बगलामुखी संक्षिप्त पूजन
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सामान्य पूजन सामुग्री जैसे आचमनी पात्र ,हल्दी ,कुमकुम ,चंदन ,अष्टगंध ,अक्षत , फूल , माला ,नैवेद्य ,फल ,दीपक (तेल या घी का ),अगरबत्ती आदि का प्रयोग कर सकते है ..
सबसे पहले गुरु ,गणेश इन्हे वंदन करे
ॐ गुं गुरुभ्यो नम:
ॐ श्री गणेशाय नम:
ॐ ह्ल्रीं बगलायै नम:
फिर आचमन करे
ह्रीं आत्मतत्वाय स्वाहा
ह्रीं विद्या तत्वाय स्वाहा
ह्रीं शिव तत्वाय स्वाहा
ह्रीं सर्व तत्वाय स्वाहा
फिर गुरु स्मरण करे और पुजन के लिये पुष्प अक्षत अर्पण करे
ॐ श्री गुरुभ्यो नम:
ॐ श्री परम गुरुभ्यो नम:
ॐ श्री पारमेष्ठी गुरुभ्यो नम:
अब आसन पर पुष्प अक्षत अर्पण करे
ॐ पृथ्वी देव्यै नमः
चारो तरफ दिशा बंधन हेतु अक्षत फेके
और अपनी शिखा पर दाहिना हाथ रखे
फिर दीपक को प्रणाम करे
दीप देवताभ्यो नमः
कलश में जल डाले और उसमे चन्दन या सुगन्धित द्रव्य डाले
कलश देवताभ्यो नमः
अब अपने आप को तिलक करे
गणेश जी के लिये पुष्प अक्षत अर्पण करे
वक्रतुंड महाकाय सुर्यकोटी समप्रभ
निर्विघ्नम कुरु मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा
अब आप हाथ मे जल ,अक्षत ,पुष्प लेकर संकल्प करे की आप आज बगलामुखी साधना कर रहे है और उनकी कृपा से आपकी जो समस्या है उसका निवारण हो ..
गुरुस्मरण कर सदगुरु का पंचोपचार पूजन करे
ॐ गुं गुरुभ्यो नम: गंधं समर्पयामि
ॐ गुं गुरुभ्यो नम: पुष्पम समर्पयामि
ॐ गुं गुरुभ्यो नम: धूपं समर्पयामि
ॐ गुं गुरुभ्यो नम: दीपं समर्पयामि
ॐ गुं गुरुभ्यो नम: नैवेद्यम समर्पयामि
अब आप भगवती बगलामुखी जी का ध्यान का जो मंत्र है उसे पढे और उनका आवाहन करे
ध्यान मंत्र :-
जिव्हाग्र मादाय करेण देविं
वामेन शत्रून परी पीडयंतीम
गदाभि घातेन च दक्षिणेन
पीतांबराभ्यां द्विभुजां नमामि
ह्ल्रीं श्री बगलायै नम :
मा भगवती बगलामुखी आवाहयामि मम पूजा स्थाने मम हृदये स्थापयामि पूजयामि नम:
अब आवाहनादि मुद्राये आती हो तो प्रदर्शित करे
ह्ल्रीं बगलायै नम: आवाहिता भव
ह्ल्रीं बगलायै नम: संस्थापिता भव
ह्ल्रीं बगलायै नम: सन्निधापिता भव
ह्ल्रीं बगलायै नम: सन्निरुद्धा भव
ह्ल्रीं बगलायै नम: सम्मुखी भव
ह्ल्रीं बगलायै नम: अवगुंठिता भव
ह्ल्रीं बगलायै नम: वरदोभव
सुप्रसन्नो भव
फिर भगवती बगलामुखी देवी का पंचोपचार पूजन करे
ह्ल्रीं बगलायै नम: गंधं समर्पयामि
ह्ल्रीं बगलायै नम: पुष्पं समर्पयामि
ह्ल्रीं बगलायै नम: धूपं समर्पयामि
ह्ल्रीं बगलायै नम: दीपं समर्पयामि
ह्ल्रीं बगलायै नम: नैवेद्यं समर्पयामि
ह्ल्रीं बगलायै नम: तांबूलं समर्पयामि
ह्ल्रीं बगलायै नम: सर्वोपचारार्थे पुन: गंधाक्षतपुष्पं समर्पयामि
अब नीचे दिये हुये बगलामुखी नामावली से पूजन करे .. एकेक नाम का उच्चारण करते हुये पुष्प या अक्षत या एक आचमनी जल अर्पण करते जाये .. सहसा किसी भी देवता के अष्टोत्तर शत नाम स्तोत्र मे 108 नाम होते है लेकिन इस बगलामुखी अष्टोत्तर शत नाम स्तोत्र मे 115 नाम आये है .. तो जैसा है वैसा यहा पर प्रस्तुत किया है ..
1) ॐ बगलायै नम:
2) ॐ विष्णुवनितायै नम:
3) ॐ विष्णुशंकरभामिन्यै नम:
4) ॐ बहुलायै नम:
5) ॐ वेदमात्रे नम:
6) ॐ महाविष्णुप्रसवे नम:
7) ॐ महामत्स्यायै नम:
ॐ महाकूर्मायै नम:
9) ॐ महावाराहरुपिण्यै नम:
10) ॐ नारसिंहप्रियायै नम:
11) ॐ रम्यायै नम:
12) ॐ वामनायै नम:
13) ॐ बटुरुपिण्यै नम:
14) ॐ जामदग्नस्वरुपायै नम:
15) ॐ रामायै नम:
16) ॐ रामप्रपूजितायै नम:
17) ॐ कृष्णायै नम:
18) ॐ कपर्दिन्यै नम:
19) ॐ कृत्यायै नम:
20) ॐ कलहायै नम:
21) ॐ कलकारिण्यै नम:
22) ॐ बुद्धिरुपायै नम:
23) ॐ बुद्धभार्यायै नम:
24) ॐ बौद्धपाखण्डखण्डिन्यै नम:
25) ॐ कल्किरुपायै नम:
26) ॐ कलिहरायै नम:
27) ॐ कलिदुर्गतिनाशिन्यै नम:
28) ॐ कोटिसूर्यप्रतीकाशायै नम:
29) ॐ कोटिकंदर्पमोहिन्यै नम:
30) ॐ केवलायै नम:
31) ॐ कठिणायै नम:
32) ॐ काल्यै नम:
33) ॐ कलायै नम:
34) ॐ कैवल्यदायिन्यै नम:
35) ॐ केशव्यै नम:
36) ॐ केशवाराध्यायै नम:
37) ॐ किशोर्यै नम:
38) ॐ केशवस्तुतायै नम:
39) ॐ रुद्ररुपायै नम:
40) ॐ रुद्रमूर्त्यै नम:
41) ॐ रुद्राण्यै नम:
42) ॐ रुद्रदेवतायै नम:
43) ॐ नक्षत्ररुपायै नम:
44) ॐ नक्षत्रायै नम:
45) ॐ नक्षत्रेशप्रपूजितायै नम:
46) ॐ नक्षत्रेशप्रियायै नम:
47) ॐ नित्यायै नम:
48) ॐ नक्षत्रपतिवंदितायै नम:
49) ॐ नागिन्यै नम:
50) ॐ नागजनन्यै नम:
51) ॐ नागराजप्रवंदितायै नम:
52) ॐ नागेश्वर्यै नम:
53) ॐ नागकन्यायै नम:
54) ॐ नागर्यै नम:
55) ॐ नगात्मजायै नम:
56) ॐ नगाधिराजतनयायै नम:
57) ॐ नगराजप्रपूजितायै नम:
58) ॐ नवीनायै नम:
59) ॐ नीरदायै नम:
60) ॐ पीतायै नम:
61) ॐ श्यामायै नम:
62) ॐ सौंदर्यकारिण्यै नम:
63) ॐ रक्तायै नम:
64) ॐ नीलायै नम:
65) ॐ घनायै नम:
66) ॐ शुभ्रायै नम:
67) ॐ श्वेतायै नम:
68) ॐ सौभाग्यदायिन्यै नम:
69) ॐ सुंदर्यै नम:
70) ॐ सुभगायै नम:
71) ॐ सौम्यायै नम:
72) ॐ स्वर्णाभायै नम:
73) ॐ स्वर्गतिप्रदायै नम:
74) ॐ रिपुत्रासकर्यै नम:
75) ॐ रेखायै नम:
76) ॐ शत्रूसंहारकारिण्यै नम:
77) ॐ भामिन्यै नम:
78) ॐ मायायै नम:
79) ॐ स्तंभिन्यै नम:
80) ॐ मोहिन्यै नम:
81) ॐ शुभायै नम:
82) ॐ रागद्वेषकर्तर्यै नम:
83) ॐ रात्र्यै नम:
84) ॐ रौरवध्वंसकारिण्यै नम:
85) ॐ यक्षिण्यै नम:
86) ॐ सिद्धनिवहायै नम:
87) ॐ सिद्धेशायै नम:
88) ॐ सिद्धिरुपिण्यै नम:
89) ॐ लंकापतिध्वंसकर्यै नम:
90) ॐ लंकेश्यै नम:
91) ॐ रिपुवंदितायै नम:
92) ॐ लंकानाथकुलहरायै नम:
93) ॐ महारावणहारिण्यै नम:
94) ॐ देवदानवसिद्धौघपूजितायै नम:
95) ॐ परमेश्वर्यै नम:
96) ॐ पराणुरुपायै नम:
97) ॐ परमायै नम:
98) ॐ परतंत्रविनाशिन्यै नम:
99) ॐ वरदायै नम:
100) ॐ वरदाराध्यायै नम:
101) ॐ वरदानपरायणायै नम:
102) ॐ वरदेशप्रियायै नम:
103) ॐ वीरायै नम:
104) ॐ वीरभूषणभूषितायै नम:
105) ॐ वसुदायै नम:
106) ॐ बहुदायै नम:
107) ॐ वाण्यै नम:
108) ॐ ब्रह्मरुपायै नम:
109) ॐ वराननायै नम:
110) ॐ बलदायै नम:
111) ॐ पीतवसनायै नम:
112) ॐ पीतभूषणभूषितायै नम:
113) ॐ पीतपुष्पप्रियायै नम:
114) ॐ पीतहारायै नम:
115) ॐ पीतस्वरुपिण्यै नम:
अब एक आचमनी जल पूजन स्थान पर अर्पण करे
अनेन अष्टोत्तर शत नामावली द्वारा पूजनेन श्री पीतांबरा बगलामुखी देवता प्रीयतां न मम ..
इसके बाद अगर आवरण पूजन करना हो तो करे .. या फिर बगलामुखी के विविध स्तोत्र का पाठ करे ..
अब निम्न बगलामाला मंत्र का पाठ करें. कमसे कम एक या 3,5,11,, 21,51,108 संख्या मे पाठ कर सकते है.
बगला माला मंत्र :-
ॐ नमो भगवति ॐ नमो वीरप्रताप विजय भगवति बगलामुखि ! मम सर्व निंदकानां सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां मुद्रय मुद्रय बुद्धिं विनाशय विनाशय अपरबुद्धिं कुरु कुरु , आत्मविरोधिनां शत्रूणां शिरो ललाट मुख नेत्र कर्ण नासिकां उरु पद अणु रेणु दंत ओष्ठ जिव्हा तालु गुह्य गुदा कटि जानु सर्वांगेषु केशादि पादांतं पादादि केश पर्यंतं स्तंभय स्तंभय खें खीं मारय मारय परमंत्र परयंत्र परतंत्राणि छेदय छेदय आत्म मंत्र तंत्राणि रक्ष रक्ष ग्रहं निवारय निवारय व्याधिं विनाशय विनाशय दु:खं हर हर , दारिद्र्यं निवारय निवारय , सर्व मंत्र स्वरुपिणी दुष्ट ग्रह भूतग्रह पाषाणग्रह सर्व चांडाल ग्रह यक्ष किन्नर किंपुरुष ग्रह भूतप्रेत पिशाचानां शाकिनी डाकिनी ग्रहाणां पूर्व दिशं बंधय बंधय वार्तालि मां रक्ष रक्ष दक्षिणदिशं बंधय बंधय स्वप्न वार्तालि मां रक्ष रक्ष पश्चिम दिशं बंधय बंधय उग्रकालि मां रक्ष रक्ष पातालदिशं बंधय बंधय बगला परमेश्वरी मां रक्ष रक्ष सकलरोगान विनाशय विनाशय शत्रू पलायनम पंचयोजन मध्ये राज जन स्वपचं कुरु कुरु शत्रून दह दह पच पच स्तंभय स्तंभय मोहय मोहय आकर्षय आकर्षय मम शत्रून उच्चाटय उच्चाटय ह्ल्रीं फट स्वाहा ..
स्तोत्रो का पाठ कर गुरु मुख से प्राप्त मंत्र का जाप करे ..
फिर मंत्र जाप भगवती को समर्पित करे और एक आचमनी जल मे हल्दी कुंकुम या अष्टगंध मिलाकर भगवती को अर्घ्य दे
ॐ ब्रह्मास्त्राय विद्महे स्तंभन बाणाय धीमहि तन्नो बगला प्रचोदयात्
अंत मे क्षमाप्रार्थना करे .. ॐ मां ..
how May I Help You. Please Write Me A Message .!
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*जय गुरुदेव *कृपया अपना पता भेजें*
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