Gurudev Dr. Narayan Dutt Shrimali

भैरव/भैरवी -भेरू  के 52 शक्ती और 52 रूप, bhairav/bhairav -bhairav ke 52 shakti aur 52 roop Naam

भैरव/भैरवी -भेरू  के 52 शक्ती और 52 रूप, bhairav/bhairav -bhairav ke 52 shakti aur 52 roop Naam

◆भैरव/भैरवी -भेरू  के 52 शक्ती और 52 रूप (नाम ) _:bhairav/bhairav -bhairav ke 52 shakti aur 52 roop Naam

bhairav/bhairav -bhairav ke 52 shakti aur 52 roop Naam
1.  हिंगलाज
      शक्ति- कोटरी (भैरवी-कोट्टवीशा) 
      भैरव का नाम - भीमलोचन 
2.   शर्कररे (करवीर)
       शक्ति- महिषासुरमर्दिनी
       भैरव का नाम - क्रोधिश 
3.   सुगंधा- सुनंदा
       शक्ति है सुनंदा
       भैरव का नाम - त्र्यंबक
4.    कश्मीर- महामाया
        शक्ति है महामाया
        भैरव का नाम - त्रिसंध्येश्वर 
5.   ज्वालामुखी- सिद्धिदा (अंबिका)
      शक्ति है सिद्धिदा (अंबिका) 
      भैरव का नाम - उन्मत्त 
6.   जालंधर- त्रिपुरमालिनी
      शक्ति है त्रिपुरमालिनी
      भैरव का नाम - भीषण 
7.   वैद्यनाथ- जयदुर्गा
       शक्ति है जय दुर्गा 
      भैरव का नाम - वैद्यनाथ 
8.   नेपाल- महामाया ( गुहेश्वरी )
       शक्ति है महशिरा (महामाया) 
      भैरव का नाम - कपाली 
9.   मानस- दाक्षायणी
       शक्ति है दाक्षायनी
       भैरव का नाम - अमर 
10.  विरजा- विरजाक्षेत्र
        शक्ती है विमला
        भैरव का नाम - जगन्नाथ 
11.   गंडकी- गंडकी
         शक्ती है चण्डी
         भैरव का नाम - चक्रपाणि 
12.   बहुला- बहुला (चंडिका)
         शक्ति है देवी बाहुला
         भैरव का नाम - भीरुक 
13.   उज्जयिनी- मांगल्य चंडिका
         शक्ति है मंगल चंद्रिका
         भैरव का नाम - कपिलांबर 
14.   त्रिपुरा- त्रिपुर सुंदरी
         शक्ति है त्रिपुर सुंदरी
        भैरव का नाम - त्रिपुरेश 
15.   चट्टल - भवानी
         शक्ति है भवानी
         भैरव का नाम - चंद्रशेखर 
16.   त्रिस्रोता- भ्रामरी
         शक्ति है भ्रामरी
         भैरव का नाम - अंबर और भैरवेश्वर
17.   कामगिरि- कामाख्‍या
         शक्ति है कामाख्या 
         भैरव का नाम - उमानंद 
18.   प्रयाग- ललिता
         शक्ति है ललिता
         भैरव का नाम - भव
19.   जयंती- जयंती
         शक्ति है जयंती
         भैरव का नाम - क्रमदीश्वर
20.  युगाद्या- भूतधात्री
        शक्ति है भूतधात्री
        भैरव का नाम - क्षीर खंडक
21.  कालीपीठ- कालिका
        शक्ति है कालिका 
        भैरव का नाम - नकुशील
22.  किरीट- विमला (भुवनेशी)
        शक्ति है विमला 
        भैरव का नाम - संवर्त्त 
23.  वाराणसी- विशालाक्षी
        शक्ति है विशालाक्षी‍ मणिकर्णी
        भैरव का नाम - काल भैरव 
24.  कन्याश्रम- सर्वाणी
        शक्ति है सर्वाणी
        भैरव का नाम - निमिष 
25.  कुरुक्षेत्र- सावित्री
        शक्ति है सावित्री
        भैरव का नाम - स्थाणु
26.  मणिदेविक- गायत्री
        शक्ति है गायत्री 
        भैरव का नाम - सर्वानंद
27.  श्रीशैल- महालक्ष्मी
        शक्ति है महालक्ष्मी
        भैरव का नाम - शम्बरानंद
28.   कांची- देवगर्भा
         शक्ति है देवगर्भा
         भैरव का नाम - रुरु 
29.   कालमाधव- देवी काली
         शक्ति है काली
         भैरव का नाम - असितांग 
30.   शोणदेश- नर्मदा (शोणाक्षी)
         शक्ति है नर्मदा
         भैरव का नाम - भद्रसेन 
31.   रामगिरि- शिवानी
         शक्ति है शिवानी
         भैरव का नाम - चंड 
32.  वृंदावन- उमा
        शक्ति है उमा 
        भैरव का नाम - भूतेश 
33.  शुचि- नारायणी
        शक्ति है नारायणी 
        भैरव का नाम - संहार
34.   पंचसागर- वाराही
         शक्ति है वराही
         भैरव का नाम - महारुद्र
35.   करतोयातट- अपर्णा
         शक्ति है अर्पण
         भैरव का नाम - वामन
36.  श्रीपर्वत- श्रीसुंदरी
        शक्ति है श्रीसुंदरी
        भैरव का नाम - सुंदरानंद
37.  विभाष- कपालिनी
        शक्ति है कपालिनी (भीमरूप)
       भैरव का नाम - शर्वानंद 
38.  प्रभास- चंद्रभागा
        शक्ति है चंद्रभागा 
        भैरव का नाम - वक्रतुंड
39.  भैरवपर्वत- अवंती
        शक्ति है अवंति
        भैरव का नाम - लम्बकर्ण
40.   जनस्थान- भ्रामरी
         शक्ति है भ्रामरी
         भैरव का नाम - विकृताक्ष
41.  सर्वशैल स्थान
        शक्ति है रा‍किनी
        भैरव का नाम - वत्सनाभम
42.    गोदावरीतीर :
         शक्ति है विश्वेश्वरी
         भैरव का नाम - दंडपाणि
43.   रत्नावली- कुमारी
        शक्ति है कुमारी
        भैरव का नाम - शिव 
44.   मिथिला- उमा (महादेवी)
        शक्ति है उमा
        भैरव का नाम - महोदर
45.  नलहाटी- कालिका तारापीठ
        शक्ति है कालिका देवी 
        भैरव का नाम योगेश
46.  कर्णाट- जयदुर्गा
        शक्ति है जयदुर्गा
        भैरव का नाम - अभिरु 
47.  वक्रेश्वर- महिषमर्दिनी
       शक्ति है महिषमर्दिनी 
       भैरव का नाम - वक्रनाथ
48.  यशोर- यशोरेश्वरी
        शक्ति है यशोरेश्वरी
       भैरव का नाम - चण्ड 
49.  अट्टाहास- फुल्लरा
       शक्ति है फुल्लरा
       भैरव का नाम - विश्वेश
50.  नंदीपूर- नंदिनी
       शक्ति है नंदिनी और 
       भैरव का नाम नंदिकेश्वर
51.  लंका- इंद्राक्षी
       शक्ति है इंद्राक्षी
       भैरव का नाम - राक्षसेश्वर
52.  मगद - सर्वानन्दकरी
       शक्ति है सर्वानन्दकरी
       भैरब का नाम व्योमकेश
■"महाँकाल भैरव"
भैरव का नाम सुनते ही मन मे भाय व्याप्त हो जाता है , जबकि ऐसा नहीं है ... 
भैरव शिव के ही अंश हैं।
माँ सती के अंग जहां जहां गिरे थे वे सभी शक्ति पीठ हो गए , भगवान शिव ने प्रत्येक शक्ति पीठ की रक्षा हेतु एक भैरव नियुक्त किए हैं । 
धर्म ग्रंथों के अनुसार भैरव भी भगवान शंकर के ही अवतार हैं। 
भगवान शंकर के इस अवतार से हमें अवगुणों को त्यागना सीखना चाहिए।
भैरव के बारे में प्रचलित है कि ये अति क्रोधी, तामसिक गुणों वाले तथा मदिरा का सेवन करने वाले हैं। 
इस अवतार का मूल उद्देश्य है कि मनुष्य अपने सारे अवगुण जैसे- मदिरापान, तामसिक भोजन, क्रोधी स्वभाव आदि भैरव को समर्पित कर पूर्णत: धर्ममय आचरण करें।
भैरव अवतार से हमें यह भी शिक्षा मिलती है कि हर कार्य सोच-विचार कर करना ही ठीक रहता है। 
बिना विचारे काम करने से पद व प्रतिष्ठा धूमिल होती है।
शिव महापुराण में भैरव को भगवान शंकर का पूर्ण रूप बताया है। 
इनके अवतार की कथा इस प्रकार है- 
एक बार भगवान शंकर की माया से प्रभावित होकर ब्रह्मा व विष्णु स्वयं को श्रेष्ठ मानने लगे। 
इस विषय में जब वेदों से पूछा गया तब उन्होंने शिव को सर्वश्रेष्ठ एवं परमतत्व कहा। किंतु ब्रह्मा व विष्णु ने उनकी बात का खंडन कर दिया। 
तभी वहां भगवान शंकर प्रकट हुए। 
उन्हें देखकर ब्रह्माजी ने कहा- चंद्रशेखर तुम मेरे पुत्र हो। 
अत: मेरी शरण में आओ। 
ब्रह्मा की ऐसी बात सुनकर भगवान शंकर को क्रोध आ गया। 
उनके क्रोध से वहां एक तेज-पुंज प्रकट हुआ और उसमें एक पुरुष दिखलाई पड़ा। 
भगवान शिव ने उस पुरुषाकृति से कहा- 
काल की भांति शोभित होने के कारण तुम साक्षात कालराज हो। तुम से काल भी भयभीत रहेगा, अत: तुम कालभैरव भी हो। 
मुक्तिपुरी काशी का आधिपत्य तुमको सर्वदा प्राप्त रहेगा। 
उस नगरी के पापियों के शासक भी तुम ही होंगे। 
भगवान शंकर से इन वरों को प्राप्त कर कालभैरव ने अपनी अंगुली के नाखून से ब्रह्मा का एक सिर काट दिया।
भगवान भैरवनाथ को प्रसन्न करने के उपाय -
1. रविवार, बुधवार या गुरुवार के दिन एक रोटी लें। 
इस रोटी पर अपनी तर्जनी और मध्यमा अंगुली से तेल में डुबोकर लाइन खींचें। 
यह रोटी किसी भी दो रंग वाले कुत्ते को खाने को दीजिए। 
यदि कुत्ता यह रोटी खा लें तो समझिए आपको भैरव नाथ का आशीर्वाद मिल गया। 
यदि कुत्ता रोटी सूंघ कर आगे बढ़ जाए तो इस क्रम को जारी रखें लेकिन सिर्फ हफ्ते के इन्हीं तीन दिनों में (रविवार, बुधवार या गुरुवार)। 
यही तीन दिन भैरव नाथ के माने गए हैं।
2. उड़द के पकौड़े शनिवार की रात को कड़वे तेल में बनाएं और रात भर उन्हें ढंककर रखें। 
सुबह जल्दी उठकर प्रात: 6 से 7 के बीच बिना किसी से कुछ बोलें घर से निकले और रास्ते में मिलने वाले पहले कुत्ते को खिलाएं। 
स्मरण रहे , पकौड़े डालने के बाद कुत्ते को पलट कर ना देखें। 
यह प्रयोग सिर्फ रविवार के लिए हैं।
3. शनिवार के दिन शहर के किसी भी ऐसे भैरव नाथ जी का मंदिर खोजें जिन्हें लोगों ने पूजना लगभग छोड़ दिया हो। 
रविवार की सुबह सिंदूर, तेल, नारियल, पुए और जलेबी लेकर पहुंच जाएं। 
मन लगाकर उनकी पूजन करें। 
बाद में 5 से लेकर 7 साल तक के बटुकों यानी लड़कों को चने-चिरौंजी का प्रसाद बांट दें। 
साथ लाए जलेबी, नारियल, पुए आदि भी उन्हें बांटे। 
अपूज्य भैरव की पूजा से भैरवनाथ विशेष प्रसन्न होते हैं।
4. प्रति गुरुवार कुत्ते को गुड़ खिलाएं।
5. रेलवे स्टेशन पर जाकर किसी कोढ़ी, भिखारी को मदिरा की बोतल दान करें।
6. सवा किलो जलेबी बुधवार के दिन भैरव नाथ को चढ़ाएं और कुत्तों को खिलाएं।
7. शनिवार के दिन कड़वे तेल में पापड़, पकौड़े, पुए जैसे विविध पकवान तलें और रविवार को गरीब बस्ती में जाकर बांट दें।
8. रविवार या शुक्रवार को किसी भी भैरव मं‍दिर में गुलाब, चंदन और गुगल की खुशबूदार 33 अगरबत्ती जलाएं।
9. पांच नींबू, पांच गुरुवार तक भैरव जी को चढ़ाएं।
10. सवा सौ ग्राम काले तिल, सवा सौ ग्राम काले उड़द, सवा 11 रुपए, सवा मीटर काले कपड़े में पोटली बनाकर भैरव नाथ के मंदिर में बुधवार के दिन चढ़ाएं।
भैरव आराधना के लिए इनमे से कोई भी मंत्र ले सकते हैं - 
- 'ॐ कालभैरवाय नम:।'
- ॐ भयहरणं च भैरव:।'
- 'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं।'
- 'ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नम:।'
- 'ॐ भ्रां कालभैरवाय फट्‍।'
उपरोक्त मंत्र जप आपके समस्त शत्रुओं का नाश करके उन्हें भी आपके मित्र बना देंगे। 
आपके द्वारा सच्चे मन से की गई भैरव आराधना और मंत्र जप से आप स्वयं को जीवन में संतुष्ट और शांति का अनुभव करेंगे।
!! ॐ साम्ब सदाशिवाय नमः !!◆।।
🙏🔱जय बाबा काल भैरव जी🔱
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llकरालं महाँकाल, कालं कृपालं ll

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