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  • Mantra Tantra Yantra Vigyan Gurudev Dr. Narayan Dutt Shrimaliji

maa saraswati ki puja upasana मां सरस्वती की पूजा-उपासना

maa saraswati ki puja upasana मां सरस्वती की पूजा-उपासना

मां सरस्वती को ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है। देवी लक्ष्मी के साथ हमेशा ही सरस्वती की पूजा की जाती है, इसके पीछे का आधार यह है क्योंकि संपूर्ण जगत के प्राणी एक जीवन-चक्र से अवश्य जुड़े हैं किंतु बुद्धि केवल मनुष्य के पास ही है। इसी बुद्धि के आधार पर ज्ञान की प्राप्ति करते हुए इसने तरक्की की है।

शास्त्रों के अनुसार जिस भी मनुष्य के पास बुद्धि और ज्ञान है, इनकी मदद से वह अपने जीवन में सबकुछ पा सकता है, धन-संपत्ति और वैभव भी।

किंतु जिनके पास बुद्धि और ज्ञान नहीं है, अगर उसके पास संसार के सभी सुख और धन-संपत्ति हों तो वह स्वयं ही उसे गंवा बैठता है।

इसलिए वेदों और पुराणों में एक सुखी-संपन्न, खुशहाल जीवन के लिए बुद्धि तथा ज्ञान का होना मनुष्य के विकास हेतु अति आवश्यक माना गया है। प्रथम पूज्य गणपति की कृपा से जहां व्यक्ति संसार की बड़ी से बड़ी मुश्किल अपनी बुद्धि के बल पर पार कर सकता है, वहीं ज्ञानी मनुष्य हमेशा ही मनुष्यों में श्रेष्ठ और वंदनीय माने गये हैं।

शास्त्रानुसार जो भी स्त्री या पुरुष नित्य मां सरस्वती की पूजा-उपासना करता है, उसपर मां ज्ञान की कृपा बरसाती हैं। वह अपनी बुद्धि का सही जगह प्रयोग कर अपने ज्ञान के बल पर जगत में प्रसिद्धि और नाम कमाता है। उसके लिए सफलता की राहें हमेशा खुली रहती हैं और वह जो चाहे उसे पा सकता है।


यूं तो सभी देवों की तरह मां सरस्वती की पूजा-उपासना के भी कई नियम हैं, लेकिन मंत्रों का जाप करना इसमें सबसे आसान उपाय है। यहां हम आपको हर राशि के लिए एक सरस्वती मंत्र बता रहे हैं। अपनी राशि अनुसार नित्य प्रात:काल में स्नान-आदि से निवृत्त होकर 108 बार इसका जाप करें, धीरे-धीरे आप देखेंगे कि आपके ज्ञान का दायरा अपने आप ही बढ़ने लगा है और इसके दम पर आपके लिए लाभ की नई राहें भी खुलनी लगी हैं।


या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।


या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता

सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥


शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं

वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌।


हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌

वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥2॥



भगवती शारदा (सरस्वती देवी) की मैं वंदना करता हूं


मेष राशि


ॐ वाग्देवी वागीश्वरी नम:


वृष राशि


ॐ कौमुदी ज्ञानदायनी नम:


मिथुन राशि


ॐ मां भुवनेश्वरी सरस्वत्यै नम:


कर्क राशि


ॐ मां चन्द्रिका दैव्यै नम:


सिंह राशि


ॐ मां कमलहास विकासिनी नम:


कन्या राशि


ॐ मां प्रणवनाद विकासिनी नम:


तुला राशि


ॐ मां हंससुवाहिनी नम:


वृश्चिक राशि


ॐ शारदै दैव्यै चंद्रकांति नम:


धनु राशि


ॐ जगती वीणावादिनी नम:


मकर राशि


ॐ बुद्धिदात्री सुधामूर्ति नम:


कुंभ राशि


ॐ ज्ञानप्रकाशिनि ब्रह्मचारिणी नम:


मीन राशि


ॐ वरदायिनी मां भारती नम:

??जय ??श्री ??गुरवे नमः??

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