पौष शाकम्भरी पूर्णिमा २ साधना प्रयोग दिया जा रहा है
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सदगुर स्वामी निखिलेश्वर महाराज की साधना
*शुभ तिथि के उपलक्ष्य मे सदगुर स्वामी निखिलेश्वर महाराज की साधना मे जो भाग लेना चाहते हैं वो अपना नामांकन करे!! आप का नाम संकल्प मे लिया जायेगा और आपके मंगलमय जीवन हेतु प्रार्थना कि जायेगी। साथ ही हवन के दर्शन की छवि आपको भेज दी जाएगी *
साधना मे विशेष मंत्रो का जाप साथ हवन भी किया जायेगा
शुल्क 501/-
इस दिन विशेष साधना सदगुर स्वामी निखिलेश्वर महाराज की साधना के लिए सम्पर्क करे स:शुल्क 501 -
*अपना नाम एड्रेस गोत्र न्योछावर राशि के साथ जमा करें!
upi:- Paytm, Phone Pay, Gpay Number 9313444700
WhatsApp mobile number +91 9560160184
विशेष मंत्र द्वारा जो केवल ऊपर दिए गये समय तक ही प्रभावशाली रहेगा!! आप खुद करे और अनुभव करे!! मंत्र प्राप्ति के इच्छुक व्यक्ति संपर्क करे!!*अपना नाम एड्रेस गोत्र न्योछावर राशि के साथ जमा करें
सेवा भाव से की गयी कोई भी क्रिया समर्पण ही कहलाती है । और हमारा ये समर्पण हमारे गुरु के प्रति होता है, उस परमात्मा के प्रति होता है । यहां हमारी आसक्ति खत्म होने लग जाती है और साधना की क्रिया भी उस गुरु से जुड़ने की क्रिया बन जाती है ।
और जब समर्पण होता है, तब ही इस बात की समझ आती है कि जब भी हम अपने गुरु का चिंतन करते हैं तो आंखों से आंसू क्यों बहने लग जाते हैं । आंखों से आंसू बहने लगते हैं तब ही पता चलता है कि प्रेम क्या होता है, समर्पण क्या होता है और गुरु से जुड़ाव क्या होता है ।
अगर आपको अपने जीवन में जीवित जाग्रत गुरु मिल जायें तो आपका सौभाग्य है । और उसमें भी सदगुरु मिल जायें तो सौभाग्य की उपमा की ही नहीं जा सकती है । अगर मिलें तो फिर पैर पकड़ लेना उनके । अगर न मिलें तब भी कोई बात नहीं, क्योंकि गुरु तो अंदर ही बैठे हैं । वैसे भी आप उनको नहीं खोज सकते, गुरु ही आपको खोजते हैं ।
अगर कोई सद्गुरु न मिले तब भी अपने ह्रदय में बैठे सद्गुरु से ही मार्गदर्शन लीजिए, उनके प्रति ही समर्पण कीजिए । अगर इतना भी नहीं कर सकते तो राम, कृष्ण, बुध, महावीर, शिव..... किसी को भी गुरु रुप में धारण कीजिए, अपना समर्पण कीजिए और साधना कीजिए ।
तब जाकर साधना में सफलता मिलने की बात कीजिए । अगर इतना नहीं कर सकते तो बाकी सब भी व्यर्थ ही है ।
अब बात करते हैं कार्य सिद्धि की तो किसी भी कार्य में सफलता तब तक नहीं मिल सकती जब तक कि काल का सहयोग न प्राप्त हो । आपने बहुत बार सुना होगा कि मेहनत तो बहुत की पर शायद समय ठीक नहीं चल रहा है । बहुधा ऐसा होता है कि हम बहुत मेहनत करते हैं पर प्रारब्ध की वजह से या मेहनत की कमी से, या फिर कहिये कि आत्मविश्वास की कमी से हम बहुत से ऐसे कार्यों में भी असफलता प्राप्त करतेे हैं जहां हमें सफलता की पूरी उम्मीद थी । फैक्टर तो बहुत सारे होते हैं पर मुख्य रुप से दो ही चीजें हमारे भाग्य को दुर्भाग्य में बदल देती हैं ।
पहली चीज है चैतन्यता की कमी और दूसरा है काल शक्तियों का सहयोग न मिलना ।
तो अगर जीवन में सफलता प्राप्त करनी है तो हमें अपनी चैतन्यता के स्तर को ऊपर उठाना ही पड़ेगा