Gurudev Dr. Narayan Dutt Shrimali

दर्द ही दर्द है इश्क़ मे

दर्द ही दर्द है इश्क़ मे

इश्क़ हर एक मे अव्वल है ... इश्क़ इफतीदा  है ,

इंतहा भी इश्क़ है । 

दर्द ही दर्द है इश्क़ मे ... और कुछ भी नहीं ,

मन बांवरा सा रहता है ,

वस्ल हो तो जी दुखता है कि फिर बिछड़ना होगा ...

हिज्र हो तो जी जलता है कि विसाल कब होगा ।

 

आधा चाँद कम लगता है , पूरा चाँद कम होने लगता है ...

 

शीशा और रिश्ता एक सा होता है ...

शीशा गलती से टूट जाता है , और रिश्ता ...

गलतफहमियों से .... !!

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