तारा साधना → दर्शन, सिद्धि और धनलाभ हेतु --------
२६-९-१९८७ नवरात्र जोधपुर |
धन के मामले मे नियम पालन जरूरी |
कब? → किसी भी शुक्ल पक्ष की तृतीया से
→ लाल आसन, पुष्प,लाल ही मिठाई (केवल दूध का बना)
→ लाल मूंगा माला|
मंत्र : →|| ॐ ह्रीं ह्लीं ह्लीं ओं ओं ह्रीं ह्रीं क्रीं क्रीं क्रीं हुं हुं फट ||
→||om Hrring hleem Hleem Ong Ong Hring hring Kring Kring Kring Hum Hum Phat||
१२वें दिन ११ कुमारी को भोजन और ११०० आहुती इसी मंत्र की घी से दे तो इसमे फट की जगह स्वाह: बोले (फट मे ट पर हलंत लगाए )नोट :→ शिविरो की साधानए पत्रिका मे नहीं दी जाती थी और इसका उच्चारण ओर नियम गुरुदेव ने जो बताय थे उसी अनुरूप |
माला - संबंधी सावधानी
माला फेरते समय निम्न सावधानियां बरतनी आवश्यक हैं -
माला सदा दाहिने हाथ में रखनी चाहिए ।
माला भूमि पर नहीं गिरनी चाहिए , उस पर धूल नहीं जमनी चाहिए ।
माला अंगूठे , मध्यमा व अनामिका से फेरना ठीक है । दूसरी उंगली तर्जनी से भूलकर भी माला नहीं फेरनी चाहिए ।
मनकों पर नाखून नहीं लगने चाहिए ।
माला में जो सुमेरु होता है , उसे लांघना नहीं चाहिए । यदि दुबारा माला फेरनी हो तो वापस माला बदलकर फेरें । मनके फिराते समय सुमेरु भूमि का कभी स्पर्श न करे । इस बात के प्रति सदा सावधान रहना चाहिए ।