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festivals kaal bhairav ashtami

festivals kaal bhairav ashtami

कालाष्टमी( कालभैरव जयंती )

शिव के रूधिर से भैरव की उत्पत्ति हुई। बाद में उक्त रूधिर के दो भाग हो गए- पहला बटुक भैरव और दूसरा काल भैरव। मुख्‍यत: दो भैरवों की पूजा का प्रचलन है, एक काल भैरव और दूसरे बटुक भैरव। पुराणों में भगवान भैरव को असितांग, रुद्र, चंड, क्रोध, उन्मत्त, कपाली, भीषण और संहार नाम से भी जाना जाता है। भगवान शिव के पांचवें अवतार भैरव को भैरवनाथ भी कहा जाता है। नाथ सम्प्रदाय में इनकी पूजा का विशेष महत्व है।

कालाष्टमी को काला अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है और हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान इसे मनाया जाता है। कालभैरव के भक्त साल की सभी कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा और उनके लिए उपवास करते हैं।

सबसे मुख्य कालाष्टमी जिसे कालभैरव जयन्ती के नाम से जाना जाता है, उत्तरी भारतीय पूर्णीमांत पञ्चाङ्ग के अनुसार मार्गशीर्ष के महीने में पड़ती है जबकि दक्षिणी भारतीय अमांत पञ्चाङ्ग के अनुसार कार्तिक के महीने पड़ती है। हालाँकि दोनों पञ्चाङ्ग में कालभैरव जयन्ती एक ही दिन देखी जाती है। यह माना जाता है कि उसी दिन भगवान शिव भैरव के रूप में प्रकट हुए थे।

कालभैरव जयन्ती को भैरव अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है।

०८ जनवरी (सोमवार) कालाष्टमी
०७ फरवरी (बुधवार) कालाष्टमी
०९ मार्च (शुक्रवार) कालाष्टमी
०८ अप्रैल (रविवार) कालाष्टमी
०७ मई (सोमवार) कालाष्टमी
०६ जून (बुधवार) कालाष्टमी
०६ जुलाई (शुक्रवार) कालाष्टमी
०४ अगस्त (शनिवार) कालाष्टमी
०२ सितम्बर (रविवार) कालाष्टमी
०२ अक्टूबर (मंगलवार) कालाष्टमी
३१ अक्टूबर (बुधवार) कालाष्टमी
२९ नवम्बर (बृहस्पतिवार) कालभैरव जयन्ती
२९ दिसम्बर (शनिवार) कालाष्टमी

यह ध्यान में रखना चाहिए कि कालाष्टमी का व्रत सप्तमी तिथि के दिन भी हो सकता है। धार्मिक मूलग्रन्थ के अनुसार जिस दिन अष्टमी तिथि रात्रि के दौरान प्रबल होती है उस दिन व्रतराज कालाष्टमी का व्रत किया जाना चाहिए। इसके अनुसार ही कालाष्टमी के लिए व्रत के दिन का चयन करने के लिए प्रदोष के बाद कम से कम एक घटी के लिए अष्टमी को प्रबल होना चाहिए। अन्यथा कालाष्टमी पिछले दिन चली जाती है जब रात्रि के दौरान अष्टमी तिथि के और अधिक प्रबल होने की सम्भावना होती है।

चमत्कारी भैरव मंत्र- 'ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं'।

* भैरव को शिव जी का अंश अवतार माना गया है। रूद्राष्टाध्याय तथा भैरव तंत्र से इस तथ्य की पुष्टि होती है।

* भैरव जी का रंग श्याम है। उनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें वे त्रिशूल, खड़ग, खप्पर तथा नरमुंड धारण किए हुए हैं।

* उनका वाहन श्वान यानी कुत्ता है।

* भैरव श्मशानवासी हैं तथा ये भूत-प्रेत, योगिनियों के स्वामी हैं।

* भक्तों पर कृपावान और दुष्टों का संहार करने में सदैव तत्पर रहते हैं।

* रविवार एवं बुधवार को भैरव की उपासना का दिन माना गया है।

* भैरव जयंती, भैरव अष्‍टमी के दिन कुत्ते को मिष्ठान खिलाकर दूध पिलाना चाहिए।

* भैरव की पूजा में श्री बटुक भैरव अष्टोत्तर शत-नामावली का पाठ करना चाहिए।

* भैरव की प्रसन्नता के लिए श्री बटुक भैरव मूल मंत्र का पाठ करना शुभ होता है।

* श्री काल भैरव अपने उपासक की दसों दिशाओं से रक्षा करते हैं।

29 नवंबर, 2018 के दिन भैरव अष्टमी है. इस दिन किन उपायों के करने से लाभ होगा.
इस दिन काल भैरव का जन्म हुआ था. उन्हें प्रसन्न करने के यह 10 उपाय आजमाएं. घर से हर तरह की नकारात्मक शक्ति दूर होगी. चारों तरफ से खुशियों भरे समाचार आने लगेंगे.

उपाय-1

रविवार, बुधवार या बृहस्पतिवार के दिन एक रोटी पर अपनी तर्जनी और मध्यमा अंगुली से तेल में डुबोकर लाइन खींचें. इस रोटी को किसी दो रंग वाले कुत्ते को खिलाएं. कुत्ते के यह रोटी खाने पर मान लें आपको भैरव नाथ का आशीर्वाद मिला है. यदि कुत्ता रोटी सूंघ कर आगे बढ़ जाए तो इसी तरह रोजाना रोटी डालते रहे.

उपाय-2

उड़द की दाल के पकौड़े शनिवार की रात को सरसों के तेल में बनाएं. रातभर उन्हें रखने के बाद सुबह बिना किसी के टोके घर से निकलें. रास्ते में जो पहला कुत्ता दिखाई दें उसे पकौड़े खाने को दें. ध्यान रखें कि पकौड़े खिलाने के बाद कुत्ते को पलट कर ना देखें. इस उपाय को काल भैरव जयंती या रविवार के दिन ही किया जाता है.

उपाय-3

शहर के किसी ऐसे भैरव मंदिर में जाएं, जिसमें कम ही लोग जाते हो. रविवार की सुबह सिंदूर, तेल, नारियल, पुए और जलेबी लेकर वहां जाएं. भैरव नाथ का पूजन करें.

इसके बाद 5 से 7 साल तक के लड़कों को चने-चिरौंजी, तेल, नारियल, पुए और जलेबी का उन्हें प्रसाद दें. ध्यान रखें जिनकी कोई पूजा नहीं करता ऐसे भैरव की पूजा करने से भैरवनाथ बहुत जल्दी कामना पूरी करते हैं.

उपाय-4

किसी कोढ़ी, भिखारी को मदिरा दान करें. भैरव नाथ को मदिरा का भोग लगाया जाता है. इसलिए यह उनके निमित्त ही करें.

उपाय-5

बुधवार या काल भैरव जयंती के दिन सवा किलो जलेबी भैरव नाथ को चढ़ाएं. जलेबी का एक भाग कुत्तों को खिलाएं.

उपाय -6

शनिवार या काल भैरव जयंती के दिन कड़वे तेल में पापड़, पकौड़े, पुए आदि पकवान तलें. एक दिन उन्हें रखकर रविवार को या अगले दिन गरीब बस्ती में जाकर बांट दें.

उपाय -7

रविवार, शुक्रवार या काल भैरव जयंती के दिन किसी भैरव मं‍दिर में चंदन, गुलाब और गुगल की खुशबूदार 33 अगरबत्तियां जलाएं.

उपाय -8

5 नींबू, 5 गुरुवार या काल भैरव जयंती के दिन भैरव नाथ को चढ़ाएं. ऐसा करने वाले व्यक्ति पर काल भैरव की विशेष कृपा बरसती है.

उपाय -9

बुधवार या काल भैरव जयंती के दिन सवा सौ ग्राम काले तिल, सवा 11 रुपए, सवा सौ ग्राम काले उड़द, सवा मीटर काले कपड़े में एक पोटली बनाकर भैरव नाथ के मंदिर में चढ़ाएं.

उपाय -10

काल भैरव के मंदिर जाकर भगवान काल भैरव की आरती करें. उन्हें पीले रंग की ध्वज चढ़ाएं.

"जय माता दी"

??️?जय माता दी??️?
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?️♈?️
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☠️?जय शमशान भैरव??☠️


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