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sadhana karne ka tarika बहुत सारे लोग जीवन भर पूजा एवं साधना करते हैं पर कोई लाभ बहुत सारे लोग जीवन भर पूजा एवं साधना करते हैं पर कोई लाभ नहीं होता है?

MTYV Sadhana Kendra -
Thursday 30th of March 2017 06:06:51 AM



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बहुत सारे लोग जीवन भर पूजा एवं साधना करते हैं पर कोई लाभ नहीं होता है क्योंकि उन्हे साधना करने का तरीका नहीं मालूम है । जबतक हम नियम से साधना नहीं करेंगे उसका फल प्राप्त नहीं होगा । साधना करने के लिए सबसे पहले अलग पूजा का कमरा रखना चाहिए जिसमें पवित्रता बनी रहे । यदि अलग साधना कक्ष नहीं बना सक्ते हैं तो कपड़े से घेरकर साधना का स्थाना बनाना चाहिए । एक लकड़ी का बाजोट बनाए जो लगभग 1×3 फीट का हो ।इसपर पीले रंग का वस्त्र बिछा दें ।बाजोट पर अपने बायें तरफ़ दीपक रख दें एवं दाहिने तरफ़ एक प्लेट में धूप या अगरबत्ती स्टैंड रखें । मध्य में एक 6 इंच के तांबे के प्लेट में पारद या स्फटीक का शिवलिंग स्थापित करें ओर सामने देवी देवताओं की तस्वीर लगायें । बैठने के लिए आपका आसन 2-3 इंच मोटा होना चाहिए । इसके लिए एक कंबल को मोड़कर आसन बना सक्ते हैं । आपके आसन पर किसी और को नहीं बैठना चाहिए । जल के लिए एक तांबे का जलपात्र एवं आचमनी रखें । चंदन या तिलक के लिए एक छोटी सी कटोरी रखें । प्रसाद के लिए एक छोटी सी कटोरी रखें जो तांबा , पीतल या चांदी का हो ।
साधना करने के लिए पवित्र होकर पीली धोती धारण करें । सबसे पहले पवित्रिकरण का मंत्र बोलकर अपने ऊपर जल छिड़के फिर आचमनी करें । इसके बाद गुरुदेव एवं गणेश जी का ध्यान करें । इसके बाद मंत्र के साथ धूप , दीप एवं प्रसाद चढ़ायें । सम्पुर्ण पूजन विधि जानने के लिए दैनिक साधना विधि या नित्य पूजन प्रकाश पुस्तक खरिदें एवं उसका अध्यन करें ।

हमारे ऋषि मुनियों ने ऐसी साधना पद्धति का ज्ञान दिया जिसके माध्यम से हम अपने जीवन की समस्या का समाधान करते हुए सुखी जीवन बिता सक्ते हैं एवं मोक्ष भी प्राप्त कर सक्ते हैं । पर आज के जमाने में अनेक ऐसे पंथ एवं संस्था बन गए हैं जो हमारे सनातन धर्म ,देवी देवता एवं हमारे ऋषियों के ज्ञान का अपमान कर रहे हैं एवं लोगों को मूर्ख बनाकर ये कहते हैं कि देवी देवताओं की साधना करने से मोक्ष नहीं मिलेगा । असल में ये हिन्दूओं को बाँटकर सनातन धर्म को समाप्त करना चाहते हैं । आज अनेको ऐसे मूर्ख हिन्दू मिल जायेंगे जो अपने हीं देवी देवताओं का अपमान करते रहते हैं ।

साधना को हमें दो भागों में बाँटना चाहिए एक परमपिता परमेश्वर में लीन होते हुए मोक्ष की प्राप्ति का प्रयत्न करना और दूसरा अपने जीवन को सूखी बनाने लिए अलग अलग देवी देवताओं की साधना करना । मोक्ष प्राप्ति के लिए सोहं मंत्र या गुरु मंत्र का निरंतर मानसिक जप करना चाहिए एवं ध्यान लगाना चाहिए । इसके बारे में सम्पुर्ण ज्ञान प्राप्त करने के लिए पूज्य गुरुदेव डा• नारायण दत्त श्रीमाली जी के द्वारा रचित ग्रन्थ * ध्यान धारणा और समाधि एवं कुण्डलिनी नाद ब्रह्म * या उपनिषद का अध्यन करें ।

हमारा सम्पुर्ण जीवन ग्रहों पर अधारित है और 9 ग्रहों के 9 मुख्य देवता हैं । इनकी साधना करके हिं हम अपने जीवन को सुखमय बना सक्ते हैं । इनके अलावा किसी देवता या मजारों पर जगह – जगह माथा टेकने से कुछ प्राप्त नहीं होनेवाला है । क्योंकि इन देवताओं से बड़ा कोई नहीं है । हमारे जीवन की सम्पुर्ण समस्या का समाधान इनकी साधना करने से हो जाता है । सूर्य के देवता विष्णु जी , चंद्रमा के शिव जी , मंगल के हनुमान जी , बुध के दुर्गा जी , बृहस्पति के ब्रह्मा जी , शुक्र के लक्ष्मी जी , सनि के भैरव जी , राहु के सरस्वती जी एवं केतु के गणेश जी ( नौदुर्गा एवं दसमहाविद्या दुर्गा जी के ही रूप हैं ) ।

हमें अपने जीवन को सुखमय बनाते हुए मोक्ष प्राप्ति की ओर अग्रसर होने के लिए प्रत्येक दिन कुछ मंत्रों का जप करना चाहिए । सबसे पहले हमें प्रतिदिन कुछ समय के लिए ध्यान आवश्य लगाना चाहिए ।

 1. – मंत्र जप में सबसे पहले अपने गुरु मंत्र या सोहं मंत्र का जप करना चाहिए ।
2.- गायत्री मंत्र – (ब्रह्मत्व प्राप्ति का शाश्वत मंत्र ) मनुष्य स्वयं ब्रह्म का ही दूसरा रूप है ।अहं ब्रह्मस्मि इसी भावना को प्रदर्शित करता है ।जब वह ब्रह्म से छिटकता है तभी वह मनुष्य योनि में जन्म लेता है ।वह जीवन में पुर्णता तभी प्राप्त कर सक्ता है जब वह पुन: उसी परम सत्ता में लीन हो जाए। ब्रह्म में लीन करने का संसार में एक ही मंत्र है जिसे हमारे शास्त्रों में * गायत्री मंत्र * से सम्बोधित किया है ।
3.- महामृत्युंजय मंत्र – जीवन में होने वाले रोग बीमारी , कष्ट , अकाल मृत्यु से रक्षा करता है । राहु , केतु , शनि एवं कालसर्प योग जैसे ग्रहों के दुष्प्रभाव को समाप्त करके शिव जी की कृपा प्राप्त होती है ।
4. – नवार्ण मंत्र – ( अमोध सुरक्षा प्रदान करने वाला मंत्र ) समस्त प्रकार की व्याधियों , बाहरी आक्रमणों और घाट प्रतिघात से बचाने वाला यह एक मात्र मंत्र है , जिसे सिद्ध करने पर मानव को न शत्रुओं से भय रहता है और न किसी प्रकार की आधि – व्याधि , कष्ट – पीड़ा का डर रहता है । यह मंत्र मानव को सभी दृष्टियों से सुरक्षा प्रदान करता है । ऐसे व्यक्ति पर किसी भी प्रकार का कोई तान्त्रिक प्रभाव व्याप्त नहीं रहता है ।
5.- गणेश मंत्र – जीवन में शुभता लाने एवं निर्विघ्न रूप सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए गणेश मंत्र का जप आवश्य करना चाहिए ।
6.- भैरव मंत्र – भैरव मंत्र का जप करने से जीवन में सभी प्रकार की सुरक्षा होती है । आगजनी , दुर्घटना , चोरी इत्यादि समस्यायों से बचाव होता है ।
7.- हनुमान मंत्र या ( हनुमान चालिसा ,बजरंग बाण एवं हनुमान बाहुक ) – हनुमान जी की साधना करने से भूत – प्रेत बाधा एवं सभी प्रकार के संकटों से छुटकारा मिलती है । मंगल एवं शनि ग्रह के दोषों का शमन होता है ।
8.- लक्ष्मी मंत्र – जीवन में दरिद्रता को समाप्त करके धन – धान्य एवं समृद्धि प्राप्त करने के लिए कोई भी लक्ष्मी मंत्र का जप आवश्य करना चाहिए एवं कनकधार स्तोत्र या श्री सूक्त का पाठ भी करना चाहिए ।
9.- चेतना मंत्र – यह मंत्र मात्र ध्वनि के माध्यम से कुंडलिनी जागरण करने में सक्षम है ।
( यदि आप सही ढंग से साधना करना चाहते हैं एवं सम्पुर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो * मंत्र रहस्य * पुस्तक आवश्य पढ़ें )
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साधना में पुर्णरूप से सफलता प्राप्त करने के लिए साधना करने का जो नियम है ,उसका सही तरिक से पालन करना आवश्यक है । साधना के मार्ग में शार्ट – कर्ट नहीं चलता और ना हिं जल्दबाजी करने से काम चलता है । साधना मार्ग आसान नहीं है । बाजार में जो पुस्तक या पत्रिकायें मिलती हैं उनमें इस तरीक़े से लिखा होता है जिसे पढ़कर लगता है 1-2 माह में सिद्धि मिल जाएगी पर ऐसा नहीं है । ये तो पुस्तक बेचने का और साधना के नाम पर लोगों को ठगने का एक तरीका है । एक साधना सिद्ध करने में जीवन बीत जाता है । कोई अवतारी पुरुष होते हैं उनकी बात अलग है ।
साधना में सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे पहले अष्टांग योग का पालन करना चाहिए इसके बिना सब व्यर्थ है ।
1- यम , 2- नियम , 3 – आसन , 4.- प्राणायाम , 5.- प्रत्याहार , 6.- धारणा , 7.- ध्यान , 8.- समाधि
( इनके बारे में विस्तार से * मंत्र रहस्य * पुस्तक में पढ़ सक्ते हैं )

***** सबसे पहले गुरु दीक्षा लेने के बाद दैनिक साधना विधि से पूजा करना प्रारम्भ करें और अपनी सुविधा अनुसार मंत्र जप करना प्ररम्भ करें । धीरे धीरे मंत्र जप की मात्रा को बढ़ाते रहें । कम से कम एक बार में 60 माला करने की क्षमता जब हो जाए तब सबसे पहले गुरु मंत्र का 5 लाख का अनुष्ठान करें एवं अंत में हवन करें । ( मंत्र जप की क्षमता को धीरे धीरे आगे बढायें । ज्यादा समय तक आसन पर बैठ सकें इसके लिए प्रतिदिन त्राटक करते हुए सोहं मंत्र का जप करें । ओर प्रतिदिन ध्यान लगायें यदि मंत्र जप में आपका ध्यान मंत्र पर केंद्रित नहीं होता है तो चाहे कितना भी मंत्र जप कर लें , सफलता नहीं प्राप्त होगी । कई बार साधना में मन नहीं लगता है या मन उचट जाता है ऐसे में बजरंग बाण का पाठ करना लाभदायक होता है । )

***** गुरु मंत्र के अनुष्ठान के बाद उत्कीलन साधना करनी चाहिए । भगवान शिव ने मंत्रों के दुरुपयोग को रोकने के लिए मंत्रों को कीलित कर दिया था । अत:उत्कीलन साधना करने के बाद हिं साधना में सफलता मिलती है ।(उत्कीलन साधना के बारे में सम्पुर्ण लेख पढ़ने एवं साधना सामग्री मंगाने के लिए ** निखिल मंत्र विज्ञान ** पत्रिका का नवम्बर 2014 अंक पढ़ें)

***** उत्कीलन साधना करने के बाद पाप मोचनी साधना करना चाहिए । पापमोचनी साधना करने से पूर्व जन्मकृत पाप – दोष का शमन होता है और साधना में सफलता मिलती है । सवालाख का अनुष्ठान आवश्य करना चाहिए ।

***** पापमोचनी के बाद भैरव साधना करना बहुत ही आवश्यक है । भैरव साधना करने से साधना में विघ्न बाधा नहीं आती है । जबतक कोई भैरव साधना नहीं कर लेता तबतक उसे साधना के क्षेत्र में प्रवेश करने का अधिकार ही नहीं है ।भैरव साधना का मतलब है अपने आपमें पूर्ण विजय प्राप्त करने की क्रिया । जगदम्बा की साधना में सफल हो ही नहीं सक्ते पूरी जिन्दगी भर , जबतक कि भैरव साधना सिद्ध न कर लें ।भैरव का तात्पर्य है – रक्षा करने वाला । जो साधना में विघ्न न पड़ने दे , साधना में सफलता मिले ही ।

***** गणेश साधना – गणेश साधना करने से आगे जो भी साधना करते हैं वो निर्विघ्न रूप से चलता रहता है । साधना में सफलता के लिए एक बार गणेश मंत्र का अनुष्ठान आवश्य करना चाहिए । संकल्प लें कि मैं जो भी साधना करूँ उसमें विघ्न ना आए ।

***** गणेश साधना के बाद महाकाली साधना करना चाहिए । जितनी भी शक्ति से संबन्धि साधना है उन सभी में सफलता प्राप्त करने के लिए पहले महाकाली साधना करना आवश्यक है । महाकाली साधना दसमहाविद्या साधना का द्वार है । जबतक महाकाली साधना नहीं कर लेते तबतक दूसरे महाविद्या साधना में सफलता नहीं मिल सक्ता है ।

*****इतना करने के बाद अब कोई भी साधना करने के लिए तैयार हैं । अब आप कोई भी एक साधना चुन लीजिए । जो साधना आप करना चाहते उसके बारे में सम्पुर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहिए । मंत्र जप के साथ उस साधना से सम्बन्धित स्तोत्र एवं कवच का भी पाठ करना चाहिए । जो साधना आप कर रहें हैं हमेशा उसका हिं चिंतन करते रहना चाहिए और मानसिक जप करते रहना चाहिए ।

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