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गुरु दीक्षा कैसे लें ❓ दीक्षा के बाद डाक द्वारा घर पहुंचाई जाने वाली साधना एवं प गुरु दीक्षा कैसे लें ❓ दीक्षा के बाद डाक द्वारा घर पहुंचाई जाने वाली साधना एवं पूजन सामग्री

MTYV Sadhana Kendra -
Thursday 14th of December 2023 03:59:07 PM


गुरु दीक्षा कैसे लें ❓ दीक्षा के बाद डाक द्वारा घर पहुंचाई जाने वाली साधना एवं पूजन सामग्री जैसे-:
?गुरु चित्र
?मंत्र जाप हेतु आसन
?गुरु शक्ति माला
?पीली गुरु चादर ( चोला)
?दैनिक साधना विधि पुस्तिका एवं
? ?? ll निखिल मंत्र विज्ञान ll ?? पत्रिका वार्षिक सदस्यता
बिना गुरु के और बिना गुरु दीक्षा के साधना के मार्ग पर चलना और जीवन में पूर्णता प्राप्त करना असंभव है
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बहुत से लोग निरंतर Facebook पर मेरे द्वारा ग्रुप में निरंतर किए जानेवाले पोस्ट देखकर और पढ़कर मुझे व्यक्तिगत रुप से बोल रहे हैं की हम भी साधना के मार्ग से जुड़ना चाहते हैं और परम पूज्य सदगुरुदेव जी से दीक्षा लेकर उनसे जुड़ना चाहते हैं साधनाओं के मार्ग पर चलना चाहते हैं और साधनाएं करना चाहते हैं.....!
मैं उन सभी भाइयों बहनों और मित्रों का अंतर्राष्ट्रीय सिद्धाश्रम साधक परिवार में स्वागत करता हूं ??
?हमारे जीवन में गुरु का और गुरु दीक्षा का अत्यंत महत्व है, जिसे शायद कुछ समझ भी पाते हैं और कुछ नहीं भी . जो समझ पाते हैं, जो इसके प्रति गंभीर हैं और इस प्रक्रिया को और परम्परा को समझने की कोशिश कर रहें हैं . साधना में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि बिना गुरु के अन्य सभी मंत्र तंत्र प्रयोग साधना आधार नियम व्यर्थ हैं जीवन में इष्ट से ज्यादा गुरु का महत्व होना चाहिए क्योंकि उनकी तपस्या के द्वारा ही शिष्य में आत्म चेतना पैदा होती है जब गुरु शिष्य को दीक्षा देता है तो उसके प्राणों को अपने प्राणों से जोड़ देता है और इस प्रकार अपनी तपस्या का कुछ अंश उसे प्रदान कर देता है इसलिए सर्वप्रथम तो गुरु से दीक्षा लेना परम आवश्यक है इसके अलावा भी साधना सिद्धि में पांच तत्व और भी आवश्यक हैं
?1. गुरु से दीक्षा प्राप्त करना
?2. गुरु के प्रति पूर्ण समर्पित रहना
?3. गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा बांध बने रहना
?4. किसी भी परिस्थिति या आलोचनाओं के बीच भी गुरु के प्रति आस्था को न्यूनतम ना करना और यथा संभव गुरु की सेवा करना l
साधना के मार्ग में गुरु को सर्वोत्तम महत्व दिया गया है क्योंकि गुरु ही इष्ट है गुरु ही साधना है और गुरु ही जीवन की पूर्णता है l
?गुरु दीक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण क्रिया है सबसे बड़ी बात तो ये है, कि इस क्रिया का तात्पर्य है गुरु के प्राणों से जुडना, गुरु की उर्जा का हमारे प्राणों में, मन में, रक्त के कण-कण में स्थापित होना, ललाट पे अंगूठा टिकाने से या किसी के हाथ में श्री फल देकर गुरु मानने से गुरु या दीक्षा नहीं हो जाती, गुरु की एक अत्यंत गुढ़ क्रिया है जिसे समझने में शायद कई जन्म लग जाते हैं......
?यदि सही रूप से देखा जाए तो हमारा अब तक का बीता हुआ जीवन परेशानियों बाधाओं अड़चनों और कठिनाइयों से भरा हुआ है हमें जीवन में कुछ सुख और सफलता मिलना चाहिए थी वह हमें नहीं मिल पाई हम जीवन में जो कुछ आनंद लेना चाहते थे वह आनंद नहीं ले पाए और हम पद के लिए धन के लिए और प्रभुता के लिए बराबर परेशान होते रहे झगड़ते रहे जरूरत से ज्यादा परिश्रम करते रहे परंतु हमें जो अनुकूलता फल प्राप्त होना चाहिए था वह प्राप्त नहीं हो पाया इसका कारण यह है कि व्यक्ति उन्नति तभी कर सकता है जब उसके पास दैविक शक्ति हो... साधनाओं का बल हो... दैविक शक्ति की सहायता से ही व्यक्ति अपने जीवन में पूर्ण उन्नति एवं सफलता प्राप्त कर सकता है l
?महाभारत काल में भी जब अर्जुन को युद्ध में विजय प्राप्त करने की इच्छा हुई तो भगवान श्री कृष्ण ने उसे यही सलाह दी कि बिना दिव्य अस्त्रों के तुम्हारे लिए युद्ध में विजय प्राप्त करना असंभव है इसलिए यह जरूरी है कि पहले तो तुम शिव और इंद्र की आराधना करो उनसे दैविक अस्त्र और शस्त्र प्राप्त करो और ऐसा होने पर ही तुम जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पूर्ण सफलता प्राप्त कर सकते हो युद्ध को जीत सकते हो
?और हम जीवन के इस युद्ध में लड़ते रहे हैं परंतु जिस प्रकार से विजय हमारी होनी चाहिए उस प्रकार से विजय या सफलता या लाभ हमें नहीं मिल पा रहा है क्योंकि यह जीवन का युद्ध केवल हम अपने बाहुबल से ही लड़ रहे हैं जबकि हमारे पास ....दैविक शक्ति ....साधना शक्ति होनी चाहिए यदि हम गुरु के ज्ञान के माध्यम से उनके आशीर्वाद के माध्यम से.... गुरुदेव द्वारा प्रदान की गई उच्च कोटि की साधनाओं के माध्यम से दैविक शक्ति को प्राप्त कर लेते हैं तो निश्चय ही जीवन में सफलता पा जाना सरल, ज्यादा अनुकूल और ज्यादा सुविधाजनक हो जाता है और ऐसा करने पर ही संपूर्ण जीवन में जगमगाहट प्राप्त हो सकती है l
?गुरु दीक्षा कैसे लें ❓
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गुरु दीक्षा के लिए भारत के विभिन्न शहरों में सदगुरुदेव जी द्वारा साधनात्मक शिविरों का आयोजन किया जाता है परंतु इस संक्रमण काल में प्रशासनिक आपत्तियों की वजह से शिविर का आयोजन नहीं हो पा रहा है आप गुरु दीक्षा गुरुधाम दिल्ली अथवा जोधपुर एवं साधनात्मक शिविरों के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं इसके अलावा आप फोटो के माध्यम से भी गुरु दीक्षा प्राप्त कर सकते हैं उसके लिए मैं आपको व्हाट्सएप नंबर दे रहा हूं और गुरु धाम का नंबर भी दे रहा हूं ...???
?? ll निखिल मंत्र विज्ञान ll ??
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☎️ 0291 - 2638209 - 2624081
? Wats - 960 233 4847
इस नंबर पर आप दीक्षा के लिए बात करिए और व्हाट्सएप नंबर पर अपने सामने से लिए गए फोटो (चित्र) को व्हाट्सएप नंबर पर भेज दीजिए उस चित्र में आपकी आंखें पूरी तरह से खुली होना चाहिए... जो फोटो आप मोबाइल से लेंगे वह बिल्कुल सामने से और बिल्कुल साफ क्लियर होना चाहिए फोटो के माध्यम से भी आप गुरु दीक्षा ले सकते हैं इसके अलावा विभिन्न प्रकार की तीव्र शक्तिपात दिखाएं भी आप फोटो के माध्यम से गुरुजी से ले सकते हैं इसमें किसी प्रकार का कोई संशय नहीं है यह उतना ही असरकारक है जितना की प्रत्यक्ष दीक्षा लेने पर है
गुरु दीक्षा साधना पूजा सामग्री के लिए आपको 1200 रुपए का शुल्क गुरुधाम के इस खाते में जमा करना होगा यह शुल्क आप बैंक खाते में अथवा ऑनलाइन भी जमा कर सकते हैं जिसकी जानकारी आपकी सुविधा के लिए मैं आपको नीचे दे रहा हूं ????
✅ बैंक खाते का नाम ➖ निखिल मंत्र विज्ञान
✅ बैंक का नाम ➖ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
✅ खाता नंबर ➖ 32677736690
✅ ब्रांच कोड - ➖ 659
✅ IFSC कोड ➖ SBIN 0000 659
गुरुधाम जोधपुर संपर्क फोन नंबर ☎️
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?? ll निखिल मंत्र विज्ञान ll ??
☎️ 0291 - 2638209 - 2624081
? 011 - 27029044 - 27029045
? Wats - 960 233 4847
बैंक खाते में अथवा ऑनलाइन दीक्षा सामग्री शुल्क जमा करने के बाद बैंक खाते की रसीद या ऑनलाइन पैसा जमा करने का संदेश mess. दीक्षा का फोटो और अपने घर का पता आप गुरुधाम के इस ?Wats No- ? 960 233 4847 ? पर भेज दीजिए
आपके द्वारा जो 1200 रुपए का शुल्क दिया जाता है उसमें आपको एक वर्ष के लिए?? " निखिल मंत्र विज्ञान पत्रिका"?? की सदस्यता दी जाती है जिससे निरंतर पत्रिकाओं के माध्यम से आपको गुरु ज्ञान एवं साधनाओ का ज्ञान निरंतर प्राप्त होता रहे इसके अलावा अन्य साधना सामग्री जैसे-:
?गुरु चित्र
?मंत्र जाप हेतु आसन
?गुरु शक्ति माला
?पीली गुरु चादर ( चोला)
?दैनिक साधना विधि पुस्तिका
?ll निखिल मंत्र विज्ञान ll ?? पत्रिका वार्षिक सदस्यता दी जाती है जो प्रत्येक नए शिष्य या साधक साधिका के लिए दीक्षा के बाद अनिवार्य है यह साधना सामग्री दीक्षा के बाद डाक द्वारा या कोरियर के द्वारा आपके निवास के पते पर पहुंचा दी जाती है इसकी संपूर्ण जानकारी आपको गुरुधाम के फोन नंबर पर गुरु सेवक द्वारा मिल जाएगी ,इसके बाद आप देश के किसी भी राज्य या शहर मे गुरु परिवार के साधकों द्वारा लगाए जाने वाले साधना शिविर में या गुरुधाम दिल्ली या जोधपुर में जाकर गुरुदेव से आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और उनके द्वारा प्रदान की गई साधनाओं में भाग ले सकते हैं और उच्च कोटि की साधनाएं कर सकते हैं l✍
जिसने भी अपनी साधना के बल पर एक स्तर प्राप्त कर लिया और परमपिता परमात्मा की असीम शक्ति का एक अंश भी प्राप्त कर लिया वही तो देवता है देवता साधना के मार्ग में एक विशेष माध्यम हैं जिनकी कृपा से सांसारिक जीवन में कुछ विशेष प्राप्त किया जा सकता है और वह भी सहज रूप से किन किन देवताओं की प्रार्थना किन मंत्रों से की जानी चाहिए और उसका मंत्र विधान क्या है ❓ ........
पूज्य सदगुरुदेव जी प्रायः साधना शिविरों में अनेक ऐसे गूढ़तम रहस्यों का उद्घाटन कर देते हैं जिनके बारे में सामान्यतः कहीं विवरण प्राप्त होना प्रायः संभव नहीं होता यह हमारा इस पीढ़ी का तथा आगे आने वाली पीढ़ी का सौभाग्य है कि हम अपने पूर्वजों के चिंतन को दुर्लभ साधनात्मक रहस्य प्राचीन ऋषि मुनियों की साधना विधियों के दुर्लभ ज्ञान को पूज्य सदगुरु देव जी के माध्यम से जोड़ने की क्रिया संपन्न कर अपने जीवन को उन्नत बनाने का प्रयास कर रहे हैं साथ ही पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास के साथ इन साधनआत्मक प्रक्रियाओं से गुजरते हुए जीवन की विपरीत परिस्थितियों पर विजय प्राप्त कर लेते हैं तथा एक नवीन इतिहास के सृजन का अध्याय लिख डालते हैं इतिहास के नवीन पृष्ठों की संरचना संभव है यदि पूज्य सद्गुरुदेव द्वारा प्रदत्त यह साधनाए दिए गए विधि विधान से संपन्न कर ली जाए....
साधना को जब तक प्रत्येक मानव अपने जीवन में नहीं अपनाता है, तब तक उसके अंग-प्रत्यंग के महत्वपूर्ण तत्व सुप्त अवस्था में होते हैं, जिससे वह जीवन में वांछित प्रगति नहीं कर पाता है।साधना के माध्यम से एक सामान्य मनुष्य नर से नारायण तक पहुँच सकता है और प्रभु से दर्शन कर सकता है, जो जीवन का आधार है,जो जीवन का चिन्तन है । साधना का तात्पर्य ?शरीरं साधयति सः धर्म ? अर्थात शरीर को साध लेना ही साधना है, साधना ही वह क्रिया है जिसके माध्यम से मनुष्य जीवन को व्यवस्थित ढंग से संचालित कर सकता है। जिसके माध्यम से जीवन का निर्माण किया जा सकता है।जब तक जीवन में साधना नहीं है, तब तक शरीर संतुलित एवं स्वस्थ नहीं बन सकता है और जब तक स्वस्थ नहीं रहेंगे तब तक जीवन में पूर्णता नहीं है, इस अधूरे जीवन को पूरा करने के लिए *साधना* करना ही एक श्रेष्ठतम मार्ग है।
??साधना तो कोई भी कर सकता है ??
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