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चेतना मंत्र रहस्य Gurudev Dr. Narayan Dutt Shrimaliji चेतना मंत्र रहस्य chetna mantra rahsya

MTYV Sadhana Kendra -
Friday 17th of April 2015 03:19:56 PM


GIVE ME FAITH AND DEVOTION, AND I WILL GIVE YOU FULFILMENT & COMPLETENESS -

ParamPujya Pratahsamaraniya Gurudev Dr. Narayan Dutt Shrimaliji

चेतना मंत्र ......

साधनाओ के महासागर मे कुछ हीरे , कुछ मोती हम सब के पास हैं ही. पर हम अन्य चमकीले पत्थर की खोज मे लगे रहते हैं क्योंकि इन हीरे मोती को प्राप्त करने मे हमने कोई संघर्ष किया ही नही .

और एक ऐसे ही अनमोल धरोहर या वरदान कहें या हमारे न मालूम कितने जीवनों का सौभाग्य की चेतना मंत्र आज जो हमें प्राप्त हैं . पर कितने हैं कि इस मंत्र को करते हैं और अगर कुछ करते हैं तो एक माला मंत्र .......इस से आगे कितने गए ..

पर जब बात आये एक पूरा अनुष्ठान तो शायद दो तीन ही होंगे ..जिन्होंने इस बात की ... इस तथ्य की गंभीरता समझी होगी .पर यह मंत्र इतना महत्वपूर्ण क्यों है न .शास्त्रों मे वर्णित हैं की ..इस देह मे एक मुख नही बल्कि ८४ लाख मुख हैं , और जैसा कहाँ जाता हैं कि भगवान महवीर के रो म रोम से राम राम उच्चारित होता रहा हैं तो यह कपोल कल्पना नही हैं . आज के युग मे स्वामी राम तीर्थ जी के जीवन मे और कई ऐसे योगी रहे हैं जिन्होंने इस बात को देख समझा या परखा हैं . और जब एक मुख से मंत्र जप का इतना अर्थ हैं तो अगर पूरा शरीर से मंत्र जप का उच्चरण हो तब क्या बात हैं ..एक बार मे लाखों मंत्रका उच्चरण तब क्या और कितना समय लगेगा साधना सिद्ध होने मे .निश्चय ही यह देह ... विज्ञानिको कि दृष्टी मे मात्र कुछ पैसे की हैं पर भारतीय साधनाओ से जुड़े जानते हैं की यह अमूल्य हैं क्योंकि इसमें संभावनाए ही नही बल्कि जो अर्थ हैं वह तो अप्रितम हैं .पर यह सारे रोम रोम जाग्रत कैसे हो ,,अगर किसी भी साधना मे बैठने से पहले शरीर को स्वच्छ रखना एक महत्वपूर्ण बात हैं तो क्यों ??वह इस लिए कि शरीर का रोम रोम स्वच्छ हो जाए पर इसके बाद यदि वह रोम जाग्रत ही ना हुए तो क्या अर्थ रहा . और इस क्रिया को संभव बनाता हैं चेतना मंत्र ..इसे केबल एक मंत्र मानने की गलती न करे यह भी मंत्र राज कि श्रेणी का मंत्र हैं , जीवन के समस्त पाप ताप दूर करने की सामर्थ्य रखता हैं | इस बात का ध्यान रखें |

• यह मंत्र आधार हैं सारी साधनाओ मे सफलता का .

• यह मंत्र आधार हैं उच्च तंत्र साधनाओ के लिए योग्य बनने का .

• यह मंत्र आधार हैं समस्त रोग विकार इस मानव देह से दूर करने का ..

• यह मंत्र आधार हैं मन मे प्रसन्नता और उमंग पाने का क्योंकि की जब रोम रोम चैतन्य होगा तो ..

• यह मंत्र आधार हैं साधना सबंधित अनेक बातो मे आपको अनुकूलता देने का .चाहे वह एकाग्रता और अन्य बाते हो .

• शारीर स्थ अंतर ब्रम्हांड को सीधे ही बाह्य ब्रम्हां ड से जोड़ने का ..

• समस्त कुण्डलिनी के चक्र जागरण करने का ..

• चेहरे मे दिव्यता ओज लाने का .पर क्या इसके भी अनेक आयाम हैं .निश्चय ही ..... सदगुरुदेव द्वारा प्रदत्त क्रियाओं को हमने कमतर आँका हैं या मूल्य ही कभी नही समझा हैं , एक विशिष्ट गुप्त विधान जो आपके सामने जब यथोचित समय आएगा तब आएगा, जिसमे कि केवल मात्र चेतना मंत्र का जप करने से बुझा हुआ या अप्रज्ज्वलित दीपक जल उठता हैं अब और क्या प्रमाण चहिये .. जो दीपक मे प्राण डाल दे ..मतलब ज्वलित कर दे .. वह हमारी जीवित देह मे क्या कर सकता हैं..यह तो एक इशारा हैं अब जिसे समझना हैं तो समझ जाए .अन्यथा और नही लिखा जा सकता हैं क्योंकि जिन्होंने उपयोगिता समझी हैं वह जानते हैं कि यह क्या हैं .और क्या क्या दे सकता हैं ...समझदार को ..अतः जिन्होंने भी इस मंत्र का अनुष्ठान नही किया हैं वह जल्द से जल्द कर ले , सवा लाख मंत्र जप मतलब =१२५० माला आपको जप करना हैं ...तो .. >सुबह शाम मे आप दो या तीन या चार sitting मे कर सकते हैं ..पर एक दिन कि कुल जप कि माला कि संख्या अगर .. यदि १०० माला रो ज तो १२ /१३ दिन मे = १०० * १३= 1300 mala  यदि ५० माला रोज तो ........२४ /२५ दिन मे = 50 * 25 = 1250 mala >यदि २५ माला रोज तो --- ४८ /४९ दिन मे = 25 * 48 =1249 mala  यदि १२ माला रोज तो .... 102दिन मे = 12*102 =1224 mala >यदि ६ माला रोज तो ???/ दिन मे .... क्या सही मे इतना समय लेंगे आप .. ?

चेतना मंत्र साधना प्रयोग
चेतना मंत्र आपने मैं बहुत ही महत्व पुण्य है..साधना की सफलता मैं ..साधना के लिए भी साधना किया जाता तब जा कर मूल साधना करना चहिये..साधक को.पर कुछ साधक मैं चेतना पहले से ही होता पर वो पुण्य जाग्रत भाव मैं नहीं होता है..जिस से वो जो भी काम करते भी तो अनमने भाव से करते है जिस उन का कार्य सफलता की तरफ नहीं जाता है ...........
इसे साधको को गुरु मंत्र के अनुठान के बाद चेतना मंत्र अनुठान कर लेना चहिये जिस उन के प्राण कोष मैं चेतना आ सके और आपने मान को साधना मैं लगा सके एस साधना से समस्त कुंडली जाग्रत हो जाती है ..उस मैं एस्पंदन होने सुरु हो जाता है ...और उस का लाभ भी मिलने लगता है
सामग्री : चेतना यन्त्र, चेतना माला
गुरु पूजन कर सफ़ेद आसन, सफ़ेद कपडे पर ताम्र पत्र मैं यन्त्र को स्थापित कर और दिशा उत्तर, पूर्व सवा लाख मंत्र २१ दिन ,४० दिन मैं पुण्य करे साधना


चेतना मंत्र

!! ॐ ह्रीं मम प्राण देह रोम प्रतिरोम चैतन्य जाग्रय ह्रीं ॐ नमः !!

दिन महूर्त का अपना महत्त्व हैं नही तो काल निर्णय से समय देखें और सदगुरुदेव जी के चरण कमल मे प्रार्थना करते हुए इस साधना को भी अन्य साधना के साथ करते जाए .पर शर्त इतनी हैं कि जब यह साधना पूर्ण होगी तब आपके द्वारा ली गयी साधना को भी उसी दिन पूरा होना ही चहिये ..

मंत्र जप के प्रभाव
नए साधक और पुराने साधको के लिए
जरुरी जानकारी साधना के लिए ...
जब तक किसी विषय वस्तु के बारे में पूर्ण
जानकारी नहीं होती तो व्यक्ति वह कार्य आधे अधूरे
मन से करता है और आधे-अधूरे मन से किये कार्य में
सफलता नहीं मिल सकती है| मंत्र के बारे में भी पूर्ण
जानकारी होना आवश्यक है, मंत्र केवल शब्द
या ध्वनि नहीं है, मंत्र जप में समय, स्थान, दिशा,
माला का भी विशिष्ट स्थान है| मंत्र-जप
का शारीरिक और मानसिक प्रभाव तीव्र गति से
होता है| इन सब प्रश्नों का समाधान आपके लिये -
जिस शब्द में बीजाक्षर है, उसी को 'मंत्र' कहते हैं|
किसी मंत्र का बार-बार उच्चारण करना ही 'मंत्र-जप'
कहलाता है, लेकिन प्रश्न यह उठता है, कि वास्तव में
मंत्र जप क्या है? जप से क्या परिणाम होते
निकलता है?
व्यक्त-अव्यक्त चेतना
१. व्यक्त चेतना (Conscious mind). २. अव्यक्त
चेतना (Unconscious mind).
हमारा जो जाग्रत मन है, उसी को व्यक्त चेतना कहते
हैं| अव्यक्त चेतना में हमारी अतृप्त इच्छाएं, गुप्त
भावनाएं इत्यादि विद्यमान हैं| व्यक्त
चेतना की अपेक्षा अव्यक्त चेतना अत्यंत
शक्तिशाली है| हमारे संस्कार, वासनाएं - ये सब
अव्यक्त चेतना में ही स्थित होते हैं|
किसी मंत्र का जब ताप होता है, तब अव्यक्त चेतना पर
उसका प्रभाव पड़ता है| मंत्र में एक लय (Rythm)
होता है, उस मंत्र ध्वनि का प्रभाव अव्यक्त
चेतना को स्पन्दित करता है| मंत्र जप से मस्तिष्क
की सभी नाड़ियों में चैतन्यता का प्रादुर्भाव होने
लगता है और मन की चंचलता कम होने लगाती है|
मंत्र जप के माध्यम से दो तरह के प्रभाव उत्पन्न होते हैं -
१. मनोवैज्ञानिक प्रभाव (Psychological effect)
२. ध्वनि प्रभाव (Sound effect)
मनोवैज्ञानिक प्रभाव तथा ध्वनि प्रभाव के समन्वय
से एकाग्रता बढ़ती है और एकाग्रता बढ़ने से इष्ट
सिद्धि का फल मिलता ही है| मंत्र जप का मतलब है
इच्छा शक्ति को तीव्र बनाना|
इच्छा शक्ति की तीव्रता से क्रिया शक्ति भी तीव्र
बन जाति है, जिसके परिणाम स्वरुप इष्ट का दर्शन
या मनोवांछित फल प्राप्त होता ही है| मंत्र अचूक
होते हैं तथा शीघ्र फलदायक भी होते हैं|
मंत्र जप और स्वास्थ्य
लगातार मंत्र जप करने से उछ रक्तचाप, गलत धारणायें,
गंदे विचार आदि समाप्त हो जाते हैं| मंत्र जप
का साइड इफेक्ट (Side Effect) यही है|
मंत्र में विद्यमान हर एक बीजाक्षर शरीर
की नसों को उद्दिम करता है, इससे शरीर में रक्त संचार
सही ढंग से गतिशील रहता है|
"क्लीं ह्रीं" इत्यादि बीजाक्षरों का एक लयात्मक
पद्धति से उच्चारण करने पर ह्रदय तथा फेफड़ों पर
सकारात्मक प्रभाव पड़ता है व् उनके विकार नष्ट होते
हैं|
जप के लिये ब्रह्म मुहूर्त को सर्वश्रेष्ठ माना गया है,
क्योंकि उस समय पूरा वातावरण शान्ति पूर्ण रहता है,
किसी भी प्रकार का कोलाहर या शोर नहीं होता|
कुछ विशिष्ट साधनाओं के लिये रात्रि का समय अत्यंत
प्रभावी होता है| गुरु के निर्देशानुसार निर्दिष्ट समय
में ही साधक को जप करना चाहिए| सही समय पर
सही ढंग से किया हुआ जप अवश्य ही फलप्रद होता है|
अपूर्व आभा
मंत्र जप करने वाले साधक के चेहरे से एक अपूर्व आभा आ
जाति है| आयुर्वेद की दृष्टि से देखा जाय, तो जब
शरीर शुद्ध और स्वास्थ होगा, शरीर स्थित
सभी संस्थान सुचारू रूप से कार्य करेंगे, तो इसके
परिणाम स्वरुप मुखमंडल में नवीन कांति का प्रादुर्भाव
होगा ही|
जप माला
जप करने के लिए माला एक साधन है| शिव
या काली के लिए रुद्राक्ष माला, हनुमान के लिए
मूंगा माला, लक्ष्मी के लिए कमलगट्टे की माला, गुरु के
लिए स्फटिक माला - इस प्रकार विभिन्न मंत्रो के
लिए विभिन्न मालाओं का उपयोग करना पड़ता है|
मानव शरीर में हमेशा विद्युत् का संचार होता रहता है|
यह विद्युत् हाथ की उँगलियों में तीव्र होता है| इन
उँगलियों के बीच जब माला फेरी जाती है,
तो लयात्मक मंत्र ध्वनि (Rythmic sound of the
Hymn) तथा उँगलियों में माला का भ्रमण दोनों के
समन्वय से नूतन ऊर्जा का प्रादुर्भाव होता है|
जप माला के स्पर्श (जप के समय में) से कई लाभ हैं -
* रुद्राक्ष से कई प्रकार के रोग नष्ट हो जाते हैं|
* कमलगट्टे की माला से शीतलता एव अआनंद
की प्राप्ति होती है|
* स्फटिक माला से मन को अपूर्व शान्ति मिलती है|
दिशा
दिशा को भी मंत्र जप में आत्याधिक महत्त्व
दिया गया है| प्रत्येक दिशा में एक विशेष प्रकार
की तरंगे (Vibrations) प्रवाहित होती रहती है|
सही दिशा के चयन से शीघ्र ही सफलता प्राप्त
होती है|
जप-तप
जप में तब पूर्णता आ जाती है,
पराकाष्टा की स्थिति आ जाती है, उस 'तप' कहते हैं|
जप में एक लय होता है| लय का सरथ है ध्वनि के खण्ड|
दो ध्वनि खण्डों की बीच में निःशब्दता है| इस
निःशब्दता पर मन केन्द्रित करने की जो कला है, उसे
तप कहते हैं| जब साधक तप की श्तिति को प्राप्त
करता है, तो उसके समक्ष सृष्टि के सारे रहस्य अपने आप
अभिव्यक्त हो जाते हैं| तपस्या में परिणति प्राप्त करने
पर धीरे-धीरे हृदयगत अव्यक्त नाद सुनाई देने लगता है,
तब वह साधक उच्चकोटि का योगी बन जाता है|
ऐसा साधक गृहस्थ भी हो सकता है और संन्यासी भी|
कर्म विध्वंस
मनुष्य को अपने जीवन में जो दुःख, कष्ट, दारिद्य,
पीड़ा, समस्याएं आदि भोगनी पड़ती हैं, उसका कारण
प्रारब्ध है| जप के माध्यम से प्रारब्ध को नष्ट
किया जा सकता है और जीवन में सभी दुखों का नाश
कर, इच्छाओं को पूर्ण किया जा सकता है, इष्ट
देवी या देवता का दर्शन प्राप्त किया जा सकता है|
गुरु उपदेश
मंत्र को सदगुरू के माध्यम से ही ग्रहण करना उचित
होता है| सदगुरू ही सही रास्ता दिखा सकते हैं, मंत्र
का उच्चारण, जप संख्या, बारीकियां समझा सकते हैं,
और साधना काल में विपरीत परिश्तिती आने पर
साधक की रक्षा कर सकते हैं|
साधक की प्राथमिक अवशता में सफलता व्
साधना की पूर्णता मात्र सदगुरू की शक्ति के माध्यम
से ही प्राप्त होती है| यदि साधक द्वारा अनेक बार
साधना करने पर भी सफलता प्राप्त न हो, तो सदगुरू
विशेष शक्तिपात द्वारा उसे सफलता की मंजिल तक
पहुंचा देते हैं|
इस प्रकार मंत्र जप के माध्यम से नर से नारायण
बना जा सकता है, जीवन के
दुखों को मिटाया जा सकता है तथा अदभुद आनन्द,
असीम शान्ति व् पूर्णता को प्राप्त
किया जा सकता है, क्योंकि मंत्र जप का अर्थ मंत्र
कुछ शब्दों को रतना है, अपितु मंत्र जप का अर्थ है -
जीवन को पूर्ण बनाना|

2009 Mantra Tantra Yantra Vigyan Gurudev Dr. Narayan Dutt Shrimaliji




मंत्र


शंकराचार्य ने पुरे भारतवर्ष में घूमकर एक ही बात कही कि संसार का सब कुछ मंत्रों के आधीन हैं! बिना मंत्रों के जीवन गतिशील नहीं हो सकता, बिना मंत्रों के जीवन की उन्नति नहीं हो सकती, बिना साधना के सफलता नहीं प्राप्त हो सकती!

गुरु तो वह हैं, जो प्रत्येक व्यक्ति को एक मंदिर बना दे, मंत्रों के माध्यम से! वैष्णो देवी जायें और देवी के दर्शन करे, उससे भी श्रेष्ठ हैं कि मंत्रों के द्वारा वैष्णो देवी का भीतर स्थापन हो, अन्दर चेतना पैदा हो जिससे वह स्वयं एक चलता फिरता मंदिर बनें, जहाँ भी वह जायें ज्ञान दे सकें, चेतना व्याप्त कर सकें तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान को सुरक्षित रख सकें!
जब मैं इंग्लैण्ड गया तो वहां भी लाख-डेढ़ लाख व्यक्ति इकट्ठे हुए, उन्होंने भी स्वीकार किया कि मंत्रों का ज्ञान प्राप्त होना चाहिए! उन्होंने कीर्तन किया, मगर कीर्तन के बाद मंत्रो को सीखने का प्रयास भी किया, निरंतर जप किया और उनकी आत्मा को शुद्धता, पवित्रता का भाव हुआ! मैक्स म्युलर जैसे विद्वान ने भी कहा हैं कि वैदिक मंत्रों से बड़ा ज्ञान संसार में हैं ही नहीं ! उसने कहा हैं कि मैं विद्वान हु और पूरा यूरोप मुझे मानता हैं, मगर वैदिक ज्ञान, वैदिक मंत्रों के आगे हमारा सारा ज्ञान अपने आप में तुच्छ हैं, बौना हैं ! आईंस्टीन जैसे वैज्ञानिक ने भी कहा कि एक ब्रह्मा हैं, एक नियंता हैं, वह मुझे वापस भारत में पैदा करें, ऐसी जगह पैदा करें, जहाँ किसी योगी, ऋषि या वेद मंत्रों के जानकार के संपर्क में सकूँ, उनसे मंत्रों को सीख सकूँ! अपने आप में सक्षमता प्राप्त करूँ और संसार के दुसरे देशों मे भी इस ज्ञान को फैलाऊँ!
गुरु वह हैं जो आपकी समस्याओं को समझे, आपकी तकलीफों को दूर करने के लिए उस मंत्र को समझाएं, जिसके माध्यम से तकलीफ दूर हो सकें! मंत्र जप के माध्यम से दैवी सहायता को प्राप्त कर जीवन में पूर्णता संभव हैं! दैवी सहायता के लिए जरुरी हैं कि आप देवताओं से परिचित हो और देवता आपसे परिचित हो!
परन्तु देवता आपसे परिचित हैं नहीं! इसलिए जो भगवान् शिव का मंत्र हैं, जो सरस्वती का मंत्र हैं, जो लक्ष्मी का मंत्र हैं, उसका नित्य जप करें और पूर्णता के साथ करें, तो निश्चय ही आपके और उनके बीच की दुरी कम होगी! जब दुरी कम होगी तो उनसे वह चीज प्राप्त हो सकेगी! एक करोडपति से हम सौ-हजार रुपये प्राप्त कर सकते हैं, परन्तु लक्ष्मी अपने आपमें करोडपति ही नहीं हैं, असंख्य धन का भण्डार हैं उसके पास, उससे हम धन प्राप्त कर सकते हैं, परन्तु तभी जब आपके और उनके बीच की दुरी कम हो…. और वह दुरी मंत्र जप से कम हो सकती हैं! मंत्र का तात्पर्य हैं उन शब्दों का चयन जिन्हें देवता ही समझ सकते हैं! मैं अभी आपको ईरान की भाषा में या चीन की भाषा में आधे घंटे भी बताऊं, तो आप नहीं समझ सकेंगे! दस साल भी भक्ति करेंगे, तो उसके बीस साल बाद भी समस्याएं सुलझ नहीं पाएंगी, क्योंकि उसका रास्ता भक्ति नहीं हैं उसका रास्ता साधना हैं, मंत्र हैं!
जो कुछ बोले और बोल करके इच्छानुकूल प्राप्त कर सकें वह मंत्र हैं!
-पूज्यपाद सदगुरुदेव डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी.
मंत्र-तंत्र-यंत्र विज्ञान

जनवरी 2000, पेज नं : 21.



निखिल संदेश
प्रगति उन्नति का एक रहस्य आत्म-विश्लेषण है | अन्तर्निरीक्षण वह दर्पण है जिसमें आप अपने मन के उन दर्रों में झाँक सकते हैं जो अन्यथा आप से छुपी रह जायेंगी | अपनी असफलताओं का निदान करें और अपनी अच्छी व बुरी प्रवृत्तियों को ढूँढ़ निकालें | आप क्या हैं, क्या बनना चाहते हैं और कौन-सी त्रुटियों से आप घिरे हैं - इसका विश्लेषण कीजिए |
जय गुरूदेव

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