story Baglamukhi Brahmastra Mantra
रचा है श्रष्टि को जिस प्रभु ने लिरिक्स रचा है श्रष्टि को जिस प्रभु ने, वही ये श्रष्टि चला रहे है, जो पेड़ हमने लगाया पहले, उसी का फल हम अब पा रहे है, रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने, वही ये श्रष्टि चला रहे है।। इसी धरा से शरीर पाए, इसी धरा में फिर सब समाए, है सत्य नियम यही धरा का, एक आ रहे है एक जा रहे है, ...
सब कुछ नहीं है पैसा है वो भी जरूरी पर सब कुछ नहीं है पैसा मकसद ऐ जिंदगी का क्यों रखलिया है पैसा पैसे से सिकंदर ने क्या क्या खरीद लाया आखरी घडी में पैसा ना काम आये दो सांस भी मिल जाए होता नहीं है ऐसा है वो भी जरूरी पर सब कुछ नहीं है पैसा पैसा से कीमती तू बिस्तर खरीद लाया लाया तू ठाठ तू घर में पर नींद क्यों गवाया है नींद कीमती पर समझा नहीं तू ऐसा है वो भी जरूरी पर सब कुछ नहीं है पैसा एक हार की कमी थी बारात घर पे आयी बेटी न बनी दुल्हन बरात लौट आयी पैसे की है सगाई आया जमाना ऐसा है वो भी जरूरी पर सब कुछ नहीं है पैसा ...
एक आदमी ने नारदमुनि से पूछा मेरे भाग्य में कितना धन हे, नारदमुनि ने कहा भगवान विष्णु से पुछ कर कल बताऊंगा। नारदमुनि ने कहा- 1 रुपया रोज तुम्हारे भाग्य में हे, आदमी बहुत खुश रहने लगा उसकी जरूरते 1 रूपये में पूरी हो जाती थी। एक दिन उसके मित्र ने कहा में तुम्हारे सादगी जीवन और खुश देखकर बहुत प्रभावित हुआ हूं और अपनी बहन की शादी तुमसे करना चाहता हूँ, आदमी ने कहा मेरी कमाई 1 रुपया रोज की हे, इसको ध्यान में रखना, इसी में से ही गुजर बसर करना पड़ेगा तुम्हारी बहन को, मित्र ने कहा कोई बात नहीं मुझे रिश्ता मंजूर हे । अगले दिन से उस आदमी की कमाई 11 रुपया हो गई, उसने नारदमुनि को बुलाया की हे मुनिवर मेरे भाग्य में 1 रूपया लिखा हे फिर 11 रुपये क्योँ मिल रहे हे ? नारदमुनि ने कहा तुम्हारा किसी से रिश्ता या सगाई हुई है क्या? हाँ हुई है । तो यह तुमको 10 रुपये उसके भाग्य के मिल रहे हे, इसको जोड़ना शुरू करो तà...
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