स्वस्थ देह से स्वस्थ मन और स्वस्थ मन से स्वास्थ चित्त यही तो जीवन है
सोमवार 08.08.22
रोगमुक्ति - रुद्र प्रयोग पर जानें रुद्र पूजा, मंत्र, संकल्प और विधि का सरल मार्गदर्शन। आध्यात्मिक साधना समझें, सही नियम अपनाएँ और श्रद्धा से प्रयोग करें।
रोगमुक्ति - रुद्र प्रयोग किसके लिए है और इसे कैसे किया जाता है? जानें रुद्राभिषेक, मंत्र और संकल्प की पूरी जानकारी। आध्यात्मिक उपाय समझें, फिर आगे बढ़ें। Disease Cure - Rudra विषय पर यह मार्गदर्शिका रुद्र साधना के अर्थ, लाभ और नियम समझाती है। सही विधि पढ़ें, सावधानी रखें और स्वास्थ्य सलाह के साथ इसका पालन करें।
रोगनाश के लिए भगवान रुद्र की साधना सर्वोपरि है। उसके लिए विशिष्ट सामग्री का होना आवश्यक है, जिससे कि पूर्णरूप से साधना को सम्पन्न किया जा सके। इसमें प्रयुक्त होने वाली सामग्री है -
1. प्राण-प्रतिष्ठित एवं मंत्र सिद्ध ज्योतिर्मय शिव यंत्र, मधु रूपेण रुद्राक्ष एवं रोगनाशक गुटिका।
2. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुँह करके बैठें।
3. सफेद या पीले आसन पर बैठें।
4. प्रातः 5 बजे से 8 बजे के मध्य इस प्रयोग को करें या फिर रात्रि 8.30 से 12.00 बजे के मध्य करें।
5. सोमवार को यह साधना करें। किसी भी सोमवार को इसे सम्पन्न कर सकते हैं।
6. अपने सामने बाजोट के ऊपर सफेद वस्त्र बिछाकर, किसी थाली में कुंकुंम से स्वस्तिक बनाकर शिव यंत्र को स्थापित कर दें व धूप दीप जला दें। फिर पूजन आरम्भ करें -
ध्याये नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारूचंद्रां वतंसं।
रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम।।
पद्मासीनं समंतात् स्तुततममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं।
विश्वाद्यं विश्वबद्यं निखिलभय हरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम्।।
ॐ उमामहेश्वराभ्यां नम: आवाहन समर्पयामि।।
देवता को बिठाने के लिए आसन के रूप में पुष्प रखें।
ॐ उमामहेश्वराभ्यां नम: आसनार्थे पुष्पं समर्पयामि।।
इस पृष्ठ में भगवान शिव और माता पार्वती (उमा-महेश्वर) की पूजा तथा शिव यंत्र साधना की विधि दी गई है। इसका संपूर्ण विवरण और मंत्र नीचे लिखे अनुसार हैं:
शिव यंत्र पर जल चढ़ाते हुए निम्न मंत्र बोलें:
इसके बाद गंध (चंदन या कुंकुम), अक्षत (चावल) और पुष्प (फूल) अर्पित करते हुए क्रमशः इन मंत्रों को बोलें:
नैवेद्य (प्रसाद) के ऊपर जल से प्रदक्षिणा करते (घुमाते) हुए रुद्र गायत्री मंत्र बोलें:
इसके बाद भोग लगाते हुए यह मंत्र बोलें:
3. मुख्य रोग-मुक्ति साधना और मंत्र
भोग लगाने के बाद, एक छोटी चम्मच से शिव यंत्र पर लगातार जल चढ़ाते रहें और लगभग पाँच मिनट तक नीचे दिए गए मंत्र का उच्चारण (जाप) करें: