Join Free | Sign In | Blog
  • Mantra Tantra Yantra Vigyan
  • Mantra Tantra yantra vigyan
  • Mantra Tantra yantra Sadhana
  • Mantra Tantra Yantra Vigyan Gurudev Dr. Narayan Dutt Shrimaliji

तंत्र में छह क्र‍ियायें होती हैं tantra me 6 kirya hoti hai

तंत्र में छह क्र‍ियायें होती हैं tantra me 6 kirya hoti hai

तंत्र में छह क्र‍ियायें होती हैं .... जिनमें से कुछ क्रि‍यायें ..... बिजनिस मैनेजमेण्ट और पॉलिट‍िकल मैनेजमेण्ट में उपयोग की जातीं हैं ..... मसलन .... आकर्षण .... मोहन या सम्मोहन और वशीकरण ..... मान लीजिये कि आप एक दूकान चलाते हैं या राजनीति करते हैं तो इन तीन क्र‍ियाओं में विशेषज्ञता या महारत आपको हासिल है तो आप निसंदेह एक सफल व्यवसाई या राजनीतिज्ञ बन सकते हैं .... आकर्षण .... यानि किसी ग्राहक को अपनी दूकान तक लाना ..... सम्मोहन यानि उसे बहका बहला कर फुसला कर अपनी दूकान व सामग्री के प्रति मोहित करना या सम्मोहित करना कि उसे आपके सिवा बाकी सब दूकानें और उनका सामान हर स्तर पर हीन या घटिया जान पड़े .... तीसरी चीज है वशीकरण .... यानि आये हुये ग्राहक को सदैव के लिये अपनी दूकान से बांध लेना और उसे जाने न देना या हमेशा के लिये उसे अपना ग्राहक बना लेना .... यही चीज राजनीति में होती है ..... सदस्य हो , कार्यकर्ता हो .... पदाध‍िकारी हो ....मतदाता हो ... सब पर यही तीन चीजें लागू होतीं हैं ..... किसी घरेलू परिवार में , या कुटुम्ब में या किसी गॉंव में .... या किसी के दांपत्य जीवन में भी पति और पत्नी के मध्य या मित्रों के मध्य भी यही तीन चीजें काम करतीं हैं , और यह गुण कभी कभी मनुष्य में निजी भी होते हैं और कभी कभी भाग्य या प्रारब्धवश आ प्राप्त होते हैं , कभी कभी ईश्वरीय कृपा से या योग साधना से या कभी विलक्षण प्रयोगवश ( आप इसे तंत्र प्रयोग कह सकते हैं ) या वैज्ञानिक या दोषमुक्त‍ि क्र‍ियाओं से उत्पन्न हो जाते हैं , जैसे कि घर में चारों ओर श्री कृष्ण व राधा की तस्वीरें लगा देना या घर के अंदर रंग या दीवारों के रंग या गृह प्रबंधन की व्यवस्थाओं को बदलना , आदि अनेक प्रक्र‍ियायें व क्र‍ियायें हैं , बहुधा स्त्रीयों को यह दिक्कत रहती है कि उनका पति शराब पीता है , कुछ करता धरता नहीं या मार पीट करता है , वगैरह वगैरह , और वे तांत्रिकों की या टोटकों की शरण में जाकर अपना समय धन व कभी कभी इज्जत आबरू गंवाती रहतीं हैं , हमारी सलाह है कि इस भारत देश में या इस विश्व में असल तंत्र मंत्र यंत्र विद्या के जानकार महज 2 या तीन फीसदी लोग हैं , बाकी जितने भी आश्रम , संत , साधु या तांत्रिक वगैरह हैं , सब 98 या 97 प्रतिशत फर्जी हैं, जाली हैं और उनमें कुछ कर पाने की कोई शक्त‍ि , साधना या ज्ञान नहीं होता । यही सही है कि तंत्र मंत्र यंत्र बहुत कुछ कर सकता है , टोना टोटका भी बहुत कर देता है , लेकिन हरेक के बूते का यह काम नहीं , इसके लिये बहुत उच्चकोटि का साधक चाहिये , एक असाधारण गुरू की खोज जितनी कठिन है , उससे भी ज्यादा असाधारण श‍िष्य की खोज कठिन है , साधनाओं की अनेक कोटियां और स्तर होते हैं, योग के भी अनेक स्तर व कोटियां होतीं हैं , महिलाओं के लिये हमारा एक बेहतर संदेश है कि 98 फीसदी तांत्रिकों से दूर रहें , स्वयं को ही परिपूर्ण करें , भगवान श्री कृष्ण व राधा जी से बेहतर आपकी व्यथा सुनने वाला और दूर करने वाला अन्य कोई नहीं , बहुत आवश्यक हो तो केवल शंकराचार्य जी से या अन्य बहुत उच्च कोटि के साधक से ही मार्गदर्श , सहायता व परामर्श लें , यह भी होता है कि अनेक बार किी जन्म कुण्डली में यह योग होता है कि कोई शराब पीये या अन्य कोई व्यसन करे , या किसी अन्य नारी या नारीयों से सहयोग , मदद या अन्य ऐसे संबंध रखे जिसे अनुचित या अवैध माना जाये , केवल तभी उसी व्यक्त‍ि की उन्नति , आय या रोजगार या काम धंधा चले या आगे बढ़े , और इन चीजों से उसे रोकते या दूर करते ही उसका सब कुछ नष्ट हो जाये और सब थम जाये और वह सब सारा ऐश्वर्य वैभव भी खो दे, वैसे ऐसा तब होता है जब बारहवें भाव में जन्मकुंडली कुछ विशेष ग्रहों को बिठाल दे, अन्यथा तो पत्नी या प्रेमिका या सहसंबंधी विपरीत लिंगी की स्थ‍िति तो जन्मकुण्डली का पाताल भाव यानि सप्तम भाव बताता है और यही भाव या घर आदमी के व्यापार का भी , कांम धंधा का , व्यवसाय का भी होता है , यानि जैसी पत्नी की या प्रेमिका की हालत होगी , वैसी ही हालत उसके व्यापार या व्यवसाय की खुद ब खुद बन जाती है , कलह युक्त क्लेश कारणी पत्नी , तो निसंदेह वैसा ही उसका व्यापार व व्यवसाय होता चला जाता है .... यदि वह इसके विपरीत सुखी , प्रसन्न चित्त एवं सदा हर्ष‍ित रहने वाली मद कामिनी और हृष्ट पुष्ट एवं सर्वदा खुख वाचन एवं उत्तम व्यवहारिणी होगी तो वैसा ही उसके पति का व्यापार व व्यवसाय हो जाता है ..... खैर इस बात पर विस्तृत और बृहद जिक्र कभी अपनी किसी किताब में या अपनी वेबसाइट पर करेंगें .... फिलवक्त इतना ही काफी है
==============================
आकर्षण तंत्र क्रिया [Attraction Tantra]
================================
तंत्र के षट्कर्म के अंतर्गत आने वाले प्रयोगों में आकर्षण भी एक प्रयोग है ,जिसका उपयोग किसी व्यक्ति ,ईष्ट ,चराचर को अपनी और आकर्षित करने के लिए किया जाता है |इस तरह के तीन प्रयोग तंत्र में आते है आकर्षण -आकर्षित करना ,वशीकरण -वश में करना ,और मोहन -मोहित कर लेना ,,|सभा में लोगो को आकर्षित करने के लिए ,गए हुए को बुलाने के लिए ,रूठे हुए को बुलाने के लिए ,खोये हुए को आकर्षित करने के लिए आकर्षण प्रयोग अधिक अनुकूल होता है ,जबकि व्यक्ति से प्रत्यक्ष संपर्क संभव नहीं हो ,या परिचय न हो ,|
आकर्षण में दो तरह की क्रियाए की जा सकती है ,|शुद्ध वस्तुगत क्रिया जिसमे मंत्र शक्ति गौण रूप से ही कार्य करती है ,और केवल वस्तुगत उर्जा को बढ़ाती और लक्ष्य तक निर्देशित करती है ,यह क्रिया व्यक्ति के संपर्क में रही वस्तुओ के साथ की जाती है | सभी तरह के आकर्षण टोटके और सामान्य लोगो द्वारा सामान्य रूप से की जाने वाली क्रियाए इसके अंतर्गत आती है ,जिनकी अपनी एक सीमा होती है |दूसरा पूर्ण मंत्र शक्ति के बल पर की जाने वाली क्रिया |,यहाँ मुख्य कार्य मंत्र की ऊर्जा और ईष्ट की शक्ति के साथ करता की मानसिक शक्ति कार्य करती है |,लक्ष्य पर केंद्रीकरण निपुण साधक या व्यक्ति से नजदीकी सम्बंधित व्यक्ति करता है ,|यहाँ सामग्रियों का उपयोग ऊर्जा बढाने के लिए हो भी सकता है और नहीं भी ,|,यह क्रिया प्रकृति की ऊर्जा ,मानसिक ऊर्जा को मंत्र से व्यक्ति तक पहुचाने की है ,जिससे व्यक्ति के अवचेतन में उद्वेलन होता है |
जब आकर्षण प्रयोग किया जाता है तो उससे उत्पन्न ऊर्जा तरंगों में परिवर्तित हो व्यक्ति को लक्ष्य करती है ,माध्यम व्यक्ति के संपर्क में रहे कपडे,वस्तुए,फोटो ,यादे कुछ भी हो सकती है ,,यह न भी हो तो व्यक्ति के नाम पते पर प्रयोग किये जाते है तो यह ऊर्जा वातावरण में ईथर के माध्यम से फ़ैल जाती है और व्यक्ति को तलाश कर उसे पकडने का प्रयास करती है फिर उसके शरीर को लक्ष्य कर उसे आंदोलित करती है |फलतः व्यक्ति बेचैन होता है उसकी यादे इधर उधर भटकती है ,उसे स्वप्न आते है ,घर या सम्बंधित व्यक्ति की याद आती है ,बेचैन रहने लगता है और इस प्रकार वह सम्बंधित लक्ष्य की और खिचता है |,उसे तभी संतुष्टि-शान्ति मिलती है जब वह सम्बंधित स्थान -व्यक्ति तक पहुच जाता है |यदि व्यक्ति परिचित है प्रयोग करनेवाला या करानेवाला तो उसे उसके स्वप्न आने लगते है ,याद आती है उसकी बार-बार और वह उससे मिलने का प्रयास करता है |यदि व्यक्ति अपरिचित है तो व्यक्ति को तब तक चैन नहीं मिलता जब तक की वह प्रयोगकरता या करवानेवाले से नहीं मिल लेता |,ऐसी स्थिति में प्रयोगकर्ता को उसके सामने मिलने जाने का प्रयास करना होता है ,क्योकि व्यक्ति उसको जानता नहीं ,केवल बेचैन होता है ,मिलने पर उसे संतुष्टि मिलती है और वह आकर्षित हो जाता है ...................
==================================
Mantra For Visa Problem Solution यात्रा की बाधा का तंत्र-मंत्र-यंत्र
सोमवार एवं शनिवार को पूर्व की यात्रा करने की परिस्‍थिति में यात्रा करने वाले को क्रमश: दूध का पान कर ‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए यात्रा करनी चाहिए।

शनिवार को उड़द के दाने पूर्व दिशा में चढ़ाकर तथा कुछ दाने खाकर यात्रा करें एवं यात्रा के समय शनि-गायत्री का पाठ करता रहे- ‘ॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्न: शनि प्रचोदयात्।’
मंगलवार एवं बुधवार को यात्रा करना जरूरी हो तो मंगलवार को गुड़ का दान करें, कुछ गुड़ मुख में धारण करें तथा मंगल-गायत्री का जप करें- ‘ॐ अंगारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौम: प्रचोदयात्।’ 
बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा आवश्यक हो तो तिल एवं गुड़ का दान करें एवं उसी से बने पकवान का भोजन कर यात्रा करें। यात्रा से पूर्व पांच बार बुध-गायत्री का पाठ कर यात्रा करनी चाहिए- ‘ॐ सौम्यरूपाय विद्महे बाणेशाय धीमहि तन्न: सौम्य: प्रचोदयात्।’
वैसे तो ज्योतिष शास्त्र के मतानुसार रविवार एवं शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा करना निषिद्ध बताया गया है, फिर भी अत्यंत आवश्यक हो जाने पर यात्रा करनी हो तो उपाय कर यात्रा की जा सकती है-
रविवार को पश्चिम में यात्रा करने के पूर्व शुद्ध गाय का घी लेकर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके हवन करें तथा यात्रा से पूर्व घी का पान करें एवं कन्याओं को दक्षिणा देकर सूर्य गायत्री का जप करते हुए यात्रा प्रारंभ करें-
‘ॐ आदित्याय विद्महे प्रभाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात्।’
गुरुवार को दक्षिण दिशा में यात्रा करना सर्वथा वर्जित है, किंतु आवश्यक शुभ कार्य हेतु यात्रा करना जरूरी हो गया हो तो निम्न उपाय कर यात्रा की जा सकता है-
गुरुवार को यात्रा के पूर्व दक्षिण दिशा में पांच पके हुए नीबू सूर्योदय से पूर्व स्नान कर गीले कपड़े में लपेटकर फेंक दें, यात्रा से पूर्व दही का सेवन करें तथा शहद, शकर एवं नमक तीनों को समभाग में मिलाकर हवन करें और गुरुगायत्री का जप कर यात्रा प्रारंभ करें-
‘ॐ आंगिरसाय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नो जीव: प्रचोदयात्।’

Guru Sadhana News Update

Blogs Update