। उससे अधिक कम आवृत्ति वाली तरंगों को हम सुन नहीं पाते। हमारे सुनने की क्षमता 20 से 20 हजार कंपन प्रति सेकेंड हैं, पर इसका यह अर्थ नहीं कि अन्य तरंगे प्रभावी नहीं है। उनका प्रभाव भी पड़ता है और कुछ प्राणी उन तरंगों को सुनने में सक्षम भी होते हैं। जैसे- कुछ जानवरों और मछलियों को भूकंप की तरंगों की बहुत पहले ही जानकारी प्राप्त हो जाती है और इनके व्यवहार में भूकंप आने के पहले ही परिवर्तन दिखाई देने लगता है। इन्हीं सिद्वांतों पर आज की बेतार का तार प्रणाली भी कार्य करती है। इसे इस उदाहरण के द्वारा आसानी ...
व्यापार वृधि के लिए १. यदि परिश्रम के पश्चात् भी कारोबार ठप्प हो, या धन आकर खर्च हो जाता हो तो यह टोटका काम में लें। किसी गुरू पुष्य योग और शुभ चन्द्रमा के दिन प्रात: हरे रंग के कपड़े की छोटी थैली तैयार करें। श्री गणेश के चित्र अथवा मूर्ति के आगे“संकटनाशन गणेश स्तोत्र´´ के 11 पाठ करें। तत्पश्चात् इस थैली में 7 मूंग, 10 ग्राम साबुत धनिया, एक पंचमुखी रूद्राक्ष, एक चांदी का रूपया या 2 सुपारी, 2 हल्दी की गांठ रख कर दाहिने मुख के गणेश जी को शुद्ध घी के मोदक का भोग लगाएं। फिर यह थैली तिजोरी या कैश बॉक्स में रख दें। गरीबों और ब्राह्मणों को दान करते रहे। आर्थिक स्थिति में शीघ्र सुधार आएगा। 1साल बाद नयी थैली बना कर बदलते रहें। 2॰ किसी के प्रत्येक शुभ कार्य में बाधा आती हो या विलम्ब होता हो तो रविवार को भैरों जी के मंदिर में सिंदूर का चोला चढ़ा कर&nbs...
साधना:- तंत्र साधना, मंत्र साधना, यन्त्र साधना, योग साधना यह पोस्ट मैं उन सभी लोगों के लिए लिख रहा हूँ जो तंत्र, मंत्र, यन्त्र साधना ,तांत्रिक तथा वाम मार्गी के बारे में जानना चाहते है। यह पोस्ट उन लोगों के लिए भी है जिनके मन में तंत्र से जुडे कुछ संदेह हैं। तथा यह उन लोगों के लिए भी हैं जो हमारे हिंदू संस्कृति की सही खोज में लगे हैं। ...
एस्ट्रोलॉजी के अनुसार प्रेम और काम भावनाओं का कारक शुक्र ग्रह है और प्यार के देवता कामदेव माने गए हैं। अगर आप किसी को आकर्षित करना चाहते हैं या अपनी सेक्स पावर बढ़ाना चाहते हैं तो शुक्र एवं कामदेव को प्रसन्न करना चाहिए। कामदेव मंत्र (Kamdev Mantra) कामदेव का यह मंत्र बढ़ाता है आपकी सेक्स पॉवर 'ऊँ कामदेवाय विद्महे, रति प्रियायै धीमहि, तन्नो अनंग प्रचोदयात्।' इस मंत्र से दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है। सुयोग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है। शाबर मंत्र (Shabar Mantra) कामदेव का शाबर मंत्र भी बढ़ाता है सेक्स पॉवर 'ऊँ नमो भगवते कामदेवाय यस्य यस्य दृश्यो भवामि यस्य यस्य मम मुखं पश्यति तं तं मोहयतु स्वाहा।' कहा जाता है कि इस मंत्र के जप से व्यक्ति में आकर्षण शक्ति और यौन क्षमता में वृद्धि होती है। शुक्र मंत्र (Shukra Mantra) शुक्र मंत्र स...
नील सरस्वती स्तोत्रम् श्री गणेशाय नमः ॥ घोररूपे महारावे सर्वशत्रु भयङ्करी । भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥१॥ ॐ सुरासुरार्चिते देवि सिद्ध गन्धर्व सेविते । जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥२॥ जटाजूट समायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणी । द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥३॥ सौम्यक्रोधधरे रूपे चण्डरूपे नमोऽस्तु ते । सृष्टिरूपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणागतम् ॥४॥ जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला । मूढतां हर मे देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥५॥ ह्रूं ह्रूंकारमये देवि बलिहोमप्रिये नमः । उग्रतारे नमो नित्यं त्राहि मां शरणागतम् ॥६॥ बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देवि मे । मूढत्वं च हरेर्देवि त्राहि मां शरणागतम् ॥७॥ इन्द्रादिविलसन्देववन्दिते करुणामयी । तारे तारधिनाथास्थे त्राहि मां शरणागतम् ॥८॥ ॥...
आदित्य हृदय स्तोत्र in hindi आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ pdf आदित्य हृदय स्तोत्र के लाभ आदित्य हृदय स्तोत्र इन हिंदी आदित्य हृदय स्त्रोत आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ pdf download आदित्य हृदय स्त्रोत से लाभ विनियोग ॐ अस्य आदित्यह्रदय स्तोत्रस्य अगस्त्यऋषि: अनुष्टुप्छन्दः आदित्यह्रदयभूतो भगवान् ब्रह्मा देवता न...
विजय प्राप्ति प्रत्यगिंरा प्रयोग भगवती प्रत्यंगिरा देवी का अत्यंत उग्र रूप है.ईनकी कृपा से साधक जीवन के हर क्षेत्र मे विजय प्राप्त करता है.पंरतु यह देवी साधना मे साधक से अटूट श्रद्धा की आशा करती है,और अटूट श्रद्धा होने पर निश्चित हि साधक को ईच्छित फल की प्राप्ती होती है.प्रस्तुत प्रयोग,साधक को न्यायालय से जुड़े कार्यो मे सफलता दिलाता है.जो लोग प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रह है.वह भी ईस साधना को कर अपनी सफलता के अवसर बड़ा सकते है.यदि लाख परिश्रम के पश्चात भी आपको किसी कार्य मे सफलता नही मिल रही है तो यह प्रयोग कर आप सफलता के निकट पहुँच सकते है. प्रस्तुत प्रयोग आप किसी भी मंगलवार की रात्री को १० के बाद आरंभ कर सकते है.स्नान कर लाल वस्त्र धारण कर लाल आसन पर उत्तर की और मुख कर बैठ जाये.अब एक कागज़ पर हल्दि के घोल से अनार की अथवा पिपल की कलम से एक स्त्री का चित्र बन...
उपाय -गोमती चक्र गोमती चक्र कम कीमत वाला एक ऐसा पत्थर है जो गोमती नदी में मिलता है। विभिन्न तांत्रिक कार्यों तथा असाध्य रोगों में इसका प्रयोग होता है। इसका तांत्रिक उपयोग बहुत ही सरल होता है। किसी भी प्रकार की समस्या के निदान के लिए यह बहुत ही कारगर उपाय है। 1- यदि घर में भूत-प्रेतों का उपद्रव हो तो दो गोमती चक्र लेकर घर के मुखिया के ऊपर घुमाकर आग में डाल दें तो घर से भूत-प्रेत का उपद्रव समाप्त हो जाता है। 2- यदि घर में बीमारी हो या किसी का रोग शांत नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर उसे चांदी में पिरोकर रोगी के पलंग के पाये पर बांध दें। उसी दिन से रोगी को आराम मिलने लगता है। 3- प्रमोशन नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें और सच्चे ह्रदय से प्रार्थना करें। निश्चय ही प्रमोशन के रास्ते खुल जाएंगे। 4- व्यापार वृद्धि के लिए दो गोमती चक्र लेकर उसे बां...
किसी भी महाविद्या की पूर्ण सिद्धि तभी संभव है जब आपको उसके समस्त रहस्यों का पता हो और पूर्ण वीर भाव से उसे करने के लिए आप संकल्पबद्ध हों . अन्य साधनाएं तो आप फिर भी कर सकते हैं पर महाविद्या साधनाओं के लिए अलग जीवन चर्या का ही पालन किया जाता है .संयमित और मर्यादित जीवन जीते हुए आप इन साधनाओं को निश्चित रूप से सिद्ध कर सकते हैं. जरा सा भी भय आपके मन में हो तो इन साधनाओं को नहीं करना चाहिए . इन साधनाओं की सफलता के लिए यदि स्थापन दीक्षा या पूर्णरूपेण सफलता प्राप्ति दीक्षा ले ली जाये तो सफलता असंदिग्ध रहती है.धूमावती साधना साधक के जीवन को अद्भुत अभय से आप्लावित कर देती हैं , हाँ ये सत्य है की संहार की चरम सीमा यदि कोई है तो वो यही हैं . साधक के जीवन को अभाव और शत्रु से पूर्ण रूपेण मुक्त कर देती हैं साथ ही देती हैं शमशान साधनाओं में सफलता , प्रेत और तंत्र बाधा निवारण और आत्म आवाहन साधनाओं में सफलता ...
केवल सनातन हिन्दू धर्म मे ही पुनर्जन्म की अवधारणा है, जिस जीव ने जन्म लिया है , वो अवश्य ही दूसरा जन्म लेगा ...किन्तु यदि मृत्यु पूर्व जीव की कोई इच्छा रह गई हो , कोई पापकर्म रहा हो अथवा अकाल मृत्यु हुई हो ... ऐसे मे उस जीव की आत्मा का पुनर्जन्म नहीं हो पाता और आत्मा संतुष्टि के अभाव मे भटकती रहती है , जिससे उस आत्मा के वंशजों पर बुरा प्रभाव पड़ता है , जिसे हम ‘ पित्रदोष ‘ कहते हैं । शास्त्रों के अनुसार हमारे मृत पूर्वजों और परिवार जनों को पितृ देवता माना जाता है। पितृ देवता की कृपा के बिना किसी भी व्यक्ति को सुख प्राप्त नहीं हो सकता है। ज्योतिषशास्त्र में कई प्रकार के दोषों के बारे में बताया गया है। इनमें पितृदोष भी एक है। यह दोष जन्मकुण्डली में तब बनता है जब नवम भाव में राहु, केतु, शनि अथवा मंगल अपनी नीच राशि में बैठा हो। नवमेश के साथ इन ग...
मंत्र-शक्ति की वैज्ञानिकता मंत्र क्या हैं ? मनन करने से जो त्राण करता हैं , रक्षा करता हैं उसे ही मंत्र कहते हैं। मंत्र शब्दात्मक होते हैं ... मंत्र सात्त्विक, शुद्ध और आलोकिक होते हैं । अंत-आवरण हटाकर बुद्धि और मन को निर्मल करतें हैं , मन्त्रों द्वारा शक्ति का संचार होता हैं और उर्जा उत्पन्न होती हैं। आधुनिक विज्ञान भी मंत्रों की शक्ति को अनेक प्रयोगों से सिद्ध कर चुका हैं । समस्त संसार के प्रत्येक समुदाय, धर्म या संप्रदाय के अपने-अपने विशिष्ट मंत्र होतें हैं । अनेक संप्रदाय तो अपने विशिष्ट शक्तियों वाले मन्त्रों पर ही आधारित हैं। मन्त्रों की प्रकृति:मंत्र का सीधा सम्बन्ध ध्वनि से है इसलिए इसे ध्वनि -विज्ञान भी कहतें हैं । ध्वनि प्रकाश, ताप, अणु-शक्ति, विधुत -शक्ति की भांति एक प्रत्यक्ष शक्ति हैं । विज्ञान का अर्थ हैं सि...
ग्रहों का मानव जीवन पर प्रभाव से इंकार नहीं किया जा सकता , मैं ज्योतिष को एक मार्गदर्शक के रूप मे देखता हूँ ... यदि संबन्धित ग्रह का जप पूर्व ही कर लिया जाये तो , शत्रु ग्रह की पीड़ा से बचा जा सकता है और मित्र ग्रह को बलवान बनाया जा सकता है । अपने ज्ञान अनुसार नौं ग्रहों के मंत्र दे रहा हूँ - * सूर्य - "ॐ भास्कराय विधमहे महातेजाये धीमहि तन्नो सूर्य: प्रचोदयात " वैदिक मंत्र - "ॐ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्न मृतं मर्त्त्यंन्च हिरण्येन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्। " वैदिक मंत्र से सूर्य भगवान को प्रातः काल जल का अर्ध्य सिंदूर या लाल फूल डालकर देना चाहिए। " जपाकुसुम संकाश्म काश्पेयम मह धृयुतिम ! तमोsरिं सर्व पापघ्नं प्रणोतोsस्मि दिवाकरम !! " जप संख्या - 7,000 तांत्रिक मंत्र - 1. ॐ ह्रां हृीं हृौं सः सूर्याय नमः 2. ॐ घृणिम सूर्य आदित्...
उपाय -गोमती चक्र गोमती चक्र कम कीमत वाला एक ऐसा पत्थर है जो गोमती नदी में मिलता है। विभिन्न तांत्रिक कार्यों तथा असाध्य रोगों में इसका प्रयोग होता है। इसका तांत्रिक उपयोग बहुत ही सरल होता है। किसी भी प्रकार की समस्या के निदान के लिए यह बहुत ही कारगर उपाय है। 1- यदि घर में भूत-प्रेतों का उपद्रव हो तो दो गोमती चक्र लेकर घर के मुखिया के ऊपर घुमाकर आग में डाल दें तो घर से भूत-प्रेत का उपद्रव समाप्त हो जाता है। 2- यदि घर में बीमारी हो या किसी का रोग शांत नहीं हो रहा हो तो एक गोमत...
21अप्रेल 2015 को है अक्षय तृतीया इस बार 11 साल बाद बन रहा है महामंगल योगlयहा जानिये आप की राशिअनुसार आप को क्या खरीदना शुभ रहेगा? एवं खरीददारी के शुभ मुहूर्तो की जानकारी? वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार इस दिन किए गए शुभ कार्य, दान, उपवास व व्रत का संपूर्ण यानी पूरा फल मिलता है। इसलिए इसे अक्षय (संपूर्ण) तृतीया कहते हैं। इस बार अक्षत तृतीया का पर्व 21 अप्रैल, मंगलवार को है। अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त भी कहते हैं यानी इस दिन विवाह आदि कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखे भी किया जा सकता है। 11 साल बाद बना है महामंगल योग, इस बार अक्षय तृतीया पर 11 साल बाद महामंगल योग बन रहा है। 21 अप्रैल को सूर्य मेष, चंद्रमा वृषभ और गुरु कर्क राशि में रहकर मंगलकारी योग बनाएंगे। इस दिन दोपहर 11.59 बजे तक कृतिका व...
शत्रु स्तंभन प्रयोग Shatru Stambhan Mantra 1. Discover The Power Of शत्रु स्तंभन प्रयोग Shatru Stambhan Mantra - A Potent Mantra To Silence Enemies And Protect Yourself. Explore Its Ancient Origins And Modern Applications. 2. Unlock The Secrets Of The शत्रु स्तंभन प्रयोग Shatru Stambhan Mantra, A Time-honored Practice To Neutralize Adversaries And Safeguard Your Well-being. Learn Its Profound Significance. 3. Harness The Transformative Energy Of The शत्रु स्तंभन प्रयोग Shatru Stambhan Mantra And Reclaim Your Power Over Hostile Forces. Uncover The Wisdom Of This Ancient Practice. शत्रु स्तंभन प्रयोग यह क्रिया आप ८ अप्रेल को करे.समय रात्री ९ से ३ के मध्य का रखे,मुख उत्तर की और रखे.आसन वस्त्र का कोई बंधन नही है.एक निंबू सामने रखे और निम्न मंत्र की एक माला रूद्राक्ष माला से जाप करे. ओम क्रीं हूं क्रीं सर्व शत्रु स्तंभिनी घोर कालिकायै फट् एक माला करे और निंबु मै,एक लौंग गाड़ दे.ईस प्रकार ११ माला करे और एक एक करके ११ लौंग गाड़ दे.अगले दिन या रात्री मे ही निंबु भुमि मे कही गाड़ दे.और एक नारियल गाड़े हुए स्थान पर रख आये. ईससे शत्रु के सारे षड़यंत्र विफल हो जायेंगे. ...
कभी कभी आप ऐसे घरो मे रहने चले जाते है.जहाँ का वातावरण आपको रोगी करने लगता है.आप इतने परेशान हो जाते है कि,कुछ भी करके इस समस्या से मुक्ति पाना चाहते है . मित्रो अगर घर मे नकारात्मक उर्जा हो तो,उपरोक्त समस्या खड़ी हो जाति है.ईसके लिये आवश्यक है कि आप घर सुरक्षित एवं शुद्ध करे .किसी भी दिन से यह क्रिया आरंभ करे.नित्य पुजन के समय एक पात्र मे थोड़ा,दुध और पानी मिलाकर रखे.अब निम्न मंत्र का किसी भी माला से एक माला जाप करे. ह्रीं बाधा निवारिणी सर्व रक्षिणी कामेश्वरी दुर्गायै नमः इस क्रिया के बाद सामने रखा दुध जल घर के सभी सदस्यो को थोड़ा पिलाये और बचा हुआ घर मे छिट दे यह क्रिया नित्य करने पर अनुकुल परिणाम प्राप्त होते है.ओर घर मो निवास कर रही नकारात्मक उर्जा पलायन कर जाती है.ईसके अतिरिक्त रस तंत्र के अनुसार भैरव गुटीका टांग देने से भी घर मे कोइ नकारात्मक उर्जा...
मतारानी आप ही हो..... माँ सब कुछ होती है,उनकी कृपा ना हो तो जीवन अधूरा रहेता है.इससे आगे कुछ लिखने के लिये शब्द नही है. हम सब एक अदृश्य जगमगाती ब्रह्मांडीय शक्ति के ओज में तैर रहे हैं जिसे ‘देवी‘ कहा गया है। देवी या देवी माँ इस सम्पूर्ण सृष्टि का गर्भ स्थान है। वह गतिशीलता, ओज, सुंदरता, धैर्य, शांति और पोषण की बीज हैं। वह जीवन ऊर्जा शक्ति हैं। एक मां को अपने बच्चे के लिये पूरा प्रेम होता है। देवी मां को भी अपने बच्चों के लिये हर हाल में असीम प्रेम है जिसमें इस सम्पूर्ण जगत के सभी जीव शामिल हैं। नवरात्रि के नौ रातों में देवी के सभी नाम रुपों की आराधना की जाती है। नामों का अपना एक महत्व होता है। हम चंदन के वृक्ष को उसके सुगंध की स्मृति द्वारा याद करते हैं। देवी का हरेक नाम और रुप दिव्य शक्ति के एक विलक्षण गुण या स्वरुप का प्रतीक है। हम उस रूप को याद क...
गुप्त नवरात्री -: विशेष यह नवरात्री खास करके इतर योनी से मदत प्राप्त करने हेतु एकदम खास है,यहा पर आज मै विशेष क्रिया बता रहा हू जिससे 100% मनोकामना पूर्ण होता है. आनेवाले शनिवार के दिन सफेद आक के पौधे के पास जाये और वहा पर एक सफेद वस्त्र बिछाये,वस्त्र पर काजल से अपना पूर्ण नाम लिखे और नाम के उपर सव्वा किलो चावल का ढेरी बनाये.अब आक के पौधे को जल चढाये और कुंकुम से रौली से पुजन करे.पुजन के बाद 5 अगरबत्ती जलाये और पौधे की पांच परिक्रमा करके अगरबत्ती को जमीन पर लगादे. अब चावल के ढेरी पर एक मिट्टी का दीपक रखे जिसमे सुगन्धित तेल भरा हो और अपना कामना बोलकर दीपक को प्रज्वलित करदे. यह क्रिया रात को बारा बजे होनी चाहिये सिर्फ इतना ही नियम है.दीपक प्रज्वलित करने के बाद एखादा गुलाब का पुष्प दीपक के पास चढा दिजिये और बिना पीछे मुडे घर को वहा से निकल जाये. अगर किसी प्रकार का आवाज आये तो डरना नही को...
AGHOR SHIV SADHANA कितना भी लिखने का प्रयास करू परंतु मेरे इष्ट शिव जी का स्तुति मेरे लिये संभव नहीं, क्योंकि उनका हर रूप निराला है उनकी पुजा किसी भी समय कीजिये अनुभूतिया तो ऐसा ऐसा मिलेगा के सम्पूर्ण जीवन उनके गुण-गान गाने मे ही निकल जायेगा,ऐसा समय आज तक शिवभक्तों के जीवन मे नहीं आया होगा जिस दिन उन्हे शिव कृपा प्राप्त ना हुआ हो, आज एक दिव्य साधना दे रहा हु जो मेरा ही बल्कि बहुत से शिव साधक या भक्तो का अनुभूतित साधना है | और एक बात इस साधना को किए बिना चाहे कितना भी महाविद्या साधना कर लीजिये प्रत्यक्ष अनुभूतिया शीघ्र नहीं मिलेगा, इसलिये "अघोर शिव साधना" प्रत्येक साधक के जीवन मे लक्ष्य प्राप्ति के और बढ़ने का एक आसान सा मार्ग है,जिसने अघोरत्व प्राप्त कर लिया वह तो जीवन मे सब कुछ प्राप्त कर लेता है अन्यथा जीवन जीने का हर एक अंदाज व्यर्थ ही इच्छा पूर्ति हेतु गवा ही देता है,यह ...
होली विशेष साधना-1, --------------------------------- यह साधना मै प्रत्येक होली के पर्व पर 3 वर्ष से पोस्ट कर रहा हू और सभी ने लाभ उठाया है. यह तीनो साधनाये एक ही दिन की है और प्रत्येक साधना को संपन्न करने मे हर एक साधना के बाद 30-40 मिनिट का आराम करे.येसा करने से आप तीनो साधनाये कर सकते है. तंत्र बाधा निवारण साधना:- आज कल बहोत सारे येसे लोग जो उन्नति मे बाधक बनते है और किसी फाल्तू व्यक्ती को पैसा देकर तंत्र क्रिया करवाते है जिससे सामान्य व्यक्ति को परेशानी को भोगना पडता है,इस साधना को करने से तंत्र दोष बाधा का योग्य निवारण 100% होगा. साधना विधि:- वस्त्र आसन का रंग कोई भी हो परंतु माला काली हकिक की हो जो आसानी से आपको मिल जायेगा. होली के रात मे दक्षिण दिशा मे मुख करके 11 माला मंत्र का जाप करे. मंत्र:- ll ओम श्रीं ह्लीं क्रीं तंत्र निवारण हिडीम्बायै नम :ll ...
माँ गायत्री उपासना. ------------------------------------ गायत्री- साधना से पापमुक्ति गायत्री की अनन्त कृपा से पतितों को उच्चता मिलती है और पापियों के पाप नाश होते हैं.इस तथ्य पर विचार करते हुए हमें यह बात भली प्रकार समझ लेनी चाहिए कि आत्मा सर्वथा, स्वच्छ, निर्मल, पवित्र, शुद्ध बुद्ध और निर्लिप्त है. मै यही चाहता हू जीवन मे पवित्रता हो और सभी पापो का नाश हो,ताकी जीवन मे एक नया उद्देश्य जन्म ले और आनेवाली पीढी को सहजता से हमारे संस्कृति का ग्यान प्राप्त हो. मै इतना बडा उपासक तो नही हू परंतु माँ गायत्री उपासना पर कुछ लिखने की इच्छा रखता हू इसलिये जो कुछ ग्यान है वह शब्दो के स्वरुप मे आपके सामने रखने की एक कोशिश कर रहा हू. मै जब 10 वर्ष का था तक मेरे सभी ब्राम्हण मित्रो के यहा मुंज की जाति थी जिसमे उन्हे उच्चकोटि के ब्राम्हण देवता से गायत्री मंत्र प्राप्त होता था.मैने भी ब्राम्हण देवता के समक्...
पीताम्बरा:-नवग्रह दोष निवारण साधना बगलामुखी जी को ही पीताम्बरा कहा जाता है,यह साधना नवरात्रि मे कियी जाने वाली साधना है और अपना प्रभाव तुरंत ही साधक के जीवन मे देखने मिलता है,साधना की यह विशेषता है के माँ पीताम्बरा नक्षत्र स्तंभीनी है और जब नक्षत्र स्तंभीनी से हम प्रार्थना करते है तो हमारे सभी प्रकार के कार्य सहज ही सम्पन्न हो जाते है,अभी तक आपने पीताम्बरा जी की कई साधना ये सम्पन्न की होगी परंतु यह साधना आज के युग मे अत्यंत आवश्यक साधना मानी गयी है,इस साधना से जहा नवग्रह देवता के दोष कम होते वैसे ही उनकी अखंड कृपा भी प्राप्त होती है और जीवन मे कई प्रकार के लाभ होते है,इ...
नवरात्रि के प्रयोग यह प्रयोग दिखने मे साधारण है परंतु पूर्ण प्रभावशाली है,सिर्फ इनमे आपका विश्वास अटूट होना चाहिये क्यूके यह सभी प्रयोग माँ जगदंबा राणी के है जो इस संसार की जगत-जननी है........... ============================================================== साधना में श्रद्धा अनिवार्य तत्व है क्योंकि अपनी स्वयं की श्रद्धा ही साधक को साधना में धैर्य और ऊर्जा प्रदान करती है।श्रद्धा के द्वारा ही वह विपरीत परिस्थितियों पर विजय प्राप्त कर सकता है।यदि मन में दृढ़ श्रद्धा और विश्वास हो तो निश्चय ही लक्ष्य की प्राप्ति होती है। ...
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