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Most Powerful Baglamukhi Dhoomavati Sayujya Sadhana Most Powerful Baglamukhi Dhoomavati Sayujya Sadhana

MTYV Sadhana Kendra -
Saturday 7th of January 2017 07:19:48 AM

बग्लामुखी धूमावती सायुज्य दीक्षा के लिए संपर्क यहाँ करें :
बग्लामुखी धूमावती सायुज्य साधना – इस उच्च कोटि की साधना को इससे सम्बंधित दीक्षा प्राप्त कर के ही संपन्न करें तो ज्यादा उचित होगा तथा नियमो का पूर्ण रूप से पालन करें पूर्ण पवित्रता का पालन अति आवश्यक है ही| यह एक प्रबल शत्रुहंता, प्रबल बाधा निवारक , दरिद्रता निवारक, सर्व विजय प्राप्ति, सर्व भय मुक्ति, सर्व विजय सिद्धि प्रदायक दुर्लभ तीक्ष्ण तीव्र प्रभाव युक्त साधना है तथा गुरुपूर्णिमा जैसे पवित्र अवसर पर सदगुरुदेव जी ने वरदान स्वरुप शिष्यों को प्रदान की थी
सदगुरुदेव के वरदान स्वरुप एक ऐसी साधना कि काल भी आपकी आज्ञा की प्रतीक्षा करे जीवन में कोई शत्रु हो ही नहीं प्रत्येक क्षेत्र में विजय प्राप्त करने की साधना को ही बगलामुखी धूमावती सायुज्य साधना कहा गया है 
"क्या हम निर्भय नहीं बन सकते हमें निर्भयता कैसे प्राप्त हो सकती है हम मृत्यु से परे हट कर के पूर्ण अमृतम्य कैसे बन सकते हैं,जहाँ शत्रु रहें ही नहीं शत्रु पर हम विजय प्राप्त कर सकें भूख और अकाल पर विजय प्राप्त कर सकें दरिद्रता पर विजय प्राप्त कर सकें जीवन की न्यूनताओं पर विजय प्राप्त कर सकें ऐसी विजय हम कैसे प्राप्त कर सकते हैं और शास्त्रों मे कहा है की जीवन में प्रारम्भ में ही गुरु अपने शिष्यों को निर्भय बनाये और बराबर बनाता रहे क्योंकि निर्भय होकर के ही विचरण कर सकोगे आप शेर बन कर के ही विचरण कर सकोगे गीदड़ बन के नहीं| जो डरता है वह जरूर मरता है| हजारों प्रकार के शत्रु हैं इस जीवन में, और हजार शत्रु बनना और शत्रु पर विजय प्राप्त करना और उस जीवन में शत्रु रहे ही नहीं ऐसी क्षमता प्राप्त करना,यदि गुरुपूर्णिमा के अवसर पर प्राप्त नहीं कर पाया तो जीवन का एक दुर्भाग्य होगा और मैं भी अपने आपको सही अर्थों में इस गुरु पद को क्षमा नहीं कर पाउँगा की अपने शिष्यों को निर्भय नहीं बना सका इसीलिए गुरु का पहला धर्म पहला कर्त्तव्य है की व्यक्ति को सभी दृष्टियों से पूर्णता दे दे कोई बन्धन प्रयोग नहीं रहे कोई भय नहीं रहे कोई न्यूनता नहीं रहे और ऐसी स्तिथि के लिए ऐसी साधना को बग्लामुखी प्रयोग कहा गया है जो दस महाविद्यायों में अद्वितीय प्रयोग है"-सदगुरुदेव निखिलेश्वरानंद जी महाराज||
To speak anything about this ultimate and most powerful Sadhana, Baglamukhi Dhoomavati Sayujya Sadhana, combination of two Mother Goddesses, is like showing lamp to sun. In short only this much can be said that:

This is the most powerful Sadhana Ritual in the world bestowing full victory over all enemies of the whole world. Kicking out all fears of the whole world. The one who practices this Sadhana, no enemy can ever stand in front of him, he becomes lion, the king, and his enemies are like foxes in front of him. No fear can touch him even. Only the Guru of highest reverence and proficiency can give such Sadhana as boon to his disciples. The ones, who have completed this Sadhana, know its results very well. Even the lord of death, Yam raj, cannot touch you without your permission. Such is the effect of this ultimate Sadhana and then what to talk about other things. Such is the effect of this Sadhana that you start getting success in all the fields of life automatically. 
In life, there are so many fears and problems. There are many types of enemies out there. In present times there are bullets fired, bombs exploded on the streets, kidnappings, accidents, black magic, evil effects of planets, threats to life, jealous neighbourhood, boss threatening in the office, court cases, blackmailing, many causes which may bring bad name in the society hence defame, fear of losing prestige, enemies playing games and there are many other similar factors which produce fear and spoil your life like poison. Then the question arises, how to get rid of them all once and for all. Is there a way some method to do so? We all have fear in us, different people may have different fears, types of fear, causes of fear may differ but mostly level and pain is the same.
Only a SADGURUDEV, a true spiritual master of highest reverence can remove such obstacles from our life and make us fearless and grant victory to us over all the terrific situations of our lives.
The above Sadhana is such a boon given to mankind and humble souls, disciples by SADGURUDEV Dr Narayan Dutt Shrimali ji Maharaj, Paramhans Swami Nikhileshwaranand Ji Maharaj. 
For Baglamukhi Dhoomavati Diksha :

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