Chinnamasta Mahavidya Sadhna
छिन्नमस्ता महाविद्या साधना
Chinnamasta Mahavidya Sadhna (छिन्नमस्ता महाविद्या साधना) Body pledge: Take water in left hand and join all the fingers of right hand and pouring all the fingers on the left hand water touch the different parts of the body by chanting the following. Also keep in mind that all of your touched body parts are sanctified and energized. This act increases sensitivity of the body and strong.
ॐ आं खड्गाय हृदयाय नम: (हृदय को स्पर्श करें)Meditation: After that with folded hands worship goddess Chhinnamasta with burning Benzyl, lighting earthen lamp, rice and flowers and chant the following spell.
भावन्मण्डल मध्यगांगिज शिरशिछन्नंविकीर्णाकम्।Spell: After the Puja take an energized black Hakik rosary of 114 beads and for 64 rosaries chant the under mentioned spell for 21 days.
After chanting the spell offer, dessert, dry fruits to the goddess daily and offer the dainty by chanting the following spell.
With these 16 letters, it is proved that all the letters are especially powerful and only one chant will get you the accomplishment.
छिन्नमस्ता कवचहुं बीजात्मिका देवी मुण्डकर्त्रिधरा परा ।When 1, 25000 chanting of the spell are completed, perform the Yajna with 10% of the total chant with the flower of bastard teak and thereafter feed the Brahmins. The rules as suggested must be observed. Fearlessly with full trust chant the spell. This Chinnamasta Mahavidya Sadhna accomplishment should be kept secret. While performing Yajna, use Kamal Gatta, five dry fruits, black sesame, Ghee, and Havan materials. After the Havan is over the mascot should be donated to the Kali Temple towards the north side of the house and rest of the materials are to be thrown in a glowing river or keep them under a Peepal tree. In this way the Sadhana is treated a complete one. Goddess Chinnamasta Mahavidya Sadhna fulfil all the desires of the life very soon. Poverty is eradicated immediately.
The accomplishment of Chinnamasta Mahavidya Sadhna is a graceful Sadhana. Performing this Sadhana the person will be out of fear. For modern period this is a necessary for a prosper life. The person also gets completeness in divinity. The sins of many births are eradicated by performing this, and become a clear life. It is an easy, useful and success giving Sadhana.
छिन्नमस्ता महाविद्या साधनाअंग न्यास: पुन: बाएँ (Left Hand) हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ (Right Hand) की समूहबद्ध, पांचों उंगलियों से निम्न मंत्रों के साथ शरीर के विभिन्न अंगों को स्पर्श करें और ऐसी भावना मन में रखें कि वे सभी अंग तेजस्वी और पवित्र बन रहे है। ऐसा करने से अंग शक्तिशाली बनते है और चेतना प्राप्त होती है।
ॐ आं खड्गाय हृदयाय नम: (हृदय को स्पर्श करें)ध्यान: इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर माँ भगवती छिन्नमस्ता का ध्यान करके, छिन्नमस्ता माँ का पूजन करे धुप, दीप, चावल, पुष्प से तदनन्तर छिन्नमस्ता महाविद्या मन्त्र का जाप करें।
भावन्मण्डल मध्यगांगिज शिरशिछन्नंविकीर्णाकम्।मन्त्र: पूजन सम्पन्न कर सिद्ध प्राण प्रतिष्ठित ‘काली हकीक’ माला से निम्न मंत्र की 114 माला 11 दिन, या 64 माला 21 दिन तक मंत्र जप करें, नित्य मन्त्र जाप के पश्चात् छिन्नमस्ता कवच का पाठ करे—
॥श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीये हुं हुं फट् स्वाहा॥प्रतिदिन मन्त्र जप के बाद में देवी के लिए खीर, सूखा मेवा नैवेध्य में रखना चाहिए और नीचे लिखा मन्त्र बोलकर देवी को भोग लगाना चाहिए।
नैवेध्य मन्त्र:
॥ ॐ सिद्धिप्रदे वर्णनीये सर्वसिद्धिप्रदे डाकिनीये छिन्नमस्ते देविइस प्रकार इन सोलह अक्षरों से स्पष्ट होता है कि मंत्र का प्रत्येक अक्षर विशेष शक्तिशाली है और इस एक ही मंत्र से भौतिक एवं आध्यात्मिक सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं।
छिन्नमस्ता महाविद्या कवचहुं बीजात्मिका देवी मुण्डकर्त्रिधरा परा ।जब सवा लाख मंत्र जप सम्पन्न हो जाय तो इसका दशांश हवन पलाश पुष्पों से करना चाहिए, तत्पश्चात् ब्रह्माण भोजन कराएं। साधना के बीच साधना के नियमों का अवश्य ही पालन करें। भय रहित होकर पूर्ण आस्था के साथ मन्त्र जाप 11 या 21 दिन तक पूरा करें। छिन्नमस्ता महाविद्या साधना के बारे में जानकारी गुप्त रखें। 11 या 21 दिन तक मन्त्र का जाप करने के बाद मन्त्र दशांश (10%) या संक्षिप्त हवन कमल गट्टे, पंचमेवा, काले तिल, शुद्ध घी, हवन समग्री में मिलाकर करें। हवन के पश्चात् यंत्र को अपने घर से दक्षिण दिशा की तरफ़ किसी काली मंदिर में दान कर दें और बाकि बची पूजा सामग्री को नदी या किसी पीपल के नीचे विसर्जित कर दें। इस तरह करने से यह छिन्नमस्ता महाविद्या साधना पूर्ण मानी जाती है। माँ छिन्नमस्ता साधक के संकल्प सहित कार्य भविष्य में शीघ्र पूरे करती है।
इस तरह धीरे-धीरे साधक के जीवन की दरिद्रता पूर्णत: समाप्त हो जाती है। साधक के जीवन में शत्रु, भय, रोग, बाधा जैसी समस्या नहीं रहती। छिन्नमस्ता साधना सौम्य साधना है, इसे करने से किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता और आज के भौतिक युग में इस साधना की नितान्त आवश्यकता है। इस साधना के द्वार साधक जहां पूर्ण भौतिक सुख प्राप्त कर सकता है, वहीं वह आध्यात्मिक क्षेत्र में भी पूर्णता प्राप्त करने में समर्थ होता है। साधक के कई जन्मों के पाप कट कर वह निर्मल हो जाता है। यह साधना अत्यधिक सरल, उपयोगी और आश्चर्यजनक सफलता देने में समर्थ है।