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भगवती दिगम्‍बरी दक्षिण काली साधना, Digambari Dakshin Kali Sadhana

भगवती दिगम्‍बरी दक्षिण काली साधना, Digambari Dakshin Kali Sadhana

माघी गुप्त नवरात्रि   10 फरवरी – 18 फरवरी मैं देखता हूं कैसे सिद्धि नहीं मिलती 

भगवती दिगम्‍बरी दक्षिण काली साधना

 

यों तो काली महाकाली और दक्षिणकाली से सम्‍बन्धित कई साधनायें,  साधना ग्रंथों में प्रकाशित हैं, परन्‍तु दिगम्‍बरी दक्षिण काली साधना, साधना क्षेत्र में अत्‍यन्‍त उच्‍चस्‍तरीय साधना मानी गई है, वामा क्षेपा जैसे तांत्रिक ने भी स्‍वीकार किया है कि दिगम्‍बरी दक्षिण काली साधना सर्वाधिक गूढ गुप्‍त अलौकिक अद्वितीय और अनुपम है, पूरे जीवन काल में बिरले लोगों को ही यह सौभाग्‍य प्राप्‍त होता है, कि वे ऐसी उच्‍च स्‍तरीय साधना को प्राप्‍त करे, इसके साधना रहस्‍य को समझें जब जीवन के पुण्‍योदय प्रारम्‍भ होते हैं तभी ऐसी साधना साधक सम्‍पन्‍न करता है।

त्रिजटा अघोरी तो विश्‍व का अद्वितीय आचार्य है और उसने साधनाओं के क्षेत्र में कीर्तिमान कायम किये है, उसने भी अपने ‘तंत्र समुच्‍च सपर्या’ ग्रंथ में स्‍वीकार किया है कि कई वर्ष भटकने के बाद और हजारों तांत्रिकों से मिलने के उपरान्‍त ही स्‍वामी निखिलेश्‍वरानन्‍दजी से मुझे दिगम्‍बरी दक्षिण काली साधना प्राप्‍त हुई और मेरे पास तंत्र के हजारों रत्‍नों में से यह अपने आप में अलौकिक अनुपम रत्‍न है।

दिगम्‍बरी दक्षिण काली साधना जन साधारण में कम प्रचलित है, इसका कारण इस साधना का महत्‍वपूर्ण होना है, यह साधना एक प्रकार से पूरे जीवन का वरदान है और उच्‍च स्‍तरीय योगी उसी शिष्‍य को यह साधना प्रदान करते थे, जो जीवन भर उनकी सेवा करता था और जो मन-वचन-कर्म से उनके प्रति अनुरक्‍त रहता हुआ साधना मार्ग पर अग्रसर होता था, जीवन के अन्तिम काल में उसी को यह दिव्‍य साधना प्रदान की जाती थी।

काली का तात्‍पर्य

भारतीय आचार्यों ने भगवती काली को दस महाविद्याओं में सर्व प्रमुख स्‍थान दिया है, आचार्य भट्ट ने काली के तेरह अर्थ बताये हैं-

  1. जिसकी साधना करने से काल का क्षय होता है, और व्‍यक्ति दीर्घ आयु एवं इच्‍छामृत्‍यु प्राप्‍त करने में सक्षम हो जाता है।
  2. काली का तात्‍पर्य काल को पहचानने की क्षमता प्राप्‍त करने वाला, ऐसा साधक भूत, भविष्‍य और वर्तमान को एक पल में पहचान लेता है।
  3. काली का तात्‍पर्य जीवन में शत्रुओं पर प्रबल रूप से प्रहार करने वाली और शत्रुओं को समाप्‍त करने वाली महादेवी।
  4. काली जीवन के समस्‍त विकारों, दोषों, अपराधों को समाप्‍त करने वाली है, शराब का व्‍यसन और अन्‍य बुरी आदतों को एक ही क्षण में समाप्‍त कर काम, क्रोध, लोभ,  मोह तथा अहंकार से परे हट कर साधक को मोक्ष मार्ग की ओर प्रवृत्त करने वाली है।
  5. काली को राज राजेश्‍वरी भी कहा गया है, इसका तात्‍पर्य यह उच्‍चस्‍तरीय लक्ष्‍मी प्रदाता है, काली की साधना करने से उसके जीवन में स्‍वत: व्‍यापार वृद्धि एवं आर्थिक उन्नति होती ही रहती है।
  6. काली बिन्‍दुवासिनी है, इसका तात्‍पर्य जीवन में यह साधना पूर्ण भोग और मोक्ष को प्रदान करने वाली है।
  7. इसे ‘शरण्‍य’ कहा गया है, यह जीवन के समस्‍त दु:खों को समाप्‍त कर पूर्ण ध्‍यान लगाने में समर्थ और सहायक है।
  8. यह विज्ञान रूपा है और इसकी साधना से जीवन में किसी प्रकार का कोई अभाव नहीं रहता और साधक सभी क्षेत्रों में निरन्‍तर उन्नति करता रहता है।
  9. यह दुर्गा स्‍वरूप है, अत: जीवन में आने वाली बाधाओं को तुरन्‍त समाप्‍त करने में सहायक है।
  10. यह आपत्ति उद्धारक महादेवी है, इसकी साधना करने से पूरे जीवन काल में किसी प्रकार की कोई बाधा या अड़चन नहीं आती है। 
  11. यह सर्व सिद्धि प्रदायक है, छोटी-मोटी साधनाओं या विविध साधनाओं में समय बर्बाद करने की अपेक्षा एक ही साधना में पूर्णता प्राप्‍त करने से समस्‍त रूपों में अनुकूलता प्राप्‍त हो जाती है।
  12. काली को प्रबल रोग मुक्‍ता कहा गया है, यह समस्‍त प्रकार के रोगों को समाप्‍त करने वाली और वृ‍द्धावस्‍था को यौवनावस्‍था में बदलने वाली है, यही एक मात्र ऐसी साधना है, जिसके द्वारा व्‍यक्ति सभी प्रकार के रोगों से मुक्‍त हो सकता है।
  13. यह महाविद्याओं में प्रमुख है, इसकी साधना करने से अन्‍य सभी महाविद्याये स्‍वत: सिद्ध हो जाती है।
दिगम्‍बरी काली

जैसे ऊपर बताया कि दिगम्‍बरी दक्षिण काली पूर्ण रूपेण शिव है, जिस प्रकार से भगवान शिव दिगम्‍बर रूप में समस्‍त प्रकार से कल्‍याण करने में समर्थ है, उसी प्रकार से दिगम्‍बरी दक्षिण काली निश्‍चय ही साधना में सफलता , पूर्णता देने के साथ-साथ मनोवांछित रूप से प्रत्‍यक्ष दर्शन देने में समर्थ, सहायक है।

नीचे मैं सैकड़ों उदाहरणों में से मात्र तीन-चार उदाहरण देना ही पर्याप्‍त है जिससे पता चलता है कि उच्‍चकोटि के योगियों ने भी अद्वितीय साधना की सफलताओं को समझा है।

बहुत ही बिरले लोगों को ही दिगम्‍बरी दक्षिण काली साधना रहस्‍य प्राप्‍त होता है, जो जीवन में पूर्णता चाहते है, उन सभी स्‍त्री-पुरूषों को यह साधना सम्‍पन्‍न करनी ही चाहिये।   -स्‍वामी विशुद्धानन्‍दजी

लक्ष्‍मी की प्राप्ति तो लक्ष्‍मी साधनाओं के द्वारा की जा सकती है, परन्‍तु कई-कई पीढियों के लिये घर में लक्ष्‍मी को स्‍थापित कर देने का रहस्‍य तो दिगम्‍बरी दक्षिण काली साधना से ही सम्‍भव है।       -त्रिजटा अघोरी

वास्‍तव में ही वह नर सौभाग्‍यशाली कहा जा सकता है, जिसके जीवन में गुरू हों, जिन्‍हें अपने जीवन में दिगम्‍बरी दक्षिण काली साधना का रहस्‍य प्राप्‍त हुआ हो,

ऊपर के उदाहरण इस बात के लिये पर्याप्‍त है कि साधक के जीवन में दक्षिण काली साधना कितना अधिक महत्‍वपूर्ण है, यह अत्‍यन्‍त सरल और सहज साधना है, इस साधना को पुरूष या स्‍त्री कोई भी बिना भय के सम्‍पन्‍न कर सकता है, क्‍योंकि इस साधना से किसी प्रकार का कोई अहित नहीं होता, किसी भी प्रकार की भय व्‍याप्ति नहीं होती और यदि किन्‍हीं कारणों से सफलता नहीं मिलती या साधना अधूरी रह जाती है तब भी किसी प्रकार का अहित नहीं होता।

प्रयोग

साधना में साधक लाल वस्‍त्र धारण करें, नीचे लाल धोती पहिनी हुई हो और लाल धोती ही ऊपर कन्‍धों पर डाली हुई हो, इसी प्रकार साधिकायें भी लाल साड़ी और लाल कंचुकी ही धारण करें।

इस साधना में पूर्ण सिद्धि प्राप्ति के लिये पांच दुर्लभ वस्‍तुओं की आवश्‍यकता होती है, जिसके माध्‍यम से यह साधना पूर्ण सिद्ध की जा सकती है।

श्रंगाट की दिवस दिगम्‍बरी च यन्‍त्रं महारूप बदैव हार्यं। एकोन्‍मुखी रूद्र वदैव काल्‍यं स सिद्धि पूर्णं विजयो नराणां।।

इस साधना की सिद्धि के लिए दक्षिणकाली गुटिका हो, फिर साथ में ही दिगम्‍बरी दक्षिण काली यंत्र हो, दिगम्‍बरी दक्षिण काली का महारूप चित्र हो, एकोन्‍मुखी रूद्र अर्थात् एक मुखी रूद्राक्ष हो और काल्‍यं अर्थात् काल सिद्धि यंत्र हो, जो साधक इन पांचों दुर्लभ पदार्थों के द्वारा साधना सम्‍पन्‍न करता है, उसे निश्‍चय ही पूर्ण सिद्धि प्राप्‍त होती है और ऐसा व्‍यक्ति पूरे विश्‍व में विजयी होता है।

इसी श्‍लोक में आगे बताया गया है कि ये सारी वस्‍तुये दिगम्‍बरी काल मंत्र से सिद्ध एवं प्रयोगित हों,

गुप्‍त नवरात्रि के प्रारम्‍भ 10 फरवरी 2024 की रात्रि को साधक-साधिका लाल आसन पर दक्षिण की ओर मुंह कर बैठ जायें और सामने तेल का दीपक लगा लें फिर सामने ही लाल वस्‍त्र बिछा कर दीपक के आगे ही दक्षिण काली गुटिका रख दें और उस पर सिंदूर का तिलक लगा लें, फिर अपने ललाट पर भी सिंदूर का तिलक लगावें इसके बाद सामने ही दिगम्‍बरी दक्षिण काली यंत्र और चित्र को स्‍थापित कर दें, और उसके सामने मधुरूपेण एक मुखी रूद्राक्ष एंव काल सिद्धि यंत्र को स्‍थापित कर इन दोनों पर भी सिंदूर का तिलक लगावे।

इसके बाद सामूहिक इन सभी तत्‍वों पर पंच पूजन करें, पंच पूजन में जल, केसर, अक्षत, पुष्‍प और प्रसाद समर्पित करें, पुष्‍प यथा सम्‍भव लाल रंग के ही उपयोग में लाने चाहिये और प्रसाद में दूध का बना हुआ, किसी भी प्रकार का पदार्थ भोग के रूप में रखा जा सकता है।

इसके बाद साधक को चाहिये कि वह दिगम्‍बरी माला से इस साधना को सम्‍पन्‍न करें।

इस पूरे साधना काल में केवल 51 माला मंत्र जप करने का विधान है, साधक चाहें तो इससे ज्‍यादा भी मंत्र जप सम्‍पन्‍न कर सकता है।

दिगम्‍बरी दक्षिण काली मंत्र ।। ऊँ क्रीं क्रीं क्‍लीं क्‍लीं दिगम्‍बरी दक्षिण कालिके क्‍लीं क्‍लीं क्रीं क्रीं फट्।।

यह मंत्र अपने आप में अत्‍यन्‍त गोपनीय और दुर्लभ है, साधकों को चाहिये कि वे मंत्र को गलत लोगो के हाथ में न दें, और इस साधना को कुमार्ग, आलोचक और निन्‍दक लोगों को भी इसा साधना रहस्‍य को नहीं समझायें।

इस साधना को सम्‍पन्‍न करने से 12 लाभ तुरन्‍त अनुभव होते हैं, अधिकतर साधकों को इन लाभों की अनुभूति हुई है, और निश्‍चय ही वे इन लाभों को प्राप्‍त कर जीवन में पूर्णता प्राप्‍त कर सके हैं, ‘साधना समुच्‍य सपर्या’  ग्रंथ में इस साधना के सम्‍पन्‍न करने पर निम्‍न द्वादश लाभ बताये हैं-

  1. इस साधना में जन्‍म-जन्‍म के पाप, दोष कट जाते हैं और व्‍यक्ति पूर्णत: शुद्ध,चैतन्‍य तथा निर्मल हो जाता है।
  2. इस साधना को सम्‍पन्‍न करने पर व्‍यक्ति महाविद्या साधना को सम्‍पन्‍न कर लेता है, जिससे सभी महाविद्यायें स्‍वत: सिद्ध हो जाती है, और उसके लिये सिद्धाश्रम जाने का मार्ग खुल जाता है।
  3. इस साधना को सम्‍पन्‍न करने पर उसके या उसके परिवार के लोगों के सभी रोग समाप्‍त हो जाते हैं, गंभीर बीमारी से भी मुक्‍त हो कर पूर्ण आनन्‍द दायक जीवन व्‍यतीत करने में सक्षम हो पाते हैं।
  4. इस साधना को करने से व्‍यक्ति जन्‍म-जन्‍म की दरिद्रता निश्चित रूप से समाप्‍त कर लेता है, और उसकी व्‍यापार वृद्धि एवं निरन्‍तर आर्थिक उन्‍नति होने लगती है।
  5. इस साधना को सम्‍पन्‍न करने पर आकस्मिक धन प्राप्ति की सम्‍भावनायें बढ़ जाती है और ऐसा व्‍यक्ति लॉटरी से या अन्‍य उपायों से धन प्राप्‍त करने में सक्षम हो पाता है।
  6. इस साधना को सम्‍पन्‍न करने पर उसके जीवन के समस्‍त विकार और बुरे व्‍यसन समाप्‍त हो जाते हैं, और राज्‍य में उसे विशेष सम्‍मान प्रा‍प्‍त होता है।
  7. इस साधना को सम्‍पन्‍न करने पर सभी प्रकार के कर्जों से साधक मुक्‍त हो जाता है, और जीवन को वैभव युक्‍त व्‍यतीत करता है।
  8. इस साधना को सम्‍पन्‍न करने से मनोवांछित विवाह, लड़की के लिये अनुकूल पति व लड़के के लिये अनुकूल वधु की प्राप्ति, गृहकलह समाप्‍त होना, पारिवारिक सुख एवं स्त्रियों को पूर्ण सौभाग्‍य प्राप्‍त होता है।
  9. इस साधना को सम्‍पन्‍न करने से स्‍वयं का तथा परिवार के अन्‍य सदस्‍यों का अकाल मृत्‍यु दोष समाप्‍त हो जाता है और उन्‍हें किसी भी प्रकार की दुर्घटना या अकाल मृत्‍यु का सामना नहीं करना पड़ता, ऐसे साधक पूर्ण दीर्घायु प्राप्‍त करते हैं और इच्‍छा मृत्‍यु प्राप्‍त करने में सक्षम हो पाते हैं।
  10. इसा साधना के द्वारा साधक भगवती दिगम्‍बरी दक्षिण काली के साक्षात् दर्शन करने में समर्थ हो पाता है और जीवन में जब भी चाहे, उनका वरद्हस्‍त और साहचर्य प्राप्‍त करने में सफल हो पाता है।
  11. इस साधना को सम्‍पन्‍न करने से जेल से छुटकारा मिलता है, शत्रु भय समाप्‍त हो जाता है, राज्‍य भय की आशंका नहीं रहती, मुकदमें में सफलता मिलती है, और वह समस्‍त प्रकार के शत्रुओं पर पूर्ण हावी रहता है।
  12. इस साधना को सम्‍पन्‍न करने से साधक को इच्‍छा लेकर इस साधना में बैठता है, तथा मंत्र जप करता है, तो उसके मन की इच्‍छा निश्‍चय ही पूरी होती है।

वास्‍तव में ही केवल मात्र एक दिन की साधना से ही ऐसी अद्वितीय सफलता और सिद्धि प्राप्‍त हो फिर तो कोई अभागा ही होगा जो ऐसे अद्वितीय अवसर को हाथ से जाने दे या साधना सम्‍पन्‍न नहीं करे।

साधना समाप्ति के बाद यंत्र और चित्र को तो साधक घर में किसी स्‍थान पर रख दें, दक्षिण काली गुटिका को भी घर में ही जहां रूपये पैसे रखते हैं, वहां रख दें तथा एक मुखी रूद्राक्ष एवं काल यंत्र को धारण कर लें या पूजा स्‍थान में स्‍थापित कर दें, ऐसा करने पर साधक अद्वितीय सफलता और सिद्धि प्राप्‍त करने में सक्षम हो पाता है।


Maghi Gupt Navratri 10th February – 18th February I see how Siddhi is not achieved Bhagwati Digambari Dakshin Kali Sadhana

 

Although many sadhanas related to Kali Mahakali and Dakshinkali are published in Sadhana texts, but Digambari Dakshin Kali Sadhana is considered to be a very high level Sadhana in the field of Sadhana, Tantrik like Vama Kshepa has also accepted that Digambari Dakshin Kali Sadhana is the most esoteric. The supernatural is unique and incomparable, only a very few people get this privilege in their entire life, that they achieve such a high level of Sadhana, understand the secret of its Sadhana, only when the virtues of life begin, only a seeker completes such Sadhana.

Trijata Aghori is a unique Acharya of the world and has created records in the field of spiritual practices, he has also admitted in his book 'Tantra Samuchcha Saparya' that after many years of wandering and after meeting thousands of Tantrikas, I got inspiration from Swami Nikhileshwaranandji. I received Digambari Dakshin Kali Sadhana and among the thousands of gems of Tantra that I have, this in itself is a supernatural unique gem.

Digambari Dakshin Kali Sadhana is less popular among the common people, the reason for this is the importance of this Sadhana, this Sadhana is a blessing of the whole life and high level yogis used to provide this Sadhana only to the disciple who used to serve them throughout their life. And the one who was moving forward on the path of spiritual practice by being attached to him through his thoughts, words and deeds, only he was given this divine practice in the last period of his life.

meaning of kali

Indian Acharyas have given the most prominent place to Bhagwati Kali among the ten Mahavidyas, Acharya Bhatt has given thirteen meanings of Kali-

  1. By doing its sadhana, time gets reduced and the person becomes capable of achieving long life and voluntary death.
  2. Kali means one who has the ability to recognize time, such a seeker can recognize the past, future and present in an instant.
  3. Kali means Mahadevi, who strongly attacks the enemies in life and who destroys the enemies.
  4. Kali is going to eliminate all the vices, faults and crimes of life, will end the addiction of alcohol and other bad habits in a single moment and will help the seeker move towards the path of salvation by going beyond lust, anger, greed, attachment and ego. Is going to.
  5. Kali has also been called Raj Rajeshwari, which means she is the provider of high level Lakshmi. By worshiping Kali, there is automatic growth in business and economic progress in one's life.
  6. Kali is Binduvasini, it means that this sadhana in life is going to provide complete enjoyment and salvation.
  7. It has been called 'Sharanya', it is capable and helpful in concentrating completely by ending all the sorrows of life.
  8. This is the form of science and by its practice there is no lack of any kind in life and the seeker continues to progress in all fields.
  9. It is the form of Durga, hence it is helpful in eliminating the obstacles in life immediately.
  10. This objection-savior is Mahadevi, by worshiping her there is no hindrance or obstacle of any kind in the entire life. 
  11. It is the provider of all achievements, instead of wasting time in small sadhanas or various sadhanas, by attaining perfection in a single sadhana, one gets compatibility in all forms.
  12. Kali has been said to be a powerful disease reliever, it eliminates all types of diseases and transforms old age into youth, this is the only sadhana through which a person can become free from all types of diseases.
  13. It is prominent among the Mahavidyas, by practicing it all other Mahavidyas are automatically accomplished.
Digambari Kali

As mentioned above, Digambari Dakshin Kali is Shiva in full form, just as Lord Shiva in Digambara form is capable of doing all kinds of welfare, in the same way Digambari Dakshin Kali is definitely capable of giving success and perfection in Sadhana as well as desired results. Capable of giving direct darshan, helpful.

Below, it is enough to give only three-four examples out of hundreds, which shows that even high class yogis have understood the success of unique sadhana.

Only very rare people get the secret of Digambari Dakshin Kali Sadhana, all those men and women who want perfection in life must complete this Sadhana. -Swami Vishudhanandji

Lakshmi can be attained through Lakshmi Sadhana, but the secret of establishing Lakshmi in the house for many generations is possible only through Digambari Dakshin Kali Sadhana. -Trijata Aghori

In fact, only that person can be called fortunate, who has a Guru in his life, who has received the secret of Digambari Dakshin Kali Sadhana in his life,

The above examples are enough to show how important Dakshin Kali Sadhana is in the life of a seeker, it is a very simple and easy Sadhana, any man or woman can complete this Sadhana without any fear, because this Sadhana There is no harm of any kind, there is no fear of any kind and if due to some reasons success is not achieved or the sadhana remains incomplete then also there is no harm of any kind.

Use

During Sadhana, the Sadhak should wear red clothes, a red dhoti should be worn below and the red dhoti should be draped over the shoulders, similarly the Sadhikas should also wear red saree and red Kanchuki.

To attain complete success in this sadhana, five rare things are required, through which this sadhana can be completed completely.

Day of Shrangat Digambari and Yantram Maharup Badaiva Haryam. One-faced Rudra is always the time, he is the perfection, the full victory of men.

For the accomplishment of this sadhana, there should be Dakshinkali Gutika, along with it there should be Digambari Dakshin Kali Yantra, there should be a Maharup picture of Digambari Dakshin Kali, there should be Ekonmukhi Rudra i.e. one faced Rudraksha and there should be Kalya i.e. Kaal Siddhi Yantra, which the devotee can use for these five rare things. One who completes the sadhana through this method definitely attains complete attainment and such a person becomes victorious in the whole world.

It is further stated in this verse that all these things should be proven and used with Digambari Kaal Mantra.

On the night of 10 February 2024, the beginning of Gupta Navratri, the seeker and the seeker should sit on a red seat facing south and light an oil lamp in front, then spread a red cloth in front and place the south black gutika in front of the lamp and apply vermillion on it. Apply a tilak of 100 gms, then apply vermilion tilak on your forehead also. After this, install the Digambari Dakshin Kali Yantra and the picture in front, and in front of it, install the Madhurupen One Mukhi Rudraksh and Kaal Siddhi Yantra and apply vermilion tilak on both of them also. Attachments.

After this, do Panch Puja on all these elements collectively, offer water, saffron, Akshat, flowers and Prasad in the Panch Puja, flowers should be of red color as much as possible and any kind of substance made of milk should be used in the Prasad. Can be kept as offering.

After this the seeker should complete this sadhana with Digambari Mala.

There is a rule to chant the mantra only 51 times during the entire sadhana period, if the seeker wishes, he can chant the mantra more than this.

Digambari Dakshina Kali Mantra . OM KRIM KRIM KLIM KLIM DIGAMBARI SOUTH KALIKE KLIM KLIM KRIM KRIM PHAT.

This mantra in itself is very confidential and rare, the seekers should not give the mantra into the hands of wrong people, and should not explain the secret of this sadhana even to the evil people, critics and slanderers.

By completing this Sadhana, 12 benefits are experienced immediately, most of the seekers have experienced these benefits, and surely they have been able to attain perfection in life by getting these benefits, in the book 'Sadhana Samuchya Saprya' there is a description of this Sadhana. The following twelve benefits are given after completing it-

  1. In this sadhana, the sins and faults of every birth are removed and the person becomes completely pure, conscious and pure.
  2. By completing this Sadhana, a person completes Mahavidya Sadhana, due to which all the Mahavidyas are automatically accomplished, and the path to going to Siddhaashram opens for him.
  3. After completing this sadhana, all the diseases of the person or his family members get cured, they become free from even serious diseases and are able to live a completely happy life.
  4. By doing this sadhana, a person definitely gets rid of the poverty of his birth, and his business starts growing and there is continuous economic progress.
  5. By performing this sadhana, the chances of getting unexpected money increases and such a person becomes capable of getting money through lottery or other means.
  6. After completing this sadhana, all the problems and bad addictions of his life are eliminated and he gets special respect in the state.
  7. By completing this sadhana, the seeker becomes free from all types of debts and lives a life full of glory.
  8. By completing this sadhana, one gets the desired marriage, a suitable husband for the girl and a suitable bride for the boy, end of domestic disputes, family happiness and women get complete good fortune.
  9. By completing this sadhana, the defect of untimely death of oneself and other family members gets eliminated and they do not have to face any kind of accident or untimely death, such seekers attain complete longevity and their wish to die is saved. Are able to.
  10. Through this sadhana, the seeker is able to have a personal darshan of Bhagwati Digambari Dakshina Kali and is successful in getting her blessings and companionship whenever he wants in life.
  11. By completing this sadhana, one gets freedom from jail, fear of enemies is eliminated, there is no fear of fear of the state, one gets success in litigation, and one remains completely dominant over all types of enemies.
  12. By completing this Sadhana, if the seeker sits in this Sadhana with his wish and chants the mantra, then his heart's wish is definitely fulfilled.

In fact, such unique success and accomplishment can be achieved by just one day's sadhana, then it would be unfortunate for someone to miss such a unique opportunity or not to complete the sadhana.

After the completion of Sadhana, the seeker should keep the Yantra and the picture at some place in the house, also keep the Dakshin Kali Gutika in the house where money is kept and wear the One Mukhi Rudraksh and Kaal Yantra or in the place of worship. Establish it, by doing so the seeker is able to achieve unique success and accomplishment.




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