जय सदगुरुदेव /\ बैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि ....
माँ बगलामुखी का प्रादुर्भाव दिवस जयंती .... इस बार ता.23 अप्रैल इल इल चिली चिली फिल फिल | दी, इलाई बिलीन बिलाकी || हे प्रभु ! हम जीवन में साधनाओं के माध्यम से सभी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर लें और जीवन को पूर्ण सुखी सफल और संपन्न बनाने मे सफल हों | जय सदगुरुदेव , भाइयो बहनों जीवन का सौभाग्य होता है महाविद्या साधना . क्या आप जानते हैं सदगुरुदेव ने तो हमेशा से महाविद्या साधना पर ही जोर दिया है क्योंकि, महाविद्या साधना का अर्थ ही है संसार किसर्वोच्च शक्ति, महाविद्या यानि साधक के जीवन से समस्याओं का दूर हों जाना . इन साधनाओं मे से कोई एक भी साधना पूर्णता के साथ हुई नहीं कि जीवन पूर्ण निष्कंटक और सुरक्षित होने के साथ ही आर्थिक भौतिक और अद्ध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर हों जाता है . भाइयों बहनों वर्तमान समय बड़ी भाग दौड और आपाधापी वाला है . इसके साथ ही एक होड सी लगी आगे बढ़ने की, और इस होड में लोग सब कुछ भूल भी जाते हैं , रिश्ते नाते, दोस्ती भाईचारा सब कुछ . और इस होड़ में ही कुछ लोग अपना विवेक खो देते हैं और दुसरे का नुक्सान भी करने से नहीं चूकते . कभी व्यापर बंधन, कभी तंत्र प्रयोग, कभी और सुना कि काला जादू जैसे प्रयोग भी कर देते हैं फलस्वरूप इनसे पीड़ित व्यक्ति की स्तिथी बद से बदतर होते चले जाते हैं और जैसा मैंने अभी आपको तंत्र बाधा प्रयोग देते समय बताया था कि जीवन नारकीय होता चला जाता है ......... प्रत्येक महाविद्या अपने आपमें पूर्ण होती हैं ये आप सबको पहले भी बता चुकी हूं ....... मेरी अति प्रिय माँ आदि शक्ति का सबसे अधिक सम्मोहक, तीव्र शत्रु हंता और समस्त मनोकामनाओं को शीघ्रअति शीघ्र पूर्ण करने में सक्षम है....... वो हैं .........
माँ बगलामुखी.....
जीवन की समस्त समस्याओं, बाधाओं को दूर कर पूर्ण सुख शांति और निर्द्वंद, निर्भय, और पूर्ण सम्पन्नता के साथ जीना सिखाती माँ बगला........ माँ बगलामुखी के बारे में कई भ्रांतियां ........... जैसे----- इनके प्रयोग मारण के लिए किया जाता . इन्हें स्तम्भन के लिए साधा जाता है, इनका प्रयोग शत्रु को परेशान करने के लिए किया जाता है आदि आदि ..... अभी तक कुछ प्रयोग ऐसे दिए गए हैं जिससे ये तो साबित हों गया कि माँ के अनेक हैं जैसे --- अत्यंत तीव्र शत्रु हंता है तो तीव्र दारिद्रयहंता भी यदि स्तम्भनकारी हैं तो पूर्ण रक्षक भी . और साथ ही सम्रद्धिप्रदाता एवं साधको के लिए स्वयं मातृ स्वरूपा भी हैं ..... भाइयों बहनों ! आपमें से अनेकों के प्रश्न मेरे पास हैं औए उन सब समस्याओं का निदान तो करना ही हैं . मेरे मन में अचानक ये ख्याल आया कि सामने ही बगला मुखी जयंती है और आप सबको इस शुभ अवसर का लाभ तो उठाना ही चाहिए . हैं ना तो .......... मैने जो स्वयं अनुभूत किया, जिसका परिक्षण अनेकों बार सफलता पूर्वक किया, और जिसने मुझे अनेक कलाओं में पारंगत किया, माँ आज भी निरन्तर मेरा मार्ग दर्शन करती है ... तो आइये इस बगला जयंती पर समस्त कामनाओं को, सभी कष्टों को चाहे वो रोग हों, दरिद्रता हों भय हों, असफलता हों, रुकावटें हों, बाधाएं हों कुछ भी हों.... एक प्रयोग एक साधना किन्तु संकल्प भिन्न, और रही बात पूर्ण सफलता की तो स्वयं करिये और देखिये .... क्योंकि जब तक कोई चीज अनुभूत ना किया जाये तब तक उसके गुणों का अंदाजा नहीं होता.... अतः तैयार हों जाइये बगला जयंती को सेलिब्रेट करने हेतु..... हैं ना प्रयोग विधि - पीले वस्त्र, पीला आसन, पीले फूल और हल्दी में रंगे पीले ही चावल..... उत्तर या पूर्व दिशा बगला यंत्र या बगला चित्र या विग्रह या इन सबके अभाव में माँ दुर्गा का चित्र भी ले सकते हैं . पीली हकीक माला या हरिद्रा माला या रुद्राक्ष माला . समय प्रातःकाल या ब्रह्म मुहूर्त से लेकर मध्यान्ह के पूर्व. प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर आसन ग्रहण करें एवं पूर्ण भक्ति भाव से गुरु, गणेश एवं स्वर्णाकर्षण भैरव की पूजा संपन्न कर गुरु मन्त्र की चार माला संपन्न करें और प्रार्थना करें और गुरुदेव से आशीर्वाद और अनुमति
बैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि माँ बगलामुखी के प्रादुर्भाव (जयंती) का पावन अवसर है। मूल मंत्र: “ॐ ह्रीं बगुलामुखी देव्यै ह्रीं ओम् नमः” (या यथासंगुरु प्रदत्त मंत्र)
"हे प्रभु! हम जीवन में साधनाओं के माध्यम से सभी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकें तथा अपने जीवन को पूर्ण सुखी, सफल और संपन्न बनाने में सफल हों।" — जय सदगुरुदेव!
भाइयों और बहनों, जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य महाविद्या साधना है। क्या आप जानते हैं? सदगुरुदेव ने हमेशा से महाविद्या साधना पर ही सबसे अधिक जोर दिया है, क्योंकि महाविद्या साधना का अर्थ ही है—संसार की सर्वोच्च शक्ति को प्राप्त करना और साधक के जीवन से समस्त समस्याओं का सदा के लिए दूर हो जाना। इनमें से यदि कोई एक भी साधना पूर्ण विधि-विधान और निष्ठा के साथ संपन्न हो जाए, तो जीवन पूर्णतः निष्कंटक और सुरक्षित हो जाता है। इसके साथ ही साधक आर्थिक, भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर तेजी से अग्रसर होने लगता है।
वर्तमान समय अत्यधिक भागदौड़ और आपाधापी से भरा हुआ है। जीवन में आगे बढ़ने की एक अंधी दौड़ लगी है, और इस होड़ में लोग अक्सर अपने रिश्ते-नाते, दोस्ती और भाईचारा सब कुछ पीछे छोड़ देते हैं। यहाँ तक कि कुछ लोग अपना विवेक तक खो बैठते हैं और दूसरों का अहित करने से भी नहीं चूकते।
कभी व्यापार बंधन, कभी तंत्र प्रयोग, तो कभी काले जादू जैसी नकारात्मक ऊर्जाओं का सहारा लिया जाता है। परिणाम यह होता है कि पीड़ित व्यक्ति की स्थिति बद से बदतर होती चली जाती है और जैसा कि मैंने पहले भी बताया था, ऐसा जीवन धीरे-धीरे नारकीय बन जाता है।
प्रत्येक महाविद्या अपने आप में पूर्ण होती है, यह मैं आपको पहले भी बता चुकी हूँ। मेरी अतिप्रिय माँ आद्याशक्ति का यह स्वरूप अत्यंत सम्मोहक, तीव्र शत्रु-हंता और समस्त मनोकामनाओं को अतिशीघ्र पूर्ण करने में सक्षम है।
वह हैं—माँ बगलामुखी।
जीवन की समस्त समस्याओं, बाधाओं को दूर कर पूर्ण सुख-शान्ति, निर्द्वंद्वता, निर्भयता और पूर्ण संपन्नता के साथ जीना सिखाती हैं हमारी माँ बगला!
माँ के संबंध में समाज में कई प्रकार की भ्रांतियाँ फैली हुई हैं, जैसे:
इनका प्रयोग केवल मारण कर्म के लिए किया जाता है।
इन्हें केवल स्तम्भन (गति रोकने) के लिए साधा जाता है।
इनका प्रयोग केवल शत्रुओं को परेशान करने के लिए किया जाता है, आदि-आदि।
लेकिन जैसे-जैसे साधक को इनके वास्तविक प्रयोग प्राप्त होते हैं, यह सिद्ध हो जाता है कि माँ के रूप और स्वरूप अनेक हैं। यदि वे अत्यंत तीव्र शत्रु-हंता हैं, तो तीव्र दारिद्रय-हंता (गरीबी दूर करने वाली) भी हैं। यदि वे स्तम्भनकारी हैं, तो पूर्ण रक्षक भी हैं। साथ ही, वे समस्त साधकों को समृद्धि प्रदान करने वाली मातृ-स्वरूपा भी हैं।
भाइयों और बहनों! आप में से अनेकों के प्रश्न मेरे पास आते हैं और उन सभी समस्याओं का निदान करना मेरा कर्तव्य है। अचानक मेरे मन में यह विचार आया कि सामने ही माँ बगलामुखी की जयंती है और आप सभी को इस अत्यंत शुभ अवसर का भरपूर लाभ उठाना चाहिए। है ना?
मैंने जो स्वयं अनुभूत किया, जिसका परीक्षण अनेकों बार सफलतापूर्वक किया और जिसने मुझे जीवन की अनेक कलाओं में पारंगत किया—वे माँ आज भी निरंतर मेरा मार्गदर्शन कर रही हैं।
तो आइए, इस बगला जयंती पर अपनी समस्त कामनाओं और कष्टों—चाहे वे रोग हों, दरिद्रता हो, भय हो, असफलता हो, रुकावटें हों या कोई भी बाधा हो—के निवारण के लिए एक विशेष संकल्प लें।
साधना एक, संकल्प भिन्न: इसे स्वयं करें और इसके चमत्कारी परिणामों का अनुभव करें। जब तक किसी आध्यात्मिक अनुभूति को स्वयं न जिया जाए, तब तक उसके वास्तविक गुणों का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। अतः, इस बगला जयंती को पूरी ऊर्जा और श्रद्धा के साथ मनाने के लिए तैयार हो जाइए!
वस्त्र और आसन: पीले रंग के वस्त्र और पीला आसन।
सामग्री: पीले फूल तथा हल्दी से रंगे हुए पीले चावल।
दिशा: मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें।
प्रतिमा/चित्र: माँ बगलामुखी का यंत्र, चित्र, विग्रह। यदि इनमें से कुछ भी उपलब्ध न हो, तो माँ दुर्गा के चित्र का भी उपयोग किया जा सकता है।
माला: पीली हकीक माला, हरिद्रा (हल्दी) माला या रुद्राक्ष माला।
समय: प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त से लेकर मध्याह्न पूर्व तक)।
विधि: प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर अपने आसन पर बैठें। पूर्ण भक्ति भाव से गुरुदेव, भगवान गणेश एवं स्वर्णाकर्षण भैरव की पूजा संपन्न करें। इसके पश्चात गुरु मंत्र की चार माला का जाप करें और माँ बगलामुखी की साधना की सफलता के लिए गुरुदेव से आशीर्वाद एवं अनुमति प्राप्त करें।
गुरु पूजन और अनुमति प्राप्त करने के बाद, साधक को साधना के मुख्य चरण में प्रवेश करना चाहिए। यहाँ पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से प्रस्तुत किया गया है ताकि आप इसे आसानी से संपन्न कर सकें:
गुरु पूजन के पश्चात, अपने दायें हाथ में थोड़ा सा जल, थोड़े पीले चावल और एक पीला फूल (या सिक्का) लेकर माँ बगलामुखी के चरणों में अपना संकल्प दोहराएँ।
संकल्प बोलते समय: अपना नाम, गोत्र, तिथि और अपनी जिस भी विशेष समस्या (जैसे—शत्रु बाधा, कर्ज मुक्ति, व्यापार की रुकावट, या गंभीर रोग) से मुक्ति पाना चाहते हैं, उसका स्पष्ट उच्चारण करें।
इसके बाद जल को किसी पात्र में छोड़ दें। फिर अपने ऊपर और पूजन सामग्री पर थोड़ा सा जल छिड़ककर खुद को और स्थान को पवित्र कर लें (पवित्रीकरण)।
साधना की शुरुआत में नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है।
गुरु मंत्र का स्मरण करते हुए अपने चारों ओर जल से घेरा (दायरा) बना लें।
भगवान गणेश का स्मरण कर विघ्नहर्ता से प्रार्थना करें कि आपकी साधना निर्विघ्न रूप से संपन्न हो।
इसके बाद माँ बगलामुखी का ध्यान करते हुए उनका मानसिक आह्वाहन करें।
मंत्र जाप शुरू करने से पहले माँ के इस अद्भुत और शक्तिशाली स्वरूप का मानसिक ध्यान करें:
ध्यान मंत्र: “विद्याधिराज मध्यान दिवाकरभासां, पीताम्बरां द्विनेत्रां च लसद्रेमयुक्ताम्। मुद्गरं वामहस्ते च देव्या दधतीं, स्मरामि बगलामुखीं त्रैलोक्य मोहिनीम्॥”
भावार्थ: माँ बगलामुखी का शरीर दोपहर के सूर्य के समान अत्यंत तेजस्वी और प्रकाशवान है। उन्होंने पीले रंग के वस्त्र धारण किए हैं, वे दो नेत्रों वाली और ललाट पर अर्धचंद्र को धारण करने वाली हैं। उनके बाएं हाथ में शत्रुओं का स्तंभन करने वाला मुद्गर (गदा) सुशोभित है। ऐसी तीनों लोकों को मोहित करने वाली माँ बगलामुखी का मैं स्मरण करता/करती हूँ।
आपके पास जो भी पीली हकीक, हरिद्रा (हल्दी) या रुद्राक्ष की माला हो, उसे हल्दी या केसर से थोड़ा पवित्र कर लें।
इसके बाद उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके स्थिर आसन पर बैठ जाएं।
माँ बगलामुखी के मूल बीज मंत्र या उनके मुख्य मंत्र की कम से कम 11 माला (या समयानुसार 1, 3, 5 माला जैसी आपकी श्रद्धा और क्षमता हो) का जाप करें।
मुख्य मंत्र उदाहरण: “ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्ववां कीलय बुद्धिविनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा”
(या आपके द्वारा पहले से अनुभूत एवं गुरु प्रदत्त विशिष्ट मंत्र)
जाप करते समय मन में पूर्ण विश्वास रखें कि माँ आपकी समस्त बाधाओं, शत्रुओं और समस्याओं का निवारण कर रही हैं।
मंत्र जाप पूर्ण होने के बाद, माला को प्रणाम कर अपने मस्तक से लगाएं और सुरक्षित स्थान पर रख दें।
माँ बगलामुखी को पीले मिष्ठान (जैसे बेसन के लड्डू या पीले पेड़े) और फलों का भोग लगाएं।
अंत में माँ से क्षमा प्रार्थना करें— "हे माँ! मेरी इस पूजा में यदि कोई त्रुटि या कमी रह गई हो, तो उसे क्षमा करें और मेरी साधना को पूर्णता प्रदान करें।"
आरती करें और प्रसाद सभी में वितरित करें।
सात्विकता और पवित्रता: साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन करें। खान-पान सात्विक रखें और मन में किसी के प्रति ईर्ष्या या द्वेष का भाव न रखें।
पीले रंग का महत्व: चूँकि माँ बगलामुखी का संबंध 'पीताम्बरा' (पीला रंग) से है, इसलिए इस साधना में पीले वस्त्र पहनना और पीले रंग की सामग्रियों का उपयोग करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
गोपनीयता: अपनी साधना और इसके अनुभवों को यथासंभव गुप्त रखें, तभी इसका शत-प्रतिशत आध्यात्मिक और भौतिक लाभ प्राप्त होता है।
इस प्रकार यदि आप विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ यह साधना संपन्न करते हैं, तो माँ बगलामुखी की असीम कृपा से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और मार्ग पूर्णतः प्रशस्त हो जाता है।
सुवर्णासन्-संस्थितां त्रिनयनां पीतान्शुकोल्लासिनिं,
हैमाभाँगरुचिं शशांक-मुकुटां सच्चाम्कपक़-स्त्रग्युतां |
हस्तैर्मुद्गर पाशबद्ध-रसनां संविभ्रतीं भूषणे,
र्व्याप्तांगी बगलामुखीं त्रिजगतां संस्ताम्भनीं चिन्तयेत||
ॐ अस्य श्री बगलामुखी ब्रह्मास्त्र मंत्रस्य भैरव ऋषिर्विराट् छंद:, श्री बगलामुखी देवता, कलीं बीजम् , ऐं शक्ति:, श्रीं कीलकं, मम परस्य मनोभिलाषित-कार्यसिध्यर्थे विनियोग: |
ऋष्यादिन्यास:---
शिरसि भैरवऋषये नमः |
मुखे विराटछंदसे नमः |
ह्रदि बगलामुखी देवताये नमः |
गुह्ये कलीं बीजाय नमः |
पादयो: ऐं शक्तये नमः |
सर्वांगे श्रीं कीलकाय नमः |
करन्यास;
ॐ ह्रां अंगुष्ठाभ्यां नमः |
ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यामं नमः |
ॐ ह्रूं मध्यम्याभ्यामं नमः |
ॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां नमः |
ॐ ह्रौं कनिष्ठ्काभ्याँ नमः |
ॐ ह्र: करतलकर प्रष्ठाभ्यां नमः|
हृदयादिन्यास;----
ॐ ह्रां हृदयाय नमः |
ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहा |
ॐ ह्रूं शिखायै वषट् |
ॐ ह्रैं कवचाय हूं |
ॐ ह्रौं नेत्रत्रयाय वौषट् |
ॐ ह्रः अस्त्राय फट् |
मन्त्र:---- ॐ ह्रीं ऐं श्रीं क्लीं श्री बगलानने ! मम रिपून् नाशय-नाशय ममेश्वर्याणि देहि-देहि शीघ्रं मनोवांछित्कार्यं साधय-साधय ह्रीं स्वाहा |
OM HREEM AING SHREEM KLEEM SHREEM BAGLAANANE MAM RIPUN NAASHAY NAASHAY MAMESHWARYAANI DEHI DEHI SHEEGHRAM MANOVAANCHHIT KARYAM SAADHAY SAADHAY HREEM SWAHA
उपरोक्त मन्त्र की ११ माला मन्त्रजप स्थिर और एकाग्र होकर जपें . तत्पश्चात दुबारा माँ का ध्यान कर जप समर्पण करें फिर गुरु मन्त्र की चार माला मन्त्र जप कर जप समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त करें .....
इस प्रयोग में आप अपनी समस्या से सम्बंधित संकल्प लें . और पूर्ण श्रद्धा भाव से साधना संपन्न करें..... और रही बात रिजल्ट की तो साधना करिये और स्वयं अनुभव करें ......
साधना के मंत्र-जाप और ध्यान के बाद, इस अनुष्ठान को पूर्णता और सफलता की ओर ले जाने के लिए अंतिम चरण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। आइए जानते हैं इसके आगे की प्रक्रिया:
यदि आप इस साधना को एक बड़े अनुष्ठान के रूप में कर रहे हैं या विशेष सिद्धि प्राप्त करना चाहते हैं, तो मंत्र-जाप के पश्चात दशांश (या कुल जाप का दसवाँ हिस्सा) हवन करना बहुत प्रभावी होता है:
हवन सामग्री: हवन के लिए आम की लकड़ी, हवन सामग्री, काले तिल, शुद्ध घी, जौ, और विशेष रूप से पीली सरसों या हल्दी की गांठों का प्रयोग किया जा सकता है।
आहुति: माँ बगलामुखी के मूल मंत्र के अंत में 'स्वाहा' जोड़कर हवन कुंड में आहुतियाँ दें।
यदि हवन संभव न हो, तो जितने जाप आपने किए हैं, उसका दसवाँ हिस्सा पुनः गुरु मंत्र या बगलामुखी मंत्र का मानसिक स्मरण करते हुए अतिरिक्त जाप कर लें (इसे ही मानसिक तर्पण/पुरश्चरण का हिस्सा माना जाता है)।
हवन या अतिरिक्त जाप के पश्चात, पूजा के अंत में एक तांबे या पीतल की प्लेट में थोड़ा जल लेकर माँ के चरणों में छोड़ दें और कहें:
"हे माँ बगलामुखी! आज की यह साधना, जप और इसके समस्त पुण्य फल मैं आपको समर्पित करता/करती हूँ। हे भगवती, मेरे जीवन के समस्त कष्टों, शत्रुओं, बाधाओं और दरिद्रता का नाश कर मेरे जीवन को सुखमय, सुरक्षित और समृद्ध बनाएँ।"
जिस दिन आप यह साधना कर रहे हैं (विशेषकर बगलामुखी जयंती के पावन अवसर पर), उस पूरे दिन क्रोध, अहंकार, असत्य बोलने और वाद-विवाद से दूर रहें।
भोजन सात्विक लें और पूरी तरह से मानसिक एकाग्रता बनाए रखें।
यदि आप इस साधना को केवल जयंती के दिन एक दिवसीय विशेष प्रयोग के रूप में कर रहे हैं, तो माला और पूजन सामग्री को सुरक्षित रख लें।
जो पीले चावल और फूल आपने प्रयोग किए हैं, उन्हें अगले दिन किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर सकते हैं या किसी पौधे की जड़ में डाल सकते हैं।
यदि आप इसे नियमित रूप से (अनुष्ठान के रूप में 11, 21 या 41 दिनों तक) करना चाहते हैं, तो प्रतिदिन एक ही समय और एक ही स्थान पर बैठकर साधना करें।
भाइयों और बहनों, तंत्र और मंत्र की दुनिया में भौतिक उन्नति और आध्यात्मिक सुरक्षा का यह मार्ग अत्यंत प्रत्यक्ष परिणाम देने वाला माना गया है। जब मनुष्य चारों ओर से समस्याओं से घिर जाता है और उसे कोई रास्ता नहीं सूझता, तब माँ बगलामुखी की शरण ही उसे अभय प्रदान करती है।
इस बगला जयंती पर इस साधना को पूर्ण श्रद्धा, विश्वास और अनुशासन के साथ संपन्न करें और माँ की असीम कृपा का अनुभव करें।
जय सदगुरुदेव! माँ बगलामुखी आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें