Join Free | Sign In | Blog

manusaya ke sanchit karmo ka faal न जाने कितने जन्मों से तुम एक से बढ़कर एक करोड़ों भयानक कर्मसंचित करते आए हो|

MTYV Sadhana Kendra -
Wednesday 10th of August 2016 01:31:53 PM


न जाने कितने जन्मों से तुम एक से बढ़कर एक करोड़ों भयानक कर्मसंचित करते आए हो| और उन संचित कर्मों में से नजाने कितने भोगने बाकी हैं| न जाने कौन-कौन से कष्टऔर आने बाकी हैं| 
प्रतिदिन साधना अवश्य करना| अपने भीतर के कर्मों के पहाड़ों को साधना की अग्नि में भस्म कर देना| इन संचितकर्मों को प्रारब्ध भोग में बदलने से रोकने के लिएअपनी बुरी आदतों को पानी मत देना| ज़्यादा सेज़्यादा पुण्य कर्म करना| और अब नए कर्म संचितकरना बंद कर दो| सभी को स्वीकार करो| सभी से प्रेम करो और सभी को क्षमा करो| दूसरों में बुराईयाँ देखना बंद कर दो| दूसरों से इर्षा करना बंद कर दो|अपने जीवन के कष्टों का बखान करना बंद कर दो|सत्संग करो| उस परमेश्वर का नाम लो| निष्काम सेवा करो| गुरू के सामने आओ तो अपने बुरे कर्म, बुरी आदतें और विकार गुरू के चरणों में अर्पित कर देना|

क्या मालूम तुम्हारा कौन सा कष्ट, कौन सा बुरा कर्म सेवा में कट जाए| सिद्ध गुरू अपनी तप कीअग्नि से तुम्हारे बुरे कर्मों का भक्षण करेगा| तुम बस शरणागती बनो| गुरू के दिखाए हुए मार्ग पर चलो|बाकी कृपा करना उसका स्वभाव है| और वो अपनादायित्व निभाएगा ही| तुम बस अपनी भावना शुद्धरखना और सभी को देख के आशीर्वाद देना, खुशहोना| ऐसा करने से, पहले के संचित कर्म भी कटेंगेऔर कोई नया कर्म भी पैदा नहीं होगा| इसलिए हरहाल में खुशी| हर समय गुरुमय-प्रेममय की स्थिति ,वर्तमान में रहने का अभ्यास|"

"या तो तुम आसुरी प्रवृत्तियाँ चुनते हो या दैव्यभाव|
तीसरा और कुछ भी नहीं है| यदि कोई कहता है की मैं तो दोनो करता हू तो वह मिथ्या भाषण करता है| संसार में सिर्फ दो प्रकार की ऊर्जाएँ हैं-
घृणा आसुरी है
प्रेम दैव्य है|
क्रोध आसुरी है,
सहनशीलता दैव्य है
ईर्ष्या और लोभ आसुरीहै
आस्तेयऔरसंतुष्टिदैव्यहैं|
अक्षमाशीलता और अकृतज्ञता आसुरी हैं,
क्षमI और कृतज्ञता दैव्य है
अस्वीकार्यता आसुरी है,और किसी को स्वीकार करना दैव्य है
मन तुम्हारा है| तुम्हें ही चुनने का अधीकार है| गुरु तो बस मार् ग दिखाता है| उस मार् ग का अनुसरण करना तुम्हारे उपर है| उर्जा को एक ही दिशा मे ंलेकर आओ| सिर्फ़ दिव्यता चुनो| चुनने का अधीकार तुम्हारे पास है|
कोई भी कर्म करने से पहले अपने से पूछना मेरा भाव क्या है इसको करने के पीछे ? मै चाहता क्या हूँ ?
""यदि उत्तर में आसुरी गुण आएँ तो तत्क्षण गुरु की वाणी को याद करना ""

Guru Sadhana News Update

Blogs Update