जन्मपत्रिका में पांचवाँ भाव वंश वृद्धि योग अथवा सन्तान योग अथवा पुत्र-पुत्री योग दर्शाता है। वंश वृद्धि के परिप्रेक्ष्य में पांचवें स्थान में स्थित ग्रह, कारकग्रह से निम्न प्रकार फलादेश होता है-
सूर्य - एक तेजस्वी यशस्वी पुत्रकारक है।
चन्द्र- कन्या देने का ग्रह
मंगल-दो पुत्र
बुध-दो कन्या
गुरु- दो पुत्र
शुक्र-तीन कन्या
शनि-दो कन्या
राहु - दो गर्भपात, दो पुत्री तथा एक पुत्र
केतु-तीन कन्या
जन्म पत्रिका एवं ज्योतिष का संक्षिप्त विवरण
जन्म पत्रिका में कुल १२ भाव होते हैं जिसमें पांचवाँ भाव पुत्र-पुत्री योग दर्शाता है। देखें कुण्डली सं. १
सिद्ध शाबर मन्त्र : ५०
रक्षा मंत्र
मन्त्र :
ॐ नमो धरती माता, धरती पिता।
धरती धेरै न धीर।
बाजै सिंगी ।
बाजै तरतरी।
आया गोरखनाथ।
मीन का पूत।
मूँज का छड़ा।
लोहे का कड़ा।
हमारी पीठ पीछै यती हनुमान खड़ा।
शब्द साँचा।
फुरो मन्त्र ईश्वरोवाचा।
यह रक्षा मन्त्र भी है और झाड़े का मन्त्र भी है।
रक्षा करने के लिए इस मन्त्र का उच्चारण करके अपनी देह को स्पर्श कर लें।
झाड़े के लिए इस मन्त्र का जाप करते हुए, यदि रोगी को झाड़ा करें तो रोगी रोग से मुक्ति पा जाता है।
ॐ द्रां दत्तात्रयाय स्मरणमात्र संतुष्टाय मम सर्व कार्य सिद्धाय कुरु कुरु स्वाहा
गुरूवार से गुरूवार तक रोज सुबह 108 बार जाप करने से मंत्र सिद्ध होता है फिर जब जरुरत हो तभी 9 बार मंत्र का पाठ करे|
चलता आवे, उछलता जावे। भस्म करता रह रह जाय। सिद्ध गुरु की आन । मंत्र साँचा, पिण्ड काँचा। स्फुरो मंत्र, ईश्वरो वाचा।
पेट की बीमारियों के लिए मंत्र
ॐ शं शूलधारिणीभ्यामं नमः ।
इस मंत्र से पेट की सब व्याधियां दूर हो जाती है पेट में दर्द पर इसका