१. ॐ नमो मन मोहिनी रानी मोहिनी चला सैर को मस्तक घर तेल का दीप जल मोहूँ, सब जगत मोहूँ, और मोहूँ मोहिनी रानी जा शख्या बैठी मोहर दरबार गौरा पार्वती की दुहाई। लोनी चमारी की दुहाई फिरें नहीं हनुमन्त की आना।
मन्त्र के प्रयोग से पहले इसे सिद्ध वन जैना आवश्यक है। दीपावली की रात्रि को ३२० मन्त्र के जप से इसकी सिद्धि मानी जाती है। जिस व्यक्ति को अपनी और आकर्षित करना हो, उसके शरीर पर ७ बार मन्त्र का उत्धारण करते हुए अभिमन्त्रित तेल का छींटा दें तो निश्चित रूप से वह मोहित होता है। यदि किसी सभा को मोहित करना हो तो चम्मेली के तेल को अभिमन्त्रित करके बिन्दी लगानी चाहिये।
ॐ नमो कामरूप कामाख्या देवी जहाँ बसे इस्माइल वोगी। योगी ने लगाई फुलवारी फूल लोहै लौना चमारी, एक फूल हँसे दूजे फूल मुसुक्याय तीजे फूल में छोटे-बड़े नरसिंह आय, जो सूंघे इस फूल की बास, वह चल आवे हमारे पास। दुश्मन को जाई लिया फटे मेरी भक्ति गुरु शक्ति फुरो मन्त्र ईथरो वाचा।
इस मन्ना से सुगन्धित पुष्ण को अभिमन्त्रित करके जिस व्यक्ति को सुंधाया जाय, वह मोहित हो जाता है। इसके सफल प्रयोन के लिए इसे सिद्ध कर लेना आवश्यक है। सिद्धि की साधना रविवार को आरम्भ करके निरन्तर २१ दिन तक चलनी चाहिये और नित्यप्रति १०८ बार मन्त्रों का जप करके पूजन सामग्री से भली प्रकार पूजन करके सुगन्धित पुष्यों को घृत में मिश्रित करके नित्य १०८ आहुतियों देनी चाहिये।