"A Mantra Meditation is Spiritual Power house, Meditation in traquel serenity , Pure Pious environment, four tier meditation system, enlightenment of Individual and society, service to mankind and global family."
POWER OF TANTRIK SADHANA
तंत्र क्या है, तंत्र विज्ञान के फायदे, What is Tantra in hindi - तंत्र को ज्यादातर लोग या तो अंधविश्वास मानकर नकार देते हैं, या फिर कोई डरावनी चीज़ मानकर उससे दूर रहने की सलाह देते हैं। लेकिन यह एक विज|्ञान है, जीवन की प्रत्येक क्रिया तन्त्रोक्त क्रिया है॰यह प्रकृति,यह तारा मण्डल,मनुष्य का संबंध,चरित्र,विचार,भावनाये सब कुछ तो तंत्र से ही चल रहा है;जिसे हम जीवन तंत्र कहेते है॰जीवन मे कोई घटना आपको सूचना देकर नहीं आता है,क्योके सामान्य व्यक्ति मे इतना अधिक सामर्थ्य नहीं होता है के वह काल के गति को पहेचान सके,भविष्य का उसको ज्ञान हो,समय चक्र उसके अधीन हो ये बाते संभव ही नहीं,इसलिये हमे तंत्र की शक्ति को समजना आवश्यक है यही इस ब्लॉग का उद्देश्य है.
श्रद्धा क्या होती है ?
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आपने देखा होगा की जब सर्दी का मौसम होता है तो मानसरोवर झील
पूरी बर्फ से ढक जाती है ऐसा मैदान बन जाता है की वहा फूटबाल खेल सकते है
उस समय हंस उस मानसरोवर से उड़ते हैं और 3000 मील दूर एक पेड़ का आश्रय
लेते है तवांग झील का आश्रय लेते है और तवांग ...
गुरु कही भी मिल सकता है , परंतु सद्गुरु जीवन मे सौभाग्य से मिलता हैं?
the master can get anything, but the master gets good luck in life?
गुरु कही भी मिल सकता है, यह आवश्यक नहीं है कि गुरु किसी विशेष वेशभूषा
में ही होगा, वेशभूषा का प्रयोग निजी लाभ के लिए मूर्ख बनाने या दिशाहीन
करने में भी किया ज...
गुरु की पहचान :-
गुरु शब्द में बहुत सारी आशा और सकारात्मकता है, ऐसा कहा भी जाता है कि जिसके सिर पर उसके गुरु का हाथ है उसको भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है | गुरु होने पर व्यक्ति को लगता है कि उसके सिर पर ऐसी छत्रछाया है जिसके कारण वह सभी प्रकार की समस्याओं और अनहोनियों स...
श्रधा क्या होती है ?
,आपने देखा होगा की जब सर्दी का मौसम होता है तो मानसरोवर झील पूरी बर्फ से ढक जाती है ऐसा मैदान बन जाता है की वहा फूटबाल खेल सकते है उस समय हंस उस मानसरोवर से उड़ते हैं और 3000 मील दूर एक पेड़ का आश्रय लेते है तवांग झील का आश्रय लेते है और तवांग झील ही एक...
साधना व मंत्र सिद्धि में ध्यान देने योग्य जरुरी बातें
necessary to pay attention to meditation and mantra in fulfillment
साधना की आवश्यकता क्यों ? :-
साधना की क्या आवश्यकता है ?
साधना क्यों करें ?
वस्तुतः साधना ‘ ईश्वरत्व ‘ का बोध कराती है | आंतरिक सुप्त शक्तियों को जाग्रत करती है | जिनका सम्बन्ध अंडज (ब...
मंत्र सिद्धि में गुरु की आवश्यकता क्यों होती है ?
मंत्र सिद्धि के लिए साधक को गुरु की नितान्त आवश्यकता होती है | इसलिए साधक अपने लिए सामर्थ्यवान गुरु की खोज करता है और चयन करता है | गुरु भी शिष्य की सुपात्रता से प्रभावित होने के उपरान्त ही अपना शिष्य स्वीकार करत...
मंत्र सिद्धि के समय मंत्र जप की सही विधि | मंत्र साधना के नियम
शास्त्रों के अनुसार मंत्र उच्चारण द्वारा देव आराधना शीघ्र फलदायी है | मंत्रों में साक्षात् देव का वास होता है | हिन्दू सभ्यता में प्राचीन काल से ही मंत्र द्वारा देव आराधना कर उन्हें प्रसन्न किया जाता ह...
*प्राचीन भारतीय धार्मिक साहित्य के मुख्य दो भाग हैं:*
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*श्रुति स्मृति*
*श्रुति :*
*श्रुति का शाब्दिक अर्थ होता है - सुना हुआ। कुछ लोग श्रुति को गुरू-शिष्य परम्परा से जोड़कर देखते हैं क्योंकि शिष्य गुरू के सम्मुख बैठकर सीधे सुनता है।*
*श्रुतियां ही मुख्य धर्मग्र...
होली : महाविद्या धूमावती साधना
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धूमावती साधना समस्त प्रकार की तन्त्र बाधाओं की रामबाण काट है.
यह साधना होली की रात्रि में की जा सकती है.दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए काले रंग के वस्त्र पहनकर जाप करें. जाप रात्रि ९ से ४ के बीच करें
जाप के पहले तथा बाद मे गुरु म...
महाविद्या छिन्नमस्ता प्रयोग mahavidya chinnamasta sadhna prayog
शोक ताप संताप होंगे छिन्न-भिन्न
जीवन के परम सत्य की होगी प्राप्ति
संसार का हर्रेक सुख आपकी मुट्ठी में होगा
अपार सफलताओं के शिखर पर जा पहुंचेंगे आप
जीवन मरण दोनों से हो जायेंगे पार
"महाविद्या छिन्नमस्ता"
एक बार देवी पार...
तारा महाविद्या की साधना जीवन का सौभाग्य है ।
यह महाविद्या साधक की उंगली पकडकर उसके लक्ष्य तक पहुंचा देती है।
गुरु कृपा से यह साधना मिलती है तथा जीवन को निखार देती है ।
यह प्रयोग साधक किसी भी शुभ दिन शुरू कर सकता है. साधक को यह प्रयोग रात्री काल में ही संपन्न करना चाहिए...
अंधकार से प्रकाश की ओर
अंधकार व्यापक है, रोशनी की अपेक्षा| क्योंकि अंधेरा अधिक काल तक रहता है, अधिक समय तक रहता है और रोशनी अधिक देर तक नहीं रहती| दिन के पीछे भी अंधेरा है रात का| दिन के आगे भी अंधेरा है रात का| माँ के गर्भ में भी अंधेरा है, जहाँ से हमारे शरीर की शुरुआत हुई औ...
वैराग्य
वैराग्य अर्थात् न ‘वैर’ हो न ‘राग’ हो। विषयों के साथ रहते हुए भी मन का उनसे लिप्त ना होना ही वैराग्य है.
वैराग्य निम्नलिखित कारणों से होता है –
* भय के कारण उत्पन्न वैराग्य – नरक के भय से संसार के विषयों से दूर हो जाने वाला वैराग्य
* विचार के का...
प्रेम होता है इसके आगे स्वर्ग की सम्पदा भी फीकी है प्रत्येक
शिष्य को हर हाल में गुरु को प्रसन्न रखना चाहिए क्योकि
हरी रूठे तो ठौर है गुरु रूठे नहीं ठौर अगर हरी रूठ जाते है तो
गुरु हरी को मना सकता है मगर गुरु नाराज हो जाने पर हरि
भी गुरु को नहीं मना सकते इसलिए श...
प्रेम क्या है ?
प्रेम ताे जीवन है, सम्पूर्ण हृदय है, पूर्णतः समाधि है, प्रेम ताे पृथ्वी है, झिलमिलाता हुवा सत्य का सूत्र है, मानसराेवर कि अथाह गहराइ है, हिमालयका सर्वाेच्च शिखर "गाैरि शंकर "है ।
पर नहीं , ईन सब उपमाअाैं से प्रेम काे परिभाषित नहीं किया जा सकता है,...
gurudev cures polio of a girl :
swami nikhileshwaranand ( dr. narayan dutt shrimali)
in those days, shrimaliji was staying at mukund babu ji s residence in patna near frazer road.
mukund babu was a house holder disciple of shrimaliji and used to recite nikhileshwaranand stevan very strictly. he was a doctor by profession and was practising successfully in patna. his daughter was suffering from polio. that 11-12-year-old girl was extremely beautiful and innocent. she used to speak to everyone with great affection. she always had great desire to serve gurudev. she wanted to make juice for shrimaliji, but she was unable to due to her condition.
the next day around 5 pm in the even...
nikhileshwaranand leela - a brief insight into life of a brahmarshi
swami satchidananda (in siddhashram ) had only 3 disciples in past thousands of years. such a rigorous examination he used to take to make someone his disciple and nikhileshwaranand was his favourite disciple.
nikhileshwaranand gave darshan of lord ganesha and vyasa mahamuni writing vedas ( in the cave of vyasa maha muni ) to his disciples
nikhileshwaranand gives darshan of lord bhairav ( manifestation of lord shiva ) to a kapalik ( whose isht devta was bhairav), who was arrogant of his small siddhis
nikhileshwaranand showed the war of mahabharat, including the scen...
गुरु की दृष्टि तो साधक की ओर अखण्ड रुप से है ,
किन्तु साधक ही गुरु की ओर दृष्टि नहीँ करता है ।
गुरु तो जीव को अपनाने हेतु तत्पर हैँ किन्तु
...अभागा साधक उनसे मिलने को आतुर कहाँ है ?
गूरूमंत्र की महिमा
गुरुमंत्रो मुखे यस्य तस्य सिद्धयन्ति नान्यथा | ...
आसन सिद्धि
सर्वप्रथम सद्गुरु पूजन कर उनके सम्मुख नतमस्तक होकर सफलता का आशीष ले. फिर निम्न मन्त्र का ११ बार जप करे.
ॐ आः सुरेखे वज्रे रेखे हूं फट स्वाहा
ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवित्वं विष्णुना धृता.
त्वंच धारय माँ देवी पवित्रं कुरु चासनम्
ओम प...
मंत्र सिद्धि रहस्य
मंत्र अपना प्रभाव तभी दिखातें हैं जब उन्हें सिद्धि कर लिया जाये। मंत्र सिद्धि के अलग अलग प्रयोग हमारे शास्त्रों में दिया गए हैं लेकिन गुप्त प्रयोगों को समझना एक साधारण व्यक्ति के लिए बहतु कठिन हैं।
जो व्यक्ति साधना करना चाहता है उसके लिए उसक...
नवार्ण और नवदुर्गा मंत्र साधना.
दुर्गा पूजा शक्ति उपासना का पर्व है। नवरात्र में मनाने का कारण यह है कि इस अवधि में ब्रह्मांड के सारे ग्रह एकत्रित होकर सक्रिय हो जाते हैं, जिसका दुष्प्रभाव प्राणियों पर पड़ता है। ग्रहों के इसी दुष्प्रभाव से बचने के लिए नवरात्रि में ...
गुरु पूर्णिमा पर विशेष
गुरु पूर्णिमा के दिन न केवल आप अपने गुरु से कृपा पाते हैं बल्कि अगर हृदय सही स्थिति में हो, मन विचारों से खाली हो, तो गुरु ही क्या, परमगुरु की कृपा भी मिलती है
आज तक संसार में जितने भी बुद्धपुरूष हुए हैं, उन सभी महान आत्माओं का, उन सभी महान व्य...
प्राण क्या है ?
प्राण क्या है ?
प्राण क्या है ? “प्राचीन भारतीय चिकित्सा शास्त्रों के अनुसार— ‘मानव–शरीर को संचालित करने वाली शक्ति, जो मनुष्य की जीवनी शक्ति है, उसे योगियों ने “प्राण” कहा है, जो शरीर में अनवरत रूप में प्रवाहित है, जब इस प्रवाह प्रक्रिया में कोई अ...
अद्वैत सिद्धान्त का तात्पर्य क्या है ?
अकेला ब्रह्म या अकेली माया अपने आप में पूर्णता नहीं दे सकती । शंकराचार्य ने अद्वैत सिद्धान्त की रचना की, अद्वैत का तात्पर्य है— “माया और ब्रह्म का एकाकार हो जाना ।”
डा. नारायण दत्त श्रीमाली
कुण्डलिनी यात्रा ः मुलाधार से सह...
मानसिक–गुरु पूजन
मानसिक–गुरु पूजन
सद्गुरुदेव रचित ‘तान्त्रोक्त गुरुपूजन’ ग्रन्थ से प्रचारार्थ साभार
इस मानसिक पूजन में अन्य विशिष्ट पूजनों की अपेक्षा किसी प्रकार की न्यूनता या कम लाभ होगा, ऐसा नहीं सोचना चाहिए, क्योंकि इस पूजन में भी वैसा ही ला...
पाप नाश सिर्फ गुरु किरपा से संभव
पाप ६ प्रकार से जीवन में आते है और उन को मनुस्य को ६ प्रकार से भोगता है ?
सुने सद्गुरु के वचन से और जीवन का हर समस्या का समाधान यही से प्राप्त होगा ?
जय सद्गुरु देव
https://www.4shared.com/s/fi5oha6h2
शिष्य बनाने के लिए नियम
गुरु जब मिले तो पहले उसको अपने स्तर ...
kamala lakshmi tantrot sadhana
जीवन की पूर्णता
‘‘धन’’
धन की पूर्णता
‘‘भगवती कमला’’
जीवन में केवल कुछ ही वस्तुएं ऐसी हैं, जिन्हें धन से नहीं खरीदा जा सकता। बाकी सारी वस्तुएं प्राप्त करने के लिए हमें धन की आवश्यकता होती है। हम सब जानते हैं कि रुपया-पैसा सब कुछ नहीं होता परन्तु कु...
गुरु साधना सूत्र :-
गुरु मंत्र का कम से कम सवा लाख (१,२५,००० ) जाप करने के बाद ही अन्य साधनाओं
में प्रवृत्त हों| साथ में चेतना मंत्र और गायत्री मंत्र का भी जाप करे |
गुरु, इष्ट शिव और मंत्र को एक ही मानें.
गुरु कृपा से ही साधनाओं में सफ़लता मिलती है.| गुरु के सेवा ही शिस्य क...
साधनां पथ और काम बाधा-
जय निखिलं
मित्रों जीवन में बहुत बार ऐसा होता है कि व्यक्ति साधना तो करना चाहता है परंतु देश काल और परिस्थितियों द्वारा निर्मित माहौल के कारण व बार-बार काम भाव से ग्रस्त हो जाता है और ऐसी स्थिति में उसके द्वारा किसी भी प्रकार...
महा+काली का अनुपम स्त्रोत्र आप के लिए आप इस स्त्रोत का पाठ करे और महा काली की कृपा प्राप्त करे|ये स्त्रोत्र मै इस लिए देता हू,,ताकि जो भी अध्यात्म में नए है वो नहीं जानते की मंत्र जप क्या है ?? साधना क्या है सिद्धि क्या है ,,वो इन स्त्रोत्रो का लाभ उठाकर उस परमात्मा की कृपा ...
तंत्रोक्त नवग्रह कवच
तंत्रोक्त नवग्रह कवच, navagraha kavacham stotra, navagraha kavacham, navgraha kavacha
मानवी जीवन पर ग्रह मंडल में स्थित नवग्रहों का क्या परभाव पड़ता है इससे कोई भी साधक अनजान नहीं है ...समय समय पर ये ग्रह हमारे जीवन में अपना अपना अच्छा -बुरा परभाव डालते ही हैं..इन सभी ग्रहों ...
बहुत सारे लोग जीवन भर पूजा एवं साधना करते हैं पर कोई लाभ नहीं होता है क्योंकि उन्हे साधना करने का तरीका नहीं मालूम है । जबतक हम नियम से साधना नहीं करेंगे उसका फल प्राप्त नहीं होगा । साधना करने के लिए सबसे पहले अलग पूजा का कमरा रखना चाहिए जिसमें पवित्रता बन...
भगवती त्रिपुर भैरवी महाभैरव की ही शक्ति हैं
नित्य प्रलय आद्या शक्ति
त्रिपुर भैरवी
प्रलय के बिना निर्माण संभव नहीं है।
बुरी शक्तियों, तत्वों के विनाश के बिना
श्रेष्ठ शक्तियां स्थापित नहीं हो सक...
1 -मंत्र सिद्ध करने का तरीका है कि तुम गुरू को सिद्ध कर लो ।"
जीवन का गुरू का स्थान सर्वोपरि है ।
क्योकि गुरू सर्वव्यापक तत्व हैं ।
गुरू जीवन को ईश्वर से जोडने वाले हैं ।
इसलिये गुरू पूजा को साधक का अभीष्ट माना गया है ।"
2- अपने हृदय में भक्ति ...
भगवती त्रिपुर भैरवी महाभैरव की ही शक्ति हैं
नित्य प्रलय आद्या शक्ति
त्रिपुर भैरवी
प्रलय के बिना निर्माण संभव नहीं है।
बुरी शक्तियों, तत्वों के विनाश के बिना
श्रेष्ठ शक्तियां स्थापित नहीं हो सकती हैं,
जीवन के दोषों, बाधाओं को समा...
एक संदेस सद्गुरु का श्रेष्ठ ब्रह्मर्षि परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी
॥ ऊं परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः ॥
ये समय संक्रमण काल है ...सभी गुरु मंत्र का जाप १,और ११ माला जरुर करे आपने देश के लिए न्याय के लिए .... संक्रमण काल मैं कोई आप की हेल्प नहीं कर सकता है न कोई देवी...
मन्त्र शक्ति का आधार स्त्रोत
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मन्त्र अपने आप मे शब्द गुंफन और उच्चारण का सम्यक विज्ञान है, कविता की तरह मन्त्र का निर्माण भाव प्रधान या अर्थ प्रधान नहीँ होता अपितु इसका आधार अक्षरोँ के क्रम का एकनिश्चित सयोजन है जिससे कि उसके क्रमबद्ध उच्चारण से ऐसी व...
किसी भी साधना मे पूर्ण सफलता प्राप्ति के गोपनीय सूत्र
साधना मे सफलता :
आइये अब एक एक point को विस्तार से देखते हैं। निम्न जानकारी मेरे ज्ञान (जो की बहुत कम है) के अनुसार है, वरिष्ठ भाइयों से अनुरोध है की किसी भी प्रकार की गलती दिखने पर क्षमा करें और तत्क...
क्रमश
साधना मंत्र सफलता रहस्य भाग २
पाप नाश एवं साधना सफलता रहस्य
बालक, मनुष्य को ब्रम्हचार का पालन करवाना सिर्फ गुरु साधना से ही संभव है जिस हम पाप दोस से मुक्त हो कर साधना म...
न्यास का अर्थ
ज्ञानार्णवतंत्र के अनुसार -
न्यास का अर्थ है - स्थापना। बाहर और भीतर के अंगों में इष्टदेवता और मन्त्रों की स्थापना ही न्यास है।
इस स्थूल शरीर में अपवित्रता का ही साम्राज्य है,इसलिए इसे देवपूजा का तबतक अधिकार नहीं है जबतक यह शुद्ध एवम दिव्य न हो जाये। ...
this most powerful and divine mantra is absolutely effective to remove and through away all types of sorrows and anguish, mainly identified as: physical(दैहिक) divine(दैविक) and worldly, materialistic( भौतिक).
यह एक संजीवनी मंत्र प्रयोग है,अचूक है, श्रेष्ठतम मंत्र है इसी मंत्र के प्रयोग से जीवन की किसी भी समस्या का गारंटी के साथ हल होता है | महालक्ष्मी महासरस्वती महाकाली का संयुक्त रू...
बग्लामुखी धूमावती सायुज्य दीक्षा के लिए संपर्क यहाँ करें :http://nikhilmantravigyan.org/
बग्लामुखी धूमावती सायुज्य साधना – इस उच्च कोटि की साधना को इससे सम्बंधित दीक्षा प्राप्त कर के ही संपन्न करें तो ज्यादा उचित होगा तथा नियमो का पूर्ण रूप से पालन करें पूर्ण पवित्रता का पालन अति आवश्...
11 अप्रैल (कामदा एकादशी) से आरंभ करें :
"विशिष्ट कङ्कालमालिनीतन्त्रे श्री गुरु महाकवचं"
॥ श्री गुरु महाकवचं ॥
॥ श्री देव्युवाच ॥
भूतनाथ ! महादेव ! कवचं तस्य मे वद ।
गुरुदेवस्य देवेश ! साक्षाद्ब्रह्मस्वरूपिणः ॥
॥ श्री ईश्वर उवाच ॥
अथ ते कथयामीशे ! कवचं मोक्षद...
8 अप्रैल (गुरु माँ पराम्बा श्रीभगवती जन्मोत्सव) से 21 अप्रैल (परमेष्ठि गुरु परमहंस श्रीनिखिलेश्वरानन्द जन्मोत्सव) के “भगवती-नारायण महाकल्प” में सम्पन्न करें :
|| श्री भगवतीनारायण अर्धनारीश्वर स्वरूप पूर्णत्व साधना ||
इसके अंतर्गत 8 अप्रैल से 21 अप्रैल तक प्रतिदिन “...
परमेष्ठि गुरु परमहंस निखिलेश्वरानन्द जी : एक परिचय (१)
संसार का सुविख्यात अद्वितीय साधना-तीर्थ योगियों, यतियों, तांत्रिकों, मांत्रिकों, और सन्यासियों का दिव्यतम साकार स्वप्न “सिद्धाश्रम”, जिसमें प्रवेश पाने के लिए मनुष्य तो क्या देवता भी लालायित रहते हैं, हजारों ...
immortalbeings
yakshini sadhana
the 36 yakshinis
a yakshini is a species of supernatural entity, in some ways similar to a fairy. a yaksha is male, a yakshini female. in the uddamareshvara tantra 36 of these beings are described, together with their mantras and ritual prescriptions. by soliciting their aid various powers are said to accrue to the devotee.
uddamareshvara is a name of lord shiva and means "lord of the extraordinary". his retinue consists of a host of disreputable beings, fiends, ghouls, etc.... which he has forced into his service.
yakshas and yakshinis are attendants or servitors of lord kub...
प्रातः स्मरणीय सद्गुरुदेव पूज्य निखिलेश्वरानन्द जी की दिव्य वाणी मे यह स्तुति श्रवण एवं पठन करना ही सभी सन्कटों से मुक्ति प्राप्त करना है
शरणागत दीनार्तपरित्राण परायणे। सर्वस्यातिहरे देवि नारायणी नमोस्तुते।।
"sharnaagat deenaart paritraan paraayaney, servasyarti harey devi naaraayani namostutey."
(you who are perpetually endea...
कभी कभी साधना करते करते अचानक बहुत सारी नेगेटिविटी आ जाती है , लगता है कि सब छोड़ दिया जाए , इतनी मेहनत के बाद भी कुछ अच्छा नहीं हो रहा , क्या फायदा इस साधना का ????
तो मेरे .... ! चिंता मत करो , खुश हो जाओ क्योंकि जन्म जन्म के संचित कर्म नष्ट हो रहे हैं , जो कष्ट बड़े रूप में होने थे ...
गुरु आरती और उसकी व्याख्या
गुरु आरती मात्र शब्दों का लयबद्ध संयोजन नहीं वरन मंत्र हैं ह्रदय में सदगुरुदेव के स्थापन का पुकार हैं शिष्य के अंतस की
"आर्त" शब्द से बना शब्द हैं "आरती", स्वयं में एक सम्पूर्ण साधना हैं आरती, रटे-रटाये शब्दों को दोहरा देने को ही नहीं कहते...
मनुष्य के जीवन का वह सब से स्वर्णिम क्षण होता है जब उसे सद्गुरु की प्राप्ति होती है. क्यों की बिना सद्गुरु के मनुष्य सिर्फ अपनी धारणाओं के सहारे मात्र से जीता है लेकिन उसे यह ज्ञान नहीं होता है की क्या सत्य है या क्या स्थायी है. किस प्रकार धारणाओं से भी आगे जीवन है और एक य...
the most pious spot in the house is one’s place of worship. it is a place where one can sit peacefully to accomplish some sadhana, where one can place the picture of one’s deity or guru. it is necessary to know what one must keep in the worship place. the following sadhana articles are amazing boons which are virtual pillars of a successful life.
man always feel an emptiness within, which cannot be filled with the transient joys of material life, pleasures and comforts. he keeps searching for some newness. what he is looking for he does not know. he is totally unaware whom he seeks, where he shall find it or when he shall succeed.
...
न जाने कितने जन्मों से तुम एक से बढ़कर एक करोड़ों भयानक कर्मसंचित करते आए हो| और उन संचित कर्मों में से नजाने कितने भोगने बाकी हैं| न जाने कौन-कौन से कष्टऔर आने बाकी हैं|
प्रतिदिन साधना अवश्य करना| अपने भीतर के कर्मों के पहाड़ों को साधना की अग्नि में भस्म कर देना| इन सं...
बग़लामुखी साधना मंत्र
bagalamukhi is the goddess of black magic and tantras. bagalamukhi devi smashes the devotee's misconceptions and delusions (or the devotee's enemies) with her cudgel. bagalamukhi has the power to capture or control the enemies. this bagalamukhi mantra sadhna is very powerful and is provided by gurudev dr. narayan dutt shrimali.
how to chant the mantra
start the sadhana from monday.
wear yellow clothes for this...
दुर्गा विस्तार स्वरूप
चौसठ शक्ति तत्व
विशेष साधना
शक्ति साधना के द्वारा ही इस जीवन में इन सब शक्तियों की प्राप्ति हो सकती हैै। इनमें से एक भी शक्ति की कमी रहती है तो जीवन कुछ अपूर्ण सा लगने लगता है। केवल एक ही रूप में साधना करने से शक्ति की सिद्धि सम्भव नहीं है, जीवन...
निखिलेश्वरानंद दस दिशा चैतन्य महापूजन (nikhileshwaranand das disha mahapujan)
सिद्धाश्रम सिद्धि दिवस पर विशेष
सद्गुरु निखिल आह्वान पूजन
निखिलेश्वरानंद दस दिशा चैतन्य महापूजन
सिद्धाश्रम योग निखिल जागरण
साधक को कई बार प्रयत्न करने पर भी साधनाओं सफलता नहीं ...
मातंगी साधना.
प्रधान साधार विकल्प सत्ता स्वभाव भावद भुवन त्रयस्य |
सा विद्यया व्यक्तमपिहा माया ज्योतिः परा पातु जगंती नित्यं ||
दसमहाविद्या ओ मे भगवती मातंगी कि साधना अत्यंत सौभाग्यप्रद मानी जाती है,क्युकी यह केवल साधना ह...
पूर्ण शिष्यत्व प्राप्ति साधना.
यह साधना गुरुपूर्णिमा कि अवसर पे कि जा सकती है,साधना पूर्णता दुर्लभ और गोपनीय है और मेरी जीवन कि सबसे महत्वपूर्ण साधना है . जिस तरहा गुरु-शिष्य क सम्बध है उसी तरहा इस साधना का सम्बध मेरी प्राणो से जुडा हुआ है . यह साधना हमारे पिताश्र...
guru purnima,v.ce 2056-july -1998
ये पत्र गुरूजी ने अपने जाने से पहले ही लिख दिया था
.....
जब जब इसको पड़ता हु रोना अता है।....आप भी एक एक शब्द पढ़े इसे ..
गुरु पूर्णिमा, वि॰ संवत् 2056,
मेरे परम आतमीय पुत्रों,
तुम क्यों निराश हो जाते हो, मुझे ना पाकर अपने बीच ? मगर मैं तो तुम्हारे बिलकुल बीच ही हू...
शिष्य किस प्रकार से पूर्णता प्राप्त करें, किस प्रकार से अपने जीवन को श्रेष्ठता दे, और अपने में शिष्यत्व के गुण समाहित कर गुरु के योग्य बनें, सदगुरुदेव के कालजयी अमृत वचन शिष्य का अर्थहैं, नजदीक जाना “शिष्य” का अर्थ हैं, समीपता, निकटता, नजदीकता – जो साधक जितना ही ज्यादा ग...
साधना चक्र
आध्यात्मिक उन्नति का सोपान
बुद्धि से ज्ञान की यात्रा
अज्ञात रहस्यों की खोज
साधना सिद्धि का क्रमबद्ध विकास
परम तत्व की अनुभूति
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सामान्यतः प्रत्येक व्यक्ति के मन में यह प्रश्न अवश्य उठता है कि –
ईश्वर क्या ...
ॐ नमः शिवाय .... मित्रों !! mantra tantra yantra vigyan
माँ बगलामुखी जयंती की आप सभी को शुभकामनायें !
आज का दिन आप सभी के लिए शुभ हो ...
धार्मिक मान्यताओ के अनुसार वैशाख मास मे शुक्ल पक्ष की अष्टमी को माँ बगलामुखी का अवतरण दिवस कहा जाता है, इसी कारण इस तिथि को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है...
कैसे कह दूँ कि मेरी.....
हर दुआ बेअसर हो गई !
मै जब भी रोया....
सतगुरु को खबर हो गई
सो जाता है हर कोई
अपने कल के लिए ।
जागता है मेरा सतगुरू
सबके भले के लिए।
"मेरा सहारा भी तू है...
मेरी भक्ति भी तू है...
मेरा विशवास भी तू है...
मेरी शक्ति भी तू है...
अब और क्या कहु . सतगुरु .
मेरा सब तू ...
true life
true life means the ability to give up all one has. one should be filled with a craziness, a zeal ...... and one who has no such enthusiasm is nothing but ice. such a life cannot be like a swift flowing river. a limited, restricted existence is meaningless.
disciple's life
life means separation...... and only after he has been separated from his loving master can a disciple gain the eagerness to rush and fuse himself totally in the guru. one needs a fervor, an enthusiasm, an eagerness in one's heart to get up and rush to the guru.
guru
one who can give everything, one who can bestow totality, one who can transform a gain of sand that is the disciple into a universe, on...
क्या आप ऐसे शिष्य हैं?
शिष्य द्वारा अपने हृदय में गुरु को धारण करना ही पर्याप्त नहीं हैं, अपितु यह तो प्रारंभ मात्र हैं –
“यह उतना महत्वपूर्ण नहीं हैं, कि गुरु को कितने शिष्य याद करते हैं? यह भी उतना महत्वपूर्ण नहीं हैं, कि “गुरु” शब्द को कितने शिष्यों ने अपने हृदय ...
परमपूज्य सदगुरुदेव निखिलेश्वरानंद जी
परमपूज्य सदगुरुदेव निखिलेश्वरानंद जी एक ऐसे उदात्ततम व्यक्तित्व हें, जिनके चिन्तन मात्र से ही दिव्यता का बोध होने लगता हैं। प्रलयकाल में समस्त जगत को अपने भीतर समाहित किए हुए महात्मा हिरण्यगर्भ की तरह शांत और सौम्य हैं। व्...
मंत्र सिद्घ होते ही प्रकट होने लगते हैं यह लक्षण
जब मंत्र, साधक के भ्रूमध्य या आज्ञा-चक्र में अग्नि- अक्षरों में लिखा दिखाई दे, तो मंत्र-सिद्ध हुआ समझाना चाहिए।
मंत्र का सीधा सम्बन्ध ध्वनि से है। ध्वनि प्रकाश, ताप, अणु-शक्ति, विधुत -शक्ति की भांति एक प्रत्यक्ष शक्ति है...
मंत्र सिद्घ होते ही प्रकट होने लगते हैं यह लक्षण
जब मंत्र, साधक के भ्रूमध्य या आज्ञा-चक्र में अग्नि- अक्षरों में लिखा दिखाई दे, तो मंत्र-सिद्ध हुआ समझाना चाहिए।
मंत्र का सीधा सम्बन्ध ध्वनि से है। ध्वनि प्रकाश, ताप, अणु-शक्ति, विधुत -शक्ति की भांति एक प्रत्यक्ष शक्ति है...
मनुष्य जन्म का अवसर मिलना बड़ा दुर्लभ है । जो इसका दुरूपयोग करता है, उसे फिर यह मौका नहीं मिलेगा ।
शास्त्र में आया है ---
अमन्त्रमक्षरम नास्ति नास्ति मुलमनौषधम ।
अयोग्य: पुरुषो नास्ति योजक्स्त्र दुर्लभ: ।।
'ऐसा कोई अक्षर नहीं है जो मन्त्र न हो । ऐसी कोई...
महत्वपूर्ण प्रश्न
1- "सर्वोच्च विद्या क्या है ?"
"श्रीसद्गुरुदेव जी की भक्ति !"
2- "सबसे बड़ा यशस्वी कार्य क्या है ?"
"श्रीसद्गुरुदेव जी का सेवक बनना !"
3- "सर्वोच्च धन क्या है ? "
" श्री सद्गुरुदेव जी के प्रति सहज प्रेम !"
4- "सबसे भारी दुःख क्या है ?"
"श्रीसद्गुरुदेव जी भक्तो के ...
।।ॐ।।
जीवन यात्रा ~भाग ~1
पूज्य गुरुदेव नारायण दत्त श्रीमाली जी
समझ में नही आ रहा कहा से प्रारम्भ करूँ उनका
जीवन आख्यान , जगमग करते ज्योति पुंज की किरणे ही जिस प्रकार उनके बारे में सब कुछ कह देती है उसी प्रकार पूज्य प्रभु के शब्द उनका ज्ञान ही उनके बारे में सब क...
जीवन में कभी भी यह विचार न करो, कि आप अकेले हैं, आप को भले ही कोई साथ दिखे या न दिखे सद्गुरुदेव जी सदैव आपके साथ थे, आपके साथ हैं, और आपके साथ सदैव रहेंगे चाहें आप रहो या न रहो ।
बस यदि किसी बात की कमी है तो मात्र समर्पण की, बस एक बार ह्रदय से कहकर देखो......हे सद्गुरुदेव जी मैं ...
पापांकुशा साधना
यावत् जीवेत सुखं जीवेत |
सर्वं पापं विनश्यति ||
प्रत्येक जीव विभिन्न योनियों से होता हुआ निरन्तर गतिशील रहता है| हलाकि उसका बाहरी चोला बार-बार बदलता रहता है, परन्तु उसके अन्दर निवास करने वाली आत्मा शाश्वत है, वह मार...
ती नहीं हैं, अपितु भिन्न-भिन्न शर...
this sadhna should be done atleast once a year
पापांकुशा साधना
ऐसी ही एक साधना है पापांकुशा साधना, जिसके द्वारा व्यक्ति अपने जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के दोषों को - चाहे वह दरिद्रता हो, अकाल मृत्यु हो, बीमारी हो या चाहे और कुछ हो, उसे पूर्णतः समाप्त कर सकता है और अब तक के संचित पाप कर्मों को प...