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  • Mantra Tantra Yantra Vigyan Gurudev Dr. Narayan Dutt Shrimaliji

Shani Jayanti

Shani Jayanti

शनि जयन्ती 22 मई 2020, ज्येष्ठ मास अमावस्या शनि साधना और मंत्र जप का विशेष मुहूर्त है।

इस दिन एक छोटी कटोरी में तेल भर दें और उसमें देखते हुए निम्न शनि मंत्र का 30 मिनट तक जप करें -

॥ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः॥

सात दिन तक नित्य यानि 22 मई 2020 से 29 मई 2020 तक नित्य इसी तेल भरी कटोरी को देखते हुए मंत्र जप करें और 30 मई 2020, शनिवार को इसे किसी पीपल के वृक्ष में उपरोक्त मंत्र का जप करते हुए डाल दें।

सद्गुरुदेव से दीक्षा प्राप्त कर शनि मंत्र जप करने से शनि की अनुकूलता अवश्य प्राप्त होती है।



 चिंता से चतुराई घटे, दुःख से घटे शरीर।कैसा भी संकट हो, मनवा खोओ न धीर। चिंता और चिता के बीच मात्र एक अनुस्वार का अन्तर है,अत्यधिक चिंता मनुष्य के जीने की लालसा या जिजीविषा छीन लेती है।जीवन जीने के लिए उत्साह एवं संकट के समय धैर्य रखना अति आवश्यक है।जीवन में जैसी भी स्थिति हो उससे आप विचलित न हों।शान्त चित्त मन और बुद्धि-विवेक से अपने कर्म करते रहें।जीवन में अनुकूलता अवश्य प्राप्त होगी। संसार के अधिकांश व्यक्ति परिस्थितियों का रोना रोते चिंता करते हैं और सोचते हैं कि अमुक तरह की अनुकूलताएं मिलें तो वे आगे बढ़ने का प्रयास करें।परन्तु ऐसा होता नहीं है।इसलिए कहा गया है कि अपने पराक्रम एवं बुद्धिबल के सहारे अपने लिए परिस्थितियां गढ़ना ही मनुष्य का कर्तव्य है।


मंत्र:-
।। ऊँ नमः शिवाय।।  

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?    ?ऊँ गं गणपतये नमः?    ?
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गुरूवाणी
    'चलो मेरे साथ बढ़ाते कदम '
                           'अमृत प्रवाह हो हर कदम '
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                   जय निखिलं
          जय निखिलं जय निखिलं
   जय निखिलं  जय निखिलं जय निखिलं
   जय निखिलं जय निखिलं  जय निखिलं
        ऊँ जय निखिलं जय निखिलं ऊँ
        ऊँ जय निखिलं जय निखिलं ऊँ
        ऊँ जय निखिलं जय निखिलं ऊँ
   जय निखिलं  जय निखिलं जय निखिलं
   जय निखिलं  जय निखिलं जय निखिलं
   जय निखिलं  जय निखिलं जय निखिलं
   जय निखिलं  जय निखिलं जय निखिलं

सदगुरुदेव वाणी.....
दिखा पराक्रम यह जग तेरे आगे... 
                                नतमस्तक हो जाएगा।
धीर-धर  तू  कर्म  किए  जा 
                             तेरा  वक्त  भी  आएगा।।

किया परिहास सभा ने रघुवर की... 
                                    प्रत्यंचा चढ़ाने पर।
तोड़ दिया शिव धनुष राम ने... 
                               अपना समय आने पर।।
खो ना  मनोबल बढ़ता चल... 
                                शौर्य तेरा दिख जाएगा।
धीर-धर तू कर्म किए जा...
                               तेरा वक्त भी आएगा।।

करते रघुवर सागर से विनती...
                               पथ की थी अभिलाषा।
त्राहि-त्राहि हो उठा सिंधु...
                        जब जागी पौरुष की भाषा।।
दिखा   सामर्थ   तेरा   मार्ग.. 
                                सुसज्जित  हो  जाएगा।
धीर-धर तू कर्म  किए  जा
                                तेरा वक्त भी आएगा।।

हुए    शून्य   अभिमान   में   जो... 
                                 थे  स्वर्ण  नगर  वासी।
खिल   पड़ा   मान   उनका....
                      जो  थे  गुरु  के अभिलाषी।।
तुम भी चलो सन्मार्ग पर....
                    तुम्हारा जीवन भी संवर जाएगा।
धीर-धर  तू  कर्म  किए  जा...
                              तेरा  वक्त  भी आएगा।।

           "प्रसन्नो भव, प्रसन्नो भव"

अपने संकल्पों को बार -बार दोहराओं.......
मुश्किल जरुर है, पर ठहरा नहीं हूं मैं, मंजिल से जरा कह दो,अभी पहुंचा नहीं हूं मैं.....

   वन्दे गुरो !निखिल ! ते चरणारविन्दम्


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