pitra dosh nivaran sadhna and tarapan pitra dosh nivaran sadhna, tarapan “सर्वात्मकं सर्वज्ञं सर्वशक्तिसà...
शिव सिद्धि सर्व रक्षाकारक प्रासाद कवच | shiv siddhi sarv rakshaakaarak praasaad kavach शिव सिद्धि सर्व रक्षाकारक प्रासाद कवच | shiv siddhi sarv rakshaakaarak praasaad kavach विनियोग: ॐ अस्य श्रीसदा -शिव -प्रासाद -मन्त्र -कवचस्य श्रीवामदेव ऋषिः , पंक्ति छंद, श्रीसदा-शिव देवता, अभीष्ट -सिद्ध्यर्थे पाठे विनियोगः | ऋषादि न्यास: श्रीवामदेव -ऋषये नमः शिरसी | पंक्तिश्छंद से नमः मुखे | श्रीसदा -शिव -देवतायै नमः ह्रदि | अभीष्ट -सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे | ॐ शिरो मे सर्वदा पातु प्रासादाख्यः सदा-शिवः | षडक्षर-स्वरूपो मे , वदनं ...
SURYA VIGYAAN AND KAAL CHAKRA-सूर्य विज्ञानं और काल चक्र त्रिनाभिमती पञ्चारे षण्नेमिन्यक्षयात्मके l संवत्सरमये कृत्स्रम् कालचक्रम् प्रतिष्ठितं ll तीन नाभियों से युक्त है सूर्य के रथ का चक्र,अर्थात भूत भविष्य और वर्तमान ये तीनो काल ही सूर्य रथ चक्र की तीन नाभि है,नाभि अर्थात जहाँ स्पंदन होता हो प्राणों का lवेदों मे काल को प्राण ही तो कहा गया है l और सूर्य इन प्राणों का अधिपति है,अर्थात जहाँ कालमयी दृष्टि की बात आती हो या अपनी दृष्टि को काल के परे ले जाकर व्यापकता प्रदान ...
आसन सिद्धि विधान-1 ...
हत्था जोड़ी पूजा विधि : जब आपको हत्था जोड़ी मिले तो उसे निकाल कर एक साफ़ कटोरी में रख कर उसमे इतना तिल का तेल डालें की हत्था जोड़ी पूरी भीग जाये, और अगर तेल काम हो जाये तो फिर से तेल डालें, ऐसा करने से हत्था जोड़ी तेल सोखती है और इसे तब तक उसी कटोरी में रखे जब तक की प्रयोग न करना हो | और जिस दिन इसका प्रयोग करना हो ( प्रायः शुक्रवार से प्रारम्भ करना चाहिए ) इसको तेल से निकाल कर इसके ऊपर सिन्दूर लगाए और बचा तेल पीपल के वृक्ष पर अर्पित कर दे , अगर तिल का तेल न हो तो आप सरसो का तेल भी प्रयोग कर सकते है | इसके बाद एक चांदी की डिबिया लेकर उसमे सिन्दूर भरकर हत्था जोड़ी को उसमे रख दे और डिबिया को बंद करके जहा रखना चाहते है रख सकते है | प्रातः काल स्नान ध्यान से निवृत्त होकर अपने घर के मंदिर के समीप गंगा जल या गौ मूत्र से स्थान शुद्धि कर ले और उत्तर या पूर्व की दिशा की तरफ मुख करके सफ़ेद ऊनी या सूती आसन पर बैठे à¤...
हत्था जोड़ी पूजा विधि : जब आपको हत्था जोड़ी मिले तो उसे निकाल कर एक साफ़ कटोरी में रख कर उसमे इतना तिल का तेल डालें की हत्था जोड़ी पूरी भीग जाये, और अगर तेल काम हो जाये तो फिर से तेल डालें, ऐसा करने से हत्था जोड़ी तेल सोखती है और इसे तब तक उसी कटोरी में रखे जब तक की प्रयोग न करना हो | और जिस दिन इसका प्रयोग करना हो ( प्रायः शुक्रवार से प्रारम्भ करना चाहिए ) इसको तेल से निकाल कर इसके ऊपर सिन्दूर लगाए और बचा तेल पीपल के वृक्ष पर अर्पित कर दे , अगर तिल का तेल न हो तो आप सरसो का तेल भी प्रयोग कर सकते है | इसके बाद एक चांदी की डिबिया लेकर उसमे सिन्दूर भरकर हत्था जोड़ी को उसमे रख दे और डिबिया को बंद करके जहा रखना चाहते है रख सकते है | प्रातः काल स्नान ध्यान से निवृत्त होकर अपने घर के मंदिर के समीप गंगा जल या गौ मूत्र से स्थान शुद्धि कर ले और उत्तर या पूर्व की दिशा की तरफ मुख करके सफ़ेद ऊनी या सूती आसन पर बैठे à¤...
बगला शतनाम के एक सौ आठ माला पाठ कर, हवन कर दिया। परिणाम तुरन्त सामने आया यजमान की आर्थिक स्थिति में जबरदस्त सुधान प्रारम्भ हो गया। क्रिया इस प्रकार की गई - विष्णुयामल से उद्धत है- विनियोग - ऊँ अस्य श्री पीताम्वर्य अण्ठोन्तर शतनाम स्त्रोतस्य सदा शिव ऋषि, अनुष्टुप छन्दः श्री पीताम्बरी देवता श्री पीताम्बरी जपे हवन विनियोगः। (जल पृथवी पर डाल दें) 1. ऊँ बगलाये नमः स्वाहा। 2. ऊँ विष्णु विनिताये नमः स्वाहा। 3. ऊँ विष्णु शंकर भामनी नमः स्वाहा। 4. ऊँ बहुला नमः स्वाहा। 5. ऊँ वेदमाता नमः स्वाहा। 6. ऊँ महा विष्णु प्रसूरपि नमः स्वाहा। 7. ऊँ महा-मत्स्या नमः स्वाहा। 8. ऊँ महा-कूर्मा नमः स्वाहा। 9. ऊँ महा-वाराह-रूपिणी नमः स्वाहा। 10. ऊँ नरसिंह-प्रिया रम्या नमः स्वाहा। 11. ऊँ वामना वटु-रूपिणी नमः स्वाहा। 12. ऊँ जामदग्न्य-स्वरूपा नमः स्वाहा। 13. ऊँ रामा राम-प्रपूजिता नमः...
BaglaMukhi Pratyangira Kavach बगलामुखी प्रत्यंगिरा कवच इस कवच के पाठ से वायु भी स्थिर हो जाती है। शत्रु का विलय हो जाता है। विद्वेषण, आकर्षण, उच्चाटन, मारण तथा शत्रु का स्तम्भन भी इस कवच के पढ़ने से होता है। बगला प्रत्यंगिरा सर्व दुष्टों का नाश करने वाली, सभी दुःखो को हरने वाली, पापों का नाश करने वाली, सभी शरणागतों का हित करने वाली, भोग, मोक्ष, राज्य और सौभाग्य प्रदायिनी तथा नवग्रहों के दोषों को दूर करने वाली हैं। जो साधक इस कवच का पाठ तीनों समय अथवा एक समय भी स्थिर मन से करता है, उसके लिए यह कल्पवृक्ष के समान है और तीनों लोकों में उसके लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं है। साधक जिसकी ओर भरपूर दृष्टि से देख ले, अथवा हाथ से किसी को छू भर दे, वही मनुष्य दासतुल्य हो जाता है। इस कवच के पाठ से भयंकर से भयंकर तंत्र प्रयोग को भी नष्ट किया जा सकता है लेकिन इसका पाठ केवल बगलामुखी में दीक...
गुरु पूर्णिमा पर गुरुपूजन की सरल विधि गुरु पूजन की एक सरल विधि | गुरु मंत्र और साधना का महत्व Dr Narayan Dutt Shrimali गुरु पूजन की एक सरल विधि प्रस्तुत है । जिसका उपयोग आप दैनिक पूजन में भी कर सकते हैं । सबसे पहले अपने सदगुरुदेव को हाथ जोडकर प्रणाम करे ॐ गुं गुरुभ्यो नम: गणेश भगवान का स्मरण करें तथा उन्हें प्रणाम करें ॐ श्री गणेशाय नम: सृष्टि की संचालनि शक्ति भगवती जगदंबा के 10 स्वरूपों को महाविद्या कहा जाता है । उन को हृदय से प्रणाम करें तथा पूजन की पूर्णता की हेतु अनुमति मांगें । ॐ ह्रीं दश महाविद्याभ्यो नम: ॐ ह्रीं दश महाविद्याभ्यो नम: गुरुदेव का ध्यान करे गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वर: । गुरु: साक्षात परब्रह्म तस्मै à¤...
#नीलकंठ_अघोर_मंत्र_स्तोत्र #सभी_समस्याओं_का_सरल_उपाय,, Neelkanth Stotra Benefits And How It Can Heal The Body नीलकंठ स्तोत्र, भगवान शिव का अद्भुत मंत्र जिससे बड़े से बड़ा रोग भी दूर होता है यदि आपको लगता है की किसी ने आप पर तंत्र प्रयोग करवा दिया है या करवा सकता है तो नित्य नीलकंठ स्तोत्र का एक पाठ करके जल पर फूक मरे और वह जय भगवन शिव को याद करते हुए अपने घर में छिड़क दे। यदि थोडा थोडा जल आप सभी सदस्य पी ले तो और भी अच्छा रहेगा नीलकंठ अघोर मंà...
1. शिवलिंग निराकार रूप को दर्शाता है । भगवान शिव की मुख्य आराधना शिवलिंग के रूप में ही की जाती है । क्या आप जानते है की देवी देवताओ की खंडित मूर्ति की कभी पूजा नही की जाती, उन्हें विसर्जित कर दिया जाता है, लेकिन शिवलिंग à...
#श्रीविष्णुअपराजिता_स्तोत्र!! अपराजिता मंत्र:- (१).ॐ ऐं ऐं अपराजितायै क्लीं क्लीं फट्। (२))ॐ बलायै महाबलायै असिद्धसाधिनी अपराजितायै नमः। (३) ॐ बलायै विदमहे महाबलायै धीमहि तन्नोअपराजिता प्रचोदयात्। (४) ॐ आदिनारायण्यै च विदमहे नवदुर्गेश्वर्यै धीमहि तन्नो: अपराजिता: प्रचोदयात्। (५) ॐ आकर्षिणी आवेशिनी ज्वालामालिनी रमणि रामणि धरणि धारणि तपनि तापिनि मनोन्मादिनि शोषिणि सम्मोहिनि नीलपताके महानीले महाप्रिये महाग्रेयि महाचण्डे महारौद्रि महावज्रिणि आदित्य रश्मि जाह्नवि यमघण्टे! किलि किलि चिन्तामणि सुरभि सुरोत्पन्ने सरस्वति सर्वकामदुधे! मम मनीषितं कार्यं तन्मे सिध्यतु स्वाहा। यह १२६ अक्षरों का अपाराजिता देवी का मंत्र है जो बहुत तीव्र व प्रभावी है । विजयदशमी पर अपराजिता देवी का पूजन करने का विधान पूर्वकाल से ही प्रचलित है और भगवती अपराजिता भगवान विषà¥...
GURU AARTI...
Bhairav sadhana: Bhairav is the great protector deity in tantra. His temples are found on every nook and corner of India and Nepal. Bhairav is classified into various forms depending upon his task and role like sthan Bhairav, kshetrapal bhairav, batuk bhairav, shamshan Bhairav, maha Bhairav, bramha bhairav etc. Without praying Bhairav if you start any anushthana then Bhairav takes away it's fruit. Bhairav protects his devotees and seekers in all conditions irrespective of their deeds. Bhairav is one of the fastest responding deities in kaliyug. One who prays to Bhairav always, gets victory in all fields. Bhairav protects him at costs. He gets wealth, health, women, children, fame and authority. A seeker who dedicatedly does sadhana of Bhairav gets numerous supernatural powers. One who prays Bhairav and offers him wine, chilam with bhaang/ganja/ gorakhmundi, fish and goat sacrifice with proper rituals gets instant and greatest grace of him. But one has to be veer in nature to do this as lord easily gets attracted to him and starts giving experiences and manifests. People with pashu nature can do satvik dhyana puja and Chanting/recital for lord's grace. Even then he gets pleased and offer assistance. One such easy prayog is being given today to please kshetrapal bhairav. This sadhana can be started f...
….भैरव के 52 रूपों में किसी भी रूप या पूर्ण 52 भैरव की साधना हर एक तंत्र साधक को करने ही चाहिए। हर एक साधना की एक विशिष्ट दीक्षा पद्दति होती है हर एक साधना की अलग सिद्धि सूत्र जो केवल और मात्र गुरुमुख से ही प्राप्त की जा सकती है। पर क्या अगर किसी को सद्गुरु प्राप्त ना हुवा हो तो वह भैरव उपासना नहीं कर सकता??? कर सकता है पर स्तोत्र के रूप में। आगे जो स्तोत्र दिया जा रहा है यह स्तोत्र साधक की हर इच्छा पूर्ण करने में सक्षम है। चाहे कोही भी हो। हर इच्छा अवश्य पूर्ण होती ही है। और हर एक व्यक्ति को इस स्तोत्र का अनुष्ठान करने ही चाहिए। सबसे पहले साधक श्री भैरव नाथ को या भगवान् महादेव को अपने गुरु रूप में...
तंत्र के दिव्य प्रयोग माँ बगला का ध्यान मंत्र- ॐ सौवर्णा सनसंस्थितां त्रिनयनां पीतांशुकोल्लासिनीं। हेमा भांगरूचिं शशांक मुकुटां सच्चम्प कस्त्रग्युताम् । हस्तैर्मुद्गरपाश वज्र दशनांः संविधूर्ती भूषणै ॥ व्यप्तिगीं बगलामुखी त्रिजगतां संस्तम्भिनीं चिन्तयेत् ।। माँ का ध्यान करने के पश्चात् माँ के अग्रांकित मंत्र की प्रतिदिन ग्यारह मालाओं का जप करना होता है। जप अगर हरिद्रा माला के ऊपर अथवा लघु पंचमुखी रुद्राक्ष माला के ऊपर किया जाये तो शीघ्र प्रभावी होता है। माँ बगला का यह छत्तीस अक्षरों का मंत्र है। इस मंत्र में अद्भुत शक्ति सन्निहित है। मंत्र में ह्रीं बीज मंत्र माँ की असीम शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है, जो समस्त ऐश्वर्य, सुख-सम्पदा, ऋद्धि-सिद्धि को प्रदान ...
माघी गुप्त नवरात्रि 10 फरवरी – 18 फरवरी मैं देखता हूं कैसे सिद्धि नहीं मिलती भगवती दिगम्बरी दक्षिण काली साधना यों तो काली महाकाली और दक्षिणकाली से सम्बन्धित कई साधनायें, साधना ग्रंथों में प्रकाशित हैं, परन्तु दिगम्बरी दक्षिण काली साधना, साधना क्षेत्र में अत्यन्त उच्चस्तरीय साधना मानी गई है, वामा क्षेपा जैसे तांत्रिक ने भी स्वीकार किया है कि दिगम्बरी दक्षिण काली साधना सर्वाधिक गूढ गुप्त अलौकिक अद्वितीय और अनुपम है, पूर...
गुरु पूजन किसी भी साधना में बैठने से पूर्व गुरु पूजन और गणेश जी के पूजन की संक्षिप्त विधि – पवित्रीकरणः अपने उलटे हाथ की हथेली में थोड़ा सा जल लेकर निम्न मंत्र बोलते हुए जल अपने चारों ओर छिड़कें – ।। ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोsपि वा यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं सः वाह्याभ्यंतरः शुचि ।। आचमनः आंतरिक तत्वों की शुद्धि के लिए यह प्रक्रिया अत्यंत ही आवश्यक है । सीधे हाथ में जल लेकर चार बार यह मंत्र पढ़ें और उस अभिमंत्रित जल को स्वयं पी लें । ॐ आत्मतत्वं शोधयामि नमः ॐ विद्यातत्वं शोधयामि नमः ॐ शिवतत्वं शोधयामि नमः इसके बाद दिग्बंधन का स्थान आता है । दसों दिशाओं में से विघ्न आपकी साधना में बाधा न डालें, इसके लिए अपने हाथ में जल या अक्षत लेकर निम्न मंत्र पढ़ते हुये दसों दिशाओं में बिखेर दें – ...
Tripura Bhairavi भगवती त्रिपुर भैरवी महाभैरव की ही शक्ति हैं नित्य प्रलय आद्या शक्à¤...
Shri Suktam Shri Suktam: Laxmi Stotra ?? Shri Suktam: Laxmi Stotra - The Divine Path to Abundance and Prosperity ?? "श्रीसूक्त (ऋग्वेद)" श्री सूक्तम् ( Sri Suktam )– देवी लक्ष्मी ( Lakshmi ) जी की आराधना के लिए उनको समर्पित संस्कृत में लिखा मंत्र है जिसे हम श्री सूक्त ( Sri Sukt ) या लक्ष्मी सूक्त ( Lakshmi Sukt )भी कहते है | इस पवित्र शक्तिशाली श्री सूक्त का पाठ करने से मैं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है | सभी प्रकार के दुःख और गरीबी दूर होती है | श्री सूक्त का नित्य पाठ करने से मनुष्य के जीवन में अपर सुख और संपत्ति आती है | श्री सूक्त माँ लक्ष्मी जी को अति प्रिय है इसलिए मन में माँ लक्ष्मी जी के प्रति पूर्ण श्रद्धा रखते हुए इस श्री सूक्त पाठ का श्रवण करें | ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। à¤...
देव प्रबोधिनी एकादशी आज dev prabodhinee ekaadashee katha, dev prabodhinee ekaadashee vrat, kaartikee ekaadashee ********* हिंदू धर्म में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को अलग अलग नामों से जाना जाता है। इसे हरि प्रबोधिनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी, देवउठनी एकादशी या देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह किया जाता है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ साथ तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व होता है देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन देवी वृंदा को मिले वरदान की वजह से भगवान विष्णु ने शालिग्राम स्वरूप में तुलसी से विवाह किया था। इसी कारण से देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह उत्सव भी मनाया जाता है। इसके अलावा देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन चतुर्मास्य से लगे à...
इस तरीके से तुरंत सिद्ध हो जाते हैं मंत्र, जानिए रहस्य... कोई मंत्र कब होता है सिद्ध, एक लाख बार जपने पर या कि 108 बार जपने पर ही सिद्ध हो जाता है? सिद्ध हो जाता है तब क्या होता है? यह तो सवाल आपके मन में जरूर होंगे तो चलो इस बारे में बताते हैं। मुख्यत: 3 प्रकार के मंत्र होते हैं- 1.वैदिक 2.तांत्रिक और 3.शाबर मंत्र।..पहले तो आपको यह तय करना होगा कि आप किस तरह के मंत्र को जपने का संकल्प ले रहे हैं। साबर मंत्र बहुत जल्द सिद्ध होते हैं, तांत्रिक मंत्र में थोड़ा समय लगता है और वैदिक मंत्र थोड़ी देर से सिद्ध होते हैं। लेकिन जब वैदिक मंत्र सिद्ध हो जाते हैं और उनका असर कभी समाप्त नहीं होता है। मंत्र जप तीन प्रकार हैं:- 1.वाचिक जप, 2. मानस जप और 3. उपाशु जप। वाचिक जप में ऊंचे स्वर में स्पष्ट शब्दों में मंत्र का उच्चारण किया जाता है। मानस जप का अर्थ मन ही मन जप करना। उपांशु जप का अर्थ जिसमें जप करने वाले की जीभ या à¤...
"Sadhana Prayog Alakshmi Durbhagya Nashak Prayog" means "Practice of Sadhana to remove Alakshmi and misfortune". दिवाली के समय बहुत लोगों को पैसे की तंगी होने लग जाती है. और बहुत लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है जीवन में यह बातें सबको पता है पर उपाय कोई करना नहीं चाहता है सिर्फ एक बात सोचता है कि मेरा दुर्भाग्य है और मैं दुर्भाग्य के साथ ही पैदा हुआ हूं और दुर्भाग्य के साथ में जी रहा हूं. लक्ष्मी भी तभी आती हैं जब आपका मन श्रद्धा से भरा हुआ हो विश्वास हो और आपका घर में सकारात्मक माहौल हो। आपकी पत्नी आपके बच्चे आपके कंट्रोल में हो। ...
?ॐ नमो भगवते वासुदेवाय? भगवत गीता अध्याय 7 श्लोक 22 से 30 (समाप्त) यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयार्चितुमिच्छति । तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम् ॥ (२१) भावार्थ : जैसे ही कोई भक्त जिन देवी-देवताओं के स्वरूप को श्रद्धा से पूजने की इच्छा करता है, मैं उसकी श्रद्धा को उन्ही देवी-देवताओं के प्रति स्थिर कर देता हूँ। (२१) स तया श्रद्धया युक्तस्तस्याराधनमीहते । लभते च ततः कामान्मयैव विहितान्हि तान् ॥ (२२) भावार्थ : वह भक्त सांसारिक सुख की कामनाओं से श्रद्धा से युक्त होकर उन देवी-देवताओं की पूजा-आराधना करता है और उसकी वह कामनायें पूर्ण भी होती है, किन्तु वास्तव में यह सभी इच्छाऎं मेरे द्वारा ही पूरी की जाती हैं। (२२) अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भवत्यल्पमेधसाम् । देवान्देवयजो यान्ति मद्भक्ता यान्ति मामपि ॥ (२३) भावार्थ : परन्तु उन...
*श्री गुरुचरण कमलेभ्यो नमः* गुरु सिद्धि दिवस शुक्रवार दिनांक 27-10-2026 सभी शास्त्रों में गुरु सिद्धि दिवस का विशेष महत्व है, और प्रत्येक साधक महाकाल संहिता में वर्णित गुरु साधना सिद्धि को सम्पन्न करता है, जिससे उसके प्राण जाग्रत होने लगते है, और इसके बाद वर्ष में कभी भी जब उसे मिले तो वह सशरीर गुरु के सामने उपस्थित हो कर चैतन्य सिद्धि दीक्षा प्राप्त करने की इच्छा प्रगट करे, और तब गुरु उसे यह दुर्लभ दीक्षा प्रदान करते हैं। ऐसी दीक्षा सामूहिक रूप से नहीं दी जा सकती चाहे शिष्य कितने ही वर्ष गुरु के साथ रहा हो, या कितना ही गुरु का प्रीय हो, परन्तु उसके अनुरोध पर ही गुरु यह चैतन्य दीक्षा प्रदान करते हैं। चैतन्य साधना (सिद्धि महाकाल संहिताबद्ध) मैंने जैसा ऊपर बताया कि साधना जीवन की महत्वपूर्ण दिव्य साधना है, इसके लिए गुरु सिद्धि दिवस...
मनुष्य का बुरा समय कटता ही नहीं । लटक और भटक अवश्य ही जाता है? मनुष्य का मनोविज्ञान ग्रहों की माया इतनी प्रबल होती है की अपनी दशा महादशा में अच्छे अच्छे लोगो को हिला कर रख देती है। उस वक्त मंत्र जाप अनुष्ठान आदि में व्यवधान उत्पन्न होते ज्यादा है और कार्य भी शीघ्र पूर्ण नही होने देते। मनुष्य की बुद्धि भी प्रबल माया में भटक जाती है! इसीलिए कहा जाता है विनाश काले विपरीत बुद्धि। आपकी हित चाहने वालों को भी हम बुरा बना देते हैं उनके ऊपर शक करने लगते हैं और हमारा समाधान की जगह नुकसान शुरू हो जाता है। बुरे समय में मनुष्य को पूरी तरीके से हिला देता है । उसकी सोचने वाली बुद्धि और जिस पर वह विश्वास करता है। वह भी अज्ञानी और दुर्भाग्यशाली व्यक्ति की तरह अपने आप को समझने लगता है। वह अपने गुरु ईस्ट या जिसे वह उपाय करवाता है या अपनी समाधान जानने के लिए जाता है या समाधान करता है। वह उसको भी अपनी लपेटे म...
श्री बगलाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् श्री बगलाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् | SHREE BAGALA ASHTOTAR SHATNAM STOTRA ।। श्रीनारद उवाच ।। भगवन्, देव-देवेश ! सृष्टि-स्थिति-लयात्मकम् । शतमष्टोत्तरं नाम्नां, बगलाया वदाधुना ।। ।। श्रीभगवानुवाच ।। श्रृणु वत्स ! प्रवक्ष्यामि, नाम्नामष्टोत्तरं शतम् । पीताम्बर्या महा-देव्याः, स्तोत्रं पाप-प्रणाशनम् ।। यस्य प्रपठनात् सद्यो, वादी मूको भवेत् क्षणात् । रिपूणां स्तम्भनं गाति, सत्यं सत्यं चदाम्यहम् ।। विनियोगः- ॐ अस्य श्रीपीताम्बरायाः शतमष्टोत्तरं नाम्नां स्तोत्रस्य, श्रीसदा-शिव ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीपीताम्बरा देवता, श्रीपीताम्बरा प्रीतये जपे विनियोगः । ऋष्यादिन्यासः- श्रीसदा-शिव ऋषये नमः शिरसि, अनुष्टुप छन्दसे नमः मुखे, श्रीपीताम्बरा देवà...
The document provides a list of healing codes for various neurological deficits and degeneration symptoms. The codes mentioned include specific numbers for different conditions such as anoxic brain injury, herpes viruses, cellular damages, hardness of hearing and deafness, Amyotrophic Lateral Sclerosis (ALS), cerebral palsy, Guillain–Barré syndrome, Limb Girdle Muscular Dystrophy (LGMD), multiple sclerosis, Parkinson's Disease, dementia, and Alzheimer's dementia. The document suggests that these codes can be used for healing purposes related to neurological deficits and degeneration symptoms. Yes, the document provides healing codes for neurological deficits and degeneration symptoms. Here are some of the codes mentioned: - 66 51 816 for those who suffer anoxic brain injury - 88 21 233 for herpes viruses - 33 45 634 for cellular damages of any sort - 88 33 421 for hardness of hearing and deafness - 87 89 114 for Amyotrophic Lateral Sclerosis (ALS) - 55 96 183 for cerebral palsy - 41 57 051 for recovery from Guillain–Barré syndrome - 53 59 816 for Limb Girdle Muscular Dystrophy (LGMD) - 45 96 151 for multiple sclerosis in general - 19 86 116 for multiple sclerosis relapsing and remitting - 81 23 7961 for Parkinson's Disease - 29 56 932 for dementia (Mental Illness) - 25 49 563 for Alzheimer's dementia These codes can be used for healing neurological deficits and degeneration symptoms according to the document....
Yes, there are several codes for back pain mentioned in the document. Here are the codes for different types of back pain: 71 81 533 for back pain in general 71 91 334 for lumbago (pain in the muscles and joints of the lower back) 87 47 838 for problems with the sciatic nerve 78 78 833 for prolapsed intervertebral disc 89 87 438 for a bulging or herniated intervertebral disc These codes can be used for healing back pain according to the document. ...
प्रचंड माँ तारा प्रत्यंगिरा कवच | Prachanda Maa Tara Pratyangira Kavach || ईश्वर उवाच || ॐ तारायाः स्तम्भिनी देवी मोहिनी क्षोभिनी तथा । हस्तिनी भ्रामिनी रौद्री संहारण्यापि तारिणी ॥ १ ॥ शक्तयोहष्टौ क्रमादेता शत्रुपक्षे नियोजिताः । धारिता साधकेन्द्रेण सर्वशत्रु निवारिणी ॥ २ ॥ || कवचमारम्भम् || ...
inner peace, hanuman mantra to remove black magic in hindi, काला जादू दूर करने के लिए मंत्र । Black Magic Removal घर में नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने केलिए। ब्लैक मैजिक रिमूवल ऑल पर्सन बजरंग बाण का एक प्रयोग किया हुआ उपाय आप लोगों के मध्य बता रहा हूं इसका लाभ समाज को मिले यही उद्देश्य है जिसके घर में ऐसा लगे कि कोई नकारात्मक ऊर्जा है और परेशानी हो रही है तो घर का मुखिया जो पूजा पाठ कर सके वही, पूरे परिवार को शाकाहारी भोजन अपनाना है। घर में साफ सफाई शुद्धता का विशेष ...
QUANTUM HEALING CODES 1st part (2nd part: https://www.facebook.com/100063492496013/posts/686032100189867/) These codes are quantum healing tools that are safe to use on everything and everybody, and have no side effects. Since they are quantum, the intent and the energy of the person using them has a little bit of effect in how powerful they are going to be when they are used. In the hands of someone with a powerful heart energy - which has more to do in your strength of purpose and your ability to be actively involved in your life's mission and connect to sou...
1) तंत्र दोष - खुद के लिए और बिज़नेस के लिए 2) ग्रह दोष - 9 ग्रह शांति और दुर्भक्षा मगल शनि राहु केतु निवारण - शुक्र साधना और सूर्य को मजबूत करने हेतु सूर्य सम्मोहन साधना 3 ) भाग्योदय साधना - खुद के लिए और उन्नति के लिए ४) पाप दोष निवारण - पूर्व जन्म कृत दोष निवारण, समस्त दोष निवारण साधना , निष्कीलन साधना खुद के लिए 5 ) शत्रु बांधा निवरण - 52 भैरव साधना,शत्रु नाश और उन्नति के लिए वंगला मुखी साधना, तारा साधना, हनुमान साधना, 6 ) लक्ष्मी साधना - 5 प्रकार की साधना , श्री यन्त्र, कनकधारा , कुबेर, अलक्ष्मी दूर करने के लिए दरिदता निवारण, अस्ट लक्ष्मी साधना ७) ऋण मुक्ति गणपति साधना - गणपति तंत्र 8) कार्य सिद्धि विजय सिद्धि समोहन साधना ...
।। श्रीएकमुखी हनुमत्कवचम् ।। अथ श्री एकमुखी हनुमत्कवचं प्रारभ्यते। मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।। श्रीरामदूतं शिरसा नमामि।। श्रीहनुमते नमः एकदा सुखमासीनं शङ्करं लोकशङ्करम्। ...
शुक्र देव मंत्र, Shukra Yantra Mala Related searches Shukra Yantra Mala शुक्र मंत्र विनियोग, शुक्र मंत्र जाप विधि, शुक्र मंत्र फॉर लव मैरिज, शुक्र मंत्र जप संख्या, शुक्र मंत्र के लाभ, शुक्र मंत्र का जाप कब करना चाहिए, शुक्र पूजा विधि, शुक्र बीज मंत्र जाप, धर्म पथ पर या मोक्ष के मार्ग में जो सबसे बड़ा व्यवधान होता है वो होता है वह होता काम भाव का अति आवेग , वो भी साधना के दिनों में और हद तो तब होती है जब वो आवेग साधनात्मक इष्ट , समबन्धित देवी देवता और यहाँ तक की गुरु के प्रति भी हो जाता जाता है . और यही पर साधक के बस में कुछ नहीं होता. जहाँ जीवन में आर्थिक या अध्यात्मिक उन्नति का परिचायक शनि होता है , वहीं पर उसकी दमित काम भावना, कुत्सित या सुप्त विचार, साधनाओं में व्यवधान के रूप में कामुक चिंतन, सà¥...
पौष शाकम्भरी पूर्णिमा २ साधना प्रयोग दिया जा रहा है ----------------------------------- सदगुर स्वामी निखिलेश्वर महाराज की साधना *शुभ तिथि के उपलक्ष्य मे सदगुर स्वामी निखिलेश्वर महाराज की साधना मे जो भाग लेना चाहते हैं वो अपना नामांकन करे!! आप का नाम संकल्प मे लिया जायेगा और आपके मंगलमय जीवन हेतु प्रार्थना कि जायेगी। साथ ही हवन के दर्शन की छवि आपको भेज दी जाएगी * साधना मे विशेष मंत्रो का जाप साथ हवन भी किया जायेगा शुल्क 501/- जो भी आज रात 09:11 पूर्णिमा के अवसर पर गुरु साधना में भाग लेना चाहते है वो अपना नाम रजिस्ट्रेशन करवाए और सद्गुरु का का आशीर्वाद प्राप्त करे इस दिन विशेष साधना सदगुर स्वामी निखिलेश्वर महाराज की साधना के लिए सम्पर्क करे स:शुल्क 501 - *अपना नाम एड्रेस गोत्र न्योछावर राशि के साथ जमा करें! गुरु साधना प्रयोग अत्यंत महत्वप...
कल त्रयोदशी प्रदोष की अनुपम धन लाभ प्राप्ति साधना जो केवल शिव मंदिर मैं ही करना जरुरी है!! जो करना चाहते वो ही संपर्क करे ! 30 मिनट्स साधना अवधि स:शुल्क 51/- Paytm, Phone pay, Gpay Number 91 9313444700 WhatsApp Mobile Number 9560160184 प्रयोग समय (कोई भी एक समय) प्रातकाल :- 08:30 से 09:00 प्रातकाल :- 09:45 से 10:32 सांयकाल :- 07:34 से 07:58 रात्रिकाल :- 09:30 से 10:18 साधना सामग्री :- किसी भी प्रकार का पुष्प और में उसमे काळा तिल के कुछ दाने हल्दी कुमकुम एक ताम्बे के लोटे में लेकर 30 मिनट्स विशेष. मंत्र का मानसिक जाप करे फिर शिवलिंग पर चढ़ा दे रात्रि साधना करने वाले पेड़ पर चढ़ा दे विशेष मंत्र है :- विशेष मंत्र द्वारा जो केवल त्रयोदशी प्रदोष के लिए और ऊपर दिए गये समय तक ही प्रभावशाली रहेगा!! आप खुद करे और अनुभव करे!! मंत्र प्राप्ति के इच्छुक व्यक्ति संपर्क करे!!*अपना नाम एड्रेस गोत्र न्योछावर राशि के साथ जमा करे...
लक्ष्मी नारायण साधना लक्ष्मी नारायण साधना, Lakshmi Narayan Mantra, श्री लक्ष्मी नारायण पूजा की सावधानियां - श्री लक्ष्मी नारायण पूजा , -------------------------------- आज करे लक्ष्मी नारायण साधना हमारे साथ सफला एकादशी व्रत | 19 दिसंबर 2022 मनोनुकूल मनोवाञ्छितं और उत्तम श्रेष्ठ फल प्रदान करने वाली साधना है, इस साधना से जीवन में उत्तम फल की प्राप्ति होती है। जो भी व्यक्ति साधना करना चाहते है वो संपर्क कर सकते है साधना शुल्क 101/- है हितेंद्र Pratap Singh *paytm, phone pay, gpay number*9313444700 *WhatsApp mobile number*9560160184 विशेष साधना जो एक वर्ष में एक बार ही अवसर प्राप्त होता है (केवल 25 मिनट) की साधना आपका भविष्य बदल सकती है* विशेष साधना जो एक वर्ष में एक बार ही अवसर प्राप्त होता है (केवल 25 मिनट) की साधना आपका भविष्य बदल सकती है* !! अगर कोई साधना नहीं कर सकते वो हमसे संपर्क कर करवा सकते है हूँ विशेष मà...
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1...गणपति मालामन्त्राः ...
किसी भी प्रकार की गुटिका या यंत्र की आवश्यकता से मुक्त, साधना सामग्री के बंधन से मुक्त स्वयं सदगुरुदेव प्रदत्त प्रयोग ...
श्रीरामदुर्गस्तोत्रम् ॐ अस्य श्रीरामदुर्गस्तोत्रमन्त्रस्य कौशिक ऋषिरनुष्टुप्छन्दःश्रीरामो देवता रां बीजं नमः शक्ति रामाय कीलकम् श्रीराम प्रसादसिद्धि द्वारा मम सर्वतो रक्षापूर्वक नाना प्रयोग सिध्यर्थे श्रीराम दुर्ग मन्त्रस्य पाठे विनियोगः। ॐ ऐं क्लीं ह्रीं रीं चों ह्रीं रीं चों ह्रीं श्रीं आं क्रौं ॐ नमोभगवते रामाय मम सर्वाभीष्टं साधय साधय फट् स्वाहा॥ ...
श्रीफल तंत्र 1)लाल कपड़े में लपेटकर अपने रुपये रखने वाले स्थान(à...
रचा है श्रष्टि को जिस प्रभु ने लिरिक्स रचा है श्रष्टि को जिस प्रभु ने, वही ये श्रष्टि चला रहे है, जो पेड़ हमने लगाया पहले, उसी का फल हम अब पा रहे है, रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने, वही ये श्रष्टि चला रहे है।। इसी धरा से शरीर पाए, इसी धरा में फिर सब समाए, है सत्य नियम यही धरा का, एक आ रहे है एक जा रहे है, ...
सब कुछ नहीं है पैसा है वो भी जरूरी पर सब कुछ नहीं है पैसा मकसद ऐ जिंदगी का क्यों रखलिया है पैसा पैसे से सिकंदर ने क्या क्या खरीद लाया आखरी घडी में पैसा ना काम आये दो सांस भी मिल जाए होता नहीं है ऐसा है वो भी जरूरी पर सब कुछ नहीं है पैसा पैसा से कीमती तू बिस्तर खरीद लाया लाया तू ठाठ तू घर में पर नींद क्यों गवाया है नींद कीमती पर समझा नहीं तू ऐसा है वो भी जरूरी पर सब कुछ नहीं है पैसा एक हार की कमी थी बारात घर पे आयी बेटी न बनी दुल्हन बरात लौट आयी पैसे की है सगाई आया जमाना ऐसा है वो भी जरूरी पर सब कुछ नहीं है पैसा ...
प्रेम के देवता कामदेव के वशीकरण मंत्र से किसी को भी अपनी मुट्ठी में किया जा सकता है: ओम नमो भगवते काम-देवाय श्रीं सर्व-जन-प्रियाय सर्व-जन-सम्मोहनाय ज्वल-ज्वल, प्रज्वल-प्रज्वल, हन-हन, वद-वद, तप-तप, सम्मोहय-सम्मोहय, सर्व-जनं मे वशं कुरु-कुरु स्वाहा। इस मंत्र का इतना गहरा प्रभाव है, जिस किसी को भी ध्यान में रखकर 6 हजार बार जाप किया जाए तो तुरंत असर दिखाता है। आपका बड़े से बड़ा शत्रु, रुठा प्यार या जीवनसाथी तुरंत आपके वशीभूत हो जाएगा। ...
बारह राशियों के अक्षर एवं वैदिक-शाबर मंत्र संग्रह राशि अक्षर | मेष राशि - चू,चे,चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ. वृष राशि- ई, उ,ए, ओ, वा,वी, वू,वे, वो. मिथुन राशि - का, की, कू,घ,ड,छ,के, को, ह. कर्क राशि - ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू,डे,डो. सिंह राशि- मा, मी,मू,मे,मो,टा,टी, टू, टे. कन्या राशि- टो,प,पी, पू,ष,ण,ठ,पे, पो. तुला राशि - रा, री, रू,रे, रो, ता,ती, तू, ते. वृश्चिक राशि - तो, ना, नी,नू,ने, नो, या, यी,यू. धनु राशि - ये, यो, भ,भी, भू, ध,फ,ढ,भे. मकर राशि- भो,जा, जी, खी,खू,खे, खो, ग,गी. कुंभ राशि - गू, गे,गो, सा, सी, सू,से, सो, द. मीन राशि - दी, दू,थ,झ,ञ,दे, दो, चा,ची अक्षर आते हैं. 01*मेष राशि का वैदिक मन्त्र- ।।ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मी नारायणाय नमः || **साबर मंगल मंत्र** ll ओम गुरूजी मंगलवार मन कर बन्दा,जन्ममरण का कट जावे फन्दा।जन्म मरण का भागे कार।तो गुरू पावूं मंगलवार। मंगलवार भारद्वाज गोत्र,रक्त वर्ण दस हजार जाप अवन्तिदेश।दक्षिण स्थान त्रिकोण मंडल तीन अंगुल,वृà...
?कुण्डलिनी जाग्रत, ब्रह्माण्डात्माम् मंत्र? ## एक प्रकार से देखा जाए तो ये विश्व मंत्र हैं, इन्हे विश्वदेवात्माम् कहा गया है, इसलिए इन मंत्रो को ब्रह्मण्डात्माम् कहा गया है़......आखिर इन शब्दो का कोई न कोई अर्थ तो होगा ? आखिर इन शब्दों का कोई न कोई प्रयोजन तो होगा..... बिना प्रयोजन के ये मंत्र समस्त ब्रह्मण्ड में स्वत: ही विचरण करते नहीं रहते हैं । जब हम इन मंत्रो का उच्चारण करते हैं, तो ब्रह्मण्ड में विचरित होते हुए मंत्रों को ग्राह्या करते हैं, और जब ब्रह्मण्ड के मंत्रों का इन मंत्रो से सम्बन्ध स्थापित होता है, तब एक विस्फोट पैदा होता है ,एक चेतना पैदा होती है, एक दिव्यता पैदा होती है, एक तेजस्विता पैदा होती है , जो सुनने वाले के हृदय पर एक तेजस्वी बिम्ब स्थापन कर लेती है । ## यह मंत्र स्वयं प्रकृति निर्मित हैं, प्रकृति ने ही इस मंत्र का निर्माण किये हे । जिनको न देवताओं ने बनाया है , à¤...
कुंडलिनी जागरण मन्त्र प्रयोग भाग १ ऊं गं गणेशाय नमः: ऊं ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः : ऊं निखिलेश्वरायै नमः : कुन्डलिनी [ Kundalini ] जागरण साधनात्मक जीवन का सौभाग्य है. विशेष तथ्य :- कुन्डलिनी जागरण साधनात्मक जीवन का सौभाग्य है. कुन्डलिनी जागरण साधना गुरु के सानिध्य मे करनी चाहिये. यह शक्ति अत्यन्त प्रचन्ड होती है. इसका नियन्त्रण केवल गुरु ही कर सकते हैं. यदि आपने गुरु दीक्षा नही ली है तो किसी योग्य गुरु से दीक्षा लेकर ही इस साधना में प्रवृत्त हों. यदि गुरु प्राप्त ना हो पाये तो आप मेरे गुरु जी Gurudev Dr. Narayan Dutt Shrimaliji (परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानद जी )को गुरु मानकर उनसे मानसिक अनुमति लेकर जाप कर सकते हैं . साधना सामग्र्री चेतना यन्त्र , चेतना माला , रुद्राक्ष माला , या गुरुमाला आसन , पीला , सफ़ेद ऊनी कम्बल पंचौपचार गुरु पूजन करे फिर गुरु मंत्र का ४ मालà¤...
तारा साधना → दर्शन, सिद्धि और धनलाभ हेतु -------- २६-९-१९८७ नवरात्र जोधपुर | धन के मामले मे नियम पालन जरूरी | कब? → किसी भी शुक्ल पक्ष की तृतीया से → लाल आसन, पुष्प,लाल ही मिठाई (केवल दूध का बना) → लाल मूंगा माला| →नियम ::-- (१) एक समय भोजन | (२) जमीन पर सोना | (३) केवल धोती,, (वनियान आदि नहीं ) | (४) पूरे दिन तारा चिंतन | (५) तृतीया के रात थाली मे खलिख से स्त्री का चित्र बना कर, उसे तारा मान कर पुजान करे | (६) दश महाविध्या, गुरु, तारा यंत्र चित्र भी आगे रखे | (७) लाल चावल की ढेरी पर अखण्ड दीपक रखे | (८) दिशा → दक्षिण | (९) दिन को दूसरे से नहीं बोले | (१०) पूरे दिन जाप करे (बिना आसान के, बिना माला) →| ऐं ओं ह्रीं क्रीं हूं फट | (aing Ong Hring Kring Hoom Phat) (११) आसन पर ११ माला ११ दिन जाप करे रात को →| ॐ ह्रीं ह्लिं ह्लिं ओं ओं | (om Hring Hling Hling Ong Ong) #विशेष : →यदि इस विधि से पूर्ण "सहस्त्र देहन्वित तारा सिद्धि...
माताङी साधना – 30-9-1987 जोधपुर By Hirendra Pratap Singh on Monday, 12 May 2014 at 17:19 माताङी साधना -------- माताङी साधना – 30-1-2014 Delhi माताङी साधना – 30-9-1987 जोधपुर मातंगी मे सारी महाविध्या समाहित है, इस महाविध्या के सिद्द साधक कम ही है |(यह साधना अति गोपनीय रही है ) ►फायदा ------ (1) वर या श्राप से सकते है किसी को भी , पूर्णा फलीभूत होगा | (2) कोई भी अप्सरा/ यक्षिणी/ सौंदर्य साधना इसके बाद पहली बार मे होगी | (3) अद्वितीय सौंदर्य प्राप्त होगा | (4) ज्ञान और स्मरण शक्ति तीब्र होगी | ...
जय सदगुरुदेव जी...
*दीपावली पूजन विधि एवं प्रयुक्त मंत्र पवित्रीकरण बायें हाथ में जल लेकर उसे दाये हाथ से ढक कर मंत्र पढे एवं मंत्र पढ़ने के बाद इस जल को दाहिने हाथ से अपने सम्पूर्ण शरीर पर छिड़क ले। ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः ॥ आचमन मन , वाणी एवं हृदय की शुद्धि के लिए आचमनी द्वारा जल लेकर तीन बार मंत्र के उच्चारण के साथ पिए । (ॐ केशवाय नमः , ॐ नारायणाय नमः , ॐ माधवाय नमः ) ॐ हृषीकेशाय नमः ( इस मंत्र को बोलकर हाथ धो ले ) शिखा बंधन शिखा पर दाहिना हाथ रखकर दैवी शक्ति की स्थापना करें। चिद्रुपिणि महामाये दिव्य तेजः समन्विते, तिष्ठ देवि शिखामध्ये तेजो वृद्धिं कुरुष्व मे ॥ मौली बांधने का मंत्र येन बदà...
वीरभद्र, भगवान शिव के परम आज्ञाकारी हैं. उनका रूप भयंकर है, देखने में वे प्रलयाग्नि के समान, हजार भुजाओं से युक्त और मेघ के समान श्यामवर्ण हैं. सूर्य के तीन जलते हुए बड़े-बड़े नेत्र एवं विकराल दाढ़ें हैं. शिव ने उन्हें अपनी जटा से प्रकट किया था. इसलिए उनकी जटाएं साक्षात ज्वालामुखी के लावा के समान हैं. गले में नरमुंड माला वाले वीरभद्र सभी अस्त्र-शस्त्र धारण करते हैं. उनका रूप भले ही भयंकर है पर शिवस्वरूप होने के कारण वे परम कल्याणकारी हैं. शिवजी की तरह शीघ्र प्रसन्न होने वाले है. ...
वीरभद्र, भगवान शिव के परम आज्ञाकारी हैं. उनका रूप भयंकर है, देखने में वे प्रलयाग्नि के समान, हजार भुजाओं से युक्त और मेघ के समान श्यामवर्ण हैं. सूर्य के तीन जलते हुए बड़े-बड़े नेत्र एवं विकराल दाढ़ें हैं. शिव ने उन्हें अपनी जटा से प्रकट किया था. इसलिए उनकी जटाएं साक्षात ज्वालामुखी के लावा के समान हैं. गले में नरमुंड माला वाले वीरभद्र सभी अस्त्र-शस्त्र धारण करते हैं. उनका रूप भले ही भयंकर है पर शिवस्वरूप होने के कारण वे परम कल्याणकारी हैं. शिवजी की तरह शीघ्र प्रसन्न होने वाले है. ...
मंत्रों में कितनी शक्ति है, शायद आप न जानते हों। इसीलिये आज हम बताएंगे कि कैसे मंत्रों की शक्ति से अपनी मनचाही चीज़ पा सकते हैं। शाबर मंत्र न सिर्फ आसान हैं बल्कि उन्हे सिद्ध करने के लिए भी बहु...
हर व्यक्ति खुश रहना चाहता है, दुःखी रहना तो कोई चाहता नहीं है परंतु आज के समय में हमारी तमाम कोशिशों के बाद भी खुश रहना मुश्किल काम हो गया है।जब हम किसी बड़े बुजुर्ग के चरण स्पर्श करते हैं तो वे आशीष रुप में हमसे 'खुश रहो' कहते हैं।आप भी अपने छोटे को आशीष देते हुए 'खुश रहो' कहते हैं। 'खुश रहो' के इतने आदान प्रदान के बाद भी हर व्यक्ति खुश दिखाई नहीं दे रहा है।किसी शायर ने खुशी को इंगित करके यह बहुत अच्छी बात कही है कि खुशी के साथ हर व्यक्ति का सम्बन्ध कुछ ऐसा है- खुशी मेरी तलाश में दिन रात यूं ही भटकती रही, कभी उसे मेरा घर ना मिला कभी उसे हम घर ना मिले। आजकल हर व्यक्ति उदास है, नाखुश है, चाहे वह सफल हो, या संघर्षरत, युवा हो या वृद्ध, स्वस्थ हो या अस्वस्थ।प्रत्येक व्यक्ति के पास काश के अपने-अपने कारण हैं, जिन्हें उचित मानते हुए वह नाखुश है और अन्ततोगत्वा डिप्रेशन के भंवर में उलझ जाता है।खुशियों के प्...
? ♨️ साधना तो कोई भी कर सकता है ♨️? ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ निरंतर ग्रुप मे पोस्ट की जा रही साधनाओं मे से तो आप कोई भी साधना कर सकते हैं जैसे विष्णु , लक्ष्मी ,नवग्रह महागणपति, जगदंबा, स्त्रोत आदि एवं अन्य सौम्य साधनाएं ...परंतु आप तीक्षण साधनाए नहीं कर सकते क्योंकि उसके लिए योग्य गुरु से मार्गदर्शन और अनुमति प्राप्त करना बहुत जरूरी है योग्य गुरु के मार्गदर्शन में साधना करना इसलिए जरूरी है क्योंकि निरंतर मंत्र जाप करने पर निरंतर साधना करने से साधक के शरीर में अत्यंत तीव्र ऊर्जा का निर्माण होता है जिसे योग्य गुरु अपने शिष्य की इस ऊर्जा पर बराबर नियंत्रण व संतुलन बनाए रखते हैं जिससे शिष्य को किसी प्रकार की कोई हानी नहीं उठानी पड़ती साधक की साधना में त्रुटि हो जाने पर उसे अपनी शक्ति के माध्यम से पूर्ण कर देते हैं एवं शिष्य को साधना हेतु उचित मार्गदर्शन प्रदान करते हैं जिससे शिष्य तीक्ष्ण à¤...
साधना क्या है? साधनाओं के माध्यम से असंभव दिखने वाले कार्य भी पूरे होते हैं।मूल रूप से साधनाओं का उद्देश्य दो ऊर्जाओं का संगम होता है - एक उप चेतना का और एक कर्मकांड के माध्यम से प्रचारित देवता का।मंत्र जप के माध्यम से किया जाता है, जो विशेष दिव्य भस्म होते हैं, जिसका दिव्य बल बहुत जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं।लेकिन कभी-कभी यह संयोजन भी विफल हो सकता है, खासकर अगर साधक कमजोर हो।उस स्थिति में एक शक्तिशाली गुरु की आवश्यकता होती है जिसकी दिव्य शक्तियां किसी की इच्छा को अद्भुत स्तर तक बढ़ा सकती हैं।ज्ञान शक्ति सर्वोच्च है और सच्चा ज्ञान कोई सीमा नहीं जानता है।ज्ञान फैलने से बढ़ता है, और यह अज्ञानता, अंधविश्वास, अविश्वास और भय के अंधेरे को दूर करता है। साधना - सही तरीका प्रत्येक साधक दैनिक पूजा को पूरा करने और विशेष मंत्à...
?भुट्टे ही नहीं इसके बालों में भी छिपे हैं हेल्थ के ये 10 राज?* जिस भुट्टे के बालों को हम बेकार समझकर फेंक देती/देते हैं वह कई गुणों से भरपूर होता है। जिसे सुनने के बाद आप कभी भी भुट्टे के बालों को कूड़ेदान में नहीं फेकेंगे/फेकेंगी...! भुट्टा खाना हम सभी को बहुत पसंद होता है और हम सभी इसे बहुत चाव से खाते भी हैं। यह हमें सेहत से जुड़े कई लाभ भी देता है क्योंकि यह विटामिन और फाइबर से भरपूर होतà...
ॐ निखिलं ?? मंत्र-विधियाँ क्यों नहीं करते हैं काम? Why do mantras not work 〰️〰️?〰️〰️?〰️〰️?〰️〰️ ?आपने अक्सर सत्संग में सुना होगा, रामायण, महाभारत या वेदों आदि में पढ़ा होगा कि प्राचीन काल में तपस्वी लोग मंत्रों की शक्ति से जो चाहे हासिल कर लेते थे। वे जिस चीज का आह्वान करते थे, उसे तुरंत पा लेते थे। आज भी आप जब शारीरिक या आर्थिक रूप से परेशान होते हैं, और किसी ज्योतिषी के पास जाते हैं, तो वह क्या करता है। जन्म पत्रिका देखने के बाद पीड़ित ग्रह की शांति के लिए कुछ उपाय बता देता है और कुछ मंत्रों का जाप करने के लिए कहता है। ऐसे में कई बार लोग सवाल करते हैं कि उन्होंने मंत्रों का जाप तो किया, लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली। आखिर ऐसा क्यों होता है कि जो मंत्र प्राचीन काल में सिद्ध थे, उनका प्रभाव आज कम दिखता है या नहीं दिखता है। मंत्रों की शक्ति प्रभावी क्यों नहीं होती है।...
सद्गुरुदेव वाणी दुश्चिताओ, दु:ख और गहन व्यथा का रसास्वदन किये बिना व्यक्ति जीवन की ऊचाइया' नही छू सकता ... संकटो से जूझना भी एक विचित्र आनन्द है.... हारिये न हिम्मत : बिसारिये न राम ---------------------------------------------------- यह हमारा सौभाग्य है कि हमे प्रभु की कृपा से मानव जीवन मिला है, और प्रभु ने हमारे इस शरीर मे असीम सम्भावनाए भर दी है, इस काया मे इतनी अधिक छमता और शक्ति है कि हम चाहे तो असम्भव कार्य को भी सम्भव कर सकते है, प्रश्न इतना ही है कि सम्भावनाओ को पहिचाने, और अपने मे निहित उन विशेषताओ को जगाने का प्रयत्न करे, जिससे कि हम पूर्णता तक पहुच सके | संसार मे और हमारे आसपास सैकडो उदाहरण बिखरे पडे है , जिन्होने सर्वथा विपरीत परिस्थितियो म...
covid का बचाव और इलाज़ बहुत से लोग रोज़ रोज़ फ़ोन करते है की मेरा covid से बचाव और इलाज़ क्या है और अभी तक मेने इस विषय पे लिखा नहीं, तो भाई मैं लिख रहा हु . पहले आयुर्वेद को लेते है . यह सब चीज़ें आपके घर में होनी ही चाहिए . अगर covid नहीं हुआ तो आपका बचाव होगा और अगर हो गया है तो आपका इलाज़ भी होगा .पहले आयुर्वेद को लेते है 1. गिलोय :- यह आपके पास होनी ही चाहिए किसी भी पंसारी की दूकान से मिल जायेगी . इसका रस भी मिलता है चाहे रामदेव की दूकान से लें या कोई भी कंपनी की ..लेकिन आपके पास होनी चाहिए . इसके रस के दो चम्मच इसको dilute करके लें , इसका मतलब यह हुआ की पानी में मिला के लें . केवल गिलोय के लाभ पे ही मैं बहुत कुछ लिख सकता हु लेकिन अभी का मसला केवल covid से निपटने का है तो वहीं पे रहता हु . 2. तुलसी :- इसका पंचांग रस भी आपको मिल जायेगा हर पंसारी की दूकान से . बहुत सी कंपनी बनाती है जो भी पसंद है ले लो . दो चम...
#गुप्तनवरात्रिअषाढ़शुक्लप्रतिपदा● इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्र 22 जून 2020 से लेकर 29 जून 2020 तक रहेगी। गुप्त नवरात्रि में साधक गुप्त साधनाएं करने शमशान व गुप्त स्थान पर जाते हैं। नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों में वृद्धि करने के लिये अनेक प्रकार के उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन योग साधना आदि करते हैं । सभी नवरात्रों में माता के सभी 51पीठों पर भक्त विशेष रुप से माता के दर्शनों के लिये एकत्रित होते हैं। माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं, क्योंकि इसमें गुप्त रूप से शिव व शक्ति की उपासना की जाती है जबकि चैत्र व शारदीय नवरात्रि में सार्वजिनक रूप में माता की भक्ति करने का विधान है । आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में जहां वामाचार उपासना की जाती है । वहीं माघ मास की गुप्त नवरात्रि में वामाचार पद्धति को अधिक मान्यता नहीं दी गई है । ग्रंथों के अनुसार माघ म...
#गुप्तनवरात्रिअषाढ़शुक्लप्रतिपदा● इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्र 22 जून 2020 से लेकर 29 जून 2020 तक रहेगी। गुप्त नवरात्रि में साधक गुप्त साधनाएं करने शमशान व गुप्त स्थान पर जाते हैं। नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों में वृद्धि करने के लिये अनेक प्रकार के उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन योग साधना आदि करते हैं । सभी नवरात्रों में माता के सभी 51पीठों पर भक्त विशेष रुप से माता के दर्शनों के लिये एकत्रित होते हैं। माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं, क्योंकि इसमें गुप्त रूप से शिव व शक्ति की उपासना की जाती है जबकि चैत्र व शारदीय नवरात्रि में सार्वजिनक रूप में माता की भक्ति करने का विधान है । आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में जहां वामाचार उपासना की जाती है । वहीं माघ मास की गुप्त नवरात्रि में वामाचार पद्धति को अधिक मान्यता नहीं दी गई है । ग्रंथों के अनुसार माघ मास के श...
*भगवान शिव के 35 रहस्य* भगवान शिव अर्थात पार्वती के पति शंकर जिन्हें महादेव, भोलेनाथ, आदिनाथ आदि कहा जाता है, उनके बारे में यहां प्रस्तुत हैं 35 रहस्य। 1. *आदिनाथ शिव* सर्वप्रथम शिव ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया इसलिए उन्हें ‘आदिदेव’ भी कहा जाता है। ‘आदि’ का अर्थ प्रारंभ। आदिनाथ होने के कारण उनका एक नाम ‘आदिश’ भी है। 2. *शिव के अस्त्र-शस्त्र* शिव का धनुष पिनाक, चक्र भवरेंदु और सुदर्शन, अस्त्र पाशुपतास्त्र और शस्त्र त्रिशूल है। उक्त सभी का उन्होंने ही निर्माण किया था। 3. *शिव का नाग* शिव के गले में जो नाग लिपटा रहता है उसका नाम वासुकि है। वासुकि के बड़े भाई का नाम शेषनाग है। 4. *शिव की अर्द्धांगिनी* शिव की पहली पत्नी सती ने ही अगले जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लिया और वही उमा, उर्मि, काली कही गई हैं। 5. *शिव के पुत्र* शिव के प्रमुख 6 पुत्र हैं- गणेश, कार्तिकेय, सुकेश, जलंधर, अयप्प...
महामारी नाशक मंत्र का जप जरूर करें। नारायण मंत्र साधना विज्ञान में हनुमानजी का महामारी नाशक मंत्र दिया है। इस पोस्ट में महामारी नाशक मंत्र दिया है। शेयर करना है जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग लाभ ले सके हनुमानजी की जयंती आज ही है ...
शनि जयंती एक महत्त्वपूर्ण दिवस है शनि साधना के लिए, और आज के दिन हम शनि साधना का लघु प्रयोग दिन में किसी भी समय सम्पन्न कर सकते हैं। इसके लिए स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध वस्त्र धारण करें तत्पश्चात *१० मिनट तक गुरु मंत्र जप करें* ।। ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरु भ्यो नमः।। ।। om Param Tatvaay Naaraayannaay Gurubhyo Namah।। *फिर निम्न शनि मंत्र का १० मिनट तक जाप करें* ।। ॐ शं शनौश्चराय सशक्तिकाय सूर्यात्मजाय नमः ।। ।। Om sham shanaishchray sshaktikay suryatmjay namah ।। *इसके बाद १० मिनट फिर गुरु मंत्र जप करें*। ।। ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरु भ्यो नमः।। ।। om Param Tatvaay Naaraayannaay Gurubhyo Namah।। *साधना के पश्चात् शनि की प्रार्थना इन दस नामों से करनी चाहिए*- कोणस्य: पिंगलो वभ्रुः कृष्णो रौद्रान्तको यमः सौरिः शनिश्चरो à¤...
मंत्र सिद्धि के उपाय श्रद्धा विधि के साथ मंत्र साधना और अनुष्ठान करने पर भी सफलता न मिले तो उसे पुनः करना चाहिए . बार बार करने पर भी यदि इच्छित सफलता नहीं मिल पाए तो निम्नलिखित सात उपायों में से कोई एक उपाय करना चाहिए , ध्यान रहे सातों उपाय एक साथ निषिद्ध हे यदि एक उपाय करने पर मंत्र सिद्धि न हो तो फिर दूसरा उपाय करना चाहिए इससे निश्चित ही सफलता प्राप्त हो सकेगी पहला उपाय ( भ्रामन) - इस क्रिया में भोजपत्र पर वायु बीज " यं " तथा मंत्र का एक अक्षर फिर " यं " तथा मंत्र का दूसरा अक्षर - इस प्रकार पूरा मंत्र " यं " वायु बीज से ग्रथित करे. भोजपत्र पर कर्पूर , कुमकुम . खस, और चदन को मिलकर उस लेप या स्याही से लिखे और जब मंत्र पूरा लिख दिया जाये तो उसका षोडशोपचार से पूजन करे . ऐसा करके यदि मंत्र का अनुष्ठान किया जाये तो निश्चित रूप से मंत्र सिद्ध होता हे. ...
मनोकामना पूर्ति के लिए देवी-देवताओं का कौन से दीपक से करे आह्वाहन : 1. आर्थिक लाभ के लिए नियम पूर्वक घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए। 2. शत्रु पीड़ा से राहत के लिए भैरवजी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिये। 3.भगवान सूर्य की पूजा में घी का दीपक जलाना चाहिए। 4.शनि के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। 5.पति की दीर्घायु के लिए गिलोय के तेल का दीपक जलाना चाहिए। 6.राहु तथा केतु के लिए अलसी के तेल का दीपक जलाना चाहिए। ...
इस दिन एक छोटी कटोरी में तेल भर दें और उसमें देखते हुए निम्न शनि मंत्र का 30 मिनट तक जप करें - सात दिन तक नित्य यानि 22 मई 2020 से 29 मई 2020 तक नित्य इसी तेल भरी कटोरी को देखते हुए मंत्र जप करें और 30 मई 2020, शनिवार को इसे किसी पीपल के वृक्ष में उपरोक्त मंत्र का जप करते हुए डाल दें। चिंता से चतुराई घटे, दुःख से घटे शरीर।कैसा भी संकट हो, मनवा खोओ न धीर। चिंता और चिता के बीच मात्र एक अनुस्वार का अन्तर है,अत्यधिक चिंता मनुष्य के जीà...
रावण ने कैलाश पर्वत को उठा लिया फिर सीता स्वयंवर में धनुष क्यों नहीं उठा पाया और राम ने कैसे धनुष तोड़ दिया??? अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि जब रावण कैलाश पर्वत उठा सकता है तो शिव का धनुष कैसे नहीं उठा पाया और भगवान राम ने कैसे उस धनुष को उठाकर तोड़ दिया? आओ इस सवाल का जवाब जानते हैं। ऐसा था धनुष! भगवान शिव का धनुष बहुत ही शक्तिशाली और चमत्कारिक था। शिव ने जिस धनुष को बनाया था उसकी टंकार से ही बादल फट जाते थे और पर्वत हिलने लगते थे। ऐसा लगता था मानो भूकंप आ गया हो। यह धनुष बहुत ही शक्तिशाली था। इसी के एक तीर से त्रिपुरासुर की तीनों नगरियों को ध्वस्त कर दिया गया था। इस धनुष का नाम पिनाक था। देवी और देवताओं के काल की समाप्ति के बाद इस धनुष को देवराज इन्द्र को सौंप दिया गया था। देवताओं ने राजा जनक के पूर्वज देवराज को दे दिया। राजा जनक के पूर्वजों में निमि के ज्येष्ठ पुत्र...
तीव्र आकर्षण साधना –गुमशुदा व्यक्ति को बुलाने के लिए गुमशुदा व्यक्तियों को वापिस बुलाने के लिए मैंने इस साधना का प्रभाव बहुत अचरजकारी है. और अन्य मन्त्रों के बजाय इसे सिद्ध करने में कोई दिक्कत भी नहीं आती, नवरात्री में १०,००० की संख्या में इस मन्त्र को कर लेने से ये सिद्ध हो जाता है , सामने तीव्र आकर्षण यन्त्र रख कर मूंगा माला से इस मंत्र को १४ माला नित्य करने से ९ दिन में ये साधना सिद्ध हो जाती है. मन्त्र सिद्ध हुआ या नहीं इसका परीक्षण करने के बिनोला,पीली सरसों,तथा चूहे के बिल की मिटटी को मिला निम्न मंत्र से १०८ बार अभिमंत्रित करे,और एक सरकंडे को बीच में से चीर कर दो अलग अलग लोगो को जोर से पकडे रहने के लिए दे दे , और मन्त्र पढ़ कर उस अभिमंत्रित मिश्रण को उस सरकंडे पर मारे .यदि सरकंडा आपस में ...
तीव्र आकर्षण साधना –गुमशुदा व्यक्ति को बुलाने के लिए गुमशुदा व्यक्तियों को वापिस बुलाने के लिए मैंने इस साधना का प्रभाव बहुत अचरजकारी है. और अन्य मन्त्रों के बजाय इसे सिद्ध करने में कोई दिक्कत भी नहीं आती, नवरात्री में १०,००० की संख्या में इस मन्त्र को कर लेने से ये सिद्ध हो जाता है , सामने तीव्र आकर्षण यन्त्र रख कर मूंगा माला से इस मंत्र को १४ माला नित्य करने से ९ दिन में ये साधना सिद्ध हो जाती है. मन्त्र सिद्ध हुआ या नहीं इसका परीक्षण करने के बिनोला,पीली सरसों,तथा चूहे के बिल की मिटटी को मिला निम्न मंत्र से १०८ बार अभिमंत्रित करे,और एक सरकंडे को बीच में से चीर कर दो अलग अलग लोगो को जोर से पकडे रहने के लिए दे दे , और मन्त्र पढ़ कर उस अभिमंत्रित मिश्रण को उस सरकंडे पर मारे .यदि सरकंडा आपस में ...
Today (04.03.2019) is Shivratri. Lyricist is Bharat Vyas, Composed by Chitragupt, Singers are Chandrani Mukherjee & Mahendra Kapoor and Actors are Gopi Krishna & Dara Singh. Posted for entertainment purpose only and all the rights are with the original copyright owner. Thanks saregama On behalf of: Saregama India Limited. Lalaat Pe Hai Chandrama Hai Jata Meinn Gang Dhaar Hai Rami Hai Bhasma Ang Pe Gale Mein Sarpa Haar Hai Nava Rahe Hai Sheesh Dev Gan Tumhari Bhakti Mein Hai Surya Ka Prakash Hai Shiv Tumhari Shakti Mein Hai Shiv Tumhari Shakti Mein ...
?मौनी अमावस्या पर शनि का हो रहा है राशि परिवर्तन: इस दिन शनि देव अपनी राशि बदलने जा रहे हैं। शनि के राशि बदलते ही मकर, धनु के साथ कुंभ वालों पर भी शनि की साढ़े साती शुरू हो जायेगी। शनि ढैय्या की बात करें तो मिथुन और तुला वालों पर इसका प्रभाव रहेगा। ?ग्रंथों में ऐसा उल्लेख है कि इसी दिन से द्वापर युग का शुभारंभ हुआ था. माघ मास के ठीक मध्य में अमावस्या के दिन का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान से विशेष पुण्यलाभ प्राप्त होता है. कहा जाता है कि इस दिन गंगा का जल अमृत बन जाता है. इसलिये माघ स्नान के लिये माघी अमावस्या यानि मौनी अमावस्या को बहुत ही खास माना गया है. इस दिन व्रती को मौन धारण करते हुए दिन भर मुनियों सा आचरण करना पड़ता है, इसी कारण यह अमावस्या मौनी अमावस्या कहलाती है. इस साल मौनी अमावस्या का यह त्यौहार 24 जनवरी को है. मौनी अमावस्या का शुभ मुहूर्त (Mauni Amavasya Kab Hai) ?अमावस्या ...
Gopniya Shukra Tantra Sadhna – Essential for any Devotee गुरुदेव कल फिर मेरे साथ वही घटना घटित हुयी है , आखिर मेरा क्या दोष है? पूर्ण मनोयोग से मैं पिछले कई वर्षों से ये साधना कर रहा हूँ पर जब भी मैं सफलता के निकट पहुचता हूँ , हर बार बस वही घटना घटित हो जाती है. आखिर किन कर्मों का फल मैं भुगत रहा हूँ? क्या कमी है मेरी साधना में. ...
दीपावली पर देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए 51 उपाय – हिन्दुओं के सभी पर्वों में दीपावली का सबसे अधिक महत्तव है। इस पर्व पर धन की देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने की लिए उनका पूजन किया जाता है। यदि इस दिन सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में सही विधि-विधान से लक्ष्मी का पूजन कर लिया जाए तो अगली दीपावली तक लक्ष्मी कृपा से घर में धन और धान्य की कमी नहीं आती है। शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जो दीपावली के दिन करने पर बहुत जल्दी लक्ष्मी की प्रसन्नता प्राप्त की जा सकती है। यहां लक्ष्मी कृपा पाने के लिए 51 उपाय बताए जा रहे हैं और ये उपाय सभी राशि के लोगों द्वारा किए जा सकते हैं। यदि आप चाहे तो इन उपायों में से कई उपाय भी कर सकते हैं या सिर्फ कोई एक उपाय भी कर सकते हैं। 1. दीपावली पर लक्ष्मी पूजन में हल्दी की गà¤...
गतांक से आगे:- ???????️?️??????? अंखियन की करि कोठरी पुतली पलंग बिछाय , पलकन की चिक डारि कै पिउ कौ लिया रिझाय । ना मैं देखूँ और को ना तौहे देखन देहूँ । -मेने तो आखों की कोठरी बना करके पुतली का पलंग बिछाया है, क्योकि मुझे तो उसे बैठाना हे, और फिर उस को कोई देखे नहीं इसलिए मैंने पलकों की चिक डाल दी हे . . . पिउ को लिया रिझाय . . . जो मेरा ईश्वर है, जो मेरा भगवान हे, जो मेरा प्रेमी हे, जो मेरे गुरु हैं, मैं उनको रिझाने की कोशिश कर रहीँ दूं . . . लेकिन मैँ रिझाने' की क्रिया पूरी तरह से" नहीं जानती, मुझें केवल इतना ही आता है कि मै उनको केवल आंखो मे बिठा लू', आंखें बन्द कर लू' । आखें इसलिए बन्द कर लूं… ना मैं देखूं और को ना तोहे देखन देहुँ .अब मैं दूसरे को देखना ही नहीं चाहती, क्योंकि दूसरे को देखने की क्रिया हे ही नहीँ, जहां दूसरा शब्द आया वहां प्रेम खत्म हो जाता हे 1 कबीर साफ कह रहा हे प्रेम गली अति सांकरी . . . बह...
शुक्र ग्रह का विवेचन नवग्रह सभी मनुष्यों के जीवन को प्रभावित करते हैं। जीवन में जो भी सुख के क्षण या दुःख के बादल घिरते हैं, वे नवग्रह से प्रभावित होते हैं। जब सूर्य का सकारात्मक प्रभाव होता है तब आप सम्मान प्राप्त करते हैं, मंगल शौर्य देता है, चन्द्रमा मानसिक शान्ति देता है। बुध की उत्तम दशा में कार्य कुशलता आती है। गुरु के उत्तम प्रभाव से ज्ञान आता हैं। शनि शुभ होते हैं तो कार्य शीघ्रता से सम्पन्न होते हैं, पर शुक्र की शुभता प्राप्त हो जाए तो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष सभी कुछ मिल जाता है। ऐसी है, शुक्र की माया जिससे साधक और जन-साधारण सब प्रभावित होते है। चलिए विश्लेषण करते हैं शुक्र के प्रभाव का, इस आलेख में। बहुत संभव है शुक्र साधना द्वारा जीवन को शुभता की à...
गोमती चक्र के प्रयोग यदि इस गोमती चक्र को लाल सिन्दूर की डिब्बी में घर में रखे, तो घर में सुख-शान्ति बनी रहती है । यदि घर में भूत-प्रेतों का उपद्रव हो, तो दो गोमती चक्र लेकर घर के मुखिया के ऊपर से घुमाकर आग में डाल दे, तो घर से भूत-प्रेत का उपद्रव समाप्त हो जाता है । यदि घर में बिमारी हो या किसी का रोग शान्त नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर उसे चाँदी में पिरोकर रोगी के पलंग के पाये पर बाँध दें, तो उसी दिन से रोगी का रोग समाप्त होने लगता है । व्यापार वृद्धि के लिए दो गोमती चक्र लेकर उसे बाँधकर ऊपर चौखट पर लटका दें, और ग्राहक उसके नीचे से निकले, तो निश्चय ही व्यापार में वृद्धि होती है । प्रमोशन नहीं हो रहा हो, तो एक गोमती चक्र लेकर शिव मन्दिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें, और सच्चे मन से प्रार्थना करें । निश्चय ही प्रमोशन के रास्ते खुल जायेंगे । पति-पत्नी में मतभेद हो...
*गुरु बिन गति नही* एक पंडित रोज रानी के पास कथा करता था। कथा के अंत में सबको कहता कि ‘राम कहे तो बंधन टूटे’। तभी पिंजरे में बंद तोता बोलता, ‘यूं मत कहो रे पंडित झूठे’। पंडित को क्रोध आता कि ये सब क्या सोचेंगे, रानी क्या सोचेगी। पंडित अपने गुरु के पास गया, गुरु को सब हाल बताया। गुरु तोते के पास गया और पूछा तुम ऐसा क्यों कहते हो? तोते ने कहा- ‘मैं पहले खुले आकाश में उड़ता था। एक बार मैं एक आश्रम में जहां सब साधू-संत राम-राम-राम बोल रहे थे, वहां बैठा तो मैंने भी राम-राम बोलना शुरू कर दिया। एक दिन मैं उसी आश्रम में राम-राम बोल रहा था, तभी एक संत ने मुझे पकड़ कर पिंजरे में बंद कर लिया, फिर मुझे एक-दो श्लोक सिखाये। आश्रम में एक सेठ ने मुझे संत को कुछ पैसे देकर खरीद लिया। अब सेठ ने मुझे चांदी के पिंजरे में रखा, मेरा बंधन बढ़ता गया। निकलने की कोई संभावना न रही। एक दिन उस सेठ ने राजा से अपना काम निकलवाने के लिए मुझà¥...
विश्वास का फल:- ************************************ वह गाड़ी से उतरा और बड़ी तेज़ी से एयरपोर्ट मे घुसा , जहाज उड़ने के लिए तैयार था , उसे किसी कांफ्रेंस मे पहुंचना था जो खास उसी के लिए आयोजित की जा रही थी.....वह अपनी सीट पर बैठा और जहाज़ उड़ गया...अभी कुछ दूर ही जहाज़ उड़ा था कि....कैप्टन ने ऐलान किया , तूफानी बारिश और बिजली की वजह से जहाज का रेडियो सिस्टम ठीक से काम नही कर रहा....इसलिए हम करीबी एयरपोर्ट पर उतरने के लिए मजबूर हैं.। जहाज उतरा वह बाहर निकल कर कैप्टन से शिकायत करने लगा कि.....उसका एक-एक मिनट कीमती है और होने वाली कांफ्रेस मे उसका पहुचना बहुत जरूरी है....पास खड़े दूसरे मुसाफिर ने उसे पहचान लिया....और बोला डॉक्टर अविनाश साहब आप जहां पहुंचना चाहते हैं.....टैक्सी द्वारा यहां से तीन घंटे मे पहुंच सकते हैं.....उसने धन्यवाद किया और टैक्सी लेकर निकल पड़ा... लेकिन ये क्या आंधी , तूफान , बिजली , बारिश ने चलना मुश्किल कर दिया , फिर भी वह चलता रहा.....
हिन्दू धर्म एक मात्र ऐसा धर्म है जिसमें जितना सम्मान और महत्व देव पूजा को दिया जाता है उतना ही सम्मान देवी पूजन को भी दिया जाता है | माँ दुर्गा को सबसे बड़ी शक्ति के रूप में पूजा जाता है | माँ दुर्गा के अनेक रूप है जिनका विस्तार से वर्णन मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत देवी महात्यम में किया गया है | माँ दुर्गा की पूजा -आराधना और उनकी विशेष कृपा पाने हेतु दुर्गा सप्तशती का पाठ करना सर्वोतम माना गया है |दुर्गा सप्तशती का पाठ करने में पूजा-विधान बहुत बड़ा होने के साथ-साथ समय भी अधिक लगता है | इसलिए जो भक्त इस पाठ के लिए समय नहीं निकाल पाते उनके लिए सिद्ध कुंजिका स्त्रोत/Siddha Kunjika Stotram का पाठ भी सप्तशती पाठ के समान ही फल देने वाला है | Siddha Kunjika Stotram/सिद्ध कुंजिका स्त्रोत :- सिद्ध कुंजिका स्त्रोत , दुर्गा सप्तशती पाठ का सार माना गया है | इसलिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से मà¤...
ग्रहों को मजबूत करने के आसान उपाय। संसार का प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी परेशानी से जूझ रहा है। किसी को पैसे की तंगी है तो कोई बीमार है, किसी का पारिवारिक जीवन कष्टप्रद है तो कोई कोर्ट-कचहरी के मामलों में उलझा हुआ है। ज्योतिष की दृष्टि से देखें तो व्यक्ति के जीवन में आने वाले सुख-दुख उसके कर्म और जन्म कुंडली में मौजूद ग्रहों के अनुसार आते-जाते रहते हैं। यदि किसी ज्योतिषी के पास अपनी कुंडली का अध्ययन करवाने जाएंगे तो वह लंबी-चौड़ी पूजा, यज्ञ, हवन आदि बता देते हैं। इन सबका असर होता भी है, लेकिन कई लोगों के पास हवन-पूजा करने का पैसा नहीं होता है, उनके लिए भी शास्त्रों में कई आसान उपाय बताए गए हैं, जो रूठे ग्रहों को प्रसन्न् कर सकते हैं। यदि आपकी कुंडली में भी कोई ग्रह कमजोर है और बुरा प्रभाव दे रहा है तो इस आसान से दिखने वाले उपायों को जरूर आजमाएं, निश्चित रूप से लाभ प्राप्त होà...
कालाष्टमी( कालभैरव जयंती ) शिव के रूधिर से भैरव की उत्पत्ति हुई। बाद में उक्त रूधिर के दो भाग हो गए- पहला बटुक भैरव और दूसरा काल भैरव। मुख्यत: दो भैरवों की पूजा का प्रचलन है, एक काल भैरव और दूसरे बटुक भैरव। पुराणों में भगवान भैरव को असितांग, रुद्र, चंड, क्रोध, उन्मत्त, कपाली, भीषण और संहार नाम से भी जाना जाता है। भगवान शिव के पांचवें अवतार भैरव को भैरवनाथ भी कहा जाता है। नाथ सम्प्रदाय में इनकी पूजा का विशेष महत्व है। कालाष्टमी को काला अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है और हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान इसे मनाया जाता है। कालभैरव के भक्त साल की सभी कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा और उनके लिए उपवास करते हैं। सबसे मुख्य कालाष्टमी जिसे कालभैरव जयन्ती के नाम से जाना जाता है, उत्तरी भारतीय पूर्णीमांत पञ्चाङ्ग के अनुसार मार्गशीर्ष के महीने में पड़ती है जबकि दक्षिणी भारतीय अ...
मृत्यु का इतना सुन्दर वर्णन किया है ब्रह्म उपासक ने कॉपी करके सभी मित्रो के वैचारिक लाभ हेतु पोस्ट कर रहा हु।। ??जानिए आपके प्राण कहाँ से निकलेंगे...?? = ======================== प्रत्येक व्यक्ति अलग इंद्रिय से मरता है।किसी की मौत आंख से होती है, तो आंख खुली रह जाती है—हंस आंख से उड़ा। किसी की मृत्यु कान से होती है। किसी की मृत्यु मुंह से होती है, तो मुंह खुला रह जाता है। अधिक लोगों की मृत्यु जननेंद्रिय से होती है, क्योंकि अधिक लोग जीवन में जननेंद्रिय के आसपास ही भटकते रहते हैं, उà...
Sarv karya siddhi sadhana Shabar mantra / सर्वकार्य साधक शाबरमंत्र कई बार व्यक्ति की समृद्धि अचानक रुष्ट हो जाती है,सारे बने बनाये कार्य बिगड जाते है,जीवन की सारी खुशिया नाराज सी लगती हैं,जिस भी काम में हाथ डालो असफलता ही हाथ लगती है.घर का कोई सदस्य जब चाहे तब घर से भाग जाता है,या हमेशा गुमसुम सा पागलों सा व्यवहार करता हो,तब ये प्रयोग जीवन की विभिन्न समस्याओं का न सिर्फ समाधान करता है अपितु पूरी तरह उन्हें नष्ट ही कर देता और आने वाले पूरे जीवन में भी आपको सपरिवार तंत्र बाधा और स्थान दोष ,दिशा दोष से मुक्त कर अभय ही दे देता हैं. जीवन मे कितनी विकट स्थिति हो ओर कितनी ही परेशानी हो अगर आप इस मन्त्र का हर रोज केवल 10 मिंट जाप करते हो तो कोई भी संकट नहीं रहेगा. घर मे क्लेश हो यो उपरी बढ़ा हो आप खुद को असुरक्षित मह्सुश करते हो। ...
निम्नलिखित अघोर शिव मंत्र के निरंतर जाप से हृदय पक्ष जागृत होगा और जातपात, रंगभेद, इत्यादि दुर्गुण दूर होकर एक निर्मल भारतीय बनोगे । मंत्र:- ॥ ॐ यं रं लं वं अघोराय घोर-घोरतराय नमः ॥ #दहाड़ता_अघोर नित्य स्नान उपरान्त भगवान् श्री महाकालेश्वर का स्तोत्र जाप प्रबल वीरत्व जागृत करता है । #दहाड़ता_अघोर कोई आपको मूर्तिपूजक कहकर आपके इष्ट का अपमान करे तो आपका कर्तव्य है की उस चांडाल को यह ज्ञात कराएं की हम मूर्ती की नहीं अपितु उसमे प्राण-प्रतिष्ठित शक्ति की उपासना करते हैं । शक्ति ही पूजन लेती है, शक्ति ही शिव सान्निध्य देती है ! #दहाड़ता_अघोर कुछ समझ न आये तो नित्य कालिकाष्टकं, शिव तांडव स्तोत्रम् और भैरवदंड स्तोत्र का ही पाठ कर लो ! आसुरी शक्तियों को कुचलने में मदद मिलेगी ...
शांकरी महा लक्ष्मी कवच - लक्ष्मी के 108 गुप्ततम स्वरूपों में जो संसार में धन प्रदायक अन्यतम शक्तियां है उनमें शांकरी देवी का गणना प्रथम तीन स्वरूपों में होता हैं। काफी समय पूर्व संभवतः 90 के पहले के किसी शिविर में पूज्य सदगुरुदेव जी महाराज ने शांकरी लक्ष्मी का रहष्योद्घाटन किए थे इनकी मूल साधना पद्धति के साथ में... यह विद्या उस व्यक्ति को भी धन देती है जिसके भाग्य में ब्रह्मा जी ने दरिद्रता का ही भोग लिख रखा हैं। आज उसी देवी के तांत्रोक्त कवच निर्माण की क्रिया लिख रहा हूँ इनकी साधना की एक विशेषता है कि यदि एक बार साधना आरम्भ किया तो एक मात्रा में धन की नित्य प्राप्ति होता हैं। लेकिन अनेक बार साधक खीझ (लालच के कारण) जाता है कि धन की यह मात्रा दूना या चारगुना क्यों नहीं हो रहा हैं। और यदि इस लोà¤...
नाग दोष शान्ति - नाग दोष शान्ति - कालसर्प दोष शांति, Nag Panchami & Kaal Sarp Dosh Shanti एक भाग दूध + 19 भाग जल मिलकर उस से शिव जी का अभिषेक पंचाक्षरी /मृत्युंजय /रूद्र सूक्त /रुद्राष्टाध्यायी या /शिवाष्टक से सवा दो या ढाई घण्टा तक करें उन पर चांदी का नाग नागिन का जोड़ा चढ़ाएं और अभिषेक उपरान्त नाग युगल को जल प्रवाह कर दें। विशष्ट पीड़ा होने पर नाग बाम्बी की मिट्टी मिलाकर पार्थिव निर्माण भी किया जाता है पूजन अभिषेक आदि प्रयोजनार्थ । ...
प्रचंड भगवती धूमावती साधना: प्रचंड भगवती धूमावती साधना, Mahavidya Dhumavati Sadhana, Silence of Prachanda Bhagwati dhumavati प्रचंड भगवती धूमावती तंत्र की सातवीं महाविद्या के रूप में जगत प्रसिद्ध हैं। दतिया (म. प्र.) के बगलामुखी सिद्ध पीठ महादेवी के समीप ही भगवती धूमावती का भी सिद्ध स्थान है। -मां भगवती धूमावती की साधना विधि इस प्रकार है। श्यामांगी रक्तनयनां श्याम वस्त्रोत्तरीयकां । वामहस्ते शोधनं च दक्षिणहस्ते च सूर्पकम्।। धृत्वा विकीर्ण केशांश्च धूलि धूसर विग्रहा। लम्बोष्ठी शुभ्र-दशनां लंबमान पयोधराम्।। संलà...
आज एक मित्र की प्रेरणा से वेदों पर आधारित कुछ लेख प्राप्त हुए जिंनके कुछ अंश यहां प्रस्तुत है मै स्वयं ब्राह्मण हु लेकिन जाती वाद का घोर विरोधी हु और किसी भी प्रकार के जातिगत भेद की आलोचना करता हूँ मैंने कई बार इस सन्दर्भ में पोस्ट लिखी और पूर्ण हिन्दुत्व की बात की . प्रस्तुत है कुछ तथ्य वेदों में सभी चार वर्णों को जिनमें शूद्र भी शामिल हैं, आर्य माना गया है और अत्यंत सम्मान दिया गया है | यह हमारा दुर्भाग्य है कि वेदों की इन मौलिक शिक्षाओं को हमने विस्मृत कर दिया है, जो कि हमारी संस्कृति की आधारशिला हैं | और जन्म-आधारित जाति व्यवस्था को मानने तथा कतिपय शूद्र समझी जाने वाली जातियों में जन्में व्यक्तियों के साथ भेदभाव पूर्ण व्यवहार आदि करने की गलत अवधारणाओं में हम फँस गए हैं | कम्युनिस्ट और पूर्वाग्रह ग्रस्त भारतीय चिंतकों की भ्राà¤...
ॐ नमस्ते भाइयो बहनों कृपया व्यर्थ के बाद विवाद से बचें फेसबुकिया भीमवादियों द्वारा अक्सर एक झूठ फैलाया जाता है कि गुरु द्रोण ने एकलव्य का अंगूठा इसलिये मांग लिया था कि क्योंकि वो एक शूद्र था । जबकि ऐसा बिल्क नही है आज मैं आप सबको एकलव्य की असली कहानी बता रहा हूँ जो शायद आपने नही सुनी होगी क्योंकि इस कहानी को अक्सर कथावाचकों द्वारा न तो सुनाया जाता है और न ही इस पर कोई लिखता है । खैर छोड़िए हम आपको बताते हैं आली कहानी । महाभारत काल मेँ प्रयाग (इलाहाबाद) के तटवर्ती प्रदेश मेँ सुदूर तक फैला श्रृंगवेरपुर राज्य एकलव्य के पिता निषादराज हिरण्यधनु का था। गंगा के तट पर अवस्थित श्रृंगवेरपुर उसकी सुदृढ़ राजधानी थी। उस समय श्रृंगवेरपुर राज्य की शक्ति मगध, हस्तिनापुर, मथुरा, चेदि और चन्देरी आदि बड़े राà...
ॐ नमः शिवाय ... मित्रों !! आज का दिन आप सभी के लिए शुभ हो .... ग्रहों के मानव जीवन पर प्रभाव से इंकार नहीं किया जा सकता। यदि ग्रह अनुकूल हैं तो जीवन आनंदमय रहता है , जबकि ग्रहों की प्रतिकूल अवस्था मे जीवन जीना भी दूभर हो जाता है। किस ग्रह की स्थिति आपके लिए अशुभ सिद्ध हो रही है, यह दैनिक घटनाओं के आधार पर भी पता लगाया जा सकता है। कुछ लक्षण आपको बता सकते हैं कि किस ग्रह की अशुभ स्थिति आपको अशुभ फल दे रही है। ग्रहों के प्रतिकूल होने पर कुछ लक्षण और प्रभाव उत्पन्न होते हैं ... जिनके आधार पर उन ग्रहों की शांति के लिए रत्न , जड़ी , पौधे और मंत्र जप का विधान है। आइये जानते हैं की प्रतिकूल ग्रहों के क्या लक्षण हो सकते हैं - ...
मां सरस्वती को ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है। देवी लक्ष्मी के साथ हमेशा ही सरस्वती की पूजा की जाती है, इसके पीछे का आधार यह है क्योंकि संपूर्ण जगत के प्राणी एक जीवन-चक्र से अवश्य जुड़े हैं किंतु बुद्धि केवल मनुष्य के पास ही है। इसी बुद्धि के आधार पर ज्ञान की प्राप्ति करते हुए इसने तरक्की की है। शास्त्रों के अनुसार जिस भी मनुष्य के पास बुद्धि और ज्ञान है, इनकी मदद से वह अपने जीवन में सबकुछ पा सकता है, धन-संपत्ति और वैभव भी। किंतु जिनके पास बुद्धि और ज्ञान नहीं है, अगर उसके पास संसार के सभी सुख और धन-संपत्ति हों तो वह स्वयं ही उसे गंवा बैठता है। इसलिए वेदों और पुराणों में एक सुखी-संपन्न, खुशहाल जीवन के लिए बुद्धि तथा ज्ञान का होना मनुष्य के विकास हेतु अति आवश्यक माना गया है। प्रथम पूज्य गणपति की कृपा स...
हवन में कौनसे फल अर्पित करने से क्या लाभ मिलता है ? श्री फल जिसको बेल भी कहते है से लक्ष्मी प्राप्ति होती है , क्रमुक से भोग , नारंगी से सौंदर्य , कटहल से कांति , नारियल से वशीकरण , निम्बू से शत्रुनाश , आम से राज्य लाभ , जामुन से स्तम्भन , केला से सर्व सिध्ही , कैथ से उछाटन, बेर से पोरुशता, मुनक्के से मोक्ष , गुलर से धर्म , जायफल से वशीकरण , कुष्मांड से गृह शांति , रुद्राक्ष से मोक्ष मिलता है . अपनी अपनी कामना के अनुसार साधक को हवन सामग्री में इन फ्लो को मिला लेना चाहिए. ...
धूमावती जयंती विशेष दस महाविद्याओं में सातवीं महाविद्या हैं माँ धूमावती। इन्हे अलक्ष्मी या ज्येष्ठालक्ष्मी यानि लक्ष्मी की बड़ी बहन भी कहा जाता है। ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष अष्टमी को माँ धूमावती जयन्ति के रूप मइ मनाया जाता है। मां धूमावती विधवा स्वरूप में पूजी जाती हैं तथा इनका वाहन कौवा है, ये श्वेत वस्त्र धारण कि हुए, खुले केश रुप में होती हैं। धूमावती महाविद्या ही ऐसी शक्ति हैं जो व्यक्ति की दीनहीन अवस्था का कारण हैं। विधवा के आचरण वाली यह महाशक्ति दुःख दारिद्रय की स्वामिनी होते हुए भी अपने भक्तों पर कृपा करती हैं। इनका ध्यान इस प्रकार बताया है ’- अत्यन्त लम्बी, मलिनवस्त्रा, रूक्षवर्णा, कान्तिहीन, चंचला, दुष्टा, बिखरे बालों वाली, विधवा, रूखी आखों वाली, शत्रु के लिये उद्वेग कारिणी, लम्बे विरल दांतों वाली, बुभुक्षिता, पसीने से आद्र्र, स्तन नीचे लटके हो, सूà...
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