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उपाय -गोमती चक्र गोमती चक्र कम कीमत वाला एक ऐसा पत्थर है जो गोमती नदी में मिलता है। विभिन्न तांत्रिक कार्यों तथा असाध्य रोगों में इसका प्रयोग होता है। इसका तांत्रिक उपयोग बहुत ही सरल होता है। किसी भी प्रकार की समस्या के निदान के लिए यह बहुत ही कारगर उपाय है। 1- यदि घर में भूत-प्रेतों का उपद्रव हो तो दो गोमती चक्र लेकर घर के मुखिया के ऊपर घुमाकर आग में डाल दें तो घर से भूत-प्रेत का उपद्रव समाप्त हो जाता है। 2- यदि घर में बीमारी हो या किसी का रोग शांत नहीं हो रहा हो तो एक गोमतà¥...
21अप्रेल 2015 को है अक्षय तृतीया इस बार 11 साल बाद बन रहा है महामंगल योगlयहा जानिये आप की राशिअनुसार आप को क्या खरीदना शुभ रहेगा? एवं खरीददारी के शुभ मुहूर्तो की जानकारी? वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार इस दिन किए गए शुभ कार्य, दान, उपवास व व्रत का संपूर्ण यानी पूरा फल मिलता है। इसलिए इसे अक्षय (संपूर्ण) तृतीया कहते हैं। इस बार अक्षत तृतीया का पर्व 21 अप्रैल, मंगलवार को है। अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त भी कहते हैं यानी इस दिन विवाह आदि कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखे भी किया जा सकता है। 11 साल बाद बना है महामंगल योग, इस बार अक्षय तृतीया पर 11 साल बाद महामंगल योग बन रहा है। 21 अप्रैल को सूर्य मेष, चंद्रमा वृषभ और गुरु कर्क राशि में रहकर मंगलकारी योग बनाएंगे। इस दिन दोपहर 11.59 बजे तक कृतिका व...
शत्रु स्तंभन प्रयोग Shatru Stambhan Mantra 1. Discover The Power Of शत्रु स्तंभन प्रयोग Shatru Stambhan Mantra - A Potent Mantra To Silence Enemies And Protect Yourself. Explore Its Ancient Origins And Modern Applications. 2. Unlock The Secrets Of The शत्रु स्तंभन प्रयोग Shatru Stambhan Mantra, A Time-honored Practice To Neutralize Adversaries And Safeguard Your Well-being. Learn Its Profound Significance. 3. Harness The Transformative Energy Of The शत्रु स्तंभन प्रयोग Shatru Stambhan Mantra And Reclaim Your Power Over Hostile Forces. Uncover The Wisdom Of This Ancient Practice. शत्रु स्तंभन प्रयोग यह क्रिया आप ८ अप्रेल को करे.समय रात्री ९ से ३ के मध्य का रखे,मुख उत्तर की और रखे.आसन वस्त्र का कोई बंधन नही है.एक निंबू सामने रखे और निम्न मंत्र की एक माला रूद्राक्ष माला से जाप करे. ओम क्रीं हूं क्रीं सर्व शत्रु स्तंभिनी घोर कालिकायै फट् एक माला करे और निंबु मै,एक लौंग गाड़ दे.ईस प्रकार ११ माला करे और एक एक करके ११ लौंग गाड़ दे.अगले दिन या रात्री मे ही निंबु भुमि मे कही गाड़ दे.और एक नारियल गाड़े हुए स्थान पर रख आये. ईससे शत्रु के सारे षड़यंत्र विफल हो जायेंगे. ...
कभी कभी आप ऐसे घरो मे रहने चले जाते है.जहाँ का वातावरण आपको रोगी करने लगता है.आप इतने परेशान हो जाते है कि,कुछ भी करके इस समस्या से मुक्ति पाना चाहते है . मित्रो अगर घर मे नकारात्मक उर्जा हो तो,उपरोक्त समस्या खड़ी हो जाति है.ईसके लिये आवश्यक है कि आप घर सुरक्षित एवं शुद्ध करे .किसी भी दिन से यह क्रिया आरंभ करे.नित्य पुजन के समय एक पात्र मे थोड़ा,दुध और पानी मिलाकर रखे.अब निम्न मंत्र का किसी भी माला से एक माला जाप करे. ह्रीं बाधा निवारिणी सर्व रक्षिणी कामेश्वरी दुर्गायै नमः इस क्रिया के बाद सामने रखा दुध जल घर के सभी सदस्यो को थोड़ा पिलाये और बचा हुआ घर मे छिट दे यह क्रिया नित्य करने पर अनुकुल परिणाम प्राप्त होते है.ओर घर मो निवास कर रही नकारात्मक उर्जा पलायन कर जाती है.ईसके अतिरिक्त रस तंत्र के अनुसार भैरव गुटीका टांग देने से भी घर मे कोइ नकारात्मक उर्जा...
मतारानी आप ही हो..... माँ सब कुछ होती है,उनकी कृपा ना हो तो जीवन अधूरा रहेता है.इससे आगे कुछ लिखने के लिये शब्द नही है. हम सब एक अदृश्य जगमगाती ब्रह्मांडीय शक्ति के ओज में तैर रहे हैं जिसे ‘देवी‘ कहा गया है। देवी या देवी माँ इस सम्पूर्ण सृष्टि का गर्भ स्थान है। वह गतिशीलता, ओज, सुंदरता, धैर्य, शांति और पोषण की बीज हैं। वह जीवन ऊर्जा शक्ति हैं। एक मां को अपने बच्चे के लिये पूरा प्रेम होता है। देवी मां को भी अपने बच्चों के लिये हर हाल में असीम प्रेम है जिसमें इस सम्पूर्ण जगत के सभी जीव शामिल हैं। नवरात्रि के नौ रातों में देवी के सभी नाम रुपों की आराधना की जाती है। नामों का अपना एक महत्व होता है। हम चंदन के वृक्ष को उसके सुगंध की स्मृति द्वारा याद करते हैं। देवी का हरेक नाम और रुप दिव्य शक्ति के एक विलक्षण गुण या स्वरुप का प्रतीक है। हम उस रूप को याद क...
गुप्त नवरात्री -: विशेष यह नवरात्री खास करके इतर योनी से मदत प्राप्त करने हेतु एकदम खास है,यहा पर आज मै विशेष क्रिया बता रहा हू जिससे 100% मनोकामना पूर्ण होता है. आनेवाले शनिवार के दिन सफेद आक के पौधे के पास जाये और वहा पर एक सफेद वस्त्र बिछाये,वस्त्र पर काजल से अपना पूर्ण नाम लिखे और नाम के उपर सव्वा किलो चावल का ढेरी बनाये.अब आक के पौधे को जल चढाये और कुंकुम से रौली से पुजन करे.पुजन के बाद 5 अगरबत्ती जलाये और पौधे की पांच परिक्रमा करके अगरबत्ती को जमीन पर लगादे. अब चावल के ढेरी पर एक मिट्टी का दीपक रखे जिसमे सुगन्धित तेल भरा हो और अपना कामना बोलकर दीपक को प्रज्वलित करदे. यह क्रिया रात को बारा बजे होनी चाहिये सिर्फ इतना ही नियम है.दीपक प्रज्वलित करने के बाद एखादा गुलाब का पुष्प दीपक के पास चढा दिजिये और बिना पीछे मुडे घर को वहा से निकल जाये. अगर किसी प्रकार का आवाज आये तो डरना नही कोà...
AGHOR SHIV SADHANA कितना भी लिखने का प्रयास करू परंतु मेरे इष्ट शिव जी का स्तुति मेरे लिये संभव नहीं, क्योंकि उनका हर रूप निराला है उनकी पुजा किसी भी समय कीजिये अनुभूतिया तो ऐसा ऐसा मिलेगा के सम्पूर्ण जीवन उनके गुण-गान गाने मे ही निकल जायेगा,ऐसा समय आज तक शिवभक्तों के जीवन मे नहीं आया होगा जिस दिन उन्हे शिव कृपा प्राप्त ना हुआ हो, आज एक दिव्य साधना दे रहा हु जो मेरा ही बल्कि बहुत से शिव साधक या भक्तो का अनुभूतित साधना है | और एक बात इस साधना को किए बिना चाहे कितना भी महाविद्या साधना कर लीजिये प्रत्यक्ष अनुभूतिया शीघ्र नहीं मिलेगा, इसलिये "अघोर शिव साधना" प्रत्येक साधक के जीवन मे लक्ष्य प्राप्ति के और बढ़ने का एक आसान सा मार्ग है,जिसने अघोरत्व प्राप्त कर लिया वह तो जीवन मे सब कुछ प्राप्त कर लेता है अन्यथा जीवन जीने का हर एक अंदाज व्यर्थ ही इच्छा पूर्ति हेतु गवा ही देता है,यह à¤...
होली विशेष साधना-1, --------------------------------- यह साधना मै प्रत्येक होली के पर्व पर 3 वर्ष से पोस्ट कर रहा हू और सभी ने लाभ उठाया है. यह तीनो साधनाये एक ही दिन की है और प्रत्येक साधना को संपन्न करने मे हर एक साधना के बाद 30-40 मिनिट का आराम करे.येसा करने से आप तीनो साधनाये कर सकते है. तंत्र बाधा निवारण साधना:- आज कल बहोत सारे येसे लोग जो उन्नति मे बाधक बनते है और किसी फाल्तू व्यक्ती को पैसा देकर तंत्र क्रिया करवाते है जिससे सामान्य व्यक्ति को परेशानी को भोगना पडता है,इस साधना को करने से तंत्र दोष बाधा का योग्य निवारण 100% होगा. साधना विधि:- वस्त्र आसन का रंग कोई भी हो परंतु माला काली हकिक की हो जो आसानी से आपको मिल जायेगा. होली के रात मे दक्षिण दिशा मे मुख करके 11 माला मंत्र का जाप करे. मंत्र:- ll ओम श्रीं ह्लीं क्रीं तंत्र निवारण हिडीम्बायै नम :ll ...
माँ गायत्री उपासना. ------------------------------------ गायत्री- साधना से पापमुक्ति गायत्री की अनन्त कृपा से पतितों को उच्चता मिलती है और पापियों के पाप नाश होते हैं.इस तथ्य पर विचार करते हुए हमें यह बात भली प्रकार समझ लेनी चाहिए कि आत्मा सर्वथा, स्वच्छ, निर्मल, पवित्र, शुद्ध बुद्ध और निर्लिप्त है. मै यही चाहता हू जीवन मे पवित्रता हो और सभी पापो का नाश हो,ताकी जीवन मे एक नया उद्देश्य जन्म ले और आनेवाली पीढी को सहजता से हमारे संस्कृति का ग्यान प्राप्त हो. मै इतना बडा उपासक तो नही हू परंतु माँ गायत्री उपासना पर कुछ लिखने की इच्छा रखता हू इसलिये जो कुछ ग्यान है वह शब्दो के स्वरुप मे आपके सामने रखने की एक कोशिश कर रहा हू. मै जब 10 वर्ष का था तक मेरे सभी ब्राम्हण मित्रो के यहा मुंज की जाति थी जिसमे उन्हे उच्चकोटि के ब्राम्हण देवता से गायत्री मंत्र प्राप्त होता था.मैने भी ब्राम्हण देवता के समक्à¤...
पीताम्बरा:-नवग्रह दोष निवारण साधना बगलामुखी जी को ही पीताम्बरा कहा जाता है,यह साधना नवरात्रि मे कियी जाने वाली साधना है और अपना प्रभाव तुरंत ही साधक के जीवन मे देखने मिलता है,साधना की यह विशेषता है के माँ पीताम्बरा नक्षत्र स्तंभीनी है और जब नक्षत्र स्तंभीनी से हम प्रार्थना करते है तो हमारे सभी प्रकार के कार्य सहज ही सम्पन्न हो जाते है,अभी तक आपने पीताम्बरा जी की कई साधना ये सम्पन्न की होगी परंतु यह साधना आज के युग मे अत्यंत आवश्यक साधना मानी गयी है,इस साधना से जहा नवग्रह देवता के दोष कम होते वैसे ही उनकी अखंड कृपा भी प्राप्त होती है और जीवन मे कई प्रकार के लाभ होते है,इ...
नवरात्रि के प्रयोग यह प्रयोग दिखने मे साधारण है परंतु पूर्ण प्रभावशाली है,सिर्फ इनमे आपका विश्वास अटूट होना चाहिये क्यूके यह सभी प्रयोग माँ जगदंबा राणी के है जो इस संसार की जगत-जननी है........... ============================================================== साधना में श्रद्धा अनिवार्य तत्व है क्योंकि अपनी स्वयं की श्रद्धा ही साधक को साधना में धैर्य और ऊर्जा प्रदान करती है।श्रद्धा के द्वारा ही वह विपरीत परिस्थितियों पर विजय प्राप्त कर सकता है।यदि मन में दृढ़ श्रद्धा और विश्वास हो तो निश्चय ही लक्ष्य की प्राप्ति होती है। ...
सूर्यग्रहण मनोकामना पुर्ती साधना. ========================== एक सच्चा साधक तो कई दिनो पूर्व से ही सूर्य ग्रहण का प्रतीक्षा करता है,क्युके ग्रहण काल मे मंत्र जाप का फल सौ गुना होता है.येसा मत सोचे ग्रहण विदेश मे दिखेगा तो हमे यहा भारत मे क्या लाभ होगा,ग्रहण कही भी द्रुश्य हो लाभ तो होता ही है. इस साधना से कामनापूर्ति होता है और मनोकामना के कई प्रकार है.जो आपको जरुरी हो और आपको सही मार्ग पर जाना हो जिससे आपको प्रत्यक्ष लाभ मिले येसा कामना पूर्ण करने हेतु आपके लिये यह साधना आवश्यक है. साधना विधि:- ग्रहण के प्रारंभ समय मे यह साधना संपन्न करना है,मंत्र जाप से पूर्व हाथ मे जल लेकर अपनी कोई भी तीन कामना बोलकर जल जमीन पर छोड दे.स्फटिक माला से मंत्र का 24 माला जाप करे,दिशा पूर्व हो,वस्त्र आसन लाल या सफेद रंग के हो.मंत्र को जाप के पहिले ही याद करके रखे. भगवान सूर्यदेव का आवाहन मंतà...
सर्व रोग निवारण महाकाली साधना ============================ चैत्र नवरात्रि का महा पर्व आनेवाला है और इस पर्व पर आप योग्य साधना करे यही माँ के श्री चरणोमे मेरा कामना है,इस संसार में ऐसा कोई बीमारी ही नहीं है जो इस साधना से ठीक ना हो सके इसलिये आपकी सुविधा यह दिव्य साधना प्रस्तुत है. यह साधना रात्रिकालीन है,सामने कोई भी बाजोट रखिये और बाजोट पर लाल रंग का वस्त्र स्थापित करे,वस्त्र पर महाकाली जी का चित्र स्थापित करे,मंत्र जाप काली हकीक माला या फिर रुद्राक्ष माला से कर सकते है,आसान और वस्त्र भी लाल रंग के हो,मन्त्र जाप से पूर्व गणेश और गुरु पूजन करे,संकल्प ले "हे माँ आप मुज़े इस साधना में पूर्ण सफलता प्रदान करे",मंत्र जाप का समय रात्रि में ९ बजे का है,नित्य मंत्र का ९ दिनों तक १६ माला मंत्र जाप करना है.दशमी तिथि को सुबह ११ बजे से हवन करे,हवन में ११ माला काले तिल का आहुत...
महाकाली साधना. अघोरी हो या तांत्रिक हो सब की आराध्या महाकाली ही है, जिसने काल को सेवा मे रखा हुआ है.जहा महाकाली है वही महाकाल है और जो साधक महाकाली साधना करता है उस पर महाकाल की तो कृपा करते ही है. व्यर्थ का चिंता छोड दो और आप महाकाली साधना संपन्न कर लो. तो जीवन आ रही बंधा समाप्त हो जाती है और जीवन में कोई आभाव नहीं रहता है साधना विधान:- वस्त्र कोई भी हो आसन लाल हो, रुद्राक्ष का माला या काली हकिक माला से जाप करे,दिशा उत्तर,चैत्र नवरात्री मे जाप करना हो तो रात्री मे 9 बजे के बाद करे,रोज 11 माला अवश्य करे. ध्यान :- ओम कराल वदनां घोरां मुक्तकेशीं चतुर्भुजाम आद्यं कालिकां दिव्यां मुंडमाला विभूषिताम सद्यश्छिन्ना शिरः खडग वामोर्ध्व कराम्बुजाम महामेघप्रभाम् कालिकां तथा चैव दिगम्बराम् कंठावसक्तमुंडाली गलद्वधिर चर्चिताम् कर्णावतंसत...
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