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POWER OF TANTRIK SADHANA

तंत्र क्या है, तंत्र विज्ञान के फायदे, What is Tantra in hindi - तंत्र को ज्यादातर लोग या तो अंधविश्वास मानकर नकार देते हैं, या फिर कोई डरावनी चीज़ मानकर उससे दूर रहने की सलाह देते हैं। लेकिन यह एक विज|्ञान है, जीवन की प्रत्येक क्रिया तन्त्रोक्त क्रिया है॰यह प्रकृति,यह तारा मण्डल,मनुष्य का संबंध,चरित्र,विचार,भावनाये सब कुछ तो तंत्र से ही चल रहा है;जिसे हम जीवन तंत्र कहेते है॰जीवन मे कोई घटना आपको सूचना देकर नहीं आता है,क्योके सामान्य व्यक्ति मे इतना अधिक सामर्थ्य नहीं होता है के वह काल के गति को पहेचान सके,भविष्य का उसको ज्ञान हो,समय चक्र उसके अधीन हो ये बाते संभव ही नहीं,इसलिये हमे तंत्र की शक्ति को समजना आवश्यक है यही इस ब्लॉग का उद्देश्य है.

MTYV Sadhna Kendra

  • Friday 12th of June 2015 03:59:32 AM
  • एक आध्यात्मिक व्यक्ति शांति, आनंद,प्रेम, और स्थिरता का स्रोत होता है,  कई लोग मिल जायेंगे जो दावा करेंगे कि उनकी सीधी भगवान् से बात होती है, किसी का भगवान् कभी रोशनी का गोला होता है, किसी का कृष्ण, राम, या दुर्गा माता कोई भी जाना या अनजाना नाम होता है.ऐसे लोग दावा करेंगे ...

  • Friday 12th of June 2015 03:24:29 AM
  • बहुत-से ऐसे लोग हैं जो जमाने भर मे ये कहते फिरते हैं कि- "मैं गुरूदेव को प्यार करता हूँ, मैं गुरूदेव को प्यार करता हूँ" ! पर असली मज़ा तो तब और आये जब गुरूदेव आकर खुद कहे कि- "मैं तुझसे प्यार करता हूँ" ! गुलामी हो तो सद्गुरु की ________________________ ग़ुलामी कई प...

  • Friday 12th of June 2015 03:08:21 AM
  • "हमारी सामाजिक , आर्थिक, धार्मिक और आध्यात्म में निरंतर उन्नति के लिए आइये जाने शंख का स्वास्थय में, धर्म में, ज्योतिष में उपयोग ~ "शंख का नाम लेते ही मन में पूजा - और भक्ति की भावना आ जाती है ...... ! "शंख का स्वास्थ्य में महत्व : ~~ १ : ~ शंख की आकृति और पृथ्वी की संरचना समान ...

  • Friday 12th of June 2015 03:03:24 AM
  • सन्यास क्या है? सन्यास लेने या देने की चीज नहीं है| यह एक मानसिक भाव है, जिसके प्रति आकर्षण परमात्मा की कृपा से ही प्राप्त होता है| दीक्षा, आचरण के नियम, वेशभूषा, विधि आदि सम्प्रदाय या आश्रम विशेष या गुरु विशेष के होते है; पर संन्यास में इसकी कोई उपयोगिता नहीं है| जब किस...

  • Friday 12th of June 2015 02:55:56 AM
  • सदगुरू-महिमा गुरु बिनु भव निधि तरै न कोई | जौं बरंचि संकर सम होई || -संत तुलसीदासजी हरिहर आदिक जगत में पूज्यदेव जो कोय | सदगुरू की पूजा किये सबकी पूजा होय || -निश्चलदासजी महाराज सहजो कारज संसार को गुरू बिन होत नाँही | हरि तो गुरू बिन क्या मिले, समझ ले मन माँही ||...

  • Friday 12th of June 2015 02:50:46 AM
  • क्या है जीवन का असली लक्ष्य जीवन का एक मात्र लक्ष्य सत्य को उपलब्ध हो जाना है… आत्मा को जान लेना है। धन पा जाना, नाम पा जाना, बड़ा आदमी बन जाना… ये जीवन के लक्ष्य नहीं हैं। इनका नाता तो शरीर से है और शरीर छूटने के साथ ही इन सबको छूट जाना है। सत्य को उपलब्ध होना कठिन नहीं है। ...

  • Friday 12th of June 2015 02:19:38 AM
  • चेतना की सात अवस्थाएँ 1. जागृति ---- ठीक-ठीक वर्तमान में रहना ही चेतना की जागृत अवस्था है। जब हम भविष्य की कोई योजना बना रहे होते हैं, तो हम कल्पना-लोक में होते हैं। कल्पना का यह लोक यथार्थ नहीं होता। यह एक प्रकार का स्वप्न-लोक ही है। जब हम अतीत की किसी यद् में खोए हुए रहते ह...

  • Tuesday 9th of June 2015 09:24:08 AM
  • mai to tumhara hi hu,,tumhari dharkanon ka spandan hu,,,tumhare hriday ki hi to suvaas hu,,,tumhare ansuwon ki hi bhasha hu,,,fir mujhe dhundne ki zarurat hi kahan padi hai,,, mai budh k bad ek vishesh sandesh lekar tum logon k bich upasthit hua hu,,ek vishesh chetna jagrat karne k liye paida hua hu,,,, yah char din ki zindagi zindagi na rhi...umr bhar k liye rog hui jati hai..zindagi yon to hamesha se pareshan thi..ab to har saans pareshan hui jati hai ... पीर भी तू मेरा संत भी तू पंडित तू मेरा महंत भी तू अब और क्या कहूँ सतगुरु मेरा आ...

  • Tuesday 9th of June 2015 04:11:44 AM
  • ईश्वर ने तुम्हारा जन्म एक विशेष उद्देश्य के लिए किया है क्योंकि प्रभु की यह विशेष स्थिति है की वह एक घास का तिनका भी व्यर्थ पैदा नहीं करता ...और तुम्हे भी यदि ईश्वर ने जन्म दिया है तो जरूर इसके पीछे कोई हेतु है ,कोई कारण है ,कोई चिंतन है | मैं तो तुम्हे आवाज दे रहा हूँ ,युगों...

  • Tuesday 9th of June 2015 04:05:14 AM
  • गुरु सेवा गुरु सेवा से बड़ी संसार में कोई साधना नहीं. इसके आगे तो सभी मंत्र, सब साधनाये, सब भक्ति, सब क्रियाये व्यर्थ हैं. गुरु सेवा के द्वारा शिष्य क्षण मात्र में वह सब प्राप्त कर लेता हैं जो की हजारों वर्ष क्या कई जन्मों की तपस्या के बाद भी संभव नहीं. gurudev dr. narayan dutt shrimaliji ...

  • Tuesday 9th of June 2015 03:13:42 AM
  • कर्म-फ़ल में आसक्त हुए बिना साधक को अपना कर्तव्य समझ कर कर्म करते रहना चाहिये, क्योंकि अनासक्त भाव से निरन्तर कर्तव्य-कर्म करने से साधक को एक दिन सदगुरुदेव की प्रप्ति हो जाती है।" "कर्मयोगी" साधक को सबसे पहले कर्तव्य-कर्म को करना चाहिये, कर्तव्य-कर्म से मुक्त होकर ही कि...

  • Tuesday 9th of June 2015 03:09:38 AM
  • मैं समय हूँ**. समय तो जरुर पढना.. पुराने समय की बात है.एक खुबसुरत टापु पर सभी भावनाए और गुण अच्छे घर बनाकर रहते थे.सुंदरता, आनंद, उदासीनता वगैरा एक-दुसरे के आस-पास रहते थे.इन सब से दुर एक कोने के घर मेँ प्रेम रहता था. एक दिन सुबह एक परी ने आकर सभी टापुवासियो को कहा कि आज शाम त...

  • Tuesday 9th of June 2015 02:47:55 AM
  • हे सद्गुरुदेव ! तुम्हीं सबके स्वामी तुम ही सबके रखवारे हो । तुम ही सब जग में व्याप रहे, विभु ! रूप अनेको धारे हो ।। तुम ही नभ जल थल अग्नि तुम्ही, तुम सूरज चाँद सितारे हो । यह सभी चराचर है तुममे, तुम ही सबके ध्रुव-तारे हो ।। हम महामूढ़ अज्ञानी जन, प्रभु ! भवसागर में ...

  • Monday 25th of May 2015 08:55:42 AM
  • sadhana main safalta part -2 - how to cross thses small but great problems during sadhana हम मैं से हर एक साधना में  सिद्धि  जल्दी से पाना चाहता हैं . शब्दकोष (अंग्रेजी ) में ही सफलता  , कार्य के पहले आती हैं.इसी तरह से साधना  के बाद ही सफलता आती हैं . आधी से ज्यादा सफलता तो आपको  उसी समय प्राप्त हो जाती हैं जब आप किसी भी सा...

  • Monday 25th of May 2015 08:53:20 AM
  • saadhna me safalta- aasan siddhi साधना में सफलता - आसन सिद्धि प्रोयोग बाइबल में कहा गया हैं कि इच्छा तो बहुत थी पर शरीर ही कमजोर था, हम सभी साधना करने के तो बहुत ही इच्छा रखते हैं पर मन स्थिर तो बहुत दूर की बात हैं शरीर ही स्थिर हो जाये इतना ही प्रारंभिक स्तर पर एक बहुत ऊँची छलांग हैं, हम मे...

  • Monday 25th of May 2015 08:44:59 AM
  • समझे बिना हम जो पूजा पाठ माला भोग सब करते है ।वो व्यर्थ है सब क्योकि भक्ति का मूल अर्थ ही हम नही जानते।बस अंधाअनुकरण मात्र होता है।जैसे कोई मिठाई नही खाता तो हम भी नही खाये।अरे भाई उनको मधप्रमेह है।आप क्यों नही खाते?अनुकरण मात्र!! लोग उस मन्दिर में जाते है हम भी जाये व...

  • Sunday 24th of May 2015 04:07:01 AM
  • मुझे शर्म आती है के मैं अपनी जबान से तुम्हे शिष्य कहु ?,या तुम मुझे गुरु कहो ?. तुम्हे तो गुरु नहीं चाहिए.? ..जो तुम्हारे मन के अंदर सके,जो तुम्हारे बंद दरवाजे को खोल सके,जो तुम्हारे प्राणो में हलचल पैदा कर सके...? तुम्हे तो मदारी चाहिए जो डुगडुगी बजा कर लोगों की भीड़ एकत्र कर ...

  • Sunday 24th of May 2015 03:58:38 AM
  • साधना का प्रारम्भ गुरु से होता है,,,,और साधना की अंतिम स्थिति गुरु के प्राणो में समाहित होने से होती है......... पर गुरु के प्राणो में समाहित होना शिष्य का कार्य है....गुरु ने तो अपना ह्रदय,अपने प्राण पूरी तरह से खोल कर रखे है,,,,तुम्हारा जितना अहंकार गलता जायेगा उतनी ही मात्र में...

  • Saturday 23rd of May 2015 11:01:42 AM
  • ॥ बटुक भैरव प्रयोग ॥ जीवन मेँ सुख और दुःख आते ही रहते है, जहा आदमी सुख प्राप्त होने पर प्रसन्न होता है वहीँ दुःख आने पर वह धोर चिन्ता और परेशानियोँ से घिर जाता है, परन्तु धैर्यवान व्यक्ति ऐसे क्षणोँ मे भी शान्त चित्त होकर उस समस्या का निराकरण कर लेता हैँ । कलियुग मेँ ...

  • Saturday 23rd of May 2015 10:23:16 AM
  • धूमावती सौभाग्यदात्री कल्प – 26 /5/2015  धूमावती जयंत्री dhoomavati soubhagyadaatri kalp धूम्रा मतिव सतिव पूर्णात सा सायुग्मे | सौभाग्यदात्री सदैव करुणामयि: || "हे आदि शक्ति धूम्र रूपा माँ धूमावती आप पूर्णता के साथ सुमेधा और सत्य के युग्म मार्ग द्वारा साधक को सौभाग्य का दान करके सर्वदा अ...

  • Monday 18th of May 2015 10:38:23 AM
  • सद्गुरुदेव जी का प्यार हम सब के लिए है ..हम रोज़ नयी नयी तरकीबें सोचते हैं की किस तरह गुरूजी का प्यार हमें मिल पाए ...ये सेवा ,श्रधा .दान पुण्य आदि सारी विधाएं गुरूजी का प्यार पाने के ही रास्ते हैं .पर यहाँ एक बात हम समझ नहीं पा रहे हैं ..कि गुरूजी का प्यार तो हमेशा से ही हमारे ल...

  • Monday 18th of May 2015 10:26:31 AM
  • गुरूजी ने तो हम साधको हमारे गुण अवगुण के साथ अपना लिया ..पर हम बस बोलते ही रह गए कि गुरूजी हम आपके हैं ..न ही गुरूजी को अपने जीवन का लगाम सौंपा ..न ही ये समझने की कोशिश की कि गुरूजी हमें क्या बनाना चाहते हैं .... हम गुरूजी के साधक हैं .. ..हम कह रहे हैं की गुरूजी भगवान हैं तो सामने वा...

  • Sunday 17th of May 2015 08:03:00 AM
  • सद्गुरुदेव के साथ जुड़ने के बाद से ही हमारी जीवन यात्रा बहुत ही रोमांचक हो जाती है ....जो कभी सोचा भी न होगा ...वो होने लगता है ..जो सुना भी न होगा वो दिखाई पड़ने लगता है .... पहले तो हम सोचते हैं की संयोग से हुआ ऐसा ......फिर लगता है कि हम भाग्यशाली हैं जो ऐसा हो रहा है ......धीरे धीरे पता च...

  • Sunday 17th of May 2015 07:26:22 AM
  • गुरू एक तेज हे जिनके आते ही सारे सन्शय के अंधकार खतम हो जाते हे गुरू वो मृदंग हे जिसके बजते ही अनाहत नाद सुनने शुरू हो जाते हे गुरू वो ज्ञान हे जिसके मिलते ही पांचो शरीर एक हो जाते हे गुरू वो दीक्षा हे जो सही मायने मे मिलती हे तो पार हो जाते हे गुरू वो नदी हे जो निरंतर हमार...

  • Sunday 17th of May 2015 07:16:55 AM
  • सद्गुरुदेव जी से जुड़े साधक अक्सर हमें कहते हैं कि, हम सद्गुरुदेव जी को पूर्ण समर्पण कर दें ..हम आम लोग समझ नहीं पाते की क्या करना है ..जिसे हम समर्पण कह सकते हैं जहाँ पूर्ण समर्पण की बात आती है .....एक उदहारण दिया जा सकता है ... मानो कोई प्लेन क्रेश होकर गिर रहा है ...हम हवा में ...

  • Sunday 17th of May 2015 07:11:42 AM
  • गुरुदेव जी ने हमारे लिए बिलकुल खुला मार्ग रखा है ..यहाँ हम सांसारिक कार्यों में लिप्त रहते हुए यदि बस उनको याद रखते हैं ..तो भी हमारा कल्याण हो जाता है ...उन्हें हम उन गोपियों के जैसे प्यार कर सकते हैं ..जो अपने गृहस्थ धर्म को निभाते हुए भी हर पल कृष्णा के साथ ही होती थीं .. गु...

  • Sunday 17th of May 2015 07:07:07 AM
  • गुरूजी ने एक बार हम पर दया कर दी की हमारा अंदरूनी सफाई शुरू हो जाता है ...ये इतना धीमा है कि हमें खुद पर शक होता है कि इतने सालों से जुड़ने के बाद भी हममे कोई बदलाव आया कि नहीं ...लोग कहते हैं कि nature और signature कभी नहीं बदलता ..पर गुरूजी के पास आकर हमने बहुतों को पूरी तरह बदलते हुए देख...

  • Friday 15th of May 2015 08:59:01 AM
  • एक पात्र में जाल ले फिर 11 बार ॐ ह्रीं ह्रीं ॐ का जाप कर उस जाल को पुरे घर मैं छिडक दे तो तंत्र दोस खत्म हो जाता है | कैसे जानेंगे हमारे उपर गुरु कृपा है? हम लोग गुरु का सान्निध्य पाने पर खुद में कुछ बदलाव महसूस करते हैं। इसे गुरु कृपा भी कहा जाता है। लेकिन क्या गुरु से दूर ...

  • Friday 15th of May 2015 08:33:27 AM
  • आपकी भक्ति कहीं सौदा तो नहीं? ======================== जरा सोच कर देखिए कि आप कब और किसलिए अपने भगवान या इष्ट ,गुरु को याद करते हैं? जब आपको कुछ मांगना होता है या जब कोई परेशानी या तकलीफ आन पड़ती है तभी न? तो फिर यह भक्ति है या एक तरह का सौदा? अंग्रेजी में ‘डिवोशन’ (भक्ति) शब्द ‘डि...

  • Friday 15th of May 2015 08:28:40 AM
  • ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नम : हे समस्त जग के उपास्य देव,हे अंतर्यामी,हे असीम ज्ञान के प्रदाता गुरुदेव ! मुझे अपनी कृपा कटाक्ष प्रदान करे,मुझे नहीं मालूम के मैं आपकी वंदना, आपकी पूजा कैसे करू ? मेरे अंदर इतना भी सामर्थ नहीं है के मैं साधना संपन्न कर सकू ! मैं परम दोष...

  • Friday 15th of May 2015 08:17:29 AM
  • साधनाओं के नियम •साधनाओं को कोई भी गृहस्थ संपन्न कर सकता है, इसके लिये किसी भी विशेष वर्ग या जाति के आधार पर कोई बन्धन नहीं है, जिसको भी इस प्रकार की साधनाओं में आस्था हो, वह इन साधनाओं को संपन्न कर सकता है •इस प्रकार की साधनाओं में पुरुष या स्त्री, युवा या वृद्ध, विवाहि...

  • Saturday 9th of May 2015 02:30:35 AM
  • कामना पूर्ति भय बाधा निवारण बटुक भैरव साधना जीवन में सुख और दुःख आते ही रहते हैं। जहां आदमी सुख प्राप्त होने पर प्रसन्न होता है, वहीं दुःख आने पर वह घोर चिन्ता और परेशानियों से घिर जाता है, परन्तु धैर्यवान व्यक्ति ऐसे क्षणों में भी शांत चित्त होकर उस समस्या का...

  • Saturday 9th of May 2015 02:18:46 AM
  • कालसर्प दोष निवारण हेतु तीव्र राहु शांति साधना   अमावस्या को आध्यात्मिक एवं दिव्य अनुभूतियों के लिए श्रेष्ठ माना गया है… इस दिन चंद्र, सूर्य के अन्दर विलीन होता है, उसकी तरंगें सूर्य की तरंगों में समाहित होती हैं… चन्द्रमा मन का देवता है एवं सूर्य आत्मा का, अ...

  • Saturday 9th of May 2015 02:15:23 AM
  • जिनसे काल भी भयभीत रहता है भैरव रक्षाकारक देव भय का नाश करने वाले देव रोग-शोक दूर करने वाले देव तांत्रिक बाधाओं से रक्षा देने वाले देव शनि कुप्रभाव को समाप्त करने वाले देव मंगल दोष को समाप्त करने वा...

  • Saturday 9th of May 2015 02:12:52 AM
  • 1. कालिका – महाकाल भैरव 2. त्रिपुर सुन्दरी – ललितेश्‍वर भैरव 3. तारा – अक्षभ्य भैरव 4. छिन्नमस्ता – विकराल भैरव 5. भुवनेश्‍वरी – महादेव भैरव 6. धूमावती – काल भैरव 7. कमला – नारायण भैरव 8. भैरवी – बटुक भैरव 9. मातंगी – मतंग भैरव 10. बगलामुखी – मृत्युंजय भैरव श्री भैरव के अन...

  • Friday 8th of May 2015 08:49:22 AM
  • तुम मुझसे न कभी अलग थे और ना ही हो सकते हो ! दीपक की लौ से प्रकाश को अलग नहीं किया जा सकता और ना ही किया जा सकता है पृथक सूर्य की किरणों को सूर्य से ही ! तुम तो मेरी किरणें हो, मेरा प्रकाश हो, मेरा सृजन हो, मेरी कृति हो, मेरी कल्पना हो, तुमसे भला मैं कैसे अलग हो सकता हूँ वं...

  • Friday 8th of May 2015 08:32:11 AM
  • भक्ति और ज्ञान, निराकार और साकार के झगड़ों में न पड़ो भक्ति और ज्ञान के सम्बन्ध में परस्पर लोगों में बहुत सी बातें चला करती हैं। किसी के मत से ज्ञान बहुत बड़ा है और किसी के मत से भक्ति बहुत बड़ी है। जिनको न भक्ति का कुछ बोध है और न ज्ञान को ही कुछ समझते हैं, वे लोग ही भक्ति और...

  • Friday 8th of May 2015 08:31:54 AM
  • what is the difference between punya and paap ? punya is a debit card - pay first and enjoy later. paap is a credit card - enjoy first and pay later. ...

  • Friday 8th of May 2015 08:23:25 AM
  • दक्षिणाव्रती :- आज दिल किया की इस शब्द की महत्वता को कहने का .अक्सर यह शब्द सुनने में तो आता है कई ग्रंथों में में इसका उल्लेख भी मिलता है कई दक्षिणा व्रती वस्तुएं भी मिल जाती है लेकिन इस शब्द का तात्पर्य और व्याख्या क्या है यह शायद आज तक नहीं की गयी ..कम से कम मेने तो नहीं ...

  • Friday 1st of May 2015 05:11:46 AM
  • लक्ष्य तक या सिद्धि तक पहुचने में समस्या to target your aim found difficulties   गुरुदेव,अपने लक्ष्य  तक या सिद्धि तक पहुचने में पति-पत्नी,पुत्र ,स्वजन बाधक है,अवरोधक है,अगर है तो फिर क्या करना चाहिए?,क्योकि यह जीवन तो अकारण गवाना नहीं है,फिर सामाजिकता का भी ध्यान रखना पड़ता है,बड़ी उलझन रह...

  • Monday 27th of April 2015 10:37:37 AM
  • अनंत देवी देवता हैं, अनंत उपासना पद्धति है, कहाँ कहाँ जाकर सिर झुकाओगे, किन किन दरवाज़ों पर जाकर नाक रगडोगे, जीवन के दिन तो थोड़े से ही हैं, गिनती के हैं. वे तो ऐसे ही समाप्त हो जायेंगे, फिर क्या मिलेगा? जीवन यूँ ही भटकते हुए मंदिरों में , तीर्थों में, साधू सन्यासियों के पास...

  • Monday 27th of April 2015 09:43:51 AM
  • धर्म से ही जीवन सार्थक हो सकता है यह मानव जीवन दुर्लभ है। देवता भी इसके लिए तरसते हैं, क्योंकि इसी से आत्म-कल्याण संभव है। हमने असीम पुण्योदय से यह मानव जीवन पाया है, क्या इसे हम यों ही गंवा देना चाहते हैं? जो उम्र चली गई, वह तो व्यर्थ गई, लेकिन जो जीवन बचा है, उसे संभालिए। म...

  • Monday 27th of April 2015 09:42:17 AM
  • निखिल कवच श्री निखिलेश्वरानंद कवचमॐ अस्य श्री निखिलेश्वरानंद कवचस्य ,श्री मुदगल ऋषि: .अनुष्टुप छंद :.श्री गुरुदेवो निखिलेश्वरानंद परमात्मा देवता ."महोस्त्वं रूपं च " इति बीजम."प्रबुद्धम निर्नित्यमिति " कीलकम ."अथौ नैत्रं पूर्ण " इति कवचम .श्री भगवतो निखिल...

  • Tuesday 21st of April 2015 09:34:47 AM
  • लक्ष्मी के जितने भी स्वरुप होते है, उन सभी स्वरूपों का आवाहन व विशेष पूजा की जाती है, प्राण प्रतिष्ठा प्रक्रिया संपन्न की जाती है, दशों दिशाओं का कीलन किया जाता है जिससे किसी भी बाहरी बाधा से साधना में विघ्न ना पड़े और जो भी संकल्प साधक करें, उसका फल साधक को तत्काल अवश्य ...

  • Monday 20th of April 2015 07:06:00 AM
  • यदि किसी भाई या बहन को साधना में यकीन ना हो तो यह साधनाए मत करें। यह साधना तो केवल साधक जगत के लोगों के लिए हैं ना कि किसी को यकीन दिलाने के लिए। साधक इन सब साधनाओं के बारे मे पहले से ही जानते हैं। बिना किसी के मार्गदर्शन मे साधना करने से समय ज्यादा लगता है इसलिए अच्छा ...

  • Friday 17th of April 2015 11:24:56 AM
  • give me faith and devotion, and i will give you fulfilment & completeness - parampujya pratahsamaraniya gurudev dr. narayan dutt shrimaliji " मुझे वे शिष्य अत्यंत प्रिय हैं, जो अपने स्तर के अनुसार सेवा कार्य में रत हैं और समाज के नवनिर्माण में अपना योगदान प्रस्तुत कर रहे हैं. जब मैं एक, पॉँच, दस, पचास, सौ, पॉँच सौ व्यक्तियों व् परिवारों में अध्या...

  • Friday 17th of April 2015 11:19:56 AM
  • give me faith and devotion, and i will give you fulfilment & completeness - parampujya pratahsamaraniya gurudev dr. narayan dutt shrimaliji चेतना मंत्र ...... साधनाओ के महासागर मे कुछ हीरे , कुछ मोती हम सब के पास हैं ही. पर हम अन्य चमकीले पत्थर की खोज मे लगे रहते हैं क्योंकि इन हीरे मोती को प्राप्त करने मे हमने कोई संघर्ष किया ही नही . और एक ऐसे ही अन...

  • Friday 17th of April 2015 11:08:39 AM
  • ॥प्राण प्रतिष्ठा विधानम्‌॥ ये विधान सदगुरुदेव की पुस्तक ऐश्वर्य महा लक्ष्मी से लिया है इस विधान के अंत मे "ॐ" के आगे 15 लिखा है इस प्रकार सूक्ष्म रूप से विग्रह के पंच दस संस्कार सम्पन्न किया जा रहा है। इसका मतलब है की आपको ॐ को कुल 15 बार बोलना है। कृपया ज्यादा दिमाग ...

  • Friday 17th of April 2015 11:04:02 AM
  • पूर्ण शिष्यत्व प्राप्ति साधना. यह साधना गुरुपूर्णिमा कि अवसर पे कि जा सकती है,साधना पूर्णता दुर्लभ और गोपनीय है और मेरी जीवन कि सबसे महत्वपूर्ण साधना है . जिस तरहा गुरु-शिष्य क सम्बध है उसी तरहा इस साधना का सम्बध मेरी प्राणो से जुडा हुआ है . यह साधना हमारे पिताश्र...

  • Friday 17th of April 2015 10:59:13 AM
  • मानस सिद्धि : दिव्य चेतना का प्रथम द्वार   तत् सृष्टित्व तद् इव नु प्रविश्तात्  “ ब्रह्मांड की रचना करने के पश्चात ब्रहमा जी इसी में समा गए “ हम ही ब्रह्म है और हमें स्वयं को समस्त ब्रह्मांड में व्याप्त समझते हुए स्वयं के निर्माण का कार्य करना है “ कुछ द...

  • Friday 17th of April 2015 10:52:13 AM
  • aadi shankracharya has been the one of the greatest personality and gem of knowledge. the level of knowledge accomplished by him is beyond imagination, it was all due to his dedication and highest thirst for attainment of knowledge. he attained knowledge in such a way that he becomes established as the best personality, a role model in this knowledge field. his life was definitely full of struggles, at every step he faced criticism and tyranny but he had aim in his mind, his life’s basic aim, intense desire to attain knowledge and complete dedication. but was all this enough? no, every era of dynamism of time is witness to the fact that as darkness had been present in all the times so w...

  • Friday 17th of April 2015 10:48:42 AM
  • "मंजिल के तो मै बिलकुल करीब ही थी.......पर तुने एक नजर क्या देखा मंजिल ही बदल गई"..........सदगुरुदेव बिन और कोन होय.....    इस् जीवन की उहापोह में हम अक्सर हर दूसरे दिन किसी न किसी नयी उलझन में फसते रहते है. भूल जाते हे की जिस उर्जा कों हम साधना के द्वारा एकत्रित करते हे उसे ह...

  • Friday 17th of April 2015 10:43:56 AM
  • तब क्या फायदा होय जब चिड़िया चुग गई खेत...   लेकिन ये तो ना भूले की गुरु बिना गतिर्नास्ती... गुरु हे तो सब है नहीं तो कुछ नहीं...   जीवन बहुत ही आसान हो जाता है जब आप उन अनगिनत विचारों के भंवर में से खास कर उस विचार कों चुन ले जो आपको अपने लक्ष्य की तरफ बढाता हो. हर बा...

  • Friday 17th of April 2015 10:21:35 AM
  • ‎-- तांत्रोक्त गुरु पूजन -- इस साधना के लिए प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर, स्नानादि करके, पीले या सफ़ेद आसन पर पूर्वाभिमुखी होकर बैठें| बाजोट पर पीला कपड़ा बिछा कर उसपर केसर से “ॐ” लिखी ताम्बे या स्टील की प्लेट रखें| उस पर पंचामृत से स्नान कराके “गुरु यन्त्र” व “कुण्...

  • Friday 17th of April 2015 08:32:48 AM
  • निखिल जन्मोत्सव चौसठ कलायुक्त गुरु ह्र्दय रक्त बिंदु स्थापन, ब्रम्हांड जागरण प्रोयोग मनुष्य के जीवन का वह सब से स्वर्णिम क्षण होता है जब उसे सद्गुरु की प्राप्ति होती है. क्यों की बिना सद्गुरु के मनुष्य सिर्फ अपनी धारणाओं के सहारे मात्र से जीता है लेकिन उसे यह ज्ञा...

  • Monday 13th of April 2015 02:42:30 PM
  • " परम पूज्य सदगुरुदेव द्वारा प्रदत गुरु मंत्र का क्या अर्थ है ?" मैंने बीच में ही टोकते हुए पूछा । गुरु मंत्र - मूल तत्त्व दुर्लभ स्तोत्र - त्रिजटा अघोरी"गुरु मंत्र का अर्थ " ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः एक लम्बी खामोसी.........जो इतनी लम्बी हो गयी थी, कि खलने लगी थी......उनक...

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