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GOMTI CHAKRA FOR HEALTH AND WEALTH

गोमती चक्र विशेष प्रयोग / GOMTI CHAKRA FOR HEALTH AND WEALTH
(होली एवं नवरात्री तंत्र विशेष भाग 2 )

गोमती चक्र से भली-भाँति परिचित हैं। गोमती चक्र समुद्र प्रदत्त चामत्कारिक तंत्रोक्त वस्तु है गोमती चक्र के प्रयोग अन्य तंत्रोक्त साधनाओं एंव प्रयोगों की भाँति कठिन अथवा दुष्कर नहीं हैं।गोमतीचक्र के प्रयोग बड़े ही सरल, किन्तु प्रभावकारी प्रयोग होते है। यह लक्ष्मी जी की प्रिय वस्तुओं में से एक है और इसीलिए लक्ष्मी के आकर्षण और स्थायित्व के लिए प्रयोग किया जाता है। शुभ मुहूर्तो में किए जा सकने वाले लाभकारी गोमती चक्र प्रयोगों के कुछ प्रयोगों का वर्णन प्रस्तुत लेख में किया गया है।

(A) आर्थिक बाधा नाश और स्थायी लक्ष्मी हेतु :

1. यदि आपको अचानक आर्थिक हानि होती हो, तो किसी भी मास के प्रथम सोमवार को २१ अभिमन्त्रित गोमती चक्रों को पीले अथवा लाल रेशमी वस्त्र में बांधकर धन रखने के स्थान पर रखकर हल्दी से तिलक करें । फिर मां लक्ष्मी का स्मरण करते हुए उस पोटली को लेकर सारे घर में घूमते हुए घर के बाहर आकर किसी निकट के मन्दिर में रख दें ।

2. यदि आपके परिवार में खर्च अधिक होता है, भले ही वह किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए ही क्यों न हो, तो शुक्रवार को २१ अभिमन्त्रित गोमती चक्र लेकर पीले या लाल वस्त्र पर स्थान देकर धूप-दीप से पूजा करें । अगले दिन उनमें से चार गोमती चक्र उठाकर घर के चारों कोनों में एक-एक गाड़ दें । ११ चक्रों को लाल वस्त्र में बांधकर धन रखने के स्थान पर रख दें और शेष किसी मन्दिर में अपनी समस्या निवेदन के साथ प्रभु को अर्पित कर दें ।

3. यदि आप कितनी भी मेहनत क्यों न करें, परन्तु आर्थिक समृद्धि आपसे दूर रहती हो और आप आर्थिक स्थिति से संतुष्ट न होते हों, तो शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार को २१ अभिमंत्रित गोमती चक्र लेकर घर के पूजा स्थल में मां लक्ष्मी व श्री विष्णु की तस्वीर के समक्ष पीले रेशमी वस्त्र पर स्थान दें । फिर रोली से तिलक कर प्रभु से अपने निवास में स्थायी वास करने का निवेदन तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना करके हल्दी की माला से
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र की तीन माला जप करें । इस प्रकार सवा महीने जप करने के बाद अन्तिम दिन किसी वृद्ध तथा ९ वर्ष से कम आयु की एक बच्ची को भोजन करवाकर दक्षिणा देकर विदा करें ।

(B) धन प्राप्ति , स्थायित्व एवं समृद्धि हेतु

1.धन लाभ के लिए 11 गोमती चक्र अपने पूजा स्थान में रखें। उनके सामने श्रीं श्रियै नम: का जप करें। इससे आप जो भी कार्य या व्यवसाय करते हैं उसमें बरकत होगी और आमदनी बढऩे लगेगी।

2. आठ गोमतीचक्र, आठ कौड़ी एंव आठ लाल गुंजा साथ लेकर उनका पुजन करें। उन्हें दक्षिणावर्ती शंख में थोड़े से चावल डालकर स्थापित कर दें।रात्रि में ही उन्हें लाल कपडे में बाँधकर धर अथवा व्यवसाय स्थल की तिजौरी में स्थापित कर दें। यह प्रयोग आपकी आय में वृद्धि के लिए है।

3. 11 गोमती चक्र, 11 काली हल्दी, एक सुपारी और एक सिक्का पीले वस्त्र में लपेट कर तिजोरी में रखें तो वर्ष भर तिजोरी भरी रहेगी।

4. सात गोमती चक्रों को यदि चांदी अथवा किसी अन्य धातु की डिब्बी में सिंदूर तथा चावल डालकर रखें तो ये शीघ्र शुभ फल देते हैं।

(C) व्यापर वृद्धि हेतु:

1. अगर किसी का व्यापार न चल रहा हो या व्यापार को कोई नजर लग गई हो या व्यापार में कोई परेशानी बार बार आ रही हो तो अपने व्यापार कि चोखट पर ११ गोमती चक्र एवं ३ लघु नारियल सिद्ध करके शुभ महुर्त में किसी लाल कपड़े में बांध कर टांग दें व् उस पर लाल कामिया सिंदूर का तिलक कर दें ध्यान रखे ग्राहक उस के निचे से निकले बस कुछ ही दिनों में आप का व्यापार तरकी पर होगा

2. व्यवसाय स्थान पर पीतल के लोटे में जल रखा जाये और साथ गोमती चक्र उसके अन्दर डालकर खुला रखा जाये तथा जिस स्थान पर व्यापारी की बैठक है उसके दक्षिण-पश्चिम दिशा में इसे ऊपर की तरफ़ स्थापित करने के बाद रखा जाये सुबह को उस लोटे से सभी गोमती चक्र को निकाल कर उस पानी को व्यसाय स्थान के बाहर छिडक दिया जाये और नया पानी भरकर फ़िर से गोमती चक्र डालकर रख दिया जाये तो व्यवसाय में बारह दिन के अन्दर ही फ़र्क मिलना शुरु हो जाता है।

3. व्यापर स्थान पर ग्यारह सिद्ध गोमती चक्र और एक ९ मुखी रुद्राक्ष लाल कपड़े में बांध कर धन रखने वाले स्थान पर रख दे तो व्यापर में बढ़ोतरी होती जाएगी।

(D)धन वापसी हेतु :

1. किसी भी शुक्रवार की रात 11 बजे बाद स्नान करके साफ सफेद कपड़े पहनें व पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश/ऊन के आसन पर बैठ जाएं। लकड़ी का एक बाजोट (पटिया) लगाकर उस पर सफेद कपड़ा बिछा दें। बाजोट के ऊपर पांच तिल के तेल के दीपक एक पंक्ति से जलाकर रख दें। दीपकों के सामने ही कुंकुम से रंगे चावलों की पांच ढेरियां बनाएं।
इनके ऊपर पांच गोमती चक्र तथा पांच हकीक पत्थर स्थापित कर पांच और पांच लघु नारियल स्थापित करें। इन सभी पर कुंकुम का तिलक करें, चावल व फूल चढ़ाएं। इसके बाद नीचे लिखे मंत्र की 21 माला जप करें-

मंत्र- "ॐ ह्रीं चिर लक्ष्मी ऐं आगच्छ स्वाहा"

साधना समाप्ति के बाद यह पूरी सामग्री लाल कपड़े में बांधकर अपने घर में रख दें। तीन महीने के अंदर खोया हुआ धन वापस मिल जाएगा

2. यदि किसी व्यक्ति को दिया हुआ धन वापस नही मिल रहा हो, तो शनिवार को उस व्यक्ति के नाम अक्षरों के बराबर गोमती चक्र लेकर मन ही मन धन की पुनः प्राप्ति की कामना करते हुए गोमतीचक्र को एक हाथ गहरी भूमि खोदकर एकांत स्थान में गाड़ दें। इस प्रयोग से धन वापस मिल जाता है

(E) शत्रु नाश हेतु :

1. शत्रुओं से परेशानी का अनुभव कर रहें हों, तो दीपावली की रात्रि में बारह बजे के पश्चात् छह गोमती चक्र लेकर शत्रु का नाम लेते हुए उस पर लाल सिन्दूर लगाएँ और किसी एकांत स्थान पर जाकर गाड़ दें। गाडना ऐसे चाहिए कि वे पुनः निकालें नहीं। ऐसा करने से शत्रु बाधा में शीघ्र ही कमी होगी।

2. गोमती चक्र को होली के दिन थोड़ा सिंदूर लगाकर शत्रु का नाम उच्चारण करते हुए जलती हुई होली में फेंक दें। आपका शत्रु भी मित्र बन जाएगा।

3. अगर कोई व्यक्ति होली के दिन 7 गोमती चक्र को सवा मीटर कपड़े में बांधकर अपने पूरे परिवार के ऊपर से ऊतारकर किसी बहते जल में फेंक दे तो यह एक तरह से परिवार की तांत्रिक रक्षा कवच का कार्य करेगा।

(F) स्वास्थ्य प्राप्ति हेतु :

1. गोमती चक्र को साफ जल से धो कर एक लाल वस्त्र बिछा कर उस पर स्थापित करें। सिंदूर लगाएं, देशी घी का दीपक जलाये धुप दें और निम्न मंत्र का ११ माला जप करें
“ॐ वॉ आरोग्यानिकारी रोगानशेषानंम”
इस प्रकार जब ग्यारह मालाए सम्पन हो जाए तब साधक को वह गोमती चक्र सावधानी पूर्वक एक तरफ रख देना चाहिए वह गोमती चक्र तीन वर्ष तक प्रभावित रहेगा इस का प्रयोग बीमारी पर विशेष रूप से किया जाता है कोई बीमारी हो तो एक साफ गिलास में शुद्ध गंगा जल लेकर उस में यह गोमती चक्र डाल दे और ऊपर लिखे मन्त्र को इक्कीस बार मन ही मन उच्चारण कर उस गोमती चक्र को बाहर निकल दे व् वो पानी रोगी को पिला दें तो वह रोगी जल्दी ही ठीक होने लग जाएगा आश्चर्य कि बात यह है कि ऐसा प्रयोग किसी भी रोगी पर किया जा सकता है चाहे कोई भी रोग क्यों न हो
तीन वर्ष के बाद इस प्रकार के गोमती चक्र को पुनः सिद्ध किया जा सकता है।

2. यदि बीमार ठीक नहीं हो पा रहा हो अथवा दवाइयाँ नही लग रही हों, तो उसके सिरहाने पाँच गोमती चक्र उपरोक्त मंत्र से अभिमंत्रित करके रखें। ऐसा करने से रोगी को शीघ्र ही स्वास्थ्य लाभ होगा।

3 रोग-मुक्ति के लिएः परिवार में यदि कोई असाध्य रोगी है, तो चार गोमती चक्र लाकर उन्हें जल से स्वच्छ करें। डंठल सहित दो पान के पत्ते लें। एक जोड़ा लौंग को घी में डुबोकर पान के पत्तों पर रखें और पान के पत्तों को इस प्रकार लपेट लें कि सारी सामग्री अंदर बंद हो जाए। चाहें तो काले धागे से बांध सकते हैं। अब दाएं हाथ में चार गोमती चक्र तथा बाएं हाथ में पान लेकर होलिका की 11 परिक्रमा करें। प्रत्येक परिक्रमा में रोगी के स्वस्थ होने के बारे में निवेदन करें। होलिका को प्रणाम करें और गोमती चक्र को घर ले आएं। वे चारों गोमती चक्र रोगी के पलंग के चारों पायों में बांध दें। रोगी की जो चिकित्सा चल रही है, उसे चलने दें। रोजाना सुबह उठते ही रोगी के स्वास्थ्य की कामना करें। लाभ मिलेगा।

4 . यदि किसी का स्वास्थ्य अधिक खराबरहता हो अथवा जल्दी-जल्दी अस्वस्थहोता हो, तो चतुर्दशी को ११ अभिमंत्रित गोमती चक्रों को सफेद रेशमी वस्त्र पर रखकर सफेद चन्दन से तिलक करें । फिर भगवान् मृत्युंजय से अपने स्वास्थ्य रक्षा का निवेदन करें और यथा शक्ति महामृत्युंजय मंत्र का जप करें । पाठ के बाद छह चक्र उठाकर किसी निर्जन स्थान पर जाकर तीन चक्रों को अपने ऊपर से उसारकर अपने पीछे फेंक दें और पीछे देखे बिना वापस आ जायें । बाकि बचे तीन चक्रों को किसी शिव मन्दिर में भगवान्शि व का स्मरण करते हुए शिवलिंग पर अर्पित कर दें और प्रणाम करके घर आ जायें । घर आकर चार चक्रों को चांदी के तार में बांधकर अपने पंलग के चारों पायों पर बांध दें तथा शेष बचे एक को ताबीज का रुप देकर गले में धारण करें ।

5 . चार गोमती चक्र लेकर उपरोक्त मंत्र से अभिमंत्रित कर रोगी के पलंग के चारों पायों में नकले धागे से बांध दें और स्वस्थ होने पर उन्हें पीपल के निचे गाड़ दें या प्रवाहित कर दें।

6 . पेट संबंधी रोग होने पर 10 गोमती चक्र लेकर रात को पानी में डाल दें तथा सुबह उस पानी को पी लें। इससे पेट संबंध के विभिन्न रोग दूर हो जाते हैं।

(G ) संतान बाधा हेतु :

1 . महानिशा में माँ लक्ष्मी का ध्यान करते हुए एक गोमती चक्र एंव दो कौडी एक लाल कपड़े में बाँधकर गर्भवती महिला की कमर में बाँध दें। ऐसा करने से गर्भ गिरने की आशंका नहीं रहती है।

2 . अगर संतान कि प्राप्ति में किसी तरह की कोई बाधा आ रही हो तो यह प्रयोग अवश्य ही करे पाँच सिद्ध गोमती चक्र लेकर किसी नदी या तालाब में पाँच बार यह मन्त्र बोल कर विसर्जित कर दे तो संतान की बाधा समाप्त हो जाएगी मन्त्र इस प्रकार है
ओम गर्भरकक्षांम्बिकाय़ै च विद्महे, मंगल देवतायै च धीमहि, तन्नौ देवी प्रचोतयात्।

(H ) गृह क्लेश नाश हेतु ;

1 . यदि आप गृह क्लेश से पीडित है और आपकी सुख शांति दूर हो गई है, तो 3 गोमती चक्र लेकर एक डिब्बी में पहले सिन्दूर रखकर उसके ऊपर रख देना चाहिए और उस डिब्बी को किसी एकांत स्थान पर रख दें। यह प्रयोग घर में किसी अन्य सदस्य को भी नहीं बताएँ, ऐसा करने से शीघ्र ही आपकी मनोकामना पूर्ण होगी।

2 . अगर पति पत्नी में रोजाना कोई लड़ाई होती हो या झगड़ा इतना बड़ गया हो कि बात तलाक तक पहुच गयी हो तो ऐसे में तीन सिद्ध किये हुए गोमती चक्र लेकर घर के दक्षिण में हलु बलजाद कहकर फेकं दें ऐसा हफ्ते में तीन बार करे परेशानी कम हो जाएगी

3 . ग्यारह गोमती चक्र लेकर लाल सिंदूर की डिब्बी में भरकर अपने घर में रखने से दाम्पत्य प्रेम बढ़ता है।

(I ) नौकरी और सफलता हेतु :

1 . यदि गोमती चक्र को लकड़ी की डिब्बी में पीले सिंदूर के साथ रख दिया जाए, तो ऐसे व्यक्ति को जीवन में सफलता मिलने लगती है। यदि धनागम के सभी मार्ग अवरूद्ध हो रहे हों तों वह प्रयोग करने से शीघ्र ही धन लाभ प्रराम्भ हो जाता है।

2 . अगर नोकरी न मिल रही हो या नोकरी में कोई तरकी नही हो रही है तो उसे सिद्ध किया हुआ एक गोमती चक्र रोजाना शिव लिंग पर चढ़ाना चाहिए ऐसा इक्कीस दिन लगातार करने पर नोकरी में बन रही कोई भी अड़चन समाप्त हो जाएगी।

3 . अगर किसी का भाग्य उदय न हो रहा हो तो उसे सिद्ध तीन गोमती चक्र का चूर्ण बना कर शुभ महूर्त में अपने घर के बाहर बिखेर देने से दुर्भाग्य समाप्त हो जाता है

(J ) कार्य सिद्धि हेतु :
1 . यदि किसी व्यक्ति से कोई कार्य सिद्ध करवाना हो, तो उस व्यक्ति के ऊपर से गोमती चक्र पाँच बार बहते हुए जल में डाल दें।

(K ) विद्यार्थियों हेतु :

1. यदि किसी व्यक्ति का मन उखडा-उखडा रहता हो, किसी काम में मन नही लगता हो, विधार्थियों को शिक्षा में एकाग्रता न मिल रही हो, तो गोमती चक्र को सात बार अपने सिर पर फिराकर खुद ही अपने पीछें दक्षिण दिशा की ओर फेंक देना चाहिए। यह प्रयोग एकांत स्थान पर करना चाहिए तथा प्रयोग के बाद किसी से इनका जिक्र नहीं करना चाहिए।

(L ) ऊपरी बाधा हेतु :

1 अगर किसी को भुत प्रेत का उपद्रव हो तो सिद्ध किया हुआ गोमती चक्र दो दाने लेकर उस इन्सान के सर से ७ बार वार कर जलती अग्नि में डाल देने से भुत प्रेत का उपद्रव समाप्त हो जाता है अगर किसी के घर पर ऐसा हो तो पुरे घर पर या रसोई से वार कर अग्नि में डाल देने से घर का भी दोष समाप्त हो जाता है।

2 अगर किसी पर कोई किया कराये का असर है तो पाँच बुध वार लगातार सिद्ध चार गोमती चक्र अपने सर से वार कर चारो दिशाओ में फ़ेंक दे दोष समाप्त हो जायेगा।

(M ) विवाद विजय हेतु :

(1 ) अगर किसी को कोट कचहरी के चक्र पड रहे हो तो उसे सिद्ध दो गोमती चक्र लेकर अपने घर से निकलते समय अपने दाए पांव के निचे रख कर ऊपर से पांव रख कर कोट जाने से समस्या कम हो जायेगी।

(2 ) तीन गोमती चक्र को जेब में रखकर किसी मुकदमे या प्रतियोगिता के लिए जाएं तो निश्चित ही सफलता मिलेगी।

(N) सम्मान प्राप्ति हेतु :

सम्मान की खातिर सिद्ध 5 गोमती चक्र को ५ गुरुवार मंदिर में किसी ब्राह्मण को दान दे व् साथ में उसे भोजन अवश्य ही करवे राज्य संबंधी कोई भी समस्या हो समाप्त हो जायेगी

(O ) नज़र दोष हेतु :

1 . अगर किसी बच्चे को नजर जल्दी लगती हो तो उसे सिद्ध गोमती चक्र चांदी में जड़वा कर पहना दे नजर दोष से मुक्ति मिलेगी व वो सवस्थ भी रहेगा ।

2 . यदि नजर जल्दी लगती हो, तो पाँच गोमती चक्र लेकर किसी सुनसान स्थान पर जायें । फिर तीन चक्रों को अपने ऊपर से सात बार उसारकर अपने पीछे फेंक दें तथा पीछे देखे बिना वापस आ जायें । बाकी बचे
दो चक्रों को तीव्र प्रवाह के जल में प्रवाहीत कर दें ।

3 . यदि आपके बच्चे अथवा परिवार के किसी सदस्य को जल्दी-जल्दी नजर लगती हो, तो आप शुक्ल पक्ष
की प्रथमा तिथि को ११ अभिमंत्रित गोमती चक्र को घर के पूजा स्थल में मां दुर्गा की तस्वीर के आगे लाल या हरे रेशमी वस्त्र पर स्थान दें । फिर रोली आदि से तिलक करके नियमित रुप से मां दुर्गा को ५ अगरबत्ती अर्पित करें । अब मां दुर्गा का कोई भी मंत्र जप करें । जप के बाद अगरबत्ती के भभूत से सभी गोमती चक्रों पर तिलक करें । नवमी को तीन चक्र पीड़ित पर से उसारकर दक्षिण दिशा में फेंक दें और एक चक्र को हरे वस्त्र में बांधकर ताबीज का रुप देकर मां दुर्गा की तस्वीर के चरणों से स्पर्श करवाकर पीड़ित के गले में डाल दें । बाकि बचे सभी चक्रों को पीड़ित के पुराने धुले हुए वस्त्र में बांधकर अलमारी में रख दें ।

4 . यदि आपका बच्चा अधिक डरता हो, तो शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को हनुमान् जी के मन्दिर में जाकर एक अभिमंत्रित गोमती चक्र पर श्री हनुमानजी के दाएं कंधे के सिन्दूर से तिलक करके प्रभु के चरणों में रख दें और एक बार श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें । फिर चक्र उठाकर लाल कपड़े में बांधकर बच्चे के गले में डाल दें।

आशा है आप इनमे से कुछ प्रयोग आगामी होली और नवरात्री पर अवश्य करेंगे और लाभ उठाएंगे।

अन्य किसी जानकारी, समस्या समाधान एवं कुंडली विश्लेषण हेतु संपर्क कर सकते हैं।

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