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ग्रहों के मानव जीवन पर प्रभाव

ग्रहों के मानव जीवन पर प्रभाव

ॐ नमः शिवाय ... मित्रों !!
आज का दिन आप सभी के लिए शुभ हो ....

ग्रहों के मानव जीवन पर प्रभाव से इंकार नहीं किया जा सकता।
यदि ग्रह अनुकूल हैं तो जीवन आनंदमय रहता है , जबकि ग्रहों की प्रतिकूल अवस्था मे जीवन जीना भी दूभर हो जाता है।
किस ग्रह की स्थिति आपके लिए अशुभ सिद्ध हो रही है, यह दैनिक घटनाओं के आधार पर भी पता लगाया जा सकता है।
कुछ लक्षण आपको बता सकते हैं कि किस ग्रह की अशुभ स्थिति आपको अशुभ फल दे रही है।

ग्रहों के प्रतिकूल होने पर कुछ लक्षण और प्रभाव उत्पन्न होते हैं ... जिनके आधार पर उन ग्रहों की शांति के लिए रत्न , जड़ी , पौधे और मंत्र जप का विधान है।

आइये जानते हैं की प्रतिकूल ग्रहों के क्या लक्षण हो सकते हैं -

* यदि शरीर मे आलस आता है ,
आपके चेहरे पर तेज का अभाव है,
आप हमेशा थका-थका महसूस करते हैं,
हृदय के आसपास कमजोरी का आभास होता है तो समझ लीजिए सूर्य की स्थिति अशुभ है।
ज्योतिष के अनुसार सूर्य ग्रह के कुपित होने से जातक को सिर व मस्तिष्क, हृदय, नेत्र और कर्ण रोग, अस्थि भंग जैसी समस्याएं होने का अंदेशा रहता है।

* भावनाओं को प्राथमिकता देते हैं ,
अक्सर निराश और दुखी रहते हैं,
बात-बात पर रोते हैं तो समझ लीजिए आपका चंद्रमा अशुभ फल दे रहा है।
मानसिक असंतुलन और गुमसुम रहना भी चंद्रमा के अशुभ होने के लक्षण हैं।

चंद्र ग्रह के प्रभाव से मानसिक रोग, नींद न आना, रक्त विकार, ब्लड प्रैशर तथा उन्माद होने का अंदेशा रहता है।

* आंखें मे दर्द हो ,
आंखओं का कमजोर होना,
जोड़ों में दर्द,
हड्डियों में दर्द,
खून की कमी, और
पीलिया जैसे रोग कमजोर मंगल के लक्षण हैं।

मंगल ग्रह के कुपित होने से पित्त विकार, त्वचा रोग, टाइफाइड और अपैंडिक्स हो सकते हैं।

* सदैव भ्रमित रहना ,
हकलाकर बोलना,
बार-बार हिचकी आना या किसी भी प्रकार का वाणी दोष बुध की अशुभ स्थिति का लक्षण है।
इसके अलावा कर्ज मे पड़ना,
पड़ोसियों से अनबन
शरीर के नर्वस सिस्टम का कमजोर पड़ना भी कमजोर बुध के लक्षण हैं।

कुपित बुध ग्रह के कारण वात, पित्त और कफ से सम्बंधित रोग की संभावनाएं रहती हैं।

* बुरे स्वप्न आना ,
बिना कारण अपयश मिल रहा हो,
दोष मढ़े जा रहे हों,
श्वास दोष के शिकार हों,
ऐसा महसूस करते हों कि किसी की गुलामी करनी पड़ रही है तो समझें आपका बृहस्पति कमजोर है।
धन का चोरी होना,
बुरे सपने आना और असफल प्रेम भी कमजोर बृहस्पति के लक्षण हैं।

गुरु ग्रह के कुपित होने से गठिया, कमर व जोड़ों में दर्द आदि समस्याएं होने लगती हैं।

* त्वचा रोग ,
स्वप्नदोष,
परस्त्री / परपुरुष की इच्छा करते हैं,
सिर पर काफी कर्ज है और परिश्रम के बावजूद आर्थिक लाभ नहीं कमा पा रहे तो समझिए आपका शुक्र अशुभ स्थिति में है।

शुक्र ग्रह कुपित हो तो जातक को वात एवं कफ रोग शरीर के अंदरूनी हिस्सों में रोग होने की संभावनाएं रहती हैं।

* धनहानि,
रोजगार-व्यवसाय में हानि,
मानहानि आदि अशुभ शनि के लक्षण हैं।
बीमारी, अचानक मृत्यु या दुर्घटना आदि भी अशुभ शनि के लक्षण हैं।

शनि के कुपित होने से वात, कफ रोग, कैंसर जैसे रोग होने लगते हैं।

* अनिद्रा, बदनामी अशुभ राहू के लक्षण हैं,
किसी काम में अरुचि,
रोजगार की हानि,
बुरे स्वप्न आना,
नींद न आना,
घर से निकाला जाना आदि राहु की कमजोर स्थिति के लक्षण हैं।

राहु ग्रह से प्रकोपित जातक को संक्रामक रोग, ह्रदय रोग जैसी समस्याएं होती हैं।

* अचानक कर्ज बढ़ने लगे,
लड़ाई-झगड़े हों,
आग से नुकसान हो,
शत्रु आपको नुकसान पहुंचाने मे सफल हों तो समझिए केतू कि स्थिति अशुभ है।

केतु ग्रह कुपित हो तो जातक को त्वचा रोग, पाचन संबंधी रोग हो सकता है।

* ग्रहों के दुष्‍प्रभाव को दूर करने में पेड़-पौधों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है -

हमारे ऋषि मुनियों को ग्रहों के दुष्‍प्रभाव को दूर करने के लिए पेड़-पौधों की भूमिका का भी पता था।

1. यदि जातक का चंद्रमा कमजोर हो , तो उन्हें तुलसी या अन्‍य छोटे-छोटे औषधीय पौधे अपने अहाते में लगाकर उसमें प्रतिदिन पानी देना चाहिए।

2. यदि जातक का बुध कमजोर हो तो उसे बिना फल फूलवाले या छोटे छोटे हरे फलवाले पौधे लगाने से लाभ पहुंच सकता है।

3. यदि जातक का मंगल कमजोर हो तो उन्हें लाल फल-फूलवाले बड़े-बड़े पेड़ लगा़ने से लाभ होगा।

4. इसी प्रकार जातक का शुक्र कमजोर हो तो उन्हें सफेद फल-फूलवाले बड़े-बड़े पेड़ लगा़ने से लाभ होगा।

5. यदि जातक का सूर्य कमजोर हो तो उन्हें तप्‍त लाल रंग के फल-फूलवाले बड़े-बड़े पेड़ लगा़ने से लाभ होगा।

6. यदि जातक का बृहस्पति कमजोर हो तो उन्हें पीले फल-फूलवाले बड़े-बड़े पेड़ लगा़ने से लाभ होगा।

7. यदि जातक का शनि कमजोर हो तो उन्हें बिना फल-फूल वाले या काले फल-फूलवाले बड़े-बड़े पेड़ लगा़ने से लाभ होगा।

ध्यान रहे , ये सभी छोटे-बड़े पेड़-पौधे पूर्व की दिशा में लगे हुए हों।

* ग्रहों को अनुकूल करने हेतु अन्य उपाय -

सूर्य :
- चावल तथा तांबे का सिक्का रविवार को दान देना चाहिये ।
- सूर्यदेव के दोष के लिए खीर युक्त भोजन बनाएँ ,और रोजाना चींटी के बिलों पर रखकर आयें तथा केले को भी छील कर रख दें।
जब वापस आये तभी गाय को खीर और केला खिलाओ ।
- जल और गाय का दूध मिलाकर सूर्यदेव को चड़ायें ,
जब जल का अर्ध्य दें तो इस तरह से कि सूर्य की किरणें उस गिरते हुए जल में से निकल कर आपके मस्तिष्क पर प्रवाहित हो ।
- जल से अर्घ्य देने के बाद जहाँ पर जल चढ़ाया है, वहाँ पर सवा मुट्ठी साबुत चावल चढ़ा दें।

चंद्र :
- दही तथा बूरा सोमवार को दान देना चiहिये।
- पूर्णिमा के दिन गोला ( सूखा नारियल ) , बूरा तथा घी मिलाकर गाय को खिलायें ।
5 पूर्णिमा तक गाय को खिलाना है ।
- 5 पूर्णिमा तक केवल शुक्ल पक्ष मे प्रत्येक 15 दिन गंगाजल तथा गाय का दूध चन्द्रमा उदय होने के बाद चन्द्रमा को अर्घ्य दें।
- जब चाँदनी रात हो, तब जल के किनारे जल में चन्द्रमा के प्रतिबिम्ब को हाथ जोड़कर दस मिनट तक खड़ा रहे और फिर पानी में मीठा प्रसाद चढ़ा देवें,
घी का दीपक प्रज्जवलित करें ।
- उक्त प्रयोग घर में भी कर सकते हैं,
पीतल के बर्तन में पानी भरकर छत पर रखकर या जहाँ भी चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब पानी में दिख सके वहीं पर यह कार्य कर सकते हैं।

मंगल :
- लाल मसूर की दाल तथा गुड मगलवार के दिन दान देना चाहिये।
- चावलों को उबालने के बाद बचे हुए माड़ मे उतना ही पानी तथा 100 ग्राम गुड़ मिलाकर गाय को खिलायें।
43 साबुत चावल पीले कपड़े में बाँध कर यह पोटली अपने साथ रखें , यह प्रयोग सवा महीने तक करना है ।
- कम से कम 5 मंगलवार के दिन हनुमान् जी के व्रत रखें।
- किसी जंगल मे या ऐसे स्थान पर जहाँ बन्दर रहते हो,
वहाँ सवा मीटर लाल कपड़ा बाँध कर आये, फिर प्रतिदिन अथवा मंगलवार के दिन उस स्थान पर बन्दरों को चने और गुड़ खिलाये ।

बुध :
- हरे मूंग बुधवार को दान देना चाहिये।
- सवा मीटर सफेद कपड़े में हल्दी से 21 स्थान पर “ॐ” लिखें तथा उसे पीपल पर लटका दें ।
- बुधवार के दिन थोड़े गेहूँ तथा चने दूध में डालकर पीपल पर चढ़ावें ।
- सोमवार से बुधवार तक हर सप्ताह कनैर के पेड़ पर दूध चढ़ावें ।
जिस दिन से आरंभ करें उस दिन कनैर के पौधे की जड़ों में कलावा बाँधें... यह प्रयोग कम-से-कम पाँच सप्ताह करें।

गुरु :
- चने की दाल तथा गुड गुरुवार को दान देना चाहिये।
- किसी भी साँड को रोजाना सवा किलो 7 अनाज, सवा सौ ग्राम गुड़ सवा 43 दिन तक खिलायें।
- हल्दी पाँच गाँठ पीले कपड़े में बाँधकर पीपल के पेड़ पर बाँध दें तथा 3 गाँठ पीले कपड़े में बाँधकर अपने साथ रखें।
- बृहस्पतिवार के दिन भुने हुए चने बिना नमक के ग्यारह मन्दिरों के सामने बांटे,
तथा सुबह उठने के बाद घर से निकलते ही जो भी जीव सामने आये उसे ही खिलावें चाहे कोई भी पशु हो या फिर कोई व्यक्ति हो।

शुक्र :
- नारियल तथा चावल शुक्रवार को दान देना चाहिए।
- उड़द का पौधा घर में लगाकर उस पर सुबह के समय दूध चढ़ावें।
प्रथम दिन संकल्प कर पौधे की जड़ में कलावा बाँधें ... यह प्रयोग सवा दो महीने तक करना है।
- सवा दो महीने में जितने दिन होते है, उतने उड़द के दाने सफेद कपड़े में बाँधकर अपने पास रखें ।
- कम-से-कम पाँच शुक्रवार तक पाँच गेंदा के फूल तथा सवा सौ उड़द पीपल की खोखर में रखें।

शनि :
- काले तिल शनिवार को दान देना चाहिये।
- सवा महिने तक प्रतिदिन किसी तेली के घर बैल को गुड़ तथा तेल लगी रोटी खिलावें ।

राहु :
- काले उड़द रविवार को दान देना चाहिये।
- चन्दन की लकड़ी साथ मे रखें ।
प्रतिदिन सुबह उस चन्दन की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर पानी में मिलाकर उस पानी को पियें।
- साबुत मूंग का खाने में अधिक सेवन करें ।
- साबुत गेहूं उबालकर मीठा डालकर कोढ़ियों को खिलावें तथा सत्कार करके घर वापस आवें।

केतु :
- रविवार के दिन लौकी दान करनी चहिये।
- मिट्टी के घड़े को काटकर बराबर आधा-आधा करें ,
ध्यान रहे नीचे का हिस्सा काम में लेना है, वह समतल हो अर्थात् किनारे उपर-नीचे न हो ।
इसमें अब एक छोटा सा छेद करें तथा इस हिस्से को ऐसे स्थान पर जहाँ मनुष्य-पशु आदि का आवागमन न हो अर्थात् एकान्त मे, जमीन में गड्ढा कर के गाड़ दें।

ऊपर का हिस्सा खुला रखें...
अब प्रतिदिन सुबह अपने ऊपर से उबार कर सवा सौ ग्राम दूध उस घड़े के हिस्से मे चढ़ाएँ, दूध चढ़ाने के बाद आते समय पीछे मुड़कर नहीं देखें।

!! ॐ नमः शिवाय !!

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