महा विपरीत प्रत्यंगिरा माला मंत्र | Maha Viparita Pratyangira Mala Mantra विनियोग----- ऊं अस्य श्रीमहाविपरीत प्रत्यंगिरास्तोत्र मंत्रस्य महाकालभैरवऋषि: स्त्रिष्टुप् छन्द:, श्रीमहाविपरीत प्रत्यंगिरा देवता, हं बीजं, ह्रीं शक्ति:, क्लीं कीलकं, मम सर्वार्थसिद्ध्यर्थे जपे विनियोग:/परमंत्र, परयंत्र, परकृत्याछेदनार्थे, सर्वशत्रु क्षयार्थे विनियोग:। माला मंत्र-------------महा विपरीत प्रत्यंगिरा माला मंत्र | Maha Viparita Pratyangira Mala Mantra ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं ऊं नमो विपरीतप्रत्यंगिरायै सहस्रानेककार्यलोचनायै कोटि विद्युज्जिह्वायै महाव्यापिन्यै संहाररूपायै जन्मशांति कारिण्यै मम सपरिवारकस्य भावि भूत भवच्छत्रु दाराप्रत्यान् संहारय संहार...
|| श्री स्वर्णाकर्षण भैरव स्तोत्र || ।। श्री मार्कण्डेय उवाच ।। भगवन् ! प्रमथाधीश ! शिव-तुल्य-पराक्रम ! पूर्वमुक्तस्त्वया मन्त्रं, भैरवस्य महात्मनः ।। इदानीं श्रोतुमिच्छामि, तस्य स्तोत्रमनुत्तमं । तत् केनोक्तं पुरा स्तोत्रं, पठनात्तस्य किं फलम् ।। तत् सर्वं श्रोतुमिच्छामि, ब्रूहि मे नन्दिकेश्वर !।। ।। श्री नन्दिकेश्वर उवाच ।। ...
छिन्नमस्ता साधना माँ भगवती छिन्नमस्ता जयन्ती समीप ही है। इस बार माँ भगवती छिन्नमस्ता जयन्ती ९ मई २०१७ को आ रही है। आप सभी को माँ भगवती छिन्नमस्ता जयन्ती की अग्रिम रूप से ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएँ। छिन्नमस्ता शब्द दो शब्दों के योग से बना है - प्रथम छिन्न और द्वितीय मस्ता। इन दोनों शब्दों का अर्थ है - छिन्न यानि अलग या पृथक तथा मस्ता अर्थात मस्तक। इस प्रकार जिनका मस्तक देह से पृथक हैं, वह छिन्नमस्ता कहलाती हैं। देवी अपने मस्तक को अपने ही हाथों से काट कर, अपने हाथों में धारण करती हैं तथा प्...
गुरु पूजन किसी भी साधना में बैठने से पूर्व गुरु पूजन और गणेश जी के पूजन की संक्षिप्त विधि – पवित्रीकरणः अपने उलटे हाथ की हथेली में थोड़ा सा जल लेकर निम्न मंत्र बोलते हुए जल अपने चारों ओर छिड़कें – ।। ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोsपि वा यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं सः वाह्याभ्यंतरः शुचि ।। आचमनः आंतरिक तत्वों की शुद्धि के लिए यह प्रक्रिया अत्यंत ही आवश्यक है । सीधे हाथ में जल लेकर चार बार यह मंत्र पढ़ें और उस अभिमंत्रित जल को स्वयं पी लें । ॐ आत्मतत्वं शोधयामि नमः ॐ विद्यातत्वं शोधयामि नमः ॐ शिवतत्वं शोधयामि नमः इसके बाद दिग्बंधन का स्थान आता है । दसों दिशाओं में से विघ्न आपकी साधना में बाधा न डालें, इसके लिए अपने हाथ में जल या अक्षत लेकर निम्न मंत्र पढ़ते हुये दसों दिशाओं में बिखेर दें – ...
निम्नलिखित अघोर शिव मंत्र के निरंतर जाप से हृदय पक्ष जागृत होगा और जातपात, रंगभेद, इत्यादि दुर्गुण दूर होकर एक निर्मल भारतीय बनोगे । मंत्र:- ॥ ॐ यं रं लं वं अघोराय घोर-घोरतराय नमः ॥ #दहाड़ता_अघोर नित्य स्नान उपरान्त भगवान् श्री महाकालेश्वर का स्तोत्र जाप प्रबल वीरत्व जागृत करता है । #दहाड़ता_अघोर कोई आपको मूर्तिपूजक कहकर आपके इष्ट का अपमान करे तो आपका कर्तव्य है की उस चांडाल को यह ज्ञात कराएं की हम मूर्ती की नहीं अपितु उसमे प्राण-प्रतिष्ठित शक्ति की उपासना करते हैं । शक्ति ही पूजन लेती है, शक्ति ही शिव सान्निध्य देती है ! #दहाड़ता_अघोर कुछ समझ न आये तो नित्य कालिकाष्टकं, शिव तांडव स्तोत्रम् और भैरवदंड स्तोत्र का ही पाठ कर लो ! आसुरी शक्तियों को कुचलने में मदद मिलेगी ...
आदित्यहृदयं - स्रोतं ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्। रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्॥ दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्। उपागम्याब्रवीद्राममगस्त्यो भगवान् ऋषिः॥ राम राम महाबाहो शृणु गुह्यं सनातनम्। येन सर्वानरीन् वत्स समरे विजयिष्यसि॥ आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्। जयावहं जपेन्नित्यम् अक्षय्यं परमं शिवम्॥ सर्वमङ्गलमाङ्गल्यं सर्वपापप्रणाशनम्। चिन्ताशोकप्रशमनम् आयुर्वर्धनमुत्तमम्॥ रश्मिमंतं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्। पूजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्॥ ...
महाकाल साधना दीक्षा प्रोयोग गोपनीय साधना (सावन के महीने में की जाने वाली साधना ) भगवान शंकर काल के भी काल है उन्ही महाकाल को मेरा प्रणाम व नमन है | महाकाल तो वह धुरी है , जिस पर समस्त ब्रम्हांड गति शील है | महा काल में ही या समस्त चराचर जीव जगत विश्व ब्य्याप्त है , महाकाल ही शिव का ही एक रूप है , जो की खुद शिव से सह्त्र गुना जादा तेजेस्विता युक्त है ब्र्म्हामल में एक जगह कहा गया है यदि साधक गुरु ने दिव्या शक्ति पात दीक्षा ( राज्याभिषेक दीक्षा , शिस्याभिशेक दीक्षा , शाम्भवी दीक्षा आदि दीक्षा को अक्षुण बनाये रखना चाहता है तो उस के लिए महाकाल साधना करना बहुत जरुरी है | एस साधना को करने से पहले गुरु की आज्ञा मानसिक रूप से या ...
महाकाल साधना करे जिस से दुर्भाग्य से मुक्ति मिले और जीवन का मार्ग gurumay बन सके | गुरु ,गणेश , पूजन कर आप ये साधना करे .. भगवान महाकाल स्मशानाधिस्थ बेठे है जिनकी चार भुजाए है. यह साधना मूल रूप से साधक मे आत्मिक शक्ति का विकास करती है तथा साधक मे साधना के विषयक मुख्य गुणों का विकास कराती है. जेसे की निर्भयता एवं एकाग्रता , पाप समन . इस चतुर्भुज महाकाल मंत्र को साधक सोमवार की रात्री मे ११.०० के बाद जपना शुरू करे. इससे पहले भगवान महाकाल का चित्र अपने सामने स्थापित करे और पूजन करे. उसके बाद रुद्राक्ष माला से निम्न चतुर्भुज महाकाल मंत्र का २१ माला जाप करे. यह क्रम अगले सोमवार तक जारी रहे. वस्त्र तथा आसान काले रंग का हो. दिशा उत्तर रहे. ॐ ह्रीं ह्रीं हूं फट स्वाहा Om...
स्वप्न वाराही सिद्धी. यह एक अनोखी साधना है जिसमे सफलता पाना आसान है परंतु इस साधना का उपयोग तभी करना चाहिये जब आप किसी कठिन समस्या मे फसे हुए हो और समस्या से बाहर निकलने का रास्ता ना मिले. कभी भी इस साधना का गलत प्रयोग ना करे जैसे सट्टा या लौटरी का नंबर स्वप्न मे देखना. साधना विधि:- सोने से पूर्व जहा आप सोते है वहा के आस पास का जगहा साफ करके रखे और चद्दर भी साफ सुधरी होनी चाहिये. सोने से पहिले 3 माला जाप 21 दिनो तक करना है.इससे आपको इस साधना मे सफलता मिलती है.जब किसी सवाल का जवाब प्राप्त करना हो तब "स्वप्न वाराही" से प्रार्थना करके अपना सवाल बताये और 11 बार मंत्र का जाप करके निद्रा ले,इस विधान से आपको समस्या के निवारण हेतु जवाब स्वप्न मे मिल जायेगा. मंत्र- ------- ll ओम ह्रीं नमो वाराहि अघौरे स्वप्न दर्शय दर्शय ठ: ठ: स्वाहा ll ll om hreem namo vaarahi aghoure swapn darshay darshay tha...
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