Gurudev Dr. Narayan Dutt Shrimali

|| श्री नृसिंह भगवान पूजन || होली कि रात्री नरसिंह साधना बहुत लाभदायी होती है. इस साधना से शत्रू बाधा एवं तंत्र बाधा से मुक्ती एवं रोग मुक्ती नरसिंह

|| श्री नृसिंह भगवान पूजन || होली कि रात्री नरसिंह साधना बहुत लाभदायी होती है. इस साधना से शत्रू बाधा एवं तंत्र बाधा से मुक्ती एवं रोग मुक्ती नरसिंह

|| श्री नृसिंह भगवान पूजन ||

होली कि रात्री नरसिंह साधना बहुत लाभदायी होती है. इस साधना से शत्रू बाधा एवं तंत्र बाधा से मुक्ती एवं रोग मुक्ती के लिये भी लाभदायी है

नरसिंह पुजन :-

सर्वप्रथम हाथ जोडकर प्रणाम करे

ॐ गुं गुरुभ्यो नमः
ॐ श्री गणेशाय नमः
ॐ श्री विष्णवे नम:
ॐ श्री नृसिंहाय नम:

फिर आचमनी या चमच से ३ बार बाए हाथ से दाहिने हाथ पर पानी लेकर पिए
(अगर जल नहीं है तो मानसिक ग्रहण करे )

ॐ केशवाय नम:
ॐ नारायणाय नम:
ॐ माधवाय नम:

अब नीचे का मंत्र बोलकर एक आचमनी जल पात्र मे छोडे
ॐ गोविंदाय नम:

उसके बाद पूजन के स्थान पर पुष्प अक्षत अर्पण करे
(अगर पूजन सामग्री नहीं है तो मानसिक करे )

ॐ श्री गुरुभ्यो नमः
ॐ श्री परम गुरुभ्यो नमः
ॐ श्री पारमेष्ठी गुरुभ्यो नमः

उसके बाद अपने आसन का स्पर्श करे और पुष्प अक्षत अर्पण करे

ॐ पृथ्वीव्यै नमः

अब तीन बार सर से पाँव तक हाथ फेरे
ॐ श्री नृसिंहाय नमः आत्मानं रक्ष रक्ष

अब जल के पात्र को गंध लगाकर अक्षत पुष्प अर्पण करे

ॐ कलश मण्डलाय नमः

अब दाहिने हाथ में जल पुष्प अक्षत लेकर संकल्प करे
मन में यह बोले की मैं (अपना नाम और गोत्र ) होली के रात्री मे भगवान श्री नृसिंह देवता की कृपा प्राप्त होने हेतु तथा अपनी समस्या निवारण हेतु
या अपनी मनोकामना पूर्ति हेतु
यथा शक्ति साधना कर रहा हूँ
और जल छोड़े

अब गणेशजी का ध्यान करे

वक्रतुंड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ
निर्विघ्नं कुरु में देव सर्व कार्येषु सर्वदा

और गणेश भगवान के लिये पुष्प अक्षत अर्पण करे

ॐ श्री गणेशाय नमः का 11 या 21 बार जाप करे

फिर भगवान विष्णु का ध्यान करे

शांताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभांगं
लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभीर्ध्यानगम्यं
वंदे विष्णु भवभयहरं सर्वलोकैकनाथं

ॐ श्री विष्णवे नम:

श्री विष्णु ध्यायामि आवाहयामि स्थापयामि पूजयामि नम:

और भगवान श्री विष्णु के लिये चंदन पुष्प अक्षत तुलसी अर्पण करे

ॐ श्री विष्णवे नम: गंध अक्षत पुष्पं तुलसी पत्रं समर्पयामि

अब नीचे दिये हुये नामो का उच्चारण करे या इन नामों से पुष्प या तुलसी पत्र अर्पण करते जाये

१) ॐ श्री केशवाय नम:
२) ॐ श्री नारायणाय नम:
३) ॐ श्री माधवाय नम:
४) ॐ श्री गोविंदाय नम:
५) ॐ श्री विष्णवे नम:
६) ॐ श्री मधुसूदनाय नम:
७) ॐ श्री त्रिविक्रमाय नम:
८) ॐ श्री वामनाय नम:
९) ॐ श्री श्रीधराय नम:
१०) ॐ श्री हृषीकेशाय नम:
११) ॐ श्री पद्मनाभाय नम:
१२) ॐ श्री दामोदराय नम:
१३) ॐ श्री संकर्षणाय नम:
१४) ॐ श्री वासुदेवाय नम:
१५) ॐ श्री प्रद्युम्नाय नम:
१६) ॐ श्री अनिरुद्धाय नम:
१७) ॐ श्री पुरुषोत्तमाय नम:
१८) ॐ श्री अधोक्षजाय नम:
१९) ॐ श्री नारसिंहाय नम:
२०) ॐ श्री अच्युताय नम:
२१) ॐ श्री जनार्दनाय नम:
२२) ॐ श्री उपेंद्राय नम:
२३) ॐ श्री हरये नम:
२४) ॐ श्रीकृष्णाय नम:

अब विष्णु गायत्री से अर्घ्य प्रदान करे

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु: प्रचोदयात्

अब भगवान श्री नृसिंह का पूजन
करने हेतु उनका आवाहन करे

ध्यान

ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलंतं सर्वतोमुखं
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम

माणिक्याद्रिसमप्रभं निजरुचा संत्रस्तरक्षोगणं
जानुन्यस्तकरांबुजं त्रिनयनं रत्नोल्लसदभूषणं !
बाहुभ्यां धृतशंखचक्रमनिशं
दंष्ट्राग्रवक्त्रोल्लसज्वालाजिव्हमुदग्रकेश
निचयं वंदे नृसिंहं विभुम !!

ॐ श्री नृसिंहाय नम: आवाहयामि मम पूजा स्थाने स्थापयामि नम:

अब उनका पंचोपचार पूजन या षोडशोपचार पूजन करे .

यहाँ पंचोपचार पूजन दे रहे है .

ॐ लं पृथ्वी तत्वात्मकं गंधं समर्पयामि श्री नृसिंहाय नम: ( चंदन अर्पण करे )

ॐ हं आकाश तत्वात्मकं पुष्पं समर्पयामि श्री नृसिंहाय नम: ( पुष्प अर्पण करे )

ॐ यं वायु तत्वात्मकं धूपं समर्पयामि श्री नृसिंहाय नम: ( धूप अगरबत्ती अर्पण करे )

ॐ रं अग्नि तत्वात्मकं दीपं समर्पयामि श्री नृसिंहाय नम: ( दीप अर्पण करे )

ॐ वं जल तत्वात्मकं नैवेद्यम समर्पयामि श्री नृसिंहाय नम: ( नैवेद्य अर्पण करे )

अब भगवान श्री नृसिंह देवता का आवरण पूजन करे

आवरण पूजन हेतु अनुमती के लिये प्रथम निम्न मंत्र का उच्चारण कर पुष्प अक्षत अर्पण करे .

सविन्मय परो देव परामृत चरुप्रिय
अनुज्ञां देहि देवेश तव परिवार अर्चनाय मे

आवरण पूजन मे पूजयामि बोलते हुये पुष्प अक्षत और तर्पयामि बोलते हुते एक आचमनी जल अर्पण करते जाये .

प्रथम आवरण :

ॐ उग्रवीरं हृदयाय नम:
हृदय शक्ति श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ महाविष्णु शिरसे स्वाहा
शिर शक्ति श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ ज्वलंतं सर्वतोमुखं शिखायै वषट
शिखा शक्ति श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ नृसिंहं भीषणं कवचाय हुं
कवच शक्ति श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

भद्रं मृत्युमृत्युं नेत्रत्रयाय वौषट
नेत्र शक्ति श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ नमाम्यहं अस्त्राय फट
अस्त्र शक्ति श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

निम्न मंत्र बोलते हुये पुष्प अक्षत अर्पण करे

अभिष्ट सिद्धिं मे देहि शरणागत वत्सल
भक्त्या समर्यपयेत तुभ्यं प्रथम आवरण अर्चनं

निम्न मंत्र बोलते हुये 3 आचमनी जल अर्पण करे

अनेन प्रथम आवरण देवता पूजनेन श्री नृसिंह देवता प्रीयंतां न मम

द्वितिय आवरण :-

ॐ पक्षींद्राय गरुडाय नम:
गरुड श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ शंकराय नम:
शंकर श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ शेषाय नम:
शेष श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ ब्रह्मणे नम:
ब्रह्म श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ श्रियै नम:
श्री श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ ह्रीयै नम:
ह्री श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ धृत्यै नम:
धृति श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ पुष्ट्यै नम:
पुष्टि श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

निम्न मंत्र बोलते हुये पुष्प अक्षत अर्पण करे

अभिष्ट सिद्धिं मे देहि शरणागत वत्सल
भक्त्या समर्यपयेत तुभ्यं द्वितिय आवरण अर्चनं

निम्न मंत्र बोलते हुये 3 आचमनी जल अर्पण करे

अनेन द्वितिय आवरण देवता पूजनेन श्री नृसिंह देवता प्रीयंतां न मम

तृतीय आवरण :-

ॐ इंद्राय नम:
इंद्र श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ अग्नये नम:
अग्नि श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ यमाय नम:
यम श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ निऋतये नम:
निऋती श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ वरुणाय नम:
वरुण श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ वायवे नम:
वायु श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ कुबेराय नम:
कुबेर श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ ईशानाय नम:
ईशान श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ ब्रह्मणे नम:
ब्रह्म श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

ॐ अनंताय नम:
अनंत श्री पादुकां पूजयामि तर्पयामि नम:

निम्न मंत्र बोलते हुये पुष्प अक्षत अर्पण करे

अभिष्ट सिद्धिं मे देहि शरणागत वत्सल
भक्त्या समर्यपयेत तुभ्यं तृतीय आवरण अर्चनं

निम्न मंत्र बोलते हुये 3 आचमनी जल अर्पण करे

अनेन तृतीय आवरण देवता पूजनेन श्री नृसिंह देवता प्रीयंतां न मम

चतुर्थ आवरण :-

अब सिर्फ अक्षत या पुष्प अर्पण करे . जल अर्पण ना करे .

ॐ वज्राय नम:
ॐ शक्तये नम:
ॐ दंडाय नम:
ॐ खडगाय नम:
ॐ पाशाय नम:
ॐ अंकुशाय नम:
ॐ गदायै नम:
ॐ त्रिशूलाय नम:
ॐ पद्माय नम:
ॐ चक्राय नम:

निम्न मंत्र बोलते हुये पुष्प अक्षत अर्पण करे

अभिष्ट सिद्धिं मे देहि शरणागत वत्सल
भक्त्या समर्यपयेत तुभ्यं चतुर्थ आवरण अर्चनं

निम्न मंत्र बोलते हुये 3 आचमनी जल अर्पण करे

अनेन चतुर्थ आवरण देवता पूजनेन श्री नृसिंह देवता प्रीयंतां न मम

अब आवरण पूजन के बाद भगवान नृसिंह के अष्टोत्तर शत नामावली से पूजन करे .
एक एक नाम का उच्चारण करते हुये पुष्प अक्षत अर्पण करे

1) ॐ नारसिंहाय नम:
2) ॐ तीक्ष्णदंष्ट्राय नम:
3) ॐ वज्रनखाय नम:
4) ॐ विष्णवे नम:
5) ॐ जिष्णवे नम:
6) ॐ सर्वबीजाय नम:
7) ॐ सत्याय नम:
😎 ॐ सर्वचैतन्यरुपिणे नम:
9) ॐ सर्वाधाराय नम:
10) ॐ सर्वस्मै नम:

11) ॐ सर्वगाय नम:
12) ॐ विश्वस्मै नम:
13) ॐ विश्ववंद्याय नम:
14) ॐ विरिंचिजनकाय नम:
15) ॐ वागीश्वराय नम:
16) ॐ वेद्याय नम:
17) ॐ वेधसे नम:
18) ॐ वेदमौलये नम:
19) ॐ रुद्राय नम:
20) ॐ भद्राय नम:

21) ॐ मंगलाय नम:
22) ॐ महात्मने नम:
23) ॐ कारणाय नम:
24) ॐ तुरीयाय नम:
25) ॐ शिवाय नम:
26) ॐ परमात्मने नम:
27) ॐ हिरण्यकश्यपूप्राणहराय नम:
28) ॐ प्रल्हादध्येयमानाय नम:
29) ॐ प्रल्हादार्तिहराय नम:
30) ॐ प्रल्हादस्थिरसाम्राज्यदायकाय नम:

31) ॐ दैत्यवक्षोविदलनव्यग्रवज्रनखाय नम:
32) ॐ आंत्रमालाविभूषणाय नम:
33) ॐ महारौद्राय नम:
34) ॐ उग्राय नम:
35) ॐ वीराय नम:
36) ॐ ज्वलते नम:
37) ॐ भीषणाय नम:
38) ॐ सर्वतोमुखदुर्वारतेजोविक्रमशालिने नम:
39) ॐ नरसिंहाय नम:
40) ॐ रौद्राय नम:

41) ॐ मृत्युमृत्यवे नम:
42) ॐ मत्स्याद्यनंतकल्याणलीलावैभवकारिणे नम:
43) ॐ व्युहचतुष्काय नम:
44) ॐ दिव्यार्चारुपधारिणे नम:
45) ॐ परस्मै नम:
46) ॐ पांचजन्यादिपंचदिव्यायुधाय नम:
47) ॐ त्रिसाम्ने नम:
48) ॐ त्रिधाम्ने नम:
49) ॐ त्रिगुणातीतमूर्तये नम:
50) ॐ योगरुढाय नम:

51) ॐ लक्ष्याय नम:
52) ॐ मायातीताय नम:
53) ॐ मायिने नम:
54) ॐ मंत्रराजाय नम:
55) ॐ दुर्दोषशमनाय नम:
56) ॐ इष्टदाय नम:
57) ॐ किरिटहारादिदिव्याभरणधारिणे नम:
58) ॐ सर्वालंकारयुक्ताय नम:
59) ॐ आकंठहरिरुपाय नम:
60) ॐ लक्ष्मीलोलाय नम:

61) ॐ आकंठनररुपिणे नम:
62) ॐ चित्राय नम:
63) ॐ चित्ररुपाय नम:
64) ॐ जगच्चित्रकराय नम:
65) ॐ सर्ववेदांतसिद्धांतसारसत्तामयाय नम:
66) ॐ सर्वमंत्राधिदेवाय नम:
67) ॐ स्तंभडिंभाय नम:
68) ॐ शंभवे नम:
69) ॐ अनंतकल्याणगुणरत्नाकराय नम:
70) ॐ भगवच्छब्दवाच्याय नम:

71) ॐ वागतीताय नम:
72) ॐ कालरुपाय नम:
73) ॐ कल्याय नम:
74) ॐ सर्वज्ञाय नम:
75) ॐ अघहारिणे नम:
76) ॐ गुरवे नम:
77) ॐ सर्वसत्कर्मफलदाय नम:
78) ॐ अशेषदोषदूराय नम:
79) ॐ सुवर्णाय नम:
80) ॐ आत्मदर्शिने नम:

81) ॐ वैकुण्ठपदनाथाय नम:
82) ॐ नारायणाय नम:
83) ॐ केशवादिचतुर्विशंत्यवतारस्वरुपिणे नम:
84) ॐ जीवेशाय नम:
85) ॐ स्वतंत्राय नम:
86) ॐ मृगेंद्राय नम:
87) ॐ ब्रह्मराक्षसभूतादिनानाभयविनाशिने नम:
88) ॐ अखंडानंदरुपाय नम:
89) ॐ मंत्रमूर्तये नम:
90) ॐ सिद्धये नम:

91) ॐ सिद्धबीजाय नम:
92) ॐ सर्वदेवात्मकाय नम:
93) ॐ सर्वप्रपंचजन्मादिनिमित्ताय नम:
94) ॐ शंकराय नम:
95) ॐ शरण्याय नम:
96) ॐ शास्त्रयोनये नम:
97) ॐ ज्योतिषे नम:
98) ॐ जीवरुपाय नम:
99) ॐ निर्भेदाय नम:
100) ॐ नित्यभागवताराध्यसत्यलीलाविभूतये नम:

101) ॐ नरकेसरिताव्यक्तसदसन्मयमूर्तये नम:
102) ॐ सत्तामात्ररुपाय नम:
103) ॐ स्वाधिष्ठानात्मकाय नम:
104) ॐ संशयग्रंथिभेदाय नम:
105) ॐ सम्यज्ज्ञानस्वरुपिणे नम:
106) ॐ सर्वोत्तमेशाय नम:
107) ॐ पुराणपुरुषाय नम:
108) ॐ पुरुषोत्तमरुपाय नम:

अब एक आचमनी जल लेकर अर्पण करे

अनेन अष्टोत्तर शत नामावली द्वारा पूजनेन भगवान श्री नृसिंह देवता प्रीयंतां न मम

अब एक आचमनी जल मे चंदन पुष्प मिलाकर नृसिंह गायत्री से अर्घ्य प्रदान करे

ॐ उग्रनृसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो नृसिंह: प्रचोदयात्

अब हाथ मे पुष्प अक्षत लेकर निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुये पूजन स्थान पर अर्पण करे

ॐ नमो भगवते चक्रासनस्थाय श्री नृसिंहाय क्रोधमूर्ते नृसिंह पुरुप्रधानधर्मतो विकटनिर्मोचन नृसिंह कालपुरुष कालांतक विश्वेश्वर विश्वविडंबेन विश्वनिष्ठ विश्वचैतन्य चितसदाभास कालाध्वातीत निशातीत उदयास्तमय रहित परमहंस परमकारुणिक नृसिंह हृदयचतुर्दलनिविष्ट चैतन्यात्मन एकात्मन चतुरात्मन पंचात्मन द्वादशात्मन चतुर्विंशव्यात्मन पंचविंश्त्यात्मन षटविंशात्यात्मन सप्तविंशत्यात्मन शतसहस्त्रमूर्ते एहि एहि भगवन नारसिंह मम हृदये प्रवेशय प्रवेशय सर्वान आकर्षय आकर्षय मम सान्निध्यं कुरु कुरु ॐ रौं नम: हुं फट स्वाहा

इसके बाद अपने गुरु से प्राप्त नरसिंह मंत्र का यथाशक्ती जप करें.
अगर आपको मंत्र प्राप्त नाही हुवा है तो निम्न मंत्र का जप कार सकते है जो मेरे गुरुदेव जी के मुख से प्राप्त मंत्र है

कमसे कम 11 माला मंत्र जप करें

ॐ नमो भगवते नरसिंहाय

मंत्र जप के पश्चात अब क्षमा प्रार्थना करे

आवाहनं न जानामि ,
न जानामि विसर्जनम
पूजां चैव न जानामि
क्षम्यतां परमेश्वर !!

मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन
यतपूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्तु मे !!

देव देव गुरुदेव पूजां प्राप्य करोतु यत
त्राहि त्राहि कृपासिंधु पूजां पूर्णतरां कुरु !!

ॐ तत्सत ब्रह्मार्पणंमस्तु

एक आचमनी जल अर्पण करे

अनेन यथाशक्ती यथा उपलब्ध पूजाद्रव्येण श्री भगवान नृसिंह पूजनेन श्री नृसिंह देवता प्रीयंतां न मम

ॐ श्री विष्णवे नम:
ॐ श्री विष्णवे नम:
ॐ श्री विष्णवे नम:

विष्णु: विष्णु: विष्णु:

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